‘‘आंय। इसके मुंह से इंसानी आवाज़ कैसे निकल रही है?’’ ज़ारा बड़बड़ायी।
‘‘क्योंकि मैं इंसान ही हूं। भेड़ के मेकअप में।’’ उसने ज़ारा की बड़बड़ाहट सुन ली थी।
‘‘ये क्या बेवकूफी है। अगर इंसान हो तो उसी जामे में रहना चाहिए। जानते हो सूरैन की राजकुमारी
से मज़ाक करने का अंजाम।’’ ज़ारा तेज़ आवाज़ में बोली।
‘‘अरे नहीं नहीं। मज़ाक करें मेरे दुश्मन। मैं तो आपको इज़्ज़त देने के लिये आया हूं।’’ वह भेड़ जल्दी से बोला।
‘‘कैसी इज़्ज़त? कौन हो तुम?’’ इसबार ज़ारा शंकाग्रस्त होकर पूछने लगी।
‘‘मैं तुम्हारा आशिक बाकोल का राजकुमार पीको हूं। पिछली बार जबसे तुम्हारी बर्थडे में तुमसे मिलकर गया हूं तभी से दिल का सुकून गायब हो गया है। इंसान बनकर घूमने में दिल ही नहीं लग रहा इसलिए कभी कुत्ता तो कभी भेड़ बनकर टहल रहा हूं। ज़्यादा बेचैनी हुई तो तुमसे मिलने भी इसी हुलिए में आ गया।’’
‘‘तुम आये क्यों मेरे ग्रह पर बिना इजाज़त?’’ ज़ारा ने उसे झिड़का।
‘‘क्या बताऊं। जबसे तुम्हें देखा है बार बार मिलने की चाहत मुझे यहाँ खींच लाती है। लेकिन बेफिक्र रहो। जब तुम्हारी और मेरी शादी हो जायेगी और तुम सूरैन से विदा होकर बाकोल पर आ जाओगी तो मैं इधर आना कम कर दूंगा। यकीन न आये तो मेरे नौकरों से पूछ लो।’’ उसने बाकी भेड़ों की तरफ इशारा किया।
‘‘तो अपने साथ अपने नौकरों को भी ले आये हो जो मेरे ग्रह की ज़मीन पर गंदगी फैला रहे हैं।’’ ज़ारा ने उन भेड़ों को मेंगनियां
करते देखकर मुंह बनाया।
भेड़ बना पीको अपने नौकरों की तरफ घूमा और गुस्से से बोला, ‘‘कमबख्तों! ये सब हरकतें करके तुम लोग क्यों मेरी बेइज़्ज़ती का अचार बना रहे हो?’’
‘‘माफी चाहते हैं राजकुमार पीको।’’ एक नौकर बोल पड़ा, ‘‘हमें यहाँ आये हुए बहुत देर हो गयी है नतीजे में अच्छा खासा प्रेशर बन गया हमारे अन्दर। यहाँ भेड़ो के लिये बना कोई टायलेट भी नज़र नहीं आया।’’
पीको वापस ज़ारा की तरफ घूमा और दाँत निकालकर बोला, ‘‘बात ये है कि किसी जानवर के मेकअप में आदतें भी उसी जानवर की पैदा हो जाती हैं। वैसे भी भेड़ तो मैदान में ही अपना पेट साफ करते हैं।’’
‘‘इसका मतलब कि तुम भी मेरे आने से पहले...’’
‘‘मैं अपनी होने वाली ससुराल में गंदगी करना पसंद नहीं करता।’’ भेड़ बना पीको एक बार फिर बत्तीसों दाँत दिखाते हुए बोला।
ज़ारा एक बार फिर गुस्से में आ गयी। वह तो सोच भी नहीं रही थी उससे शादी करने को और वह था कि ज़बरदस्ती सर पर चढ़ा आ रहा था।
‘‘पीको अब तुम फौरन यहाँ से रफूचक्कर हो जाओ वरना तेरी खाल खिंचवाकर भूसा भरवा दूंगी और गोश्त अपने महल के पास घूमने वाले आवारा कुत्तों को खिला दूंगी।’’
‘‘चला जाऊंगा। लेकिन तुम्हारे मुंह से शादी की हाँ सुनने के बाद।’’ पीको इस वक्त चिकना घड़ा साबित हो रहा था। ज़ारा के गुस्से का उसके ऊपर ज़रा भी असर नहीं हुआ था।
ज़ारा ने अपने माथे पर हाथ मारा। उसके एक इशारे पर सूरैन की आर्मी वहां पहुंचकर उस बदतमीज़ को सारे नौकरों समेत उल्टा टाँग सकती थी। लेकिन वह चाहती थी कि मामला शांति से ही निपट जाये और दो ग्रहों के बीच की तकरार ज़्यादा न बढ़ने पाये।
फिर वह कुछ सोचकर बोली, ‘‘अच्छी बात है। मैं तुम्हें जवाब दूंगी। लेकिन उसके लिये ये जगह मुनासिब नहीं। ऐसी बातों के लिये तो कोई रोमाण्टिक टाईप की जगह होनी चाहिए।’’
‘‘तुम बताओ किधर चलना है। मैं कहीं भी चलने के लिये तैयार हूं।’’ पीको खुश होकर बोला। अब उसे अपने सेहरे के फूल खिलने की उम्मीद जाग गयी थी।
‘‘अपने नौकरों को यहीं छोड़ दो और मेरी कार की छत पर बैठ जाओ। हम एक खूबसूरत जगह की ओर चलेंगे।’’
‘‘छत पर क्यों अन्दर क्यों नहीं?’’ पीको का सवाल था।
‘‘उसके लिये तुम्हें इंसानी जामे में आना होगा। मेरी कार में भेड़ों की बदबू के लिये कोई जगह नहीं। अपना ये गंदा मेकअप खत्म करके इंसान बन जाओ तो कुछ सोच सकती हूं।’’
‘‘ अभी तो ये मुमकिन नहीं। मेकअप मशीन तो मेरे ग्रह पर है जो इंसान को जानवर और जानवर को इंसान बनाती है। छत पर ही आ जाता हूँ। कुछ दिन की बात है फिर तो मैं ड्राइव करूंगा और तुम मेरी बगल में बैठोगी।’’
कहते हुए भेड़ बना हुआ पीको कूदकर छत पर चढ़ गया और ज़ारा ने अपनी कार दूसरी तरफ मोड़ दी।
जल्दी ही वे एक जंगल के बीच हरी भरी वादी में पहुंच चुके थे।
‘‘वह देखो झाड़ियों में कितने खूबसूरत फूल खिले हैं। हम वहीं चलकर बैठते हैं।’’
‘‘हाँ वाकई ये जगह कितनी खूबसूरत है। आज मैं पूरा लव इंसाईक्लोपीडिया पढ़कर आया हूं। पहले मैं उसके सारे प्रेम वाक्य पढ़ूंगा। फिर तुम मुझसे मोहब्बत का इकरार करना और फिर शादी का वादा।’’ कहते हुए पीको कूदकर कार की छत से नीचे उतर गया और झाड़ियों की तरफ दौड़ लगा दी।
लेकिन ज़ारा ने तो अभी अपनी कार का दरवाज़ा ही नहीं खोला था। उतरना तो दूर की बात थी। फिर उसने अपने कार का हार्न खास अंदाज़ में बजाया।
उसी वक्त वहाँ का पूरा वातावरण शेर की भयानक दहाड़ से गूंज उठा। ज़ारा ने देखा भेड़ बने पीको की टाँगों के बीच की ज़मीन गीली होने लगी थी। उसने मुश्किल से अपनी हंसी रोकी और कार को तेज़ी के साथ वापस घुमा दिया। अब पोज़ीशन ये थी कि उसकी कार हवा में भाग रही थी और पीछे पीछे भेड़ बना पीको उसे पकड़ने के लिये बदहवास दौड़ लगा रहा था। शेर की गरज लगातार उनका पीछा कर रही थी।
फिर शेर सामने भी आ गया। ज़ारा जानती थी कि ये ट्रेंड शेर है और साथ ही उसका पालतू भी है। दरअसल उसने उसे बुलाने के लिये ही हार्न बजाया था जिसका जवाब उसने अपनी दहाड़ से दिया था। लेकिन ये बात बेचारे पीको को तो पता नहीं थी। उसे तो यही लगा कि वहाँ मौजूद जंगल के राजा ने उसे अपना आसान शिकार समझ लिया है। भेड़ जैसे कुछ बेचारों को तो ऊपर वाले ने पैदा ही किया है दावतों के लिये।
अब ज़ारा आराम से नार्मल स्पीड में अपनी कार आगे दौड़ा रही थी। न तो स्पीड तेज़ कर रही थी और न इतनी धीमी कि पीको उचककर उसकी कार पर सवार हो जाता। हवास बाख्ता पीको पूरी कोशिश में था कि किसी तरह उसे लटकने को मिल जाये। लेकिन ज़ारा भी बचपन में कुछ ज़्यादा ही चूहे बिल्ली का खेल खेलकर जवान हुई थी।
उधर पीको के पीछे शेर दौड़ता हुआ चला आ रहा था। वह भी बहुत ज़्यादा तेज़ी में नहीं मालूम होता था। ज़ारा को पता था कि शेर उससे मुलाकात के लिये आ रहा है और बदहवास पीको से उसका कोई लेना देना नहीं। इस बीच पीको कंटीली झाड़ियों के पचासों काँटे खाने के साथ साथ कई चिड़ियों के घोंसले भी झोंक में गिरा चुका था और अब वह सारी चिड़ियाँ उसके पीछे लगी हुई बुरी तरह उसे कोस रही थीं।
ज़ारा उस शेर को जंगल से बाहर नहीं निकालना चाहती थी इसलिए उसने कार को गोलाई में घुमाना शुरू कर दिया। इसी बीच वह एक नाले के ऊपर से गुज़री और पीछा करता हुआ पीको औंधे मुंह उस नाले में घुस गया। अब मामला ये था कि उसका सर तो नाले के कीचड़ में घुसा हुआ था और पिछली टाँगें हवा में लहराती हुई बुरी तरह फड़फड़ा रही थीं।
उसी वक्त शेर ने एक छलांग लगायी और पीको के पिछवाड़े पर लैंड होता हुआ दूसरी छलांग में ज़ारा की कार पर पहुंच गया। ज़ारा उसे पुचकारते हुए अपनी कार को ज़मीन पर ले आयी। अब वह कार से बाहर निकलकर शेर को पुचकारने लगी थी शेर भी पूरी मोहब्बत के साथ उसके पैरों को चाटने लगा।
