‘‘इंसानी रोबोट बनाने का उद्देश्य क्या है? क्या मशीनी रोबोटों से काम नहीं चल सकता ?’’
‘‘बात यह है कि मशीन चाहे जितनी डेवलप कर ली जाये, वह हर हाल में इंसान से कमतर होगी। मशीन से काम करने के लिये उसे एक पूरा प्रोग्राम बनाकर देना पड़ता है। जबकि इंसान को केवल हुक्म देना होगा और वह स्वयं उस काम को अपनी अक्ल से पूरा कर देगा।’’
‘‘कार्ल को ओलंपिक में शामिल करने का क्या उद्देश्य था ?’’
‘‘केवल पब्लिसिटी और इंसानी रोबोट की क्षमता को परखना। जब हमारा उद्देश्य पूरा हो गया तो कार्ल को ब्रेन कण्ट्रोल डिवाइस की मदद से वापस बुला लिया गया।’’
‘‘आपका प्रोग्राम काफी अच्छा है। लेकिन इसके लिये कच्चा माल यानि बच्चे कहाँ से मिलेंगे ?’’
‘‘तीसरी दुनिया के देश हमें ये सप्लाईं देंगे, जहाँ आज भी अकाल और भुखमरी का प्रकोप छाया रहता है। वहाँ से हम सस्ते दामों में बच्चे खरीदेंगे और उन्हें इंसानी रोबोट बनाकर मंहगे दामों में अमीर देशों को बेचेंगे। इस प्रकार अमेरिका को दो तरफा लाभ होगा। एक तो वह और अमीर बनेगा दूसरे उसकी पकड़ दूसरे देशों पर मज़बूत होगी।’’
‘‘लेकिन इसका विरोध क्या खुद अमेरिकावासी नहीं करेंगे? बहरहाल यह एक अमानवीय कार्य होगा।’’
‘‘जब देश की इकोनोमी इस काम से मज़बूत होगी तो विरोध के सारे स्वर दब जायेंगे। चाहे वह देश के भीतर से उठें या बाहर से।’’ मारिस स्टीफन ने उंगली से हवा में डालर का निशान बनाया था।
‘‘बहरहाल मेरे लिये विरोध की कोई वजह नहीं बनती। भगवान करे वह दिन जल्द आये जब आपका प्रयोग पूरी तरह कामयाब हो।’’ उसके बाद आर्थर ने मारिस से विदा ली। वह सोच रहा था कि अब नाकामी की फाइनल रिपोर्ट लगाकर कार्ल की फाइल बन्द कर देगा।
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अचानक कमरे का दरवाज़ा खुला और मारिस चौंक कर उसकी ओर देखने लगा। दरवाज़े से कार्ल जोहान्स अन्दर आ रहा था।
‘‘क्या बात है कार्ल ?’’ मारिस ने पूछा।
‘‘बात ये है कि मैंने तुम लोगों की सारी बातचीत सुन ली है। मुझे तुम्हारी और तुम्हारी संस्था की घिनौनी साजिश के बारे में सब कुछ मालूम हो चुका है।’’ गुस्से के कारण कार्ल का मुँह लाल हो रहा था।
‘‘तो तुमने ये भी सुना होगा कि मेरे हाथ में जो डिवाइस है वह तुम्हारे दिमाग का रिमोट कन्ट्रोल है। इसी के बल पर मैंने तुम्हें खेल गाँव से यहाँ आने पर मजबूर कर दिया। और इस समय भी इसका लाल बटन दबा कर तुम्हें भयंकर सिर दर्द में मुब्तिला कर सकता हूँ जो तुम्हें मेरा कहा मानने पर मजबूर कर देता है।’’
‘‘तो फिर दबाओ लाल बटन।’’ कार्ल व्यंग्य से बोला।
मारिस ने लाल बटन दबाया लेकिन कार्ल पर कोई असर नहीं हुआ।
‘‘बेकार है मि0 मारिस। यह रिमोट उसी समय काम कर रहा था जब तुमने मुझे ओलंपिक गाँव से बुलाया था। तुमने इंसानी रोबोट तो बना लिया लेकिन उसकी शक्ति के बारे में गलत अनुमान लगाया। तुमने उसकी शारीरिक शक्ति तो देख ली, लेकिन उसकी मानसिक शक्ति कितनी बढ़ गयी ये तुम नहीं देख पाये। वास्तव में मनुष्य को मशीन की तरह शक्तिशाली बनाने वाले जीन उसके दिमाग को भी हज़ारों गुना शक्तिशाली बना देते हैं। इसलिये मुझ में विशेषता आ गयी कि किसी भी मशीन की बनावट देखकर उसकी पूरी मशीनरी और वर्किंग सिस्टम समझ जाता हूँ। इस समय पूरी लैबोरेट्री मेरे कण्ट्रोल में है। मैं केवल तुम्हारा उद्देश्य जानना चाहता था वरना कभी का तुम पर हाथ डाल चुका होता।’’
मारिस ने खतरा जानकर गार्ड रोबोटों को बुलाना चाहा। कार्ल ने यह भांपकर कहा,‘‘बेकार है मि0 मारिस स्टीफन। पहले मेरी पूरी बात सुन लो।’’ कहते हुये उसने अपनी जेब से एक यन्त्र निकाला जो हू-ब-हू मारिस के यन्त्र जैसा था।
‘‘यह क्या है ?’’ मारिस के चेहरे पर घबराहट के कारण पसीना आ गया था।
‘‘तुम्हें तो मालूम होगा कि इसे ब्रेन कण्ट्रोल डिवाइस कहते है। इसका काला बटन दबाने पर दिमाग बम की फट जाता है और लाल बटन दबाने पर यह होता है।’’ कहते हुये कार्ल ने लाल बटन दबा दिया। मारिस का चेहरा तेज़ दर्द के कारण बिगड़ गया। वह चीख उठा,‘‘इसे बन्द करो।’’
कार्ल ने बटन आफ कर दिया।
‘‘त......तुमने मेरा दिमाग कण्ट्रोल करने का यन्त्र कैसे बना लिया ?’’ मारिस ने हाँफते हुये आश्चर्य से पूछा।
‘‘उसी तरह जिस तरह अपना ब्रेन कण्ट्रोल का यन्त्र मैंने बेकार किया। एक दिन रात के समय जब तुम सो रहे थे तुम्हें बेहोश करके सबसे पहले अपने दिमाग को कण्ट्रोल करने का यन्त्र मैंने बेकार किया फिर तुम्हें उस मशीन तक ले गया जो किसी भी मनुष्य का छोटा सा आपरेशन करके उसके दिमाग में इस यन्त्र का रिसीवर फिट कर देती है और साथ ही साथ इस यन्त्र को भी बना देती हैं यह मेरे लिये कुछ मुश्किल नहीं था क्योंकि यहाँ के पहरेदार रोबोटों को मैं पहले ही सर्किट बदल कर अपनी ओर कर चुका था। इस काम में मेरे हाई पावर दिमाग ने काफी साथ दिया। इस तरह अब तुम मेरे कण्ट्रोल में हो।’’ कार्ल के चेहरे पर विजय की मुस्कान थी।
‘‘तो अब तुम क्या चाहते हो ?’’
‘‘अब मैं चाहता हूँ कि दुनिया पर मंडराता खतरा मिटा दूँ। वैसे तुमने मेरी प्लास्टिक सर्जरी करके मेरे रास्ते की बहुत सी बाधायें दूर कर दी हैं। अब मैं किसी भी देश में नये नाम, नये चेहरे के साथ रह सकता हूँ। एक राज़ की बात और बता दूँ कि मोण्टेगामा, जिसे तुम सी.आई.ए. का एजेन्ट समझते हो, वास्तविकता में अर्जेण्टीना की सीक्रेट सर्विस का चीफ है और उसने मुझे अपना दाहिना हाथ बना लिया है।’’
‘‘क्या!’’ मारिस को आश्चर्य का एक और झटका लगा। फिर वह कार्ल का इरादा भांपकर उसकी ओर झपटा लेकिन तब तक देर हो चुकी थी और कार्ल ने ब्रेन कण्ट्रोल डिवाइस का काला बटन दबा दिया था। एक हल्के धमाके के साथ मारिस के सर के चिथड़े उड़ गये।
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अगले दिन कार्ल ने यह खबर दिलचस्पी के साथ पढ़ी कि अमेरिका की एनेटाॅमी की एक बड़ी लैबोरेट्री ज़बरदस्त धमाके के साथ तबाह हो गयी और उसमें काम करने वाले समस्त व्यक्ति जिनमें अमेरिका के प्रसिद्ध साइंटिस्ट मारिस स्टीफन भी थे, दब कर मर गये। मामले की छानबीन की जा रही है कि इस तबाही के पीछे किसका हाथ हो सकता है। इस खबर में कार्ल का कहीं नाम न था इसका अर्थ था कि उस एक्सपेरीमेन्ट को करने वाली गुप्त संस्था इस मामले को राज़ में रखना चाहती है।
इस समय कार्ल लास एंजिलिस के एक होटल में मोण्टेगामा के एजेंट की प्रतीक्षा कर रहा था। जो उसका पासपोर्ट एवं वीज़ा लेकर आने वाला था। मारिस ने प्लास्टिक सर्जरी करके उसका चेहरा बदल दिया था इसलिये अब पहचान लिये जाने का भी खतरा नहीं था।
उसका अपने माँ बाप से मिलने का कोई इरादा नहीं था जिन्होंने उसे किसी जानवर की तरह बेच दिया था। मोण्टेगामा एक वर्ष में उसका गहरा दोस्त बन गया था। उसने आफर दी थी कि वह उसके सर्कस का मैनेजर बन जाये और छिपे रूप में अर्जेण्टीना की सीक्रेट सर्विस के लिये काम करे। कार्ल ने उसका यह आफर मंज़ूर कर लिया था।
कार्ल ने घंटी बजाकर वेटर से काफी लाने के लिये कहा और अपने भविष्य के बारे में सोचने लगा।
--समाप्त--
लेखक : ज़ीशान हैदर ज़ैदी
यह कहानी 'इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिये' के ताज़ा अंक अक्टूबर 2014 में प्रकाशित हुई है