Wednesday, May 13, 2026

सूरैन का हीरो - भाग 20

ज़ारा जब शीले के पास पहुंची तो वह उस का इंतिज़ार करता मिला।


‘‘कमाल है। आज पहली बार मैं तुम्हें लैब से बाहर पा रही हूं।’’ ज़ारा हैरत से बोली।

‘‘तुमने आने से पहले ही इतनी धमकियाँ भेज दीं कि मैं डर गया था। इसलिए सोचा कि पहले तुम्हारी खास खबर सुन लूं फिर लैब में घुसूंगा।’’

‘‘खबर कुछ ऐसी है कि तुम लैब में घुसना भूल जाओगे।’’ ज़ारा खुश होकर बोली।

‘‘मालूम होता है कि तुम्हारे पालतू शेर को कोई जोड़ीदार मिल गयी है, जिसके लिये तुम बहुत दिनों से परेशान थीं। चलो अच्छा है। अब उस बेचारे का घर भी बस जायेगा और फिर आबादी भी।’’ शीले ने सर हिलाया।

‘‘फिलहाल मैंने उसकी आबादी बढ़ाने की फिक्र छोड़ दी है।’’ ज़ारा लापरवाही से बोली।

‘‘अरे, ऐसा क्यों?’’

‘‘क्योंकि, पहले मुझे कहीं और की आबादी बढ़ानी है।’’

‘‘हाँयें? अब कहाँ की? ज़ारा ये जो तुम रोज़ रोज़ फैसले बदला करती हो उससे लगता है कि बहुत जल्द मैं घनचक्कर बन जाऊंगा।’’ शीले बेबसी से बोला।

‘‘ऐसा कुछ नहीं होगा। खास खबर ये है कि जिस आबादी को बढ़ाने की बात कर रही हूं। वह मेरी और तुम्हारी है।’’ ज़ारा उसके गले में बाहें डालकर आँखों में झांकती हुई बोली।

‘‘क्या बके जा रही हो?’’ शीले हवन्नक होकर बोला।

‘‘बेवकूफ बट प्यारे साइंटिस्ट। साइंस में भले ही तुम बेमिसाल हो लेकिन बाकी मामलों में औंघड़। तुम आबादी बढ़ाने का मतलब ही नहीं समझते। अरे अब हम दो से तीन होने जा रहे हैं।’’ इस बार ज़ारा ने और साफ किया और शीले कुर्सी से उछल पड़ा।

‘‘क्या क्या कहा तुमने?’’ इस बार उसने ज़ारा को झिंझोड़ कर पूछा था।

‘‘वही जो तुमने सुना। अगर कान बन्द हैं तो तेल ले आऊं?’’ ज़ारा एक अदा के साथ बोली।

‘‘अरे तुमने इतनी शानदार खबर सुनाई है कि कानों ने ही साथ छोड़ दिया। लेकिन इतनी भी क्या जल्दी थी। कुछ दिन तो खेलने खाने दिया होता।’’ शीले एक आँख दबाकर बोला।

‘‘तुम तो ऐसे कह रहे हो जैसे ये सिर्फ मेरी कोशिशों का नतीजा है। अरे इसमें तुम भी बराबर के शरीक हो।’’ ज़ारा ने एक बार फिर त्योरियाँ चढ़ा लीं।

‘‘ओके बाबा। तो फिर अब हमें आगे का प्लान बहुत जल्द बनाना पड़ेगा।’’

‘‘कैसा प्लान?’’ ज़ारा चौंक कर पूछने लगी।

‘‘आगे का प्लान ये है कि हमें अपने बच्चे को यूनिवर्स का सबसे मज़बूत और अद्भुत मानव बनाना है।’’ शीले उसे अपनी बाहों में लेकर बोला।

‘‘जिसकी माँ मेरी जैसी और बाप तुम्हारे जैसा है, ज़ाहिर है वह यूनिवर्स का सबसे अद्भुत बच्चा ही होगा।’’ ज़ारा अकड़ कर बोली।

‘‘तुम्हारी बात से कौन इनकार करता है। लेकिन अगर इसमें मेरी साइंस भी शामिल हो जाये तो सोने पर सुहागा हो जायेगा।’’

‘‘बच्चे का माँ के पेट में बनना तो एक नेचुरल प्रोसेस है इसमें तुम्हारी साइंस क्या दखल देगी?’’ ज़ारा ने सवाल उठाया।

‘‘सुनो!’’ इस बार शीले थोड़ा गंभीरता से बोला, ‘‘ये प्लान बहुत पहले मेरे ज़हन में था कि जब हमारा बच्चा माँ के पेट में बनना शुरू होगा उसी वक्त से उसे कुछ ऐसी ट्रेनिंग दी जायेगी और ऐसा माहौल दिया जायेगा कि वह अपने में अद्वितीय हो जाये। इसके लिये मैंने अपने घर के एक हिस्से में खास वातावरण पैदा किया है, जहाँ अब तुम्हें ज़्यादा से ज़्यादा वक्त गुज़ारना होगा।’’

‘‘मैं तुम्हारी बात समझ नहीं पा रही हूं।’’ ज़ारा गायब दिमागी के साथ उसे देखने लगी।

‘‘बेहतर होगा मैं तुम्हें वहीं ले चलूं। तो फिर बात समझाने में आसानी रहेगी।’’

‘‘ठीक है।’’ शीले ने जेब से छोटा सा रिमोट निकाला और बिना छत की एक छोटी कार सरकती हुई उनके पास गयी। इस कार में दो लोगों के बैठने की जगह थी। सूरैन पर बड़े घर रखने वाले अक्सर इस तरह की कारें भी रखा करते थे ताकि आसानी से बिना थके एक जगह से दूसरी जगह पहुंच जायें।

दोनों उसपर बैठ गये और कार रवाना हो गयी। इस बार वह किसी ऐसी डायरेक्शन में जा रही थी जो ज़ारा के लिये भी अनजान थी। हालांकि वह शीले की बीवी बन चुकी थी और इस घर में कई बार चुकी थी फिर भी अभी तक कई कोने उसकी नज़रों से अछूते थे। एक तो शीले का घर ही अजीब भूलभुलैया टाइप से बना हुआ था। अकेले घूमने वाला तो यकीनन कहीं कहीं खो जाता।

इस वक्त ऐसा मालूम हो रहा था जैसे कार किसी जंगल की कच्ची सड़क पर चली जा रही है। और जंगल भी ऐसा घना जैसे कभी सूरज की धूप ज़मीन पर ही पड़ी हो।

‘‘शीले! क्या हम तुम्हारे घर के अन्दर ही हैं या कहीं दूर बाहर लेकर जा रहे हो?’’ ज़ारा ने पूछ ही लिया जब सब्र हुआ।

‘‘ज़ारा, तुम फिलहाल अपने घर में ही हो। यानि कि हमारे घर में।’’ शीले ने बताया।

‘‘तो घर के अन्दर इतना घना जंगल उगाने की क्या ज़रूरत थी?’’

‘‘ये जंगल भी मेरे प्रोजेक्ट का हिस्सा है।’’

‘‘क्या मतलब?’’

‘‘अभी बताता हूं।’’ शीले बोलकर चुप हो गया और ज़ारा झल्ला गयी। क़ायदे से तो उसे कमरे में ही पूरी बात बता देनी चाहिए थी लेकिन अभी भी वह थोड़ा थोड़ा करके बताता था और फिर चुप हो जाता था। जाने उसके मन में क्या था।

कार जैसे जैसे आगे बढ़ रही थी, जंगल और घना होता जा रहा था। अब तो लगता था कि दिन में ही रात हो गयी है। इतना घना अँधेरा था वहाँ पर।

फिर उनकी कार एक गुफा के सामने जाकर रुक गयी जो उस जंगल के बीचोंबीच एक टीलेनुमा स्ट्रक्चर में मोजूद दिखाई दे रही थी।

‘‘ जाओ।’’ शीले कार से उतरते हुए बोला।

ज़ारा ने एक बार हैरत से उसका चेहरा देखा और खुद भी उतर गयी।

‘‘यही गुफा तुम्हारे रहने की जगह होगी जहाँ तुम्हें आगे कुछ महीने ज़्यादा से ज़्यादा वक्त बिताना है।’’ शीले ने बताया और ज़ारा बुरी तरह उखड़ गयी।

‘‘शीले, क्या तुम पागल हो गये हो? मैं इस अँधेरी गुफा में रहूंगी? और वो भी प्रेग्नेंसी में?’’ वह गुस्से में बोली।

‘‘डियर पहले अन्दर तो चलो।’’ शीले ने उसका कंधा थपथपाया और फिर उसका हाथ पकड़कर गुफा के अन्दर दाखिल हो गया। जैसे ही शीले का कदम गुफा के दरवाज़े पर पड़ा, पूरी गुफा तेज़ रौशनी में नहा गयी।

अब ज़ारा ने हैरत से देखा, बाहर से वीरान नज़र आने वाली गुफा अन्दर किसी फाइव स्टार होटल के कमरे जैसी दिखाई दे रही थी। थोड़ी दूर पर एक शानदार बेड और उसके चारों तरफ लगी आदमकद खिड़कियां, जिससे बाहर का जंगल एक शानदार सीनरी की तरह नज़र रहा था।

बेड के पास कुछ निहायत नर्म दिखने वाले सोफे भी मौजूद थे जिसपर आगे बढ़ता हुआ शीले जाकर बैठ गया।

‘‘शीले! तुमने बताया क्यों नहीं कि तुमने हमारे लिये इतना खूबसूरत बेडरूम बनवा रखा है। इसके मुकाबले में वो बेडरूम तो कुछ भी नहीं जहाँ तुम मुझे शादी करके लाये थे और सूखे सूखे बिठा दिया था।’’ ज़ारा को अब दूसरी शिकायत पैदा हो गयी थी।

‘‘पहले इसकी ज़रूरत नहीं थी। हम दोनों के लिये तो वही बेडरूम काफी था। अब ये बेडरूम हमारे होने वाले बच्चे के लिये है।’’

‘‘हमारा बच्चा इस आलीशान बेडरूम का क्या करेगा? इसकी ज़रूरत तो उसे पैदा होने के कम से कम पचास साल बाद ही पड़ेगी।’’

‘‘इसकी ज़रूरत उसे पैदा होने से पहले पड़ेगी। अब तुम थोड़ी देर के लिये अपना मुंह बन्द करो ताकि मैं तुम्हें पूरी बात बता सकूं।’’

‘‘मेरा मुंह तो बहुत देर से बन्द है। मैं बोलती ही कब हूं जो तुम ऐसा सुना रहे हो।’’ ज़ारा फिर शिकायत करने लगी।

शीले ने माथे पर हाथ मारना चाहा फिर रुक गया। हो सकता है ज़ारा इसपर भी नाराज़ हो जाती।

‘‘.के. मैं बताता हूं। ये बेडरूम दरअसल एक ऐसा ट्रेनिंग सेंटर है जो हमारे बच्चे को पेट में ही ट्रेनिंग देगा, हर तरह की सिचुएशन से लड़ने की। ये जो गुफा के बाहर तुम जंगल देख रही हो, उसका हर पेड़ एक ईवेंट क्रियेट करता है। और वह ईवेंट बच्चे के माइंड में जाकर इस तरह आरेपित होगी कि वह अपने को उस ईवेंट का एक हिस्सा समझेगा।’’

‘‘क्या मतलब?’’ ज़ारा चौंक कर पूछने लगी।

‘‘जैसे, एक पेड़ ऐसी ईवेंट क्रियेट करेगा जैसे हज़ारों की आर्मी किसी मुल्क पर हमला करने जा रही है। और उस मुल्क का बादशाह उनसे मुकाबला कर रहा है। जानती हो वह बादशाह कौन होगा? हमारा बच्चा।’’

‘‘ओह।’’

‘‘इस ईवेंट के ज़रिये हमारे बच्चे में हज़ारों की आर्मी से लड़ने की सलाहियत पैदा हो जायेगी। इसी तरह कुछ पेड़ तरह तरह की जटिल पहेलियों को पैदा करेंगे, जिन्हें वह बच्चा सुलझाने की कोशिश करेगा। और इसके नतीजे में उसकी मानसिक क्षमता बढ़ती चली जायेगी। यहाँ उसे यूनिवर्स के ब्लैक होल और वार्म होल्स की गुत्थियां भी सुलझाने का मौका मिलेगा।’’

‘‘और ये सब उसके इस दुनिया में आने से पहले ही हो जायेगा।’’ अब ज़ारा भी लगभग पूरी बात समझ चुकी थी।

‘‘हाँ। और ये सब इतने साइंटिफिक तरीके से होगा कि जब वह जन्म लेगा तो तमाम कुशलताएं उसे दिमाग में पहले से मौजूद होंगी। हमारा बच्चा पूरे यूनिवर्स का सबसे अनोखा बच्चा होगा।’’

शीले की बात पर ज़ारा कहीं खो गयी थी।

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नकली ज़ारा यानि काईडोर महल से बाहर निकल कर आज़ादी के साथ खेतों में घुसकर हरी हरी ताज़ी फसल का मुंह उठा उठाकर मज़ा ले रही थी। आज से पहले उसे इतनी ज़्यादा खुशी कभी नहीं मिली थी।

महल में रहकर और पीको का अजगर वाला मुंह देख देखकर वह पक चुकी थी। अभी तक शायद महल वालों को उसके फरार की खबर नहीं मिली थी वरना खतरे का सायरन बज चुका होता। वैसे भी पीको के अलावा कोई उसका हाल पूछने वाला नहीं था। सभी को बस इसी का ध्यान रखना था कि वह बाहर निकलने पाये। अब इस वक्त तो पीको शराब के नशे में मस्त था और बाकी लोग बिजली का झटका खाकर दुबके हुए थे इसलिए किसी को भी उसका ध्यान नहीं आया।

अभी उसे फसले चरते हुए थोड़ी ही देर हुई थी कि अचानक पीछे से किसी ने उसकी टाँग पकड़कर खींच ली।

लगता है खेत का मालिक गया।उसके दिमाग में ख्याल आया। उसने डर कर आँखें बन्द कर लीं और बदन पर पड़ने वाली डंडे की मार का इंतिज़ार करने लगी। इस वक्त वह ये भी भूल गयी कि अभी वह इंसानी मंकअप में है। और इंसानों को कार्डडोर की तरह डंडे से नहीं मारा जाता।

‘‘तुम कौन हो सुंदरी?’’ एक नर्म आवाज़ उसके कानों तक पहुंची और उसने चौंक कर आँखें खोल दीं।

सामने एक स्मार्ट खूबसूरत जवान खड़ा हुआ उसे हैरत से घूरे जा रहा था।

नकली ज़ारा यानि काईडोर के पास इतनी अक्ल तो थी ही कि अगर वह अपने को पीको की बीवी बता देती तो वापस महल में सड़ने के लिये पहुंचा दी जाती। इसलिए वह रोहांसा चेहरा बनाकर बोली,

‘‘मैं एक दुखियारी आत्मा हूं। जो खुशी की तलाश में इधर उधर भटक रही हूं।’’

‘‘तुमको किस बात का दुःख है और किस तरह की खुशी चाहिए?’’ वह स्मार्ट जवान पूछने लगा।

‘‘जाने दीजिए। आप जानकर क्या करेंगे।’’ काईडोर अपने लहजे में सारे जहान का दर्द समेटकर बोली।

‘‘नहीं मुझे बताओ। हो सकता है मैं तुम्हारे दुःखों की दवा बन जाऊं।’’ वह जवान पूरी हमदर्दी के साथ बोला।

काईडोर ने हाथ में पकड़ी पत्तियाँ मुंह के हवाले की और अपनी कहानी बताने को तैयार हो गयी।

दो पलों तक सोचने के बाद वह अपनी गढ़ी हुई कहानी बताने लगी,

‘‘मैं बहुत गरीब घर की लड़की हूं जिसके करोड़पति बाप ने अरबपति बनने के लालच में एक ऐसे जानवर के साथ शादी कर दी जो आधा इंसान है। और बाकी आधा डफर है। वह मुझे हमेशा घास खिलाता रहता है। इतनी घास खिलायी कि मेरा पूरा बदन हरा हो गया।’’

‘‘लेकिन तुम तो गोरी दिख रही हो। बिल्कुल परफेक्ट गुलाबी रंगत।’’ उस जवान को तारीफ करने का मौका मिला तो उसने उसे जल्दी से लपक लिया।

‘‘पहले पूरी दर्दभरी कहानी तो सुन लो मेरी, फिर बीच में टपकना।’’ काईडोर के हलक़ से एक दर्दभरी आह निकली और उस जवान ने अपने मुंह पर हाथ रख लिया।  

‘‘और जब मेरी घास खाने की आदत हो गयी तो उसने मेरे घास खाने पर रोक लगा दी और कहने लगा कि घास खाने की वजह से मेरा बदन हरा होकर बदसूरत हो गया है। अब तुम्हें फिर से गुलाबी बनने के लिये ऑक्सोर का खून पीना पड़ेगा।’’ काईडोर एकाएक डरावनी आवाज़ बनाकर बोली।

‘‘...क्या कहा? ऑक्सोर का खून?’’ जवान एकदम से घबरा गया।

‘‘हाँ। अब वो पिछले एक महीने से रोज़ाना मुझे ऑक्सोर का खून पिला रहा है। और मैं रो रोकर पी रही हूं।’’ काईडोर रुहांसी आवाज़ में बोली। लेकिन वह जवान उसकी आवाज़ सुनने के लिये रुका कहाँ था। वह तो भड़ककर सरपट उल्टे पैरों भाग खड़ा हुआ था।

नकली ज़ारा यानि काईडोर ने उसे हैरत से भागते हुए देखा और फिर खुद भी उसके पीछे दौड़ पड़ी।

‘‘अरे रुको। तुम भाग कहाँ रहे हो?’’ वह चीखी।

‘‘तुम एक चुड़ैल हो खून पीने वाली। मैं तुम्हारे पास नहीं रुकने वाला।’’ उस जवान ने भागते हुए जवाब दिया।

‘‘अरे लेकिन खून तो मुझे ज़बरदस्ती पिलाया गया। मैं अब घास के अलावा कुछ नहीं खाने वाली। तभी तो मैं फरार होकर आयी हूं।’’ जवान ने गहरी साँस ली और अपनी चाल धीमी कर ली।

‘‘जी हाँ। अब मैं घास ही खाना चाहती हूं। इसीलिए मैं घर से फरार होकर इस खेत में चरने गयी।’’

‘‘लेकिन अगर खेत का मालिक तुम्हें देखेगा तो पीट पीटकर मार डालेगा।’’

‘‘क्या आप मेरी जैसी खूबसूरत लड़की को पीटेंगे?’’ नकली ज़ारा यानि काईडोर एक अदा के साथ पूछने लगी।

‘‘मैंने कब तुम्हें पीटने को कहा?’’ जवान हैरत के साथ बोला।

‘‘तो क्या आप अपने खेत की फसल मुझे खाते देखकर कुछ नहीं कहेंगे?’’

‘‘तुम आराम से खाओ। जितनी मर्जी है उतनी खाओ। क्योंकि मैं इस खेत का मालिक हूं ही नहीं।’’

‘‘तो फिर आप कौन हैं?’’

‘‘मैं तो एक मुसाफिर हूं। तुम्हारी जैसी खूबसूरत लड़की को अकेले इधर टहलते देखा तो हिफाज़त के लिये गया।’’

‘‘हिफाज़त के लिये या...!’’ काईडोर ने बात अधूरी छोड़ दी।

‘‘क्या मतलब? क्या तुम मुझे कोई ऐसा वैसा समझ रही हो?’’ उसने गुस्से में आकर कहा।

‘‘अगर तुम कुछ ऐसा वैसा कर भी लोगे तो यहाँ तुम्हें रोकने वाला कौन है।’’ वह पूरी मासूमियत से बोली।

‘‘नहीं। मैं किसी को धोखा नहीं दे सकता। मैं बहुत शरीफ घराने का इंसान हूं।’’

‘‘तो क्या शरीफ घराने के इंसान प्यार मोहब्बत नहीं करते?’’ काईडोर के सवाल ने उस शरीफ आदमी को लाजवाब कर दिया।

थोड़ी देर तक कुछ सोचता रहा फिर उसे जवाब सूझ गया, ‘‘मोहब्बत करी नहीं जाती बल्कि हो जाती है।’’

‘‘तुम ठीक कहते हो। मुझे लगता है कि हो गयी है मुझे।’’

‘‘ऐसा क्यों लग रहा है तुम्हें?’’

‘‘बस मुझे ख्वाहिश हो रही है कि तुम मुझे यहाँ से लेकर भाग जाओ।’’

‘‘मैं क्यों? ये काम तो तुम अपने आप कर सकती हो।’’ उसने हैरत से पूछा।

‘‘तुम तो मेरे पति से भी ज़्यादा डफर हो। चलो यहाँ से।’’ उसने उस जवान का हाथ पकड़ा और आगे की ओर दौड़ लगा दी। वह अरे अरे करता रह गया।

---- जारी है