Saturday, May 2, 2026

सूरैन का हीरो - भाग 9

 ‘‘जब टाइम बाउंडेशन नहीं पता तो फिर मेरे दिमाग का दही क्यों बना रहे हो?’’ ज़ारा ने उसे घूरा।

‘‘अब मैं क्या करूं। मेरी नालेज के मुताबिक तो अगर कोई लड़की घर में घुसे तो उसे यही बोला जाता है। और अगर बाहर निकले तो बोला जाता है...’’

‘‘बकबक बन्द करो और ये बताओ कि तूने मेरे किडनैप की झूठी खबर क्यों फैलायी?’’ उसकी बात काटकर ज़ारा ने उसे डाँटा।

‘‘मैं क्या करता। तुम्हारी अम्मा मुझसे पूछ रही थी और मैंने पूरे यूनिवर्स में देख डाला, तुम्हारा कहीं अता पता नहीं चल रहा था।’’

‘‘हाँ। क्योंकि मैं दूसरे यूनिवर्स में पहुंच गयी थी।’’ ज़ारा उस यूनिवर्स की याद में खो गयी जहाँ वह शीले के साथ मौजूद थी। जहाँ पर मुंह से ख्वाहिश निकलते ही गरमागरम लेमीट सामने था और जहाँ वह समुन्द्र की सैर हवा में उड़ते हुए कर रही थी।

‘‘देखो मोहतरमा तुम्हें ऐसी जगह हरगिज़ जाना चाहिए जहाँ का अता पता किसी को चले।’’ तोते ने उसके ख्यालों में भंग डाल दिया, ‘‘ऊपरवाला करे अगर तुम्हारे साथ कुछ उल्टा सीधा हो गया तो तुम्हारे घरवालों का क्या होगा। सूरैन के सम्राट की तो नाक ही कट जायेगी और मेरी चोंच।’’

‘‘तुम्हारी चोंच तो मैं अभी काट देती हूं।’’ ज़ारा उसके उपदेशों से बौखलाकर बोली। अब शीले का ये गिफ्ट उसे बुरी तरह खल रहा था।

‘‘माफी चाहता हूं। अब नहीं बोलूंगा। तुम्हारे साथ कुछ भी हो जाये मेरी बला से। मुझे तो अपनी चोंच प्यारी है। मैं तो पूरे यूनिवर्स में देखा करता हूं। बाहर घूमने वाली लड़कियों के साथ हर जगह बुरा सुलूक होता है। बुरा सुलूक तो अन्दर रहने वाली लड़कियों के साथ भी होता है लेकिन उस सूलूक के बारे में कोई कुछ नहीं बोलता। हर जगह बस यही कहा जाता है कि लड़कियां को बाहर नहीं घूमना चाहिए। उन्हें अपने को एक्सपोज़ नहीं करना चाहिए। उन्हें ज़्यादा बढ़ चढ़कर नहीं रहना चाहिए।...’’

तोता फिर चालू हो गया था। ज़ारा ने झल्लाहट में उसका पिंजरा उठाया और कमरे के बाहर रखे हुए डस्टबिन में डाल दिया। फिर वापस आकर कमरे का दरवाज़ा बन्द कर लिया।

लेकिन तोते की कर्कश आवाज़ अभी भी सुनाई दे रही थी। ‘‘अरे ये मुझे कहाँ लाकर डाल दिया। यहाँ तो बदबू से दिमाग फटा जा रहा है। अच्छा बाबा माफ कर दो अब कुछ नहीं बोलूंगा।’’

ज़ारा ने सुना और कान में उंगलियाँ ठूस लीं। उसे पता था कि तोता सुधरने वाला नहीं। इसलिए उसे थोड़ी सज़ा मिलना ज़रूरी थी। सज़ा तो शीले को भी मिलनी चाहिए थी जिसने उसे इतना घटिया गिफ्ट दिया था।

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बाकोल का राजकुमार सूरैन से पिट पिटाकर वापस अपने ग्रह पहुंच चुका था और वहाँ के वैज्ञानिक अपनी मशीनों के ज़रिये उसे वापस भेड़ से इंसानी जामे में ले आये थे। अब उसके जिस्म की टूट फूट का सही अंदाज़ा हो रहा था। बदन का जोड़ जोड़ दर्द से फटा जा रहा था। उस शेर से बचने के लिये वह जान छोड़कर भागा था। उस समय तो कोई एहसास हुआ नहीं था, बस शेर से जान बचाने की फिक्र थी। अब वापस आकर जब टूट फूट का एहसास हुआ तो नानी से लेकर पिछली तमाम पुश्तें याद रही थीं।

डाक्टरों की पूरी टीम उसके इलाज के लिये चुकी थी लेकिन किसी की समझ में नहीं रहा था कि उसपर दवा लगायें, मालिश करें या फिर सीधे सीधे सर्जरी ही कर दें।

‘‘नालायकों। खड़े खड़े मुंह क्या देख रहे हो। डाक्टरी पढ़कर घास खोदी है क्या। मेरा इलाज क्यों नहीं करते।’’ दर्द से कराहता हुआ वह दहाड़ा।

‘‘आप फिक्र करें राजकुमार पीको। मैं अभी मालिश करके आपको ठीक कर देता हूं।’’ एक डाक्टर ने आगे बढ़कर उसकी पीठ पर हाथ रखा और पीको बुरी तरह उछल गया।

‘‘अरे क्या कर रहा है कमबख्त। हाय जान निकाल दी।’’ वह दर्द से कराहा।

‘‘तुझे हाथ रखने को किसने कहा था।’’ दूसरे डाक्टर ने पहले वाले को घूरा, ‘‘तुझे डाक्टरी की डिग्री किसने दे दी। जाहिल गँवार। जानता नहीं। दर्द में मालिश नहीं की जाती। आप घबराईए मत राजकुमार मैं आपको दवाई लगाकर ठीक करता हूं।’’

कहते हुए डाक्टर ने एक शीशी निकाली और उसकी दवा पीको की पीठ पर उंडेल दी।

लेकिन दवा कुछ ज़्यादा ही असर वाली थी। क्योंकि जैसे ही वह पीको के जिस्म पर टपकी वह हवा में उछल गया।

और अब वह पूरे कमरे में ऐसे गुब्बारे की तरह नाच रहा था जिसका मुंह हवा भरने के बाद गलती से खुल जाये।

‘‘हाय मार डाला कमबख्त ये कौन सी दवा लगा दी। पूरे बदन में जलन हो गयी हे। ..पानी।’’ वह दौड़ता हुआ कमरे से बाहर निकला और सामने बने हुए हौज़ में छलांग लगा दी।

‘‘आह अब कुछ आराम मिला।’’ वह आँख बन्द करके बोला।

‘‘...लेकिन राजकुमार। इस दवा पर पानी नहीं पड़ना चाहिए था। अब तो पूरे बदन पर छाले हो जायेंगे और आप महीनों बेड पर नहीं सो पायेंगे।’’ दवाई लगाने वाला डाक्टर अफसोस के साथ बोला।

‘‘तुझे तो मैं अभी शाही डाक्टरी के पद से निकालता हूं। दूर हो जा मेरी नज़रों से।’’ पीको दहाड़ा।

 पहला डाक्टर जिसको दूसरे डाक्टर ने डपटा था, उसे अपनी बेइज़्ज़ती का बदला लेने का भरपूर मौका मिल गया और उसने उसे तगड़ी लात मारकर बाहर निकाल दिया।

अब पीको बाहर निकल आया था लेकिन बाहर निकलते ही दर्द और बढ़ गया।

‘‘राजकुमार आप कहें तो मैं योगा से इसका इलाज कर दूं।’’ तीसरा डाक्टर डरते डरते बोला।

‘‘योगा से करो या पोंगा से। कुछ भी करो लेकिन मेरी जलन मिटाओ। हाय उस नालायक डाक्टर ने दवा लगाई है या दारू। पूरे बदन में आग लग गयी है।’’

‘‘जलन हटाने का सबसे अच्छा उपाय है शीर्षासन। आप सर के बल खड़े हो जायें। आप देखियेगा सारा दर्द पल भर में ऐसे गायब होगा जैसे गर्ल फ्रेंड बनाने के बाद जेब के पैसे।’’ आवाज़ के दर्द से मालूम होता था कि डाक्टर शायद भुक्तभोगी है।

‘‘ज़्यादा बकवास मत कर। भला सर के बल खड़े होने से बदन का दर्द कैसे गायब होगा?’’ पीको ने उसे घूरकर देखा।

‘‘सर के बल खड़ा होने से सारा खून सर में पहुंच जायेगा। और दर्द वाली जगह से हट जायेगा। इसलिए दर्द भी गायब हो जायेगा।’’

‘‘हूं। तरकीब तो अच्छी है। लेकिन मुझे सर के बल खड़ा होना नहीं आता।’’ पीको अब नयी दुविधा में फंस गया था।

‘‘ये काम मैं कर देता हूं।’’ कहते हुए योगा वाला डाक्टर आगे बढ़ा और पीको को सर के बल खड़ा करने की कोशिश करने लगा।

लेकिन वह बूढ़ा और दुबला पतला था जबकि पीको जवान और अच्छा खासा भारी भरकम। नतीजे में पीको को खड़ा करते हुए वह खुद लड़खड़ा गया और पीको धम्म से पक्की ज़मीन पर जा गिरा। वह छाले जो अभी बनने ही जा रहे थे, जवानी आने से पहले ही फूट फट कर बह गये। उधर पीको किसी बकरे की तरह डकराया। शायद इस बार कोई हड्डी ही अपनी जगह से खिसक गयी थी।

उसी वक्त वहाँ चोबदार की आवाज़ गूंजी, ‘‘होशियार! खबरदार! बाकोल ग्रह के ग्रेट सम्राट हाबू अपने बेटे से मुलाकात के लिये हाज़िर हो रहे हैं।’’

चोबदार का एलान सुनते ही वहाँ मौजूद डाक्टरों के चेहरे पर हवाईयाँ उड़ने लगीं। सम्राट अगर अपने बेटे को इस हालत में देख लेते तो यकीनन दो चार सर तो धड़ से अलग हो ही जाते। सभी डाक्टरों ने इशारों ही इशारों में एक दूसरे से मशविरा किया और फिर पीको को चारों तरफ से हाथ पैर पकड़कर उठा लिया।

अब वे जल्दी से उसे उठाकर वापस कमरे में ले गये और धीरे से बिस्तर पर लिटा दिया। हालांकि इस काम में उन्हें अच्छी खासी दिक्कत पेश आयी क्योंकि पीको लगातार चिंघाड़ता हुआ अपने हाथ पैर फेंक रहा था।

बाहर से शायद सम्राट हाबू प्रवेश कर चुका था और जब उसने पीको की चीख पुकार सुनी तो दौड़ता हुआ आया और पीको के कमरे में घुस गया।

पीको का हाल देखते ही उसने भी चीख पुकार शुरू कर दी। जब पीको ने अपने बाप को खुद से भी ज़्यादा तेज़ी से हाय हाय करते देखा तो अपना दर्द भूल गया।

‘‘मेरे लाल, मेरे बेटे ये क्या हुआ? किस कमबख्त ने तुम्हारी ये हालत की? मैं उसका घर खुदवा दूंगा। उसे चीर फाड़कर बाकोल के कव्वों को खिला दूंगा।’’

‘‘नहीं नहीं डोडी, उसे कुछ मत कहिएगा। उसकी कोई गलती नहीं। वह तो फरिश्तों की तरह मासूम है।’’ पीको जल्दी से बोल उठा।

‘‘कौन? तू किसकी बात कर रहा है।’’ डोडी ने चौंक कर पूछा। बाकोल के ज़्यादातर लड़के अपने बाप को डोडी कहकर ही पुकारते थे।

‘‘मैं तो अपनी महबूबा अपनी ज़ारा की बात कर रहा हूं। डोडी।’’ पीको ने कराहकर कहा।

‘‘तू उसके पास कब पहुंच गया? और तेरी ये हालत क्या उसी ने बनायी है?’’

‘‘नहीं डोडी वो तो मुझसे बहुत मोहब्बत से बात कर रही थी। उससे अच्छी लड़की तो पूरी कायनात में कोई नहीं। मेरी ये दुर्गति तो उसके शेर ने बना दी।’’ पीको उस सिचुएशन को याद करके केंचुए की तरह सिकुड़ गया।

‘‘मुझे तेरी बात समझ में नहीं रही। और तू वहाँ आखिर गया ही क्यों? हम लोग तेरे रिश्ते की बात कर रहे हैं न।’’

‘‘आप रिश्ते की बात करने में बहुत लेट कर रहे हो डोडी। इतने टाइम में तो दूसरों के दो चार बच्चे भी हो जाते हैं। इसीलिए मैं खुद गया था प्रपोज़ करने और अगर वह हाँ बोल देती तो उसी वक्त शादी करके उसे बाकोल लेकर जाता।’’

‘‘तो क्या उसने हाँ नहीं बोली?’’ हाबू तैश में आकर पूछने लगा।

‘‘उसे बोलने का मौका ही कहाँ मिला। बीच में वह कमबख्त नामुराद शेर का बच्चा जो टपक पड़ा। हाय कितनी बुरी दुर्गत बनायी है मेरी।’’ कहते हुए पीको ने पूरा माजरा बयान कर दिया।

‘‘ओफ्फोह। आज तो मेरा बेटा बाल बाल बच गया। लेकिन तू भेड़ के मेकअप में गया ही क्यों था। तुझे शेर के ही मेकअप में जाना चाहिए था।

‘‘अब शेर के मेकअप में जाता तो प्रपोज़ करने से पहले ही गोली खाकर ढेर हो जाता।’’

सम्राट हाबू कुछ देर सोचता रहा और जैसे जैसे सोचता जा रहा था उसकी त्योरियाँ चढ़ती जा रही थीं, ‘‘पूरी सिचुएशन से यही शक पैदा होता है कि ज़ारा ने ही तुम्हें भगाने के लिये शेर वाली चाल चली है।’’

‘‘नहीं डोडी। ज़ारा तो बिल्कुल मोमी की तरह मासूम हैं।’’ पीको को ज़ारा के बारे में कुछ भी सुनना गवारा था चाहे सुनाने वाला उसका डोडी ही क्यों हो।

‘‘लेकिन तुम्हारी मोमी कितनी मासूम है ये तुम मेरे दिल से पूछो। पूरी दुनिया को दिखाने के लिये मैं बाकोल का सम्राट हूं लेकिन मेरी डोर तुम्हारी मोमी के हाथ में रहती है।’’ इस वक्त सम्राट हाबू ने भी अपने दिन के फफोले फोड़ दिये। लगता था बरसों का दुःख सम्राट के दिल से फूलकर उभर आया है।

‘‘तो फिर मैं क्या करूं डोडी। ज़ारा के बिना अब मैं एक दिन भी नहीं जिंदा रह सकता।’’ पीको अपना दिल थामकर दोहरा हो गया।

‘‘मैंने सूरैन के सम्राट को दो दिन का अल्टीमेटम दिया था। दो दिन पूरे हो चुके हैं। मैं अभी उसे दोबारा फोन करके पूछता हूं कि उसने क्या फैसला किया।’’

हाबू ने वहीं बैठे बैठे सूरैन के सम्राट मास्टर पंजुम को काल लगा दी। शायद मास्टर पंजुम इस वक्त फ्री था सो उसने फौरन काल रिसीव कर ली।

‘‘हैलो मास्टर पंजुम तुमने ये क्या कर दिया मेरे बेटे के साथ।’’ उसने फोन को पीको की तरफ घुमाकर उसकी हालत दिखाई।

‘‘कहीं पर चोरी से जाने का अंजाम तो यही होता है।’’ उधर से जवाब मिला, ‘‘किसी को क्या पता कि वह भेड़ था या तुम्हारा बेटा।’’

‘‘छोड़ो। मैं बात बढ़ाना नहीं चाहता। ये बताओ कि तुमने फैसला क्या किया?’’

‘‘किस सिलसिले में?’’ सूरैन के सम्राट ने अंजान बनकर पूछा।

‘‘तुम्हारी मेमोरी बहुत खराब हो गयी है मास्टर पंजुम। लगता है बुढ़ापे का असर हो रहा है। मैं पूछ रहा हूं कि तुम अपने बेटी की शादी मेरे पीको के साथ कब कर रहे हो?’’ कहते हुए हाबू ने अपने बेटे के सर पर प्यार से हाथ फेरा और पीको सी कहकर रह गया। क्योंकि दो चार खरोंचें सर में भी मौजूद थीं।

दूसरी तरफ दिखने वाले सम्राट मास्टर पंजूम का चेहरा गंभीर हो गया वह बोला, ‘‘हाबू। बेहतर है कि तुम अपना ये इरादा डस्टबिन में डाल दो। ज़ारा के बारे में हम फैसला कर चुके हैं। दो दिन बाद उसकी शादी है शीले के साथ। मुझे खुशी होगी अगर तुम लोग उस शादी में इंसान ही बनकर दावत उड़ाओ। भेड़ या डॉगी बनकर नहीं।’’

‘‘नहीं!’’ पीको ने एक चीख मारी और अपने डोडी से लिपट गया। हाबू ने उसे प्यार से थपकी दी और फिर गुस्से में फोन की तरफ घूमा, ‘‘सम्राट पंजुम में अपने बेटे की आँख में आँसू बर्दाश्त नहीं कर सकता। अगर उसकी आँख से एक आंसू टपक गया तो सूरैन पर खून की नदियां बह जायेंगी। इसलिए अभी वक्त है तुम ज़ारा की शादी जल्द से जल्द मेरे बेटे के साथ करके उसे यहाँ ट्रांस्फर कर दो।’’

‘‘हाबू! शायद तुम्हें मेरी बात समझ में नहीं आयी। ज़ारा दो दिन बाद शीले के साथ अटूट बंधन में बंधने जा रही है और मेरा ये फैसला अटल है खुद ज़ारा की भरपूर रज़ामन्दी के साथ।’’ इस बार सूरैन का सम्राट सख्त लहजे में बोला था।

‘‘ऐसा है तो हम भी देखेंगे कि तुम्हारे अटल के पलीते में कैसी आग लगती है। अभी तक तुम बाकोल के सम्राट का प्यार देख रहे थे अब उसका क़हर देखोगे।’’ हाबू अचानक हत्थे से उखड़ गया।

‘‘सूरैन का सम्राट अपनी प्यारी बेटी की खुशी के लिये हर क़हर को झेलने को तैयार है। और याद रखना हम साइंस, तकनीक और सुरक्षा के मामले में तुमसे उन्नीस हरगिज़ नहीं पड़ेंगे।’’ कहते हुए सम्राट मास्टर पंजुम ने सम्पर्क काट दिया और हाबू तैश में नाचकर रह गया।

---- जारी है

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