बहरहाल वह बोला कुछ नहीं।
‘‘वह शर्तें क्या हैं बेटे?’’ हाबू ने सवाल किया। यानि उन शर्तों के बारे में पीको ने अपने बाप को भी अँधेरे में रखा था।
‘‘पहली शर्त ये है कि गोजर को उस पहाड़ से कीमती पत्थर बिना किसी साधन के अकेले अपनी हाथों से उठाकर लाने होंगे।’’ पीको ने उनके सामने पहली शर्त पेश की।
‘‘ओह!’’ गोजर के चेहरे पर दिखने वाली खुशी मद्धम पड़ गयी।
‘‘कोई बात नहीं। कुछ तो वह ले ही आयेगा। अगर एक भी पत्थर वह लाने में कामयाब हो गया तो इस ग्रह के अमीर लोगों में उसकी गिनती होने लगेगी।’’ यह सोचकर वह थोड़ा सुकून महसूस करने लगा।
‘‘अब दूसरी शर्त सुनो। वहाँ तक तुम्हें बिना किसी साधन के जाना होगा। पैदल नंगे पैर।’’ कहते हुए पीको मुस्कुराया।
‘‘जो हुक्म राजकुमार का।’’ गोजर सर झुकाकर बोला।
‘‘बेटे! तुम्हारी दूसरी शर्त तो बहुत सख्त है।’’ हाबू चौंक कर बोला और पीको के चेहरे की मुस्कुराहट में कुटिलता भी शामिल हो गयी।
‘‘डोडी, लगता है आप ने पहाड़ तक जाने का रास्ता देख लिया है।’’
‘‘बेटे, हम जिस ग्रह के शहंशाह हैं वहां के चप्पे चप्पे से वाकिफ हैं। अगर उस पहाड़ तक पैदल जाना नामुमकिन नहीं तो दुनिया का सबसे मुश्किल काम ज़रूर है।’’
हाबू की बात पर गोजर चौंक कर उसे देखने लगा। और साथ में मंदोरा भी।
‘‘ऐसी क्या बात है इस रास्ते में सम्राट?’’
इस बार मंदोरा ने सवाल किया।
‘‘इस पूरे रास्ते में आदमखोर चीटियों का जाल बिछा हुआ है। जो पैदल चलने वाले को काट काटकर उसके बदन का अच्छा खासा गोश्त उतार लेती हैं। उस पहाड़ तक पहुंचते पहुंचते गोजर तो आधा ही हो जायेगा।’’
हाबू ने रहस्योद्घाटन किया और गोजर व मंदोरा दोनों ही काँप कर रह गये।
‘‘राजकुमार!’’
इस बार गोजर नर्मी के साथ सर झुकाकर पीको से मुखातिब हुआ, ‘‘आपने मुझे इनाम दिया है या मेरी किसी गलती की सज़ा? अगर ऐसा है तो मेहरबानी फरमाकर मुझे मेरी गलती तो बता दें।’’
‘‘सुनो!’’ इसबार पीको सख्त आवाज़ में बोला, ‘‘हम तुम्हें ईनाम और सज़ा साथ में दे रहे हैं। इनाम इस बात कि तुमने मेरे बदन को वापस इंसानी रूप में ढाला है।’’
‘‘और सज़ा?’’
‘‘सज़ा इस बात की कि तुमने मेरे बदन को कीड़ों से खूब नुचवाया और कटवाया है। इसलिए तुम्हारे बदन का कुछ हिस्सा भी कीड़ों के पेट में जाना चाहिए।’’
‘‘लेकिन राजकुमार, अगर मैं ऐसा न करता तो आपका वापस इंसानी जिस्म पाना नामुमकिन था।’’ गोजर मरी मरी आवाज़ के साथ बोला।
‘‘हां बेटा, तुमको नर्मी से काम लेना चाहिए।’’ हाबू ने पीको की तरफ देखा। ज़ाहिर है कि गोजर ने उसके साथ इतना बड़ा एहसान किया था ऐसे में वह उसे मुश्किल में डालने की फिलहाल कैसे सोच सकता था।’’
‘‘डोडी अगर मैंने किसी के साथ हमदर्दी की तो कभी जस्टिस नहीं कर सकता। मुझे अगला सम्राट बनना है और इसके लिये हमदर्दी जैसी तमाम इंसानी कमज़ोरियों
के दूर फेंककर खालिस शुद्ध होना ज़रूरी है।’’ पीको ने खुश्क आवाज़ में जवाब दिया।
हाबू ने एक गहरी साँस ली। उसका बेटा लगता है उससे भी महान सम्राट बनने वाला था पाँच सौ सालों बाद।
‘‘ठीक है बेटे।’’ उसने सर हिलया और गोजर की ओर घूम, ‘‘गोजर तुम्हें उन कीमती पत्थरो को पाने के लिये वहाँ तक पहुंचना ही होगा पैदल।’’
‘‘अगर तुम वहाँ नहीं जाना चाहते तो हम तुम्हें मजबूर नहीं करेंगे।’’
इसबार पीको मुस्कुराकर बोला, ‘‘आखिर तुमने मुझे फिर से पूरा इंसान बनाया है।’’
गोजर के मुंह से एक राहतभरी साँस निकली, ‘लगता है पीको ने उसे इनाम देने का कोई और तरीका सोच लिया था।’
‘‘तुम चाहो तो वहाँ तक पहुंचने का इरादा छोड़ सकते हो। लेकिन ऐसी हालत में उन कीमती पत्थरों को पाने का इरादा दिल से निकाल देना पड़ेगा।’’ पीको का अगला जुमला सुनकर गोजर के फेफड़ों से निकलने वाली सुकून की दूसरी साँस अन्दर ही अटक कर रह गयी।
अब हाबू भी एकदम खामोश हो गया था। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि दोबारा इंसान बनने के बाद उसका बेटा उससे भी बड़ा ज़ालिम बन जायेगा।
कुछ मिनट लग गये गोजर को फैसला लेने में। फिर वह बोला, ‘‘दुनिया में रिस्क लिये बगैर कुछ हासिल नहीं होता। मुझे उन कीमती पत्थरों को लेना है और इसके लिये मैं अपने बदन को चीटियों से कटवाने को तैयार हूं।’’
‘‘गुड डिसीजन।’’ पीको मुस्कुराया और गोजर रिस्क लेने की तैयारियां करने लगा।
उसने मन ही मन अंदाज़ा लगाया। उसे पहाड़ तक पहुंचने में कम से कम टाईम लगाना था ताकि उन च्यूंटियों को उसपर अपना हाथ साफ करने का या तो कम से कम मौका मिले या फिर मौका ही न मिले। उसने फैसला किया कि अपनी पूरी ताकत लगाकर दौड़ेगा।
उसने एक छलांग लगायी और पहाड़ की ओर दौड़ गया। पीको व वहां मौजूद दूसरे तमाशाईयों ने अपनी आँखों पर एअर लेंस चढ़ा लिया। जो माथे से चिपकी खास डिवाईस द्वारा आँखों के सामने हवा के ज़रिये ही बन जाता था और दूर की चीज़ों को पास करके दिखाने लगाता था साफ और बड़े आकार में।
मंदोरा ने देखा कि गोजर अभी आधा रास्ता भी तय नहीं कर पाया था कि लाल रंग की च्यूँटियां उसके पैरों पर रेंगने लगीं। जिन्हें वह झटका देकर गिराने की कोशिश कर रहा था। लेकिन पैरों पर चढ़ने वाली च्यूंटियों की तादाद बढ़ती ही जा रही थी।
‘‘इसने उन च्यूंटियों की रफ्तार के बारे में गलत अंदाज़ा लगाया है।’’ वह बड़बड़ाया। वाकई च्यूंटियों की ऊपर चढ़ने की रफ्तार काफी तेज़ थी और जल्दी ही उनमें दो चार गोजर के मुंह पर भी नज़र आने लगीं। जबकि गोजर ने अभी ठीक आधा रास्ता ही तय किया था।
उसके मुंह भयानक चीखें निकलने लगीं। च्यूंटियों के काटने से उपजा दर्द सहनशक्ति से बाहर था।
वह अपने बदन को झटका देकर और हाथ पैरों के फेंकते हुए उन च्यूंटियों को अपने बदन से दूर करने की कोशिश करने लगा। इसी के साथ वह पहाड़ की तरफ भी बढ़ा जा रहा था।
फिर चीखते चिल्लाते और रोते हुए किसी तरह उसने पहाड़ तक का रास्ता तय कर लिया। मंदोरा ने देखा कि जैसे ही उसने पहाड़ की सीमा में कदम रखा, उसके बदन से चिमटी सारी च्यूंटियां बेजान होकर पट से नीचे गिर पड़ीं।
‘‘उस पहाड़ से खास तरह की किरणें निकलती रहती हैं। जिसके कारण उसकी सीमा में च्यूंटियां मर जाती है।’’ हाबू ने शायद यह जानकारी मंदोरा को ही दी थी।
जबकि मंदोरा गोजर को देख रहा था। जिसके पूरे बदन से खून रिस रहा था और छोटे छोटे बेशुमार ज़ख्म नज़र आ रहे थे। एअरलेंस से सब कुछ साफ दिख रहा था।
गोजर पहाड़ से जुड़े हुए एक कीमती पत्थर से अपने को टिकाकर कराह रहा था।
‘‘बहुत खूब गोजर। तुमने बेहतरीन काम किया है।’’ मंदोरा उसकी हिम्मत बढ़ाने के लिये चीखा।
‘‘हाँ, अब कुछ पत्थर उठाओ और वापस आ जाओ।’’ हाबू भी चीखा।
‘‘मैं वापस नहीं आ सकता। इन च्यूंटियों से दोबारा अपने को कटवाने की ताकत मेरे अन्दर नहीं।’’ गोजर रोते हुए बोला और मंदोरा अपना सर खुजलाने लगा।
‘‘लेकिन वापस तो आना ही पड़ेगा। क्या हमेशा उस पहाड़ पर ही टिके रहोगे?’’ मंदोरा ने पूछा।
‘‘हाँ। मैं हमेशा इसी पहाड़ पर बैठा रहूंगा। इतने बड़े खज़ाने के पास बैठे रहने में ही सुकून है।’’ वह वहीं से चिल्लाकर बोला।
‘‘लगता है इसका दिमाग पलट गया है।’’ हाबू ने पीको की तरफ देखकर कहा।
लेकिन पीको अपने में ही मुस्कुराये जा रहा था। और कई लोगों का ख्याल था कि उसका दिमाग पहले ही पलट चुका है। वापस इंसानी शक्ल में आने के बाद से ही।
उसी वक्त हाबू को अपने फोन पर मैसेज मिलने लगा।
उसने कलाई पर मौजूद बटन को दबाया और फिज़ा में बाकोल के एक और महान वैज्ञानिक डा0कोसी की शक्ल बनने लगी।
‘‘बोलो कोसी क्या बात है?’’ हाबू ने सवाल किया।
‘‘सम्राट! सूरैन को डिक्टेट करने का और उसकी तबाही का पूरा सामान एक बार फिर तैयार है।’’
‘‘वेरी गुड। हम अभी आते हैं।’’ हाबू खुश होकर बोला। और फिर पीको से मुखातिब हुआ, ‘‘बेटे! अब गोजर को उसके हाल पर छोड़ दो। हम चलते हैं एक तमाशा देखने बहुत बड़ा तमाशा।’’
‘‘मुझे खेल तमाशों से कोई दिलचस्पी नहीं।’’ पीको मुंह बनाकर बोला, ‘‘हाँ, अगर इंसानों के खून की बारिश दिखाना चाहते हो - तो अलग बात है।’’ वह इस तरह हंसा जैसे कोई ड्रैकुला किसी इंसान का खून चूसने के बाद हंसता है।
‘‘बात कुछ ऐसी ही है। याद है तुमको, सूरैन की राजकुमारी
ने तुमसे शादी से इनकार करके तुम्हें धोखा दिया था। अब उस पूरे सूरैन की ही तबाही का सामन तैयार हो गया है। क्या तुम देखना नहीं चाहोगे?’’
‘‘मैं ज़रूर देखना चाहूंगा। मुझे तो किसी भी तबाही का मंज़र ही याद करने में लज़्ज़त महसूस होती है।’’ उसने इस तरह मुंह चलाया मानो रोस्टेड चिकन को चबा चबाकर मज़े ले रहा हो।
‘‘तो फिर चलो।’’
फिर गोजर कीमती पत्थरों से बने पहाड़ पर बैठा आँसू बहाता रह गया और वे सभी अपने यान में बैठकर उड़ चले।
-----
जब हाबू डा0कोसी के पास पहुंचा तो वह अपनी पूरी टीम के साथ अपनी महाविशालकाय लैब में मौजूद था।
ज़ाहिर है कि उस टीम में सम्राट के साले का साढ़ू भी मौजूद था।
‘‘इसबार हम सूरैन को इस तरह पकड़ेंगे जैसे जाल बिछाकर मछली को पकड़ लिया जाता है।’’ सम्राट को देखते ही डा0कोसी बोल उठा।
‘‘मुहावरे बोलने की बजाय हकीकत दिखाओ। हम सूरैन की तबाही को देखने के लिये बेताब हैं।’’ सम्राट बेसब्री के साथ बोला।
‘‘मेरी बात मुहावरा नहीं बल्कि सच्चाई है। दरअसल हम मान सकते हैं कि बारहवीं डाईमेंशन एक समुन्द्र है जिसकी गहराईयों में सूरैन किसी मछली की तरह गुम है।
अब हमारी तकनीक एण्टीगै्रविटी किरणों की ऐसी डोरियाँ एक ऐसा जाल यानि स्ट्रिंग्स बनायेगी जो बारहवीं डाईमेंशन में दाखिल होकर उसकी तमाम चीज़ों को अपने में समेट लेंगी और फिर ठीक किसी छनने की तरह उन सब को छानकर हमारे सामने ले आयेंगी।’’ डा0कोसी बता रहा था।
‘‘क्या बेवकूफी की बात कर रहे हो।’’ पीको गुर्राया,
‘‘क्या सूरैन जैसे भारी भरकम प्लेनेट को तुम्हारी डोरियाँ खींच पायेंगी?’’
‘‘राजकुमार! ये खींचना किसी वज़न को खींचने जैसा नहीं होगा। बल्कि किसी चीज़ को डाईमेंशन्स के भीतर से खींचना होगा। आम लफ्ज़ों में कहा जाये तो हम उस ग्रह को उसी की जगह पर विज़िबिल दिखा देंगे।’’
‘‘ठीक है। तो ये काम जल्दी करो।’’ पीको ही दोबारा बोला।
‘‘जी राजकुमार।’’ डा0कोसी ने सर झुकाया और सम्राट के साले के साढ़ू से मुखातिब हुआ, ‘‘इस बार बटन दबाने का पहला नंबर मैंने तुम्हारा रखा है।’’
‘‘तुम कौन होते हो नंबर लगाने वाले।’’ सम्राट के साले का साढ़ू अकड़ कर बोला, ‘‘मैं अपना नंबर खुद लगा सकता हूं।’’
‘‘जी! मैं आपके हाथ जोड़ता हूं कि इस बार ऐसा न करना वरना मेरी महीनों की मेहनत पर फिर से मिट्टी फिर जायेगी।’’
डा0 कोसी गिड़गिड़ाकर बोला।
‘‘ठीक है।’’ सम्राट के साले का साढ़ू उसी तरह अकड़ा अकड़ा बोला।
‘‘मैं कहता हूं कि बकवास बन्द करके काम जल्दी शुरू करो।’’ पीको दहाड़ा और सभी उसकी तरफ हैरत से देखने लगे।
जबसे पीको दोबारा अजगर से इंसान बना था डा0कोसी की टीम का उससे पहली बार सामना हो रहा था। और पीको का ये रूप उनके लिये नया था। इससे पहले तो उन्होंने हमेशा उसे बेवकूफी की ही हालत में देखा था।
‘‘ओ के। अब आप लोग देर न करें और अपनी पोज़ीशन ले लें।’’ डा0कोसी अपनी टीम से मुखातिब होकर बोला और उसकी टीम के सभी लोग जल्दी जल्दी बाहर निकल गये।
अब वे अपनी पोज़ीशन लेने के लिये अपने अपने यान की तरफ जा रहे थे।
फिर उस बड़े से हॉल के एक तरफ हवा में ही बाहर का पूरा मंज़र किसी थ्री डी फिल्म की तरह दिखने लगा। जिसमें डा0कोसी की टीम के वैज्ञानिक अपनी अपनी पोज़ीशन ले रहे थे।
फिर जब डा0कोसी ने देखा कि सभी अपनी पोज़ीशन ले चुके हैं तो उसने अगले हुक्म के लिये रिमोट को अपने मुंह के पास किया।
लेकिन उसी वक्त उसकी बगल में खड़े पीको ने उसके हाथ से रिमोट ले लिया।
डा0कोसी चौंक कर उसे देखने लगा।
‘‘परवाह न करो।’’ पीको मुस्कुराया, ‘‘पिछली बार तुम्हारा हुक्म मानने से कुछ लोगों ने इंकार कर दिया था। जिससे सूरैन की तबाही का प्रोजेक्ट खतरे में पड़ गया था। आज मैं हुक्म दूंगा और अगर किसी ने ज़ारा भी लापरवाही दिखाई, तो उसे अपना अंजाम देखना पड़ेगा।’’
पीको की गुर्राहट भरी आवाज़ सुनकर डा0कोसी काँप उठा।
पीको रिमोट अपने मुंह के पास लाया और बोलने लगा, ‘‘मैं पीको बोल रहा हूं। अब मैं जो आर्डर करने जा रहा हूं और उसके खिलाफ ज़रा भी कुछ हुआ तो गलती करने वाले को मैं खुद अपने हाथों से सज़ा दूंगा।’’
