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Tuesday, October 7, 2014

एथलीट : कहानी (पांचवां अन्तिम भाग)

‘‘इंसानी रोबोट बनाने का उद्देश्य क्या है? क्या मशीनी रोबोटों से काम नहीं चल सकता ?’’
‘‘बात यह है कि मशीन चाहे जितनी डेवलप कर ली जाये, वह हर हाल में इंसान से कमतर होगी। मशीन से काम करने के लिये उसे एक पूरा प्रोग्राम बनाकर देना पड़ता है। जबकि इंसान को केवल हुक्म देना होगा और वह स्वयं उस काम को अपनी अक्ल से पूरा कर देगा।’’

‘‘कार्ल को ओलंपिक में शामिल करने का क्या उद्देश्य था ?’’
‘‘केवल पब्लिसिटी और इंसानी रोबोट की क्षमता को परखना। जब हमारा उद्देश्य पूरा हो गया तो कार्ल को ब्रेन कण्ट्रोल डिवाइस की मदद से वापस बुला लिया गया।’’

‘‘आपका प्रोग्राम काफी अच्छा है। लेकिन इसके लिये कच्चा माल यानि बच्चे कहाँ से मिलेंगे ?’’

‘‘तीसरी दुनिया के  देश हमें ये सप्लाईं देंगे, जहाँ आज भी अकाल और भुखमरी का प्रकोप छाया रहता है। वहाँ से हम सस्ते दामों में बच्चे खरीदेंगे और उन्हें इंसानी रोबोट बनाकर मंहगे दामों में अमीर देशों को बेचेंगे। इस प्रकार अमेरिका को दो तरफा लाभ होगा। एक तो वह और अमीर बनेगा दूसरे उसकी पकड़ दूसरे देशों पर मज़बूत होगी।’’

‘‘लेकिन इसका विरोध क्या खुद अमेरिकावासी नहीं करेंगे? बहरहाल यह एक अमानवीय कार्य होगा।’’
‘‘जब देश की इकोनोमी इस काम से मज़बूत होगी तो विरोध के सारे स्वर दब जायेंगे। चाहे वह देश के भीतर से उठें या बाहर से।’’ मारिस स्टीफन ने उंगली से हवा में डालर का निशान बनाया था।

‘‘बहरहाल मेरे लिये विरोध की कोई वजह नहीं बनती। भगवान करे वह दिन जल्द आये जब आपका प्रयोग पूरी तरह कामयाब हो।’’ उसके बाद आर्थर ने मारिस से विदा ली। वह सोच रहा था कि अब नाकामी की फाइनल रिपोर्ट लगाकर कार्ल की फाइल बन्द कर देगा।
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अचानक कमरे का दरवाज़ा खुला और मारिस चौंक कर उसकी ओर देखने लगा। दरवाज़े से कार्ल जोहान्स अन्दर आ रहा था।
‘‘क्या बात है कार्ल ?’’ मारिस ने पूछा।

‘‘बात ये है कि मैंने तुम लोगों की सारी बातचीत सुन ली है। मुझे तुम्हारी और तुम्हारी संस्था की घिनौनी साजिश के बारे में सब कुछ मालूम हो चुका है।’’ गुस्से के कारण कार्ल का मुँह लाल हो रहा था।

‘‘तो तुमने ये भी सुना होगा कि मेरे हाथ में जो डिवाइस है वह तुम्हारे दिमाग का रिमोट कन्ट्रोल है। इसी के बल पर मैंने तुम्हें खेल गाँव से यहाँ आने पर मजबूर कर दिया। और इस समय भी इसका लाल बटन दबा कर तुम्हें भयंकर सिर दर्द में मुब्तिला कर सकता हूँ जो तुम्हें मेरा कहा मानने पर मजबूर कर देता है।’’

‘‘तो फिर दबाओ लाल बटन।’’ कार्ल व्यंग्य से बोला। 
मारिस ने लाल बटन दबाया लेकिन कार्ल पर कोई असर नहीं हुआ। 

‘‘बेकार है मि0 मारिस। यह रिमोट उसी समय काम कर रहा था जब तुमने मुझे ओलंपिक गाँव से बुलाया था। तुमने इंसानी रोबोट तो बना लिया लेकिन उसकी शक्ति के बारे में गलत अनुमान लगाया। तुमने उसकी शारीरिक शक्ति तो देख ली, लेकिन उसकी मानसिक शक्ति कितनी बढ़ गयी ये तुम नहीं देख पाये। वास्तव में मनुष्य को मशीन की तरह शक्तिशाली बनाने वाले जीन उसके दिमाग को भी हज़ारों गुना शक्तिशाली बना देते हैं। इसलिये मुझ में विशेषता आ गयी कि किसी भी मशीन की बनावट देखकर उसकी पूरी मशीनरी और वर्किंग सिस्टम समझ जाता हूँ। इस समय पूरी लैबोरेट्री मेरे कण्ट्रोल में है। मैं केवल तुम्हारा उद्देश्य जानना चाहता था वरना कभी का तुम पर हाथ डाल चुका होता।’’

मारिस ने खतरा जानकर गार्ड रोबोटों को बुलाना चाहा। कार्ल ने यह भांपकर कहा,‘‘बेकार है मि0 मारिस स्टीफन। पहले मेरी पूरी बात सुन लो।’’ कहते हुये उसने अपनी जेब से एक यन्त्र निकाला जो हू-ब-हू मारिस के यन्त्र जैसा था।

‘‘यह क्या है ?’’ मारिस के चेहरे पर घबराहट के कारण पसीना आ गया था।

‘‘तुम्हें तो मालूम होगा कि इसे ब्रेन कण्ट्रोल डिवाइस कहते है। इसका काला बटन दबाने पर दिमाग बम की फट जाता है और लाल बटन दबाने पर यह होता है।’’ कहते हुये कार्ल ने लाल बटन दबा दिया। मारिस का चेहरा तेज़ दर्द के कारण बिगड़ गया। वह चीख उठा,‘‘इसे बन्द करो।’’
कार्ल ने बटन आफ कर दिया।

‘‘त......तुमने मेरा दिमाग कण्ट्रोल करने का यन्त्र कैसे बना लिया ?’’ मारिस ने हाँफते हुये आश्चर्य से पूछा।

‘‘उसी तरह जिस तरह अपना ब्रेन कण्ट्रोल का यन्त्र मैंने बेकार किया। एक दिन रात के समय जब तुम सो रहे थे तुम्हें बेहोश करके सबसे पहले अपने दिमाग को कण्ट्रोल करने का यन्त्र मैंने बेकार किया फिर तुम्हें उस मशीन तक ले गया जो किसी भी मनुष्य का छोटा सा आपरेशन करके उसके दिमाग में इस यन्त्र का रिसीवर फिट कर देती है और साथ ही साथ इस यन्त्र को भी बना देती हैं यह मेरे लिये कुछ मुश्किल नहीं था क्योंकि यहाँ के पहरेदार रोबोटों को मैं पहले ही सर्किट बदल कर अपनी ओर कर चुका था। इस काम में मेरे हाई पावर दिमाग ने काफी साथ दिया। इस तरह अब तुम मेरे कण्ट्रोल में हो।’’ कार्ल के चेहरे पर विजय की मुस्कान थी।

‘‘तो अब तुम क्या चाहते हो ?’’

‘‘अब मैं चाहता हूँ कि दुनिया पर मंडराता खतरा मिटा दूँ। वैसे तुमने मेरी प्लास्टिक सर्जरी करके मेरे रास्ते की बहुत सी बाधायें दूर कर दी हैं। अब मैं किसी भी देश में नये नाम, नये चेहरे के साथ रह सकता हूँ। एक राज़ की बात और बता दूँ कि मोण्टेगामा, जिसे तुम सी.आई.ए. का एजेन्ट समझते हो, वास्तविकता में अर्जेण्टीना की सीक्रेट सर्विस का चीफ है और उसने मुझे अपना दाहिना हाथ बना लिया है।’’

‘‘क्या!’’ मारिस को आश्चर्य का एक और झटका लगा। फिर वह कार्ल का इरादा भांपकर उसकी ओर झपटा लेकिन तब तक देर हो चुकी थी और कार्ल ने ब्रेन कण्ट्रोल डिवाइस का काला बटन दबा दिया था। एक हल्के धमाके के साथ मारिस के सर के चिथड़े उड़ गये। 
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अगले दिन कार्ल ने यह खबर दिलचस्पी के साथ पढ़ी कि अमेरिका की एनेटाॅमी की एक बड़ी लैबोरेट्री ज़बरदस्त धमाके के साथ तबाह हो गयी और उसमें काम करने वाले समस्त व्यक्ति जिनमें अमेरिका के प्रसिद्ध साइंटिस्ट मारिस स्टीफन भी थे, दब कर मर गये। मामले की छानबीन की जा रही है कि इस तबाही के पीछे किसका हाथ हो सकता है। इस खबर में कार्ल का कहीं नाम न था इसका अर्थ था कि उस एक्सपेरीमेन्ट को करने वाली गुप्त संस्था इस मामले को राज़ में रखना चाहती है।

इस समय कार्ल लास एंजिलिस के एक होटल में मोण्टेगामा के एजेंट की प्रतीक्षा कर रहा था। जो उसका पासपोर्ट एवं वीज़ा लेकर आने वाला था। मारिस ने प्लास्टिक सर्जरी करके उसका चेहरा बदल दिया था इसलिये अब पहचान लिये जाने का भी खतरा नहीं था।

उसका अपने माँ बाप से मिलने का कोई इरादा नहीं था जिन्होंने उसे किसी जानवर की तरह बेच दिया था। मोण्टेगामा एक वर्ष में उसका गहरा दोस्त बन गया था। उसने आफर दी थी कि वह उसके सर्कस का मैनेजर बन जाये और छिपे रूप में अर्जेण्टीना की सीक्रेट सर्विस के लिये काम करे। कार्ल ने उसका यह आफर मंज़ूर कर लिया था। 

कार्ल ने घंटी बजाकर वेटर से काफी लाने के लिये कहा और अपने भविष्य के बारे में सोचने लगा।
--समाप्त--
लेखक : ज़ीशान हैदर ज़ैदी 

यह कहानी 'इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिये' के ताज़ा अंक अक्टूबर 2014 में प्रकाशित हुई है  

Monday, October 6, 2014

एथलीट : कहानी (भाग 4)

जब आर्थर लास एंजिलिस के एयरपोर्ट पर उतरा तो सोच रहा था कि क्या इस केस में चक्कर लगाने पड़ेंगे। क्योंकि लास एंजिलिस से इसकी शुरूआत हुई थी और दो देशों में घूमने के पश्चात फिर वापस आना पड़ा था।

हवाई अडडे से वह सीधे आफिस पहुॅंचा और वहीं उसने टेलीफोन डायरेक्ट्री मंगवा ली। और फिर उसमें बाब द्वारा बताये गये नंबर का पता देखकर उसकी आँखें फटी रह गयीं। यह पता अमेरिका की सबसे बड़ी एनेटामी लैब का था। फिर जब उसने शुरू से आखिर तक की कड़ियाँ मिलायीं तो काफी कुछ साफ हो गया।

‘‘तो इसका मतलब कि इस साजिश के पीछे इसी लैब का कोई साइंटिस्ट है। और कार्ल इसी लैब के प्रयोगों की उपज है। क्योंकि कोई भी इंसान इतनी शक्ति हासिल नहीं कर सकता जितनी कार्ल में थी।"

वह लैबोरेट्री के इंचार्ज मारिस स्टीफन से मिलने चल दिया। मारिस इस समय प्रयोगशाला में मिला।
‘‘आईए मि0 आर्थर।’’ मारिस ने उसे देखकर कहा।
‘‘मि0 मारिस आप मेरा नाम कैसे जानते हैं?’’

‘‘लास एंजिलिस में कौन ऐसा होगा जो तुम्हारा नाम नहीं जानता। बड़े बड़े केस तो तुमने हल किये हैं।’’
‘‘मशहूर तो आप भी बहुत हैं और अमेरिका के चोटी के वैज्ञानिकों में गिने जाते हैं। मैं इस समय एक केस के सम्बन्ध में आया हूँ।’’

‘‘कहिये।’’

‘‘क्या आपको मालूम है कि इस लैबोरेट्री में आपकी नाक के नीचे एक साजिश रची जा रही है और इसका सम्बन्ध मशहूर एथलीट कार्ल जोहान्स से है।’’ आर्थर को विश्वास था कि यह सुनकर मारिस आश्चर्यचकित रह जायेगा लेकिन मारिस पर कोई असर नहीं हुआ। उसने कहा,

‘‘मुझे इस बात की पूरी जानकारी है।’’

अब आश्चर्यचकित होने की बारी आर्थर की थी। उसने कहा, ‘‘फिर आपने इसे रोकने की कोशिश क्यों नहीं की?’’

‘‘इसलिए क्योंकि इस साजिश का कर्ता धर्ता मैं ही हूँ।’’ मारिस ने रहस्योद्घाटन किया।

यह सुनकर आर्थर खड़ा हो गया और अपना रिवाल्वर निकालकर मारिस पर तान दिया, ‘‘अगर ऐसी बात है तो कार्ल के अपहरण की साजिश में मैं तुम्हें गिरफ्तार करता हूँ।’’

‘‘बैठ जाओ आर्थर।’’ मारिस के इत्मिनान में कोई फर्क नहीं पड़ा था, ‘‘जब तुम मोण्टेगामा तक पहुँच गये तो मैं समझ गया था कि उस पर नजर रखकर तुम यहाँ तक जरूर आ जाओगे। वैसे मैं इस समय भी अमेरिका के लिए काम कर रहा हूँ। ये अलग बात है कि खुद अमेरिका को इस बारे में जानकारी नहीं।’’

‘‘लेकिन कार्ल के अपहरण से अमेरिका को क्या फायदा होगा?इसमें उसकी बदनामी हो रही है।’’ आर्थर फिर बैठ गया था लेकिन रिवाल्वर मारिस की तरफ उठा रहने दिया।

‘‘यह बदनामी तो केवल कुछ दिनों की है। लेकिन हम जो प्रयोग कर रहे हैं वह कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। और यह प्रयोग हम ऐसी संस्था के लिये कर रहे हैं जो अमेरिका की भलाई चाहती है।’’

‘‘कैसा प्रयोग? कैसी संस्था?’’

‘‘फिलहाल मैं उस संस्था का नाम नहीं बता सकता। लेकिन ये ज़रूर बता सकता हूँ कि इस समय मेरी हैसियत क्या है और मोण्टेगामा कौन है?हम लोग एक ऐसी खुफिया एजेंसी के सदस्य हैं जो गुप्त रूप से ऐसे काम करती है जिससे भविष्य में देश को फायदा हो सकता है। लेकिन वर्तमान में चूंकि कानूनी तौर पर ये गलत है अतः हम इसे ज़ाहिर नहीं कर सकते, जब तक कि हमारा एक्सपेरीमेन्ट कामयाब न हो जाये। मोन्टेगामा भी हमारी एजेंसी का एक मेम्बर है और तुम्हारा सीआईए का चीफ भी। मैं जानता हूं कि तुम सीआईए एजेंट हो।’’

आर्थर को यह सुनकर हैरत का एक झटका लगा। क्योंकि केवल ऊँची रैंक के अफसर जानते थे कि वह सीआईए का एजेन्ट है और मोन्टेगामा के बारे में तो वह सोच भी नहीं सकता था कि वह सी आई ए का एजेन्ट हो सकता है। और उसका चीफ ऐसी कानून तोड़ने वाली संस्था का मेम्बर?

‘‘शायद तुम्हें मेरी बात पर विश्वास नहीं हो रहा है।’’ कहते हुए मारिस ने फोन पर एक नंबर मिलाया। कुछ देर बाद जब फोन मिल गया तो उसने फोन पर कहा, ‘‘हलो मि0 चीफ। इस समय तुम्हारा एक मातहत एल.ए.23 मेरे सामने बैठा है। उसे मेरे बारे में बता दो।’’ कहकर उसने रिसीवर आर्थर की तरफ बढ़ा दिया, ‘‘लो अपने चीफ से बात करो।’’

‘‘आर्थर!’’ रिसीवर पर आवाज उभरी और आर्थर तुरंत पहचान गया कि यह उसका चीफ है, ‘‘मारिस की हर तरह से मदद करो।’’

‘‘यस सर।’’ आर्थर ने जवाब में कहा और रिवाल्वर वापस होलेस्टर में रख लिया।

‘‘मोन्टेगामा ने तुम्हें बताया होगा कि उसने पन्द्रह साल पहले कार्ल को खरीदा था। तुम्हें यह भी मालूम हो गया होगा कि पन्द्रह साल पहले वह काफी गरीब था।’’ 

‘‘हाँ! और मेरे दिमाग में यह सवाल उभरा था कि एक गरीब व्यक्ति ने किसी लड़के को क्यों और कैसे खरीदा।’’
‘‘मोण्टेगामा ने सही कहा था कि उसने लड़के को खरीदा है और उसके लिये रकम मैंने दी थी। मुझे उस समय अपने प्रयोगों के लिये बच्चों की ज़रूरत थी इसलिये मैंने मोण्टेगामा के माध्यम से कार्ल को खरीदा। कुछ और बच्चों को भी मैंने अलग अलग-अलग लोगों को माध्यम बनाकर खरीदा। मोण्टेगामा बाद में सी.आई.ए. का एजेण्ट बन गया। उसने यह गलत कहा था कि कार्ल उसके पास बचपन से रहा है। हकीकत ये है कि कार्ल और कुछ दूसरे बच्चे मेेरे प्रयोगों के काम आ रहे थे। मुझे दुःख है कि उन बच्चों में केवल कार्ल जीवित बचा।’’

‘‘आप एक्सपेरीमेंट क्या कर रहे थे मि0 मारिस?’’ आर्थर ने उत्सुकता में पूछा।
‘‘मैं इंसानी रोबोट बनाने के सिलसिले में एक्सपेरीमेंट कर रहा हूँ। और इसमें काफी कामयाबी भी मिल चुकी है।’’
‘‘मैं कुछ समझा नहीं।’’ आर्थर की आँखों में उलझन थी।

‘‘मैं समझाता हूँ। प्रत्येक प्राणी के शरीर में विशेष प्रकार की संरचनायें पायी जाती हैं। इन्हें जीन कहते हैं और ये प्राणी के समस्त गुणों की वाहक होती है। अगर ये जीन बदल दिये जायें तो गुण भी परिवर्तित हो जाते हैं। प्राकृतिक रूप में यह होता है कि शेर का बच्चा शेर पैदा होता है और आम के पेड़ में हमेशा आम की पैदावार होती है क्योंकि शेर और आम का पेड़ अपने ही जैसे जीन्स अपनी संतानों को ट्रान्सफर करते हैं।
लेकिन अगर किसी तरीके से जीन्स बदल दिये जायें तो शेर का पैदा होने वाला बच्चा बिल्ली भी हो सकता है और आम का पेड़ सेब भी पैदा कर सकता है।’’

‘‘हाँ। मैंने भी इस बारे में सुना है। लेकिन क्या ये वाकई मुमकिन है?’’

‘‘हण्ड्रेड परसेन्ट मुमकिन है। जीन्सों की काँट-छाँट की जा सकती है और साइंस की जो शाखा यह कार्य करती है उसका नाम है बायो टेक्नालॅाजी। इसी का सहारा लेकर मैं इंसानी रोबोट बना रहा हूँ।’’ 
‘‘इंसानी रोबोट का क्या मतलब हुआ ?’’

‘‘इंसानी रोबोट, अर्थात किसी मनुष्य के शरीर में इस प्रकार बदलाव लाना कि वह एक मशीन की तरह शक्तिशाली हो जाये और साथ ही साथ उसके दिमाग को इस तरह बदल देना कि उसमें विरोध की भावना समाप्त हो जाये और वह एक गुलाम की तरह काम करने लगे।’’

‘‘तो क्या कार्ल भी एक इंसानी रोबोट है ?’’

‘‘हाँ! लेकिन अभी उसमें एक कमी है। वह एक मशीन की तरह शक्तिशाली बन चुका है लेकिन अभी मैं उसके मस्तिष्क से प्रतिरोध शक्ति नहीं खत्म कर पाया हूँ। इसलिये मैंने एक दूसरी तरकीब निकाली है। कहते हुये मारिस ने अलमारी खोलकर कैलकुलेटर के साइज़ का एक यन्त्र निकाला और बताने लगा, ‘‘यह ब्रेन कण्ट्रोल डिवाइस है। इंसानी रोबोट बनाते समय एक छोटा सा यन्त्र आपरेशन करके उसके दिमाग में फिट कर दिया जाता है जो इस डिवाइस का रिसीवर है। इस यन्त्र के द्वारा इंसानी रोबोट का दिमाग उस व्यक्ति के काबू में आ जाता है जिसके हाथ में यह यन्त्र होता है।’’

--- कल अंतिम भाग में इस कहानी का अन्जाम।
  

Sunday, October 5, 2014

एथलीट : कहानी (भाग 3)

आर्थर और बाब अब अर्जेण्टीना की यात्रा पर रवाना हो चुके थे। अर्जेण्टीना पहुँचकर आर्थर सबसे पहले एक बड़े अफसर से मिला जो उसका दोस्त था।
‘‘क्या केस ले बैठे हो ?’’ उसके दोस्त ने देखते ही पूछा।

‘‘कार्ल जोहान्स के गायब होने का केस।’’
‘‘कोई सुराग मिला?’’

‘‘अभी कोई नहीं। इस सिलसिले में यहाँ के एक नीग्रो मोण्टेगामा को टटोलना है जो शायद करोड़पति है।’’

‘‘मोण्टेगामा यहाँ की पुलिस की दृष्टि में संदिग्ध है। क्योंकि पाँच साल पहले तक वह बहुत गरीब था। फिर उसने कोई बिजनेस शुरू किया और देखते ही देखते उसके पास दौलत की रेल-पेल हो गयी। उसका क्या बिजनेस था, यह कोई नहीं जानता। फिर उसने अभी ढाई साल पहले मषहूर सर्कस माउन्ट सर्किल भी खरीद लिया।’’

‘‘मैं मोण्टेगामा की टेलीफोन कालें टेप करना चाहता हूँ। क्या तुम इसका बंदोबस्त कर सकते हो ?’’ आर्थर ने पूछा।
‘‘ज़रूर! और कुछ?’’ 

‘‘हाँ! और मैं चाहता हूँ कि उसकी डाक पर भी नज़र रखी जाये।’’
‘‘यह भी हो जायेगा।’’

‘‘ठीक है।’’ आर्थर ने कहा, ‘‘बाब, तुम मोण्टेगामा की टेप कालों को सुनते रहना और अगर कोई खास बात मालूम हो तो मुझे खबर करना। अब मैं उससे मिलने जा रहा हूँ।’’
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मोण्टेगामा का निवास शहर की आबादी से लगभग चार मील दूर एक शांत स्थल पर था। इमारत काफी खूबसूरत थी। आर्थर इसी इमारत के ड्राइंगरूम में बैठा मोण्टेगामा का इंतिजार कर रहा था। थोड़ी देर बाद मोण्टेगामा ने कमरे में प्रवेश किया, ‘‘माफ कीजिए, आपको इंतिजार करना पड़ा। मैंने आपका कार्ड देखा लेकिन समझ में नहीं आया कि ऐसा क्या काम आपको पड़ गया जो लास एंजिलिस से यहाँ आपको आना पड़ा।’’

‘‘मैं एक अपहरण के मामले की जाँच कर रहा हूँ। इस सम्बन्ध में आपको कष्ट दिया।’’
‘‘कैसा अपहरण ?और उस अपहरण से मेरा क्या सम्बन्ध ?’’ मोण्टेगामा ने चौंक कर पूछा।

‘‘मैं प्रसिद्ध एथलीट कार्ल जोहान्स की बात कर रहा हूँ। मुझे मालूम हुआ है कि कार्ल पहले आपके पास था। क्या आप बता सकते हैं कि वह आपके पास कहाँ से आया ?’’

‘‘जरूर ! मैंने पन्द्रह वर्ष पहले उसे एक व्यक्ति से खरीदा था जो स्वयं को कार्ल का बाप कहता था। उसका कहना था कि वह बहुत गरीब है और उसके छह बच्चे हैं। इसपर मैंने उसे पाँच हजार डालर देकर कार्ल को खरीद लिया।’’

आर्थर को जानकारी मिल चुकी थी कि कार्ल के बाप की छह संतानें हैं। ‘ तो क्या उसने झूठ बोला था कि कार्ल का बचपन में अपहरण हुआ था !’ वह मोण्टेगामा से बोला, ‘‘ मैं कार्ल के बाप से मिल चुका हूँ। उसने बताया है कि कार्ल का बचपन में अपहरण हो गया था।’’

‘‘हो सकता है उसने यही बताया हो, क्योंकि ब्राजील में बच्चे बेचना जुर्म है।’’
‘‘उसके बाद आपने कार्ल को दौड़ की ट्रेनिंग दी।’’

‘‘नहीं ! मैंने कोई ट्रेनिंग नहीं दी। लेकिन उसमें अद्भुत शक्ति थी। एक बार उसने एक झगड़े में अपने से दोगुने कद के आदमी को कमर से पकड़ कर उछाल दिया था और वह दस फिट दूर जा कर गिरा था।’’

‘‘जब कार्ल आपके पास था तो उस समय उसकी किसी से दुश्मनी वगैरा चल रही थी ?’’ आर्थर ने पूछा
‘‘नहीं, ऐसी तो कोई बात नहीं थी।’’

‘‘जानकारी देने का शुक्रिया। मैं अब चलूँगा।’’ कहते हुए आर्थर उठ गया।

बाहर आकर आर्थर ने कार नार्मल स्पीड में छोड़ दी और विचारों में लीन हो गया। अचानक उसे कुछ याद आया, ‘‘यहाँ के पुलिस आफिसर का कहना था कि मोण्टेगामा केवल पाँच वर्ष पहले अमीर बना है, फिर उसके पास पन्द्रह वर्ष पहले कार्ल को खरीदने के लिए पैसे कहाँ से आये?’

उसने इरादा किया कि कार को वापस मोड़कर मोण्टेगामा से इस बारे में पूछे लेकिन फिर कुछ सोचकर वह अपने रास्ते पर चलता रहा। थोड़ी देर बाद वह अपने दोस्त पुलिस आफिसर के घर पर था।
‘‘क्या कुछ मालूम हुआ?’’ दोस्त ने पूछा।

‘‘हाँ, काफी बातें मालूम हुईं। मेरा विचार है कि जल्दी ही कार्ल का सुराग मिल जायेगा।’’ 
‘‘यानि किसी ठोस नतीजे पर आप पहुँच चुके हैं!’’

‘‘अभी कुछ कड़ियों को आपस में मिलाना है। उसके बाद तस्वीर साफ होगी।’’ आर्थर ने बाब का नंबर मिलाया जो इस समय पुलिस कण्ट्रोल रूम में था।

‘‘मैं आपको फोन करने वाला था।’’ उधर से बाब की आवाज़ सुनायी दी, ‘‘अभी अभी मोण्टेगामा ने लास एंजिलिस को एक काल की है।’’
‘‘उसने क्या बातचीत की है?’’ आर्थर ने पूछा।

‘‘उसने जो भी बातचीत की है वह अजीब ज़बान में है। मेरा ख्याल है कि कोड वर्ड्स में यह बातचीत की गयी है। मैं टेप लेकर आपके पास आ रहा हूँ।’’
‘‘मैं खुद आ रहा हूँ। तुम्हारा वहाँ रहना जरूरी है।’’ आर्थर ने कहा।

थोड़ी देर बाद वह पुलिस कण्ट्रोल रूम में मोण्टेगामा की लास एंजिलिस में किसी व्यक्ति के साथ बातचीत का रिकार्ड सुन रहा था।

‘‘यह काल लास एंजिलिस में किस फोन नंबर पर की गयी?’’ आर्थर ने पूछा। बाब ने नंबर बता दिया।

‘‘यह फोन नंबर हमारे लिये महत्वपूर्ण है। अब मैं लास एंजिलिस जाकर इसे चेक करूँगा। बाब तुम यही रूककर  मोण्टेगामा पर नजर रखना और अगर कोई खास बात दिखायी दे तो मुझे तुरन्त  खबर करना।’’ आर्थर ने उठते हुए कहा।
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… (जारी है)

Friday, October 3, 2014

एथलीट : कहानी (भाग 2)

लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया। क्योंकि अगले ही दिन कार्ल ओलंपिक के खेल गाँव से गायब हो गया। होटल के जिस कमरे में वह ठहरा था सुबह वेटर को वह कमरा खाली मिला। कार्ल के गायब होने की ख़बर से पूरे विश्व में खलबली मच गयी। पुलिस ने लास एंजिलिस शहर का चप्पा - चप्पा छान मारा लेकिन कार्ल का कहीं पता नहीं चला।

तब यह केस तेज़ तर्रार सार्जेण्ट आर्थर स्काट को सौंपा गया जो इस तरह के पेचीदा केसों को हल करने का माहिर समझा जाता था। आर्थर अपने सहायक बाब फिशर के साथ उस होटल में पहुँचा जहाँ से कार्ल गायब हुआ था। दोनों कार्ल के कमरे में पहुँचे और उसका बारीकी से निरीक्षण करने लगे।

‘‘कार्ल इस खिड़की से गायब हुआ है।’’ एक खुली खिड़की की तरफ संकेत करते हुये आर्थर ने कहा।
‘‘यह आप किस तरह कह सकते हैं ?’’ बाब ने पूछा।

‘‘यह निशान देख रहे हो।’’ आर्थर ने खिड़की के पास प्लास्टर पर एक निशान दिखाया, ‘‘यह निशान हुक फंसाने का है। अर्थात यहाँ हुक फंसाकर एक रस्सी नीचे लटकाई गयी है, जिसके सहारे कार्ल नीचे पहुँचा या ले जाया गया।’’

फिर दोनों ने कोई और सुराग पाने के लिये पूरा कमरा छान मारा लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिली।
‘‘मेरा ख्याल है कि हमें ब्राजील जाना चाहिये और कार्ल के संबंधियों से मिलना चाहिये। तभी कुछ पता लग सकता है।’’ आर्थर ने कहा।
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दूसरे दिन वे लोग ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया में कार्ल के आवास पर थे। कार्ल के बाप ने उन्हें देखकर बुरा सा मुँह बनाया क्योंकि अब तक सैकड़ों रिपोर्टर उसका भेजा चाट चुके थे। उसने इन्हें भी कोई रिपोर्टर समझा।

‘‘कहिये मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ।’’ ज़बरदस्ती चेहरे पर एक मुस्कराहट लाकर उसने कहा।
‘‘हम कार्ल के गायब होने के केस पर काम कर रहे हैं और आपकी कुछ मदद चाहते हैं।’’ आर्थर ने कहा।

‘‘ओह! क्या कार्ल का कुछ सुराग मिला?’’ उसने बेचैनी से पूछा।
‘‘अभी नहीं। क्या आप बता सकते हैं कि वह एथलेटिक्स की तैयारी किस तरह करता था ?’’

और फिर उसके बाप ने जो बताया वह इनको चौंकाने के लिये काफी था। उसने बताया, ‘‘बात यह है कि कार्ल हमेशा से हमारे साथ नहीं रहा। जब वह केवल पाँच साल का था तब उसका अपहरण कर लिया गया था। फिर पन्द्रह वर्षों के बाद अचानक वह घर आ गया। उसके बाद उसने नेशनल गेम्स में रिकार्ड बनाया और ओलंपिक के लिये टीम में चुन लिया गया।’’

‘‘क्या उसने यह भी बताया कि वह कहाँ चला गया था?’’
‘‘उसने इस बारे में कुछ नहीं बताया। और कहा कि यह बताने पर उसकी जान को खतरा है।’’

‘‘कार्ल का बचपन में किस जगह अपहरण हुआ था ?’’ आर्थर ने पूछा। 

‘‘कार्ल का अपहरण उस समय हुआ था जब हम ब्यूनस आयर्स एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिये गये थे।’’

‘‘ओ0के0, अब हम चलते हैं। आवश्यकता पड़ने पर फिर कष्ट देंगे।’’ आर्थर स्काट ने उठते हुये कहा।

दोनों ने मि0 जोहान्स से हाथ मिलाया और कार में आकर बैठ गये।

‘‘तुमने मि0 जोहान्स की बातों से क्या अंदाज़ा लगाया ?’’ आर्थर ने बाब ने पूछा।
‘‘एक तो यह कि मि0 जोहान्स कार्ल के गायब होने से उतने चिंतित नहीं है जितना कि एक बाप को होना चाहिये।’’

‘‘सही कहा तुमने। लेकिन हो सकता है पन्द्रह साल दूर रहने के कारण मि0 जोहान्स बेटे की जुदाई के आदी हो गये हों और जब दूसरी बार कार्ल गायब हुआ तो उन पर कोई खास असर नहीं हुआ।’’

‘‘पहली बार कार्ल अर्जेण्टीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में गायब हुआ था जहाँ के एथलीट ने इस ओलंपिक में दूसरी पोजीशन पाई है। क्या दोनों में कोई लिंक हो सकता है ?’’ बाब ने पूछा।
‘‘अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।’’

‘‘इस समय हम कहाँ चल रहे हैं ?’’ बाब ने कार को दूतावास के रास्ते पर न मुड़ते देखकर पूछा।

‘‘अभी हम उस बिजनेस मैन से मिलने जा रहे हैं जिसने कार्ल को नेशनल गेम्स में हिस्सा लेने के लिये स्पांसर किया था।’’
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शीघ्र ही आर्थर और बाब की ड्राइंग रूम में उस बिजनेसमैन से मुलाकात हो गयी।

‘‘कार्ल से आपका सम्पर्क किस प्रकार हुआ ?’’ आर्थर ने उससे पूछा।
‘‘हकीकत ये है कि मैंने कार्ल को अर्जेण्टीना में अपने एक दोस्त के पास देखा था। वहीं मेरे दोस्त ने कार्ल को दौड़ते हुये दिखाया था और मैं उसकी स्पीड देखकर दंग रह गया था। फिर मेरे दोस्त ने कहा कि कार्ल ब्राजील का ही नागरिक है और वहाँ के नेशनल गेम्स में भाग लेना चाहता है। इसलिये मैं उसके नाम की सिफारिश कर दूँ। मैं इसके लिये तैयार हो गया।’’

‘‘मैं आपके उस दोस्त का नाम पता जानना चाहता हूँ।’’

‘‘उसका नाम माण्टेगामा है और वह ब्यूनस आयर्स में इस पते पर मिल सकता है।’’ कहते हुये उसने एक कार्ड निकाल पर आर्थर को दे दिया।

‘‘क्या मोण्टेगामा कोई नीग्रो है ?’’ आर्थर ने पूछा।
‘‘हाँ ! वह अर्जेण्टीना का एक करोड़पति नीग्रो है।’’

‘‘उसका बिजनेस क्या है ?’’
‘‘वह मशहूर सर्कस माउंट सर्किल का मालिक है।’’

‘‘ओह ! यह तो दुनिया के बड़े सर्कसों में से एक है। क्या वही इसका मालिक है।’’ आर्थर ने विस्मय में कहा।

‘‘हाँ उसने तीन वर्ष पहले यह सर्कस खरीदा था।’’
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… (जारी है)

Thursday, October 2, 2014

एथलीट : कहानी (भाग 1)

 ---ज़ीशान ज़ैदी (लेखक)

लाॅस एंजिलिस के ओलम्पिक स्टेडियम में सौ मीटर की दौड़ जैसे ही शुरू हुई, दर्शकों ने अपनी साँसें रोक लीं। खचाखच भरे स्टेडियम की भीड़ ने इस फाइनल मुकाबले में एक करिश्मा देखा। ब्राजील का कार्ल जोेहान्स बाकी खिलाड़ियों को पीछे छोड़ता हुआ गोली की रफ्तार से आगे बढ़ा और पल भर में बाउन्ड्री लाइन पार कर ली। कम्प्यूटराइज़्ड स्कोर बोर्ड पर दौड़ पूरी करने का समय अंकित था 4.565 सेकेण्ड। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच कार्ल जोहान्स को गोल्ड मेडल दिया गया। दूसरी पोजीशन अर्जेण्टाइना के बेन लारेन्स की आयी जिसने यही दौड़ 9.955 सेेकेण्ड में पूरी की। 

पूरे विश्व में कार्ल जोहान्स के कारनामे की धूम मच गयी। क्योंकि आज तक किसी ने सौ मीटर की दौड़ इतने कम समय में पूरी नहीं की थी। ओलंपिक कमेटी की मीटिंग में प्रेसीडेन्ट ने ड्रग्स विशेषज्ञ जेम्स क्लार्क को सम्बोधित किया, ‘‘मि0 क्लार्क, कहीं ऐसा तो नहीं कि कार्ल ने ड्रग्स ली हो ?’’

‘‘लेकिन ड्रग्स लेने के बाद भी कोई इंसान इतना शक्तिशाली नहीं हो सकता कि वह तेज़ी से दौड़ती कार को पीछे छोड़ दे। फिर भी हम टेस्ट कर रहे हैं। जल्दी ही परिणाम सामने आ जायेगा।’’ क्लार्क ने जवाब दिया। 
उसके बाद कार्ल जोहान्स के अनेको परीक्षण हुये और उनसे जो परिणाम निकला वह यही था कि कार्ल ने कोई ड्रग्स इस्तेमाल नहीं की है।

लेकिन इन परीक्षणों से जेम्स क्लार्क अभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं था। इस समय वह प्रसिद्ध एनेटाॅमिस्ट मारिस स्टीफन के पास बैठा था। वह उसका दोस्त था। मारिस स्टीफन की आयु पचपन-साठ के बीच थी लेकिन स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से पैंतालीस से ज़्यादा न लगता था।

‘‘मि0 स्टीफन।’’ क्लार्क ने मारिस स्टीफन को सम्बोधित किया, ‘‘क्या इंसान को किसी विधि से इतना शक्तिशाली बनाया जा सकता है कि वह एक मशीन की तरह काम करने लगे?’’

‘‘कुछ तरकीबें ऐसी हैं जिन्हें अपनाने से मनुष्य बहुत ज़्यादा शक्तिशाली बन सकता है जैसे योग, कुछ विशेष प्रकार के व्यायाम इत्यादि। उसमें इतनी शक्ति आ जाती है कि वह चलती हुई कार को रोक सकता है, बड़े से बड़ा भार उठा सकता है। इस तरह के कारनामे अनेक लोगों ने किये भी हैं।’’

‘‘क्या कार्ल जोहान्स का कारनामा भी ऐसा ही माना जायेगा ?’’

‘‘उसके बारे में मैं अभी कुछ नहीं कह सकता। लेकिन अगर उसके शरीर का कोई फोटो मुझे मिल जाये तो मैं कोई अनुमान लगा सकता हूँ। लेकिन यह फोटो साधारण कैमरे का नहीं होना चाहिये।’’ कहते हुये स्टीफन ने अलमारी खोलकर एक कैमरा निकाला, ‘‘यह खास तरह का लेसर कैमरा है और यह किसी मनुष्य के भीतरी शरीर का होलोग्राफिक फोटो उतार सकता हैै। तुम इस कैमरे से कार्ल का फोटो ले लो।’’

जेम्स क्लार्क ने स्टीफन से वह कैमरा ले लिया।
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जेम्स ने कार्ल का फोटो लिया और वापस मारिस के पास आ गया।

‘‘गुड! अब मैं टेस्ट करता हूँ।’’ कहते हुये वह एक मशीन के पास गया। यहाँ यह बता देना ज़रूरी है कि यह अमेरिका की सबसे बड़ी एनेटाॅमी की लेबोरेट्री थी और मारिस स्टीफन इसका इंचार्ज और मुख्य वैज्ञानिक था।
मारिस ने कैमरा उस मशीन के एक खाँचे में फिट कर दिया और एक स्विच दबाकर मशीन चालू कर दी। जल्दी ही उस मशीन की स्क्रीन पर कार्ल जोहान्स के भीतरी जिस्म का फोटो उभरने लगा। यह फोटो थ्री डाईमेंशनल था।

‘‘ये देखिये, कार्ल की पेशियाँ कुछ हरापन लिये हुये हैं, जबकि किसी भी मनुष्य की पेशियाँ भूरे रंग की होती हैं।’’ मारिस ने स्क्रीन की ओर संकेत किया। इतने में मशीन से एक स्लिप निकली। इस स्लिप को पढ़कर मारिस के चेहरे पर विस्मय की लकीरें खिंच गयी।

‘‘क्या बात है मारिस ?’’ जेम्स क्लार्क ने पूछा।

‘‘हैरत की बात है जेम्स। मशीन के अनुसार ये पेशियाँ किसी मनुष्य की नहीं हैं।’’

‘‘तो क्या कार्ल......लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है ?अगर कार्ल का शरीर मनुष्य का नहीं है तो फिर किसका हो सकता है।’’

‘‘इस बारेे में पता करने के लिये तुम्हें कार्ल को इस लैब में लाना पड़ेगा।’’

‘‘कोशिश करता हूँ।’’ कहते हुये जेम्स उठ खड़ा हुआ।

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