Saturday, October 30, 2021

Monday, August 9, 2021

तेरी दुनिया मेरे सपने - Your World My Dreams (रोमांचक कहानी)

आज के वक़्त में साइंस फिक्शन के कई आइडियाज़ अब हकीकत बन चुके है.इन ही में से एक है लिखित मैटर को आवाज़ में बदलना। अब कुछ साइट्स व एप्प इस काम को बखूबी कर रहे हैं।  ऐसे ही एक सॉफ्टवेयर द्वारा कहानी 'तेरी दुनिया मेरे सपने' को वॉइस रूप में सुनें। ये कहानी मेरे व डा अरविन्द मिश्र द्वारा संयुक्त रूप से लिखी गई थी व विज्ञान प्रगति नवम्बर 2008 में प्रकाशित हुई। 



Friday, July 30, 2021

रोमांचक सस्पेंस कहानी : मुर्दे की आवाज़ - The Voice of Corpse

 एक रोमांचक सस्पेंस कहानी : मुर्दे की आवाज़ - The Voice of Corpse मेरे यूट्यूब चैनल 'रोमाँच' पर सुनें 



Pl like and subscribe

Wednesday, July 21, 2021

रोमांचक सस्पेंस कहानी - नक़ली जुर्म

 रोमांचक सस्पेंस कहानी - नक़ली जुर्म" मेरे यूट्यूब चैनल 'रोमाँच' पर सुनें  

Pl like and subscribe
https://youtu.be/4NAk3ElU5BA

Wednesday, June 30, 2021

ड्रामा 'अकबर की जोधा'

 मेरा लिखा हुआ ड्रामा 'अकबर की जोधा' देखें मेरे यूट्यूब चैनल 'रोमांच' पर. आगे भी कुछ अच्छे कंटेंट देखने के लिए चैनल सब्सक्राइब करें 



Monday, June 21, 2021

फीरान का झूला

 


उस आवाज़ के मुंह से यह सुनकर कि वे फीरान के झूले में प्रवेश कर चुके हैं, सभी हैरत में पड़ गये थे। अभी तक तो जो उन्होंने सुना था उसके मुताबिक तो वो एक खतरनाक जगह थी। लेकिन यहाँ तो सामने फूलों की घाटी नज़र आ रही थी जिसके एक कोने पर सोने का छोटा सा पहाड़ तो दूसरी तरफ रेनबो बिखेरता नीला आकाश। और साथ में उनकी खिदमत के लिये एक बौना गुलाम। बस बदसूरत था थोड़ा सा।

‘‘कितनी अजीब बात है।’’ थोड़ी देर बाद महावीर बोला।
‘‘क्या अजीब बात?’’ सैफ ने पूछा।
‘‘ये मेहनती बौना हमारी इतनी मदद कर रहा है और हमने इसे शुक्रिया भी नहीं कहा अभी तक। चलो इससे हाथ मिलाकर शुक्रिया कहते हैं।’’ कहते हुए महावीर बौने की तरफ भेजा।
‘‘हैलो मिस्टर खादिम तुम्हारा बहुत बहुत शुक्रिया।’’ महावीर ने शेकहैण्ड के लिये अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ाया लेकिन बौना पीछे हट गया।
‘‘खादिम को शोभा नहीं देता कि वह अपना हाथ मालिक के साथ मिलाये।’’ बौना पूरे विनय के साथ बोला।
‘‘अच्छा तुमको शाबाशी तो दे सकता हूं कंधा थपथपाकर।’’ कहते हुए महावीर फिर उसकी तरफ बढ़ा लेकिन बौना फिर पीछे हट गया।
‘‘नहीं। मेरा बदन हमारे मालिकों के लिये अछूत है।’’ वह फिर जल्दी से बोल उठा।
‘‘ये तो ऐसा अपने को बचा रहा है जैसे हमारे छूते ही पिघल जायेगा।’’ सैफ बड़बड़ाया।
महावीर ने आगे कुछ नहीं कहा और न ही उसकी तरफ बढ़ने की कोशिश की।
‘‘ये हमें अपने जिस्म से दूर रखने की कोशिश कर रहा है। आखिर क्यों?’’ इसबार उसने सैफ से कोडवर्डस में कहा।
‘‘मुझे लगता है कि यह चूंकि एक थ्री डी इमेज ही है इसलिए हमारे हाथ लगाने से वह इमेज बिगड़ सकती है।’’ कोडवर्डस में ही सैफ ने अपना ख्याल ज़ाहिर किया। ज़ाहिर है इस पूरे तामझाम के पीछे का दिमाग उनकी सारी बातें सुन रहा था। ऐसे वक्त में कोडवर्डस में ही बातें करना मुनासिब था।
‘‘मुझे इसके पीछे कोई और गहरा राज़ मालूम होता है।’’
‘‘तुम लोग यहीं बैठे मक्खियां मारते रहो बैल की औलादों। ऐसे निकम्मे लोग निकले हें खज़ाने की तलाश में। अब मैं अकेले जा रहा हूं सोना बटोरने।’’ अचानक वडाली ने बोलकर सभी को चौंका दिया।
उन्होंने देखा, कहने के साथ ही उसने सोने की पहाड़ी की तरफ दौड़ लगा दी थी।
‘‘अबे खुदाई किससे करेगा?’’ सैफ ने पुकारा।
‘‘अपने हाथों से।’’ दौड़ते हुए ही उसने जवाब दिया।
‘‘लगता है उसके हाथ हाथ नहीं बल्कि लोहे के बेलचे हैं। क्या तुम लोग उसका साथ नहीं दोगे? फड़वा और तसला बनकर?’’ सैफ ने नताशा और बामर की तरफ देखा।
नताशा ने बुरा सा मुंह बनाया, ‘‘हम खज़ाने की तलाश में यहां तक आकर एक गलती कर चुके हैं। अब इस बेवकूफी में और नहीं पड़ेंगे।’’ शायद अब नताशा सैफ और महावीर के सामने अपना लालच ज़ाहिर नहीं करना चाहती थी। पहले ही अच्छी खासी बेइज़्ज़ती हो चुकी थी।
‘‘हाँ। और क्या प्लेन तो तबाह हो गया। हम खज़ाना ले कैसे जायेंगे?’’ बामर ने भी हां में हां मिलायी।
‘‘खज़ाना मिल जाये तो दूसरा खरीद लेना। फिर उसी पर लादकर निकल जाना।’’ सैफ ने मशविरा दिया।
‘‘ये तो वही बात हुई कि मुर्गी खरीदकर उससे अंडा निकलवाया जाये या अंडा खरीदकर उससे मुर्गी निकलवाई जाये।’’ महावीर हंसकर बोला।
‘‘हम लोग खुद को यहां से निकाल ले जायें यही बड़ी बात है।’’ गोल्डी भी बोल उठा।
‘‘लेकिन हम लोग किसी अंडे के अन्दर थोड़ी न बन्द हैं।’’
‘‘क्या पता। हो सकता है ये जगह किसी एलियेन का अण्डा ही हो। किसी बहुत बड़े एलियेन का अण्डा।’’ इस वक्त महावीर भी तफरीह के मूड में आ चुका था।
‘‘कुछ भी हो लेकिन लगता नहीं हम यहां से बाहर निकल पायेंगे।’’ गोल्डी इस तरह बोल रहा था मानो उसकी जान निकली जा रही हो।
‘‘तो क्या तुझे यहां से निकलने की उम्मीद नहीं? तू तो यहां कई बार आ जा चुका है।’’ सैफ ने गोल्डी को घूरा।
‘‘पहले और अब में बहुत फर्क दिखाई दे रहा है। अब तो ये जगह मेरे लिये पूरी तरह अजनबी हो चुकी है।’’ गोल्डी मुंह बनाकर बोला।
सैफ आगे कुछ बोलने वाला था लेकिन उससे पहले ही नताशा बोल उठी।
‘‘मैं तो जाती हूं फूल तोड़ने। बहुत खूबसूरत फूल लगे हैं यहाँ।’’ नताशा झाड़ियों की तरफ बढ़ी जो शायद मुश्किल से दो सौ मीटर के फासले पर थीं। सैफ और महावीर दोनों को जाते हुए देख रहे थे जबकि गोल्डी और बामर एक दूसरे के कंधे पर हाथों को रखे हुए आगे के बारे में सोच रहे थे। ये अलग बात है कि आगे करना क्या है किसी की समझ में नहीं आ रहा था। बौना अलग अपनी जगह बुत बना खड़ा हुआ था।
‘‘अबे क्या तेरी बैटरी किसी ने निकाल ली?’’ सैफ ने उसे पुकारा।
‘‘खादिम की बैटरी फुल है। आप हुकम तो करें।’’ बौना सर झुकाकर बोल पड़ा।
‘‘हमारा हुकम है कि तू जा और उस सोने के पहाड़ को उठाकर यहीं लाकर पटक दे।’’ बौने की डिमाँड पर सैफ ने हुक्म दे दिया।
‘‘माफ कीजिए ये खादिम की क्षमता से बाहर का हुक्म है।’’ बौना फिर सर झुकाकर बोला।
‘‘बोल तो ऐसे रहा था जैसे अलादीन के चराग के जिन का बड़ा भाई है तू। अच्छा छोटा सा काम कर दे। मेरा सर बहुत दर्द कर रहा है। चल दबा दे।’’
‘‘माफ कीजिए ये खादिम की क्षमता से बाहर का हुक्म है।’’ बौने ने अपना डायलाग हूबहू पहले की तरह से दोहरा दिया।
‘‘तो फिर हमें ऐसे नालायक खादिम की कोई ज़रूरत नहीं। भाग जा यहाँ से।’’
‘‘माफ कीजिए ये खादिम की क्षमता से बाहर का हुक्म है।’’ इसबार वाकई सैफ का दिल चाहा कि वहीं पड़ी ईंट उठाकर अपने सर पर मार ले। उसने खून का बड़ा सा घूंट अपनी हलक के नीचे उतारा और गोल्डी की तरफ घूम गया।
‘‘यार गोल्डी, तेरा बाप यकीनन बहुत बड़ा बेवकूफ था।’’ सैफ ने उसे छेड़ा।
गोल्डी ने उसे व्यंगात्मक भाव से देखा, ‘‘हां था तो। तेरी बात का बुरा नहीं मानूंगा। बेवकूफ न होता तो तेरी खाल में भूसा भरवाकर अपने महल में लटका चुका होता।’’
‘‘अरे नहीं। इस नाकामी की ज़िम्मेदार तो तेरी बेवकूफी है। मैंने उसे बेवकूफ इसलिए कहा कि जहाँ पर सोने का इतना बड़ा पहाड़ मौजूद हैं वहां तेरे बाप को ज़रा सा खज़ाना छुपाने की ज़रूरत क्या थी।’’
‘‘ज़रूरत थी। मैं नहीं जानता ये इतना बड़ा पहाड़ कहां से आ गया। क्योंकि जब डैड यहां काम कर रहे थे तो इस विशाल पहाड़ का नामोनिशान नहीं था।’’
‘‘क्या?’’ हैरत से सैफ का मुंह खुल गया।
‘‘नामुमकिन।’’ बामर बड़बड़ाया, ‘‘इस तरह का पहाड़ बनने में हज़ारों लाखो साल लग जाते हैं। क्या यहां कोई जादूगर पाया जाता है जिसने छूमंतर कहकर ये पहाड़ पैदा कर दिया?’’
‘‘पता नहीं। मैं तो पहली बार ही इसे देख रहा हूं। जबकि इस जगह का चप्पा चप्पा हमारा छाना हुआ है।’’ गोल्डी कंधे उचकाकर सर खुजलाने लगा।
‘‘इस जगह अजीबोगरीब घटनायें घट रही हैं।’’ महावीर बीच में बोला, ‘‘अब यही देखो सैफ, तुम्हारी भूतपूर्व अम्माजान अभी तक उस झाड़ी तक नहीं पहुंच सकी हैं। फूलों को तोड़ने के लिये।’’
‘‘अरे!’’ सैफ के साथ साथ वहां मौजूद सभी हैरत में पड़ गये। क्योंकि जिस रफ्तार से नताशा उन झाड़ियों की तरफ बढ़ी थी उससे तो अबतक उसे उनसे भी आगे निकल जाना चाहिए था। ऐसा मालूम होता था कि वह कदम आगे बढ़ा रही है और नीचे की ज़मीन पीछे की तरफ खिसक रही है किसी ट्रेडमिल की तरह।
‘‘नताशा तुम आगे की तरफ क्यों नहीं बढ़ रही हो?’’ बामर ने पुकारा।
‘‘जा तो रही हूं। लेकिन आखिर मैं उन फूलों तक क्यों नहीं पहुंच पा रही?’’ नताशा की भी हैरत से भरी आवाज़ आयी।
‘‘क्या वडाली की संगत में रहकर अम्माजान का दिमाग पलट गया है?’’ सैफ बड़बड़ाया।
उसी वक्त वडाली की दहशतभरी आवाज़ ने उनका ध्यान अपनी तरफ खींच लिया, ‘‘ब...बचाओ मुझे।’’
‘‘अब तुझे क्या हुआ?’’ सैफ ने पूछा।
‘‘म...मैं गिरने वाला हूं। कोई मुझे आकर थाम लो प्लीज़। वरना खाई में गिरकर मेरी हड्डियों का सुरमा बन जायेगा।’’ वडाली फिर रोहांसी आवाज़ में बोला। उन्होंने देखा वडाली एक जगह जाकर रुक गया था और कुछ इस तरह से अपने जिस्म को हरकत दे रहा था जैसे किसी बहुत पतले रास्ते पर अपने को बैलेंस कर रहा हो।
‘‘चिपरेलीन की आखिरी बोतल तो टूट गयी थी फिर इसे इतना नशा कैसे हो गया?’’ सैफ डा0बामर की ओर घूमा।
‘‘म...मैं क्या बताऊं।’’ डा0बामर भी हक्का बक्का था।
‘‘कमबख्तों क्या तुम लोग बहरे हो गये हो? मेरी फरियाद सुनाई नहीं देती।’’ वडाली फिर चीखा।
‘‘अरे लेकिन तू तो समतल ज़मीन पर खड़ा है। किधर से गिर जायेगा?’’ बामर भी चीखा।
‘‘तुम सब अंधे हो गये हो क्या? दिखाई नहीं देता।’’ वडाली भी चीखा, ‘‘मैं एक बहुत पतले रास्ते पर चल रहा हूं जिसके दोनों तरफ गहरी खाई है। अरे कोई तो मुझे बचा लो।’’ वह लगभग रो देने वाली आवाज़ में कह रहा था।
‘‘मुझे पक्का यकीन है कि खज़ाना न मिलने की मायूसी ने इसका दिमाग पलट दिया है।’’ बामर ने ख्याल ज़ाहिर किया।
-----
पूरी कहानी पढ़ने लिए निम्न लिंक या इमेज पर क्लिक करें 

Monday, May 31, 2021

वैज्ञानिक राजकुमारी

 एक तेज़ फुफकार ने उसे ठिठकने पर विवश कर दिया।


हालाँकि इस घने जंगल में इस प्रकार की फुफकार अप्रत्याशित नहीं थी। किन्तु यह आवाज़ ठीक सामने से आयी थी। और यह निश्चित था कि सामने स्थित घनी झाड़ियों के दूसरी ओर खतरनाक जीव मौजूद है।
उसका नाम सिकंदर था। एक आयुर्वैदिक डाक्टर जिसे जड़ी बूटियों की तलाश यहाँ इस जंगल में ले आयी थी। वह जड़ी बूटियों का विशेषज्ञ था। और स्वयं चिर युवा रहने का नुस्खा जानता था। यही कारण था कि पचास वर्ष की आयु होने पर भी पच्चीस वर्ष से अधिक का दिखायी नहीं पड़ता था। उसका स्वास्थ्य दुश्मनों में ईर्ष्या का विषय था। इस समय दस घन्टों की लगातार मेहनत भी उसके चेहरे पर एक शिकन भी नहीं ला पायी थी।

उसने सावधानी से रास्ता बदला। और जब वह धने झुरमुट को पार करके दूसरी ओर पहुँचा तो यहाँ वह अजीब जीव मौजूद था जिसकी फुफकार वह इतनी देर से सुन रहा था। अजीब इन अर्थों में था कि उसने इस प्रकार का जीव अपने जीवन में पहली बार देखा था। एक दैत्याकार छिपकली नुमा जीव जो आकार में किसी चीते के बराबर था। रह रहकर उसके मुँह से फुफकार के साथ सफेद रंग की भाप निकल रही थी।
अभी वह जीव को देखकर आश्चर्य के सागर में गोते लगा ही रहा था कि वह जीव एकाएक उसकी ओर घूम गया। लगा, मानो जीव को उसकी उपस्थिति का आभास हो गया है। इससे पहले कि सिकंदर अपने बचाव का कोई उपाय करता, एक तीव्र फुफकार के साथ जीव के मुँह से निकलने वाली भाप उसके चेहरे से टकराई और  उसका सर तेज़ी से चकराने लगा। दूसरे ही पल वह चेतनाशून्य हो चुका था।
-----

जब उसे होश आया तो एक नर्म बिस्तर उसके शरीर को आराम पहुँचा रहा था।  किन्तु यह बिस्तर आधुनिक न होकर किसी नर्म घास की चटाई थी। वह आँखें मलता हुआ उठ बैठा। जब उसने माहौल का अवलोकन किया तो मन यही चाहा कि दोबारा बेहोश हो जाये। कमरे में थोड़ी ही दूर बैठी वह युवती इतनी ही खूबसूरत थी कि बड़े से बड़ा मानव अपने होश खो बैठता। किन्तु उस युवती से अधिक आश्चर्य जनक उस अनोखे जीव की उसकी बगल में उपस्थिति थी जिसके सर पर वह युवती हौले हौले हाथ फेर रही थी।
‘‘आप कौन हैं ? और यह सब क्या है ? मैं कहाँ हूँ ? सिकन्दर के मुँह से जब बोल फूटे तो बहुत से प्रश्नों में एक साथ परिवर्तित हो चुके थे।’’
 ‘‘तुम इस समय मेरे महल में हो और तुम्हें लाने वाला मेरा यह इकलौता दोस्त है।’’ युवती की आवाज़ भी उसके वाह्य सौन्दर्य की तरह खूबसूरत थी।
‘‘मैं इस तिलिस्मी वातावरण को किसी भी तरह नहीं समझ पा रहा हूँ। आखिर यह सब क्या है ?’’ सिकन्दर के चेहरे से उलझन साफ पढ़ी जा सकती थी।
‘‘अभी तुम्हें सब मालूम हो जायेगा। मेरा नाम सोफिया है। अफ्रीका के इस घने जंगल में तुम्हारे आने से पहले मैं एकमात्र मनुष्य थी।’’
‘‘लेकिन तुम इस जंगल में कहाँ से आयी हो ? यहाँ आने का कारण क्या है ?’’
‘‘मैं इस जंगल में कहाँ से आयी, यह मुझे अब याद नहीं। यहाँ मैं अपने बाप के साथ आयी थी। मेरा बाप बहुत बड़ा वैज्ञानिक था। एक प्रोजेक्ट पर कार्य करने के लिये यहाँ आया था, उस समय मेरा बचपन था। फिर धीरे धीरे वर्ष बीतते गये और वह प्रोजेक्ट चलता रहा। मेरे बाप ने मुझे भी वैज्ञानिक बनाकर उस प्रोजेक्ट पर लगा दिया। अब मेरे बाप की मृत्यु हो चुकी है लेकिन यहाँ एक गुप्त लैब में उस लम्बे प्रोजेक्ट पर कार्य चल है जिसे केवल मेरे हाथ अंजाम दे रहे हैं।’’

‘‘ऐसा कौन सा प्रोजेक्ट है जिसने तुम्हें अकेले इस वीरान जगह में जीवन व्यतीत करने पर मजबूर कर दिया है।’’ सिकंदर ने पूछा।
‘‘मेरे साथ आओ, मैं तुम्हें दिखाती हूँ।’’ सोफिया ने उठते हुये कहा।
सिकंदर सोच भी नही सकता था कि ऊपर से छोटी सी झोपड़ीनुमा दिखने वाली यह इमारत अंदर से इतनी विशाल और आधुनिक होगी। सोफिया ने केवल बटन दबाया था और झोपड़ी के फर्श का एक भाग किसी दरवाज़े की तरह खुल गया था। उन्होंने वहाँ बनी सीढ़ियों से नीचे कदम रखा और जब उस तहखाने में पहुँचे तो सिकंदर को महसूस हुआ कि वह किसी साइंस फिक्शन फिल्म के दृश्य का भाग बन गया हो । हर तरफ रखी विभिन्न प्रकार की भारी भरकम मशीनें तारों के जाल द्वारा एक दूसरे से जुड़ी हुई थीं।
‘‘माई गॉड, मैं तो सोच भी नहीं सकता था कि इस वीराने में इतनी आधुनिक प्रयोगशाला होगी। सिकन्दर ने चारों ओर दृष्टि घुमाई।
‘‘ अब मैं अपने प्रोजेक्ट के बारे में बता रही हूँ । क्या तुम ऐसी मशीन की कल्पना कर सकते हो जो अपनी तरंगों द्वारा किसी जानवर के मस्तिष्क को प्रभावित कर दे और वह जानवर उन तरंगों के सम्मोहन में बधां हुआ किसी पालतू पशु की तरह हर आज्ञा का पालन करता हुआ उस मशीन के मालिक तक पहुँच जाये।’’
‘‘मुझे तो यह असंभव लगता है।’’
‘‘विज्ञान की दुनिया में असंभव कुछ नहीं। यह देखो, यह रही वह मशीन।’’ सोफिया ने सामने की ओर संकेत किया जहाँ एक विशालकाय मशीन दिखायी पड़ रही थी।
‘‘इस मशीन द्वारा किसी भी जानवर को विशेष प्रकार की तरंगों द्वारा वश में किया जा सकता है। ’’
‘‘तो क्या वह अजीब सा जीव .....!’’
उसका नाम मैगना है। वह एक अद्भुद जीव है जो अपने मुँह से निकलने वाली फुफकार से किसी को भी बेहोश कर सकता है। मैंने इन्हीं मशीनों की सहायता से उसे अपना पालतू बना लिया है।’’
‘‘अद्भुत ! आश्चर्यजनक। कहीं मैं कोई तिलस्मी कहानी तो नहीं पढ़ रहा हूँ। और तुम उस तिलिस्मी कहानी की राजकुमारी हो।’’
‘‘हाँ। मैं राजकुमारी हूँ। लेकिन तिलिस्मी कहानी की न होकर इस वैज्ञानिक दुनिया की राजकुमारी हूँ।
‘‘और राजकुमार कौन है इस राज्य का ?’’
‘‘जल्दी ही तुम्हें मालूम हो जायेगा।’’ उसके शब्द सिकंदर को विस्मित कर गये क्योंकि इससे पहले सोफिया कह चुकी थी कि वह इस स्थान पर एकमात्र मनुष्य है।
-----

रात का न जाने कौन सा पहर था जब एकाएक सिकंदर की आँख खुल गयी। मस्तिष्क में विभिन्न विचारों की उथल पथल के कारण बहुत देर से उसे नींद आयी थी। इसलिये एकाएक इस प्रकार आंख खुलना अप्रत्याशित था। किसी विशेष कारण से उसकी नींद उचटी थी।
और फिर उसे वह कारण दिख गया। कोई साया था जो उसके सिरहाने बैठा हुआ था।
‘‘कौन हो तुम ?’’ सिकंदर ने जल्दी से उठने की कोशिश की।
‘‘मैं हूँ।’’ यह आवाज़ सोफिया की थी।
‘‘तुम! लेकिन तुम इस समय यहाँ क्या कर रही हो ?’’ सिकंदर चौंक पड़ा।
‘‘आज तुमने पूछा था कि इस वैज्ञानिक दुनिया का राजकुमार कौन है। मैं तुम्हारे प्रश्न का उत्तर देने आयी हूँ।’’
‘‘लेकिन इस समय! यह उत्तर तो कल भी दिया जा सकता है।’’
‘‘इस उत्तर के लिये यही घड़ी सबसे उपयुक्त है।’’ सोफिया ने कहा।
‘‘अब तो मैं इसे सुनने के लिये बहुत अधिक उत्सुक हो गया हूँ।’’
सिकंदर अब उठ कर बैठ चुका था।
‘‘इस दुनिया के राजकुमार तुम हो सिकंदर। मैंने अपने पति के रूप में तुम्हें चुन लिया है।’’ सोफिया के वाक्यों ने मानो वहाँ धमाका किया।
‘‘यह तुम क्या कह रही हो? कहाँ तुम जैसी उच्च कोटि की वैज्ञानिक और कहाँ मैं एक मामूली आयुर्वेदिक डाक्टर।’’
लेकिन तुम मेरे लिये महत्वपूर्ण हो। क्योंकि प्यार छोटा बड़ा नहीं देखता। मैंने तुम्हें उसी समय पसन्द कर लिया था जब तुम जड़ी बूटियों की तलाश में इस क्षेत्र में पहुँचे थे। फिर अपने पालतू जानवर मैगना को भेजा तुम्हें लाने के लिये।’’
‘‘सोफिया, हालाँकि मैंने अभी शादी नहीं की है किन्तु मेरी आयु तुम से बहुत ज़्यादा है। मैं पचास वर्ष पूरे कर चुका हूँ जबकि तुम्हारी आयु मुश्किल से बीस के आसपास है। फिर कैसे हमारा तुम्हारा जोड़ बैठ सकता है?’’
‘‘तुमने मेरे बारे में, मेरी आयु के बारे में गलत अनुमान लगाया है। मैं तुम्हें विश्वास दिलाती हूँ कि आयु हमारे बीच रूकावट नहीं बनेगी।
सिकंदर के लिये यह अत्यन्त हर्षमिश्रित आश्चर्य था कि एक ऐसी युवती उसके प्रेम पाश में बंध गयी थी जो न केवल सुंदर थी बल्कि उच्चकोटि की वैज्ञानिक भी थी। कोई कारण नहीं था कि वह उसके निमन्त्रण को अस्वीकार कर देता।
-----

फिर उस सुनसान स्थान पर सिकंदर को सोफिया के साथ रहते हुये तीन माह बीत गये। अब तक वह प्रयोगशाला और यहाँ की मशीनों के बारे में लगभग सम्पूर्ण जानकारी हासिल कर चुका था। किन्तु अभी भी एक रहस्य ऐसा था जिसके पर्दे उसके सामने से नहीं हटे थे। वह रहस्य था प्रयोगशाला से सटा एक कमरा जो सदैव बन्द रहता था।
कई बार सिकंदर ने सोफिया से उस कमरे के बारे में पूछा किन्तु सोफिया ने न केवल बताने से मना कर दिया था बल्कि सख्ती से उसे कमरे के खोलने की मनाही कर दी थी।
किन्तु मानव मन का स्वभाव है कि जिस कार्य से उसे रोका जाता है उसी को करने में सबसे अधिक उतावला रहता है। सिकंदर की खोजी प्रकृति उसे कमरा खोलने के लिये उकसाती रहती थी।
फिर एक दिन उसे अवसर मिल गया।
उस दिन सोफिया अपने पालतू मैगना के साथ प्रयोगशाला से दूर निकल गयी थी और सिकंदर को मालूम था कि उसकी वापसी दो घंटे से पहले नहीं होगी।
सिकंदर ने सोफिया के कमरे की तलाशी ली और जल्द ही उसे वह रिमोट मिल गया जो विभिन्न कमरों के लॅाक खोलने और बन्द करने के लिये प्रयुक्त किया जाता था। रिमोट लेकर वह उस बन्द कमरे के पास पहुँचा और रिमोट का स्विच दबा दिया।
कमरा खुलते ही वह अन्दर दाखिल हो गया।
कमरे में ऐसी कोई वस्तु मौजूद नहीं थी जो रहस्यपूर्ण कही जा सकती। केवल कमरे के बीचोंबीच एक टी.वी. रखा हुआ था। इसके अतिरिक्त सामने दीवार पर एक बूढ़ी औरत की पुरानी पेंटिंग लटक रही थी जो शायद सोफिया की माँ थी।
‘‘फिर आखिर सोफिया ने उसे इस कमरे में आने से क्यों मना किया है?’’ कुछ देर इसी उधेड़बुन में खड़ा रहा। फिर आगे बढ़कर टी.वी. ऑन कर दिया।
उसे स्क्रीन पर सोफिया दिखायी दी। उसने देखा कि सोफिया के बाल धीरे सफेद हो रहे हैं, चेहरे पर झुर्रियां पड़ रही हैं। फिर यह झुर्रियां धीरे बढ़ती गयी। और लगभग दस मिनट बाद स्क्रीन पर सोफिया के बजाय एक बहुत बूढ़ी औरत दिखाई पड़ रही थी। उसने चौंक कर दीवार पर टंगा चित्र देखा, जिसका चेहरा स्क्रीन पर दिखने वाले चेहरे से पूर्णतः मेल खा रहा था।
उसी समय उसे पीछे से एक आवाज़ सुनाई दी, ‘‘यह तुमने क्या किया सिकंदर!’’
वह चौंककर पीछे की ओर घूमा और आश्चर्यचकित रह गया। स्क्रीन पर दिखने वाली औरत सशरीर उसके पीछे खड़ी थी। और उसकी बगल में मैगना खड़ा था।
‘‘आप कौन हैं ?’’ उसके मुँह से प्रश्नात्मक स्वर फूटा।
‘‘मैं सोफिया हूँ। लेकिन अब तुम मुझे नहीं पहचान पाओगे। मैंने तुम्हें इस कमरे में आने से मना किया था लेकिन तुमने मेरी बात नहीं मानी।
‘‘सोफिया ! तुम! तुम्हारी यह हालत कैसे हुई ?’’ सिकंदर आतुरता से उसकी ओर बढ़ा।।
‘‘अब तो मुझे सब कुछ बताना पड़ेगा।’’ सोफिया एक कुर्सी पर बैठते हुये बोली, ‘‘मैंने तुमसे एक बार कहा था कि तुमने मेरी आयु के बारे में गलत अनुमान लगाया है।’’
‘‘हाँ। कहा तो था।’’
‘‘तुम विश्वास नहीं करोगे लेकिन यह वास्तविकता है कि मेरी आयु इस समय एक सौ बीस वर्ष है। और यह सामने टंगी तस्वीर मेरी ही है, आज से दस साल पहले की।’’
सिकंदर की पलकों ने मानो झपकना छोड़ दिया और वह सोफिया को एकटक देखने लगा। सोफिया ने कहना जारी रखा, ‘‘यह टी0 वी0 नुमा मशीन मेरा एक अनोखा आविष्कार है जो किसी भी व्यक्ति का यौवन लौटा सकती है। आज से दस वर्ष पहले मेरी चालीस वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद यह तैयार हुई थी। इसका पहला प्रयोग मैंने अपने ऊपर किया था जो पूरी तरह सफल रहा। और मैं पच्चीस वर्ष की युवती में परिवर्तित हो गयी।’’ सोफिया एक पल को रूकी।

‘‘यह अनोखी मशीन कार्य कैसे करती है ?’’
‘‘वास्तव में बुढ़ापा शरीर की कोशिकाओें के कमज़ोर पड़ जाने के कारण आता है। मेरी यह मशीन विशेष प्रकार की रेडियोएक्टिव किरणों के द्वारा ऐसी कोशिकाओं को पुनः शक्तिशाली बना देती है और यह शक्तिशाली कोशिकाएं व्यक्ति को यौवन की ओर लौटा देतीं हैं। लेकिन शायद मेरे भाग्य में चिरयुवा होना नहीं  लिखा था। इसीलिये तुम इस मशीन तक पहुँच गये।’’
‘‘लेकिन इस मशीन के ऑन करने का तुम पर बुरा प्रभाव क्यों पड़ा ? जबकि यह मशीन यौवन की ओर ले जाती है।’’
‘‘जो बटन तुमने दबाया, वह मशीन को ऑन नहीं करता बल्कि मशीन से निकलने वाली रेडियोएक्टिव शक्ति की सप्लाई रोक देता है। जैसे ही यह सप्लाई मेरी कोशिकाओं को मिलना बन्द हुई, मेरी कोशिकाएं पूर्व रूप में  आने लगीं और कुछ ही पलों में मैं अपना यौवन खो चुकी थी।’’
‘‘इस समय अब तुम पहले वाली अवस्था में लौट चुकी हो। तो क्यों न मैं इस मशीन को पुनः ऑन करके तुम्हें फिर युवा दूँ ?’’ सिकंदर ने पूछा।
‘‘ऐसा सम्भव नहीं है। क्योंकि इस मशीन द्वारा जो कोशिकाएं शक्तिशाली बनने के बाद पुनः कमज़ोर हो गयी हैं उन्हें दोबारा शक्ति देने पर वे नष्ट हो जायेंगी और फिर मेरी मृत्यु हो जायेगी।’’
‘‘ओह ! तो ये बात है। यानि अब तुम्हें इसी रूप में जीवित रहना होगा।’’ सिकंदर ने एक ठंडी सांस ली।
‘‘हाँ ! अब तुम पच्चीस वर्ष की सोफिया को भूल जाओ और वापस अपनी दुनिया में लौट जाओ। मेरे भाग्य में अकेलापन ही लिखा हुआ है। मैंने किसी से प्रेम करने में भी बहुत देर कर दी। इसी की सज़ा शायद मुझे मिली है। उफ इतनी देर बातें करने के बाद कमज़ोरी महसूस होने लगी है। शायद मैं बेहोश हो जाऊँ।’’ सोफिया की आँखें धीरे धीरे बन्द होने लगीं।
‘‘नहीं सोफिया, मैं तुम्हें छोड़कर कहीं नहीं जाऊँगा। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। वह प्यार जो केवल दो शरीरों का मिलन नहीं है बल्कि दो दिलों का मिलन है। मैं यहीं रहूँगा तुम्हारा सहारा बनकर।’’ सिकंदर ने बेहोश होती सोफिया को बाहों में लेकर कहा।
सोफिया ने सिकंदर की आवाज़ पर आँखें खोली। उसे सिकंदर की आँखों में आँसू दिखायी पड़ रहें थे। उसने धीरे से हाथ उठाकर उसकी आँखों से आँसू पांछे और फिर बेहोशी की गहरी गर्त में पहुँच गयी।
सिकंदर उसे सोफे पर लिटाकर उठा। वह उसे फिर से होश में लाने के लिये पानी की तलाश में जा रहा था।

---समाप्त --
मासिक 'विज्ञान' के सितम्बर 1999 अंक में प्रथम बार प्रकाशित