शादी की रस्में शुरू हो गयी थीं। और ये रस्में निहायत टाईट सिक्योरिटी के साथ हो रही थीं। किसी बाहरी व्यक्ति या जानवर को पर मारने का भी मौका नहीं था। यहाँ तक कि उड़ने वाले परिन्दों से भी बचाव का इंतिज़ाम था क्योंकि बाकोल वासी किस जानवर के मेकअप में आकर हमला कर दें, कुछ नहीं कहा जा सकता था।
दरअसल बाकोल पर रहने वाले निवासियों के जिस्म का बड़ा हिस्सा अनपार्टिकिल के मिलने से बना होता था। और इस वजह से वो अपने को किसी भी रूप में ढाल लेते थे। जिसे वो ‘मेकअप करना’ कहते थे। सूरैन ग्रह के मुकाबले बाकोल ग्रह पर अनपार्टिकिल ज़्यादा बड़ी क्वांटिटी में थे तो ज़ाहिर है उनके वासियों के जिस्म में भी पाये जाते थे।
आप सोच रहे होंगे कि ये अनपार्टिकिल क्या बला हैं? तो मामला ये है कि हमारी ज़मीन पर तमाम चीज़ें पार्टिकिल से बनी हुई हैं, जो जगह घेरते हैं और अगर किसी जगह एक पार्टिकिल मौजूद है तो वहाँ दूसरा नहीं आ सकता। लेकिन अनपार्टिकिल के साथ ये ज़हमत नहीं होती और एक ही जगह कई अनपार्टिकिल साथ में मौजूद हो सकते हैं अपना अपना वजूद बचाते हुए।
सूरैन पर शादी की तमाम रस्में पूरे एक हफ्ते तक चलती थीं। इस पूरे हफ्ते का पहला दिन प्रपोज़ डे के तौर पर मनाया जाता था। इस दिन किसी स्टेडियम जैसी जगह पर लोगों के बीच लड़का उस लड़की का इंतिज़ार करता था जिसके साथ शादी तय होती थी। फिर किसी अनोखे अंदाज़ में उसकी होने वाली दुल्हन अपनी रथनुमा सवारी से फिज़ा में तैरती हुई आती थी और लड़के के ठीक सामने उतरती थी फिर लड़का उसे खूबसूरत तोहफों के साथ प्रपोज़ करता था।
दो चार नखरों के बाद लड़की उसके प्रपोज़ल पर हामी भर देती थी। फिर वहाँ मौजूद सभी मेहमान तालियों के साथ उनका स्वागत करते थे और उन्हें लम्बी खुशहाल जिंदगी की दुआएं देते थे।
फिलहाल ज़ारा इसी फंक्शन की तैयारी में लगी हुई थी और गिल्लू मियाँ उसकी तैयारी देखते हुए लगातार रिमार्कस पास कर रहे थे। उनके निहायत रोने गिड़गिड़ाने पर ज़ारा उसे पिछली गुस्ताखियों पर माफी दे चुकी थी। लेकिन मालूम होता था कि गिल्लू मियाँ के डी.एन.ए. में सुधरने का कोड ही नहीं है।
‘‘अगर तुम्हारी लिपिस्टिक
का रंग लाल की बजाय गुलाबी होता तो ज़्यादा बेहतर था।’’ काफी देर सब्र करने के बाद गिल्लू मियाँ आखिर बोल ही पड़े।
‘‘क्यों? लाल में क्या बुराई है?’’ ज़ारा लिपिस्टिक
की एक और तह लगाती हुई पूछ बैठी।
‘‘बिल्कुल ऐसा मालूम होता है जैसे किसी का मर्डर करके उसका खून पीकर चली आ रही हो। पृथ्वी नाम के ग्रह पर ऐसी औरतों को डायन कहा जाता है।’’
तोते का जवाब ज़ारा के तन बदन में आग लगा गया।
‘‘अभी तो नहीं किया है लेकिन बहुत जल्द मेरे हाथों एक मर्डर होने वाला है। एक गिल्लू नाम के खबीस बन्दे का।’’ वह गुर्राकर बोली।
‘‘अब नहीं बोलूंगा।’’
तोता जल्दी से बोला, ‘‘लेकिन अगर नहीं बोलूंगा तो तुम यही सूट पहन लोगी न। बैंगनी और हरे रंग वाला।’’
‘‘अब इसमें क्या बुराई है?’’ ज़ारा फिर उलझ गयी।
‘‘बैंगन सूरैन की सबसे बेकार सब्ज़ी मानी जाती है और उसकी पत्तियां हरे रंग की होती हैं। अब मैं हरगिज़ नहीं बोलूंगा कि इस सूट को पहनकर तुम पूरी की पूरी बैंगन लगोगी।’’ तोते की जजमेन्ट पावर गज़ब की थी।
लेकिन ज़ारा को उसकी जजमेन्ट पावर से क्या। अब उसने नाखूनतराश चाकू उठाया और तोते को एक तिरछा लुक दिया। तोता सहम कर पिंजरे में बिल्कुल किनारे सिमट गया।
‘‘बेटा गिल्लू, मैं तुमको बार बार मना कर रहा था कि अपनी चोंच बन्द रखो। अब हलाल होने के लिये तैयार हो जाओ।’’ वह रुहांसी आवाज़ में धीरे धीरे कह रहा था।
लेकिन ज़ारा दूसरे मूड में थी। उसने उस चाकू से अपने नाखून तराशने शुरू कर दिये और तोते की जान में जान आयी।
बहरहाल उसकी तैयारी पूरी हुई और अब जो उसने घूमकर देखा तो तोते को पिंजरे में बेहोश पाया। दोनों टाँगें हवा में उठी हुई और पंख ज़मीन पर बिछे चुके थे।
‘‘अरे अब क्या हो गया तुझे?’’ वह बड़बड़ायी और अपनी कनीज़ को आवाज़ देने लगी।
जल्दी ही कनीज़ अन्दर पहुंच गयी और ज़ारा को देखकर उसका मुंह भाड़ सा खुल गया और जिस्म किसी मूर्ति की तरह जम गया।
‘‘अब तुझे क्या हुआ?’’ ज़ारा बौखलाकर पूछने लगी।
‘‘राजकुमारी जी! क़सम से आप हमेशा की खूबसूरत हैं लेकिन इस वक्त तो आप का रूप ग़ज़ब ढा रहा है। जो भी देख लेगा वही होश खो बैठेगा।’’
‘‘तभी तो मैं बेहोश हो गया।’’ पिंजरे के अन्दर से तोता पट से बोल पड़ा।
‘‘ओह और मैं समझी तेरे पेट के अन्दर बनने वाली गैस तेरी खोपड़ी में चली गयी।’’ ज़ारा ने एक गहरी साँस ली।
‘‘आप मुझे बदनाम कर रही हैं राजकूमारी
साहिबा। मेरे अन्दर कोई गैस वैस नहीं बनती।’’ तोता अपनी सफाई पेश करने लगा।
‘‘क्या हमारी सवारी तैयार है?’’ ज़ारा अपनी कनीज़ से पूछने लगी।
‘‘जी राजकुमारी। आपकी सवारी सज धज कर तैयार है। आज उसकी भी शान निराली है।’’
‘‘चलो देखते हैं।’’ ज़ारा ने कनीज़ को आगे बढ़ने का इशारा किया।
‘‘जाओ ऊपर वाला तुम्हें अपनी अमान में रखे।’’ तोते ने बुज़ुर्गों
की तरह दुआएं दी और ज़ारा शुक्रिया कहकर बाहर निकल गयी।
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जल्दी ही ज़ारा अपनी सवारी तक पहुंच गयी। वाकई इस वक्त उसकी स्पेशल सवारी बिल्कुल अलग ही अनोखे अंदाज़ में दिखाई दे रही थी। मालूम होता था एक छोटा जलमहल है जो हवा में लहराते बादल पर तैर रहा है। वास्तव में यह एक छोटा प्लेन ही था जिसका निचला हिस्सा बादल की तरह बनाया गया था, जबकि ऊपरी हिस्सा किसी स्वर्ण महल की तरह। यह स्वर्ण महल चौकोर ज़रूर था लेकिन उसके चारों कोने लंबी पत्तियों की तरह बल खाते हुए डिज़ाईनदार थे।
उसने धीरे धीरे चलते हुए अन्दर कदम रखा। उसके साथ में उसकी कनीज़ भी मौजूद थी। फिलहाल उस सवारी से यही दोनों जाने वाले थे।
जैसे ही दोनों ने अन्दर कदम रखा, प्लेन का इंजन स्टार्ट हुआ और इसी के साथ ही वह प्लेन आसपास वालों की नज़रों से गायब हो गया।
दरअसल मामला ये था कि प्लेन ने स्टार्ट होते ही खास तरह की किरणें छोड़ी थीं जो प्लेन के चारों तरफ फैल गयी थीं और उन ही की वजह से प्लेन अदृश्य हो गया था। चीज़ों को अदृश्य करने वाली इन किरणों के इस्तेमाल के पीछे खास मकसद था - ज़ारा को बाकोल की बुरी नज़रों से बचाना।
बाकोल वासी एक बार उसकी किडनैपिंग में नाकाम हो गये थे, लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं कि वे चुपचाप बैठ जाते। दूसरा हमला होने के पूरे चांसेज थे जिससे बचना ज़रूरी था।
प्लेन अब हवा में तैर चुका था लेकिन किसी को उसकी लोकेशन का कुछ पता नहीं था कि वह फिज़ा के किस कोने में मौजूद है और किधर जा रहा है। बहरहाल उसकी मंज़िल तो शहर का सबसे बड़ा स्टेडियम ही था।
उधर स्टेडियम में ज़ारा के मेहमान हाई सिक्योरिटी चेक के बीच आना शुरू हो गये थे। कई उनमें से मुंह भी बना रहे थे क्योंकि इतना ज़्यादा सिक्योरिटी चेक इससे पहले उन्हें किसी भी शादी में झेलना नहीं पड़ा था। उन्हें क्या मालूम कि ये सब ज़ारा को बाकोल की किडनैपिंग से बचाने के लिये इंतिज़ाम किया गया है।
फिर तालियों की गड़गड़ाहट के बीच वहाँ एक आलीशान कार आकर आकर रुकी। इस कार से सम्राट मास्टर पंजुम और महारानी फारिया बाहर निकले। उन्हें देखते ही वहां मौजूद सारे ही मेहमान उनके स्वागत में खड़े हो गये।
सम्राट ने वहाँ मौजूद चीफ सिक्योरिटी आफिसर को इशारे से अपने पास बुलाया।
‘‘क्या खबर है?’’ चीफ के पास आते ही सम्राट ने सवाल किया।
‘‘खबर अच्छी है सम्राट, हमने यहाँ मौजूद सभी मेहमानों की न्यूक्लियर स्कैनिंग कर ली है। इनमें से किसी में भी बाकोल ग्रह के पार्टिकिल्स मौजूद नहीं।’’ चीफ ने बताया।
‘‘गुड। इसका मतलब हमारा आज का प्रोग्राम
शांति से निपट जायेगा।’’
‘‘जी। हमने इसका पूरा इंतिज़ाम किया हुआ है। यहाँ बाकोल का परिन्दा भी पर नहीं मार सकता।’’ चीफ सिक्योरिटी आफिसर मज़बूत लहजे में बोला।
अचानक वहाँ एक अजीब सा शोर गूंजने लगा।
‘‘ये शोर कैसा है?’’ महारानी फारिया ने चौंक कर पूछा।
चीफ ने जल्दी से अपने हाथ मे पकड़ी इन्फार्मेशन डिवाईस की तरफ देखा और फिर महारानी को बताने लगा, ‘‘महारानी साहिबा, हमारे उत्सव की महान घड़ी की शुरूआत हो चुकी है। क्योंकि शीले साहब आ चुके हैं। ये शोर उन ही के आने का है।
‘‘गुड, तुमने उसके बैठने का इंतिज़ाम कहाँ किया है?’’
सम्राट के पूछने पर चीफ सिक्योरिटी आफिसर ने स्टेडियम के एक कोने की तरफ इशारा किया जहाँ एक छोटा सा स्टेज रंग बिरंगी रौशनियों से जगमगा रहा था।
उस स्टेज के बीचोंबीच एक सिंहासन नुमा कुर्सी मौजूद थी ज़ारा के मंगेतर के बैठने के लिये। उस कुर्सी के चारों तरफ एक गोल चमकदार सफेद घेरा मंडरा रहा था, जो कि वास्तव में अनोखा सुरक्षा कवच ही था, ज़ारा के मंगेतर को किसी दुश्मन के हमले से बचाने के लिये।
‘‘सम्राट, ये सुरक्षा कवच फिलहाल शीले साहब की कुर्सी के चारों तरफ है। लेकिन जब वे राजकुमारी
को प्रपोज़ करने स्टेडियम के बीचोंबीच पहुंचेंगे तो ये सुरक्षा घेरा भी उनके चारों तरफ मंडराता हुआ साथ में जायेगा। और वे किसी भी हमले से पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।
इस बीच तालियों की ज़ोरदार गड़गड़ाहट के साथ शीले वहाँ दाखिल हो चुका था और गार्डस ने उसे उसकी कुर्सी तक पहुंचा दिया।
अब इंतिज़ार था ज़ारा के पहुंचने का।
जल्दी ही वह घड़ी भी आ गयी। स्टेडियम में एक मधुर आवाज़ गूंजने लगी। ये आवाज़ सूरैन के राजगीत की थी। इसका मतलब था कि ज़ारा का प्लेन स्टेडियम के अन्दर दाखिल हो चुका है जो अदृश्य हालत में था। फिर लोगों ने देखा स्टेडियम के बीचोंबीच ज़ारा का हवाई महल धीरे धीरे प्रकट हो रहा था यानि उसके चारों तरफ मौजूद सुरक्षा किरणों का घेरा हटने लगा था।
लेकिन इससे पहले कि वह घेरा पूरा हट पाता, अचानक पूरे स्टेडियम को घने काले बादलों ने ढंक लिया और पूरी फिज़ा एक तेज़ चीख की आवाज़ से गूंज उठी।
चीख इतनी भयंकर थी कि हर व्यक्ति का दिल ज़ोरों से धड़कने लगा। और सब चारों तरफ देखने लगे कि ये आवाज़ कहाँ से आयी?
फिर उन सबकी निगाहों ने देखा कि काले बादल अचानक अपना रूप बदलने लगे थे। और अब हर बादल किसी भयानक जानवर की शक्ल में बदल रहा था। बल्कि उन्हें जानवर से ज़्यादा राक्षस कहना मुनासिब होगा क्योंकि जानवर तो ज़्यादातर खूबसूरत शक्ल के ही होते हैं।
अब वो तेज़ चीखों की आवाज़ें उन राक्षसों के मुंह से निकलती हुई मालूम हो रही थीं।
‘‘तो आखिकार बाकोल वाले फिर आ गये रंग में भंग डालने।’’ सम्राट पंजुम गहरी साँस लेकर बोला, ‘‘तुमने इनसे बचाव का क्या इंतिज़ाम किया?’’ वह सिक्योरिटी चीफ से पूछने लगा।
‘‘सम्राट! इस बार इनकी कोई कोशिश कामयाब नहीं होगी।’’ चीफ पूरे भरोसे के साथ बोला।
उधर आसामान में तैरते राक्षस चीखों के साथ साथ कहकहे भी लगाने लगे थे। और साथ में कह रहे थे, ‘‘ज़ारा तैयार हो जाओ। हम तुमको लेने आये हैं। तुमको बाकोल ग्रह पर जाना है।’’
अब वह राक्षस धीरे धीरे नीचे आ रहे थे। मालूम होता था कि काले बादल ही धरती पर उतरे आ रहे हैं कि अचानक...
वहाँ तेज़ बिजली की चमक के साथ उन राक्षसों के ठीक नीचे सफेद रौशनी फैल गयी। फिर उस रौशनी के भीतर से आतिशबाज़ी की तरह रंग बिरंगी किरणें निकलकर उन राक्षस नुमा आकृतियों से टकराने लगीं और वहां चीख पुकार मच गयी।
वो आकृतियां लगातार खत्म हो रही थीं। लेकिन ऐसा नहीं कि कम भी हो रही थीं। दूसरी नयी आकृतियां आकर उनकी जगह लेती जा रही थीं। खास बात ये थी कि उनमें से कोई भी आकृति पलट कर हमला नहीं कर रही थी।
‘‘हमारे सुरक्षा घेरे ने बाकोल के राक्षसों को वहीं रोक दिया है।’’ सिक्योरिटी अफसर बताने लगा।
‘‘गुड! मेरा ख्याल है कि हमें अपने प्रोग्राम
को रोकना नहीं चाहिए। क्योंकि बाकोल वाले अब हमें नुकसान पहुंचाने की पोज़ीशन में नहीं हैं।’’
सम्राट का हुक्म होते ही प्रपोज़ डे की रस्में फिर से शुरू कर दी गयीं।
अब ज़ारा धीमे कदमों से अपने हवाई महल से बाहर निकल रही थी और फिर वह उस महल के अदृश्य पायदान पर टिक गयी। मालूम होता था बादलों के बीच वह किसी जन्नत के दरवाज़े पर मौजूद है और अपने महबूब का इंतिज़ार कर रही है।
फिर उसका महबूब यानि शीले अपनी सिंहासननुमा कुर्सी से उठ खड़ा हुआ और धीरे धीरे चलता हुआ ज़ारा की तरफ बढ़ा। उसके हाथों में फूलों का एक बड़ा गुलदस्ता मौजूद था। शीले के साथ साथ उसके चारों तरफ मंडराता सुरक्षा घेरा भी आगे की ओर तैर रहा था। हालांकि अब उसकी ज़रूरत नहीं थी क्योंकि बाकोल के आक्रमणकारी सूरैन की सिक्योरिटी को भेदने में नाकाम रहे थे।
शीले चलता हुआ उन अदृश्य सीढ़ियों के पास पहुंच गया जिसके सबसे ऊपरी पायदान पर ज़ारा मौजूद थी।
‘‘ज़ारा क्या तुम हमेशा के लिये मेरी जीवन संगिनी बनना पसंद करोगी?’’ उसने अपनी गंभीर आवाज़ में ज़ारा को प्रपोज़ किया और ज़ारा ने मुंह बना लिया।
‘‘शीले, क्या तुम्हारे पास रोमाण्टिक
अलफाज़ों की कमी है मझे प्रपोज़ करने के लिये?’’ उसने एक अदा के साथ गर्दन टेढ़ी कर ली।
‘‘आई एम सॉरी। एक साइंटिस्ट
के पास रोमाण्टिक अलफाज़ कम ही होते हैं।’’
‘‘कोशिश करो। वरना तुम्हारा प्रपोज़ल रिजेक्ट।’’
ज़ारा ने फिर तमाम नखरों के साथ धमकी दी। हालांकि ये धमकी फर्ज़ी ही थी। बहरहाल शीले खंखारते हुए रोमाण्टिक अलफाज़ याद करने की कोशिश करने लगा।
फिर थोड़ा सोचने के बाद दोबारा बोला, ‘‘ज़ारा, क्या तुम मेरी इस सुनसान सहरा जैसी जिंदगी में बहारों की तरह आकर मेरी जिंदगी को फूलों से महकता हुआ चमन बनाना पसंद करोगी?’’
‘‘हाँ ये कुछ ठीक है।’’ अब ज़ारा ने ज़्यादा नखरे दिखाना मुनासिब नहीं समझा। क्योंकि ऊपर मौजूद बाकोल वाले अगर हावी हो जाते तो पूरा प्रोग्राम
खटाई में पड़ जाता।
वह सीढ़ियों से नीचे उतरने लगी जहाँ उसका महबूब इंतिज़ार कर रहा था कि कब उसके कदम सीढ़ी का आखिरी पायदान छुएं और वह फूलों का गुलदस्ता उसके कदमों में निछावर करे।
‘‘ज़ारा तुमको पीको की बीवी बनना है और तुम बनकर रहोगी।’’ तेज़ चीख के साथ आसामान से आवाज़ आयी जहाँ बाकोल से आये हुए राक्षसों और सूरैन की सुरक्षा किरणों के बीच महायुद्ध चल रहा था।
उस आवाज़ को सुनकर ज़ारा एक पल को ठिठकी लेकिन फिर पूरे भरोसे के साथ उतरती हुई नीचे पहुंच गयी जहाँ शीले अपने गुलदस्ते के साथ उसका इंतिज़ार कर रहा था।
ज़ारा के नीचे पहुंचते ही उसने गुलदस्ता उसकी ओर बढ़ा दिया जिसे एक मोहक मुस्कान के साथ कुबूल कर लिया गया। तालियों की ज़ोरदार गड़गड़ाहट ने आसमान से आने वाली राक्षसों की चीखों को दबा दिया।
अब दोनों ने एक दूसरे का हाथ थामा और उन ही सीढ़ियों से वापस ज़ारा के प्लेन के भीतर जाने के लिये ऊपर चढ़ने लगे। मामला ये था कि सूरैन पर प्रपोज़ डे का फंक्शन मनने के बाद होने वाले पति को लड़की के घर पर जाना होता था लड़की के साथ और वहाँ पर लड़की के घरवाले उनकी खातिरदारी करते थे।
आसमान से आने वाली चीखें ज़ारा को लगातार अल्टीमेटम दे रही थीं लेकिन ज़ारा तो अपने महबूब का हाथ थामे हुए मदहोश थी। उसके आसपास क्या हो रहा है उससे पूरी तरह बेखबर।
फिर वह शीले का हाथ थामे हुए अपनी महलनुमा सवारी के अन्दर दाखिल हो गयी जिसके बाद वह सवारी उसी तरह अदृश्य हो गयी जिस तरह वहां लैंड करने से पहले गायब थी। इसका मतलब था कि उसका प्लेन अब वापस जाने के लिये फिज़ा में तैर चुका है। और किस तरफ जा रहा है इसका पता अब सिर्फ ज़ारा को ही था या फिर यान में मौजूद शीले को।
लेकिन सबसे खास बात ये थी कि ज़ारा के यान के गायब होने के साथ ही बाकोल से आई हुई उन राक्षसी आकृतियों की चीख पुकार भी रुक चुकी थी।
और फिर वहाँ मौजूद सम्राट के साथ साथ बाकियों ने देखा कि फिज़ा में मौजूद वे आकृतियां अब धीरे धीरे कम होने लगी थीं।
‘‘इसका मतलब कि बाकोल ने अपनी हार मान ली है।’’ सम्राट बड़बड़ाया।
‘‘जी। उन्हें यकीन हो गया है कि हमारे सुरक्षा घेरे के सामने अब उनका बस चलने वाला नहीं।’’ सिक्योरिटी आफिसर ने भी सम्राट का समर्थन किया।
‘‘तो फिर हम चलते हैं अपने महल की ओर। अब हमें होने वाले दामाद की खतिरदारी भी तो करनी है।’’ महारानी ने मास्टर पंजुम की ओर देखा।
‘‘हाँ बिल्कुल।’’ दोनों अपनी सवारी की ओर बढ़ गये।
और जिस वक्त वे अपनी फ्लाइंग कार में बैठ रहे थे तो उन्होंने देखा कि आसमान बिल्कुल साफ हो चुका है। अब बाकोल से आयी राक्षसी आकृतियों का दूर दूर तक पता नहीं था।
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सम्राट की कार जब महल में आकर रुकी तो वहाँ सन्नाटा देखकर उन्हें आश्चर्य हुआ।
‘‘क्या ज़ारा अभी तक नहीं पहुंची? उसे तो हमसे पहले आ जाना चाहिए था?’’ सम्राट ने सवालिया नज़रों से महारानी की ओर देखा।
फिर उसने महल के पहरेदारों से भी सवाल किया लेकिन सबने यही बताया कि ज़ारा की सवारी अभी तक महल में दाखिल नहीं हुई।
अचानक उसे अपने फोन पर किसी का मैसेज मिलने लगा। उसने फोन ऑन किया और सामने हाबू का चेहरा देखकर उसका मुंह बन गया। हालांकि हाबू काफी खुश दिखाई दे रहा था।
‘‘कैसे हो पंजुम! प्रपोज़ डे मना लिया क्या?’’
‘‘हाँ प्रपोज़ डे पूरी सलामती के साथ मन गया। हालांकि तुम्हारी भेजी हुई रुकावटों ने अपनी टाँग अड़ाने की पूरी कोशिश की लेकिन हमारी सिक्योरिटी के सामाने उनका कुछ बस नहीं चला।
हाबू ने एक कहकहा लगाया और बोला, ‘‘तुम्हारी सिक्योरिटी धरी रह गयी है मास्टर पंजुम।’’
‘‘क्या मतलब?’’ मास्टर पंजुम बुरी तरह चौंका।
‘‘आसमान में तैरती वो आकृतियां केवल रियल इमेजेज थीं तुम और तुम्हारी सिक्योरिटी का ध्यान भटकाने के लिये। हमने जिसे वास्तव में ज़ारा को लाने के लिये भेजा था वह अपने मकसद में कामयाब हो चुका है और अब ज़ारा को लेकर वापस आ रहा है।’’
‘‘ऐसा नहीं हो सकता।’’ मास्टर पंजुम बड़बड़ाया।
‘‘हमारी प्लानिंग और ताकत के आगे तुम्हारी पूरी सिक्योरिटी की हैसियत चींटी से भी ज़्यादा तुच्छ है। अब बहुत जल्द तुम ज़ारा को पीको की ख्वाबगाह की ज़ीनत बनते हुए देखोगे।’’ हंसते हुए हाबू ने सम्पर्क काट दिया।
अब सम्राट और महारानी दोनों ही चिंता की अथाह गहराईयों में डूब चुके थे।
