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Monday, July 15, 2013

मायावी गिनतियाँ : भाग 8


घण्टी की आवाज पर मिसेज वर्मा ने उठकर दरवाजा खोला। सामने उनके पड़ोसी मलखान सिंह मौजूद थे। हाथ में मिठाई का डब्बा लिये हुए।
''नमस्कार जी। लो जी मिठाई खाओ।" मलखान सिंह ने जल्दी से मिठाई का डब्बा मिसेज वर्मा की तरफ बढ़ाया।
मिसेज वर्मा ने इस तरह मलखान सिंह की तरफ देखा मानो उनकी दिमागी हालत पर शक कर रही हो। 

Sunday, July 14, 2013

मायावी गिनतियाँ : भाग 7


उधर असली रामू के सामने एक के बाद एक इस तरह मुसीबतें आकर गिर रही थीं जैसे पतझड़ के मौसम में पत्ते गिरा करते हैं। इतनी समस्याएं तो गणित के सवाल हल करने में नहीं झेलनी पड़ी थीं जितनी जीवन की उस पहेली को हल करने में दुश्वारियां आ रही थीं।
जिस छत पर भी वह पहुंचता था, वहीं से उसे खदेड़ दिया जाता था। पतंग की एक डोर उसकी नाक को भी घायल कर चुकी थी। दौड़ते भागते दोनों टाँगें बुरी तरह दुख रही थीं।

Saturday, July 13, 2013

मायावी गिनतियाँ : भाग 6

उस समय क्लास में गुप्ता जी अंग्रेजी पढ़ा रहे थे जब चपरासी ने वहाँ प्रवेश किया। गुप्ता जी ने पढ़ाना छोड़कर प्रश्नात्मक दृष्टि से चपरासी को देखा।
''मास्टर साहब, रामू को प्रिंसिपल मैडम बुला रही हैं।
रामू बने सम्राट ने हैरत से चपरासी को देखा। भला प्रिंसिपल को उससे क्या काम पड़ गया था।

Friday, July 12, 2013

मायावी गिनतियाँ : भाग 5


जबकि बंदर बने रामू की जान सांसत में थी। सामने मौजूद विशालकाय साँप उसे गटकने के लिए तैयार खड़ा था। उसने बचाव बचाव कहने के लिए मुँह खोला। लेकिन मुँह से बंदरों जैसी खों खों निकल कर रह गयी।
साँप ने उसके ऊपर एक झपटटा मारा और वह जल्दी से साइड में हो गया। इस चक्कर में उसके हाथ से डाल छूट गयी। और वह धड़ाक से नीचे चला आया। लेकिन नीचे उसे जरा भी चोट नहीं आयी। क्योंकि वह किसी जानवर की पीठ पर गिरा था। अब जो उसने घूमकर जानवर का चेहरा देखा तो उसकी रूह फना हो गयी। क्योंकि वह जानवर जंगली सुअर था।

Thursday, July 11, 2013

मायावी गिनतियाँ : भाग 4

उस बंदर ने एक अंगड़ायी लेकर आँखें खोल दीं, जिसके शरीर में रामू का दिमाग फिट किया गया था। दो पलों तक तो उसकी समझ में नहीं आया कि वह कहाँ है फिर उसने चारों तरफ नजर दौड़ायी। वह जिस पलंग पर लेटा था अचानक वह जोर जोर से हिलने लगा। उसने घबरा कर नीचे नजर की और उसकी जान निकल गयी। वह एक ऊँचे पेड़ की सबसे ऊँची डाल पर लेटा हुआ था।

Wednesday, July 10, 2013

मायावी गिनतियाँ : भाग 3

सम्राट के पपोटों में हरकत पैदा हुई और फिर धीरे धीरे उसने आँखें खोल दीं। उसके आसपास मौजूद सहयोगियों के चेहरे खिल उठे।
''आप कैसा महसूस कर रहे हैं सम्राट?" डोव उसकी तरफ झुका।
''मैं तो ठीक हूँ। लेकिन मुझे हुआ क्या था?"
''सम्राट! हमारे अंतरिक्ष यान में हुई दुर्घटना में आपका शरीर पूरी तरह नष्ट हो गया था। इसलिए हमने आपका दिमाग एक मानव के शरीर में फिट कर दिया है।"

Tuesday, July 9, 2013

मायावी गिनतियाँ : भाग 2

अचानक उसे लगा, पीछे से किसी ने उसकी साइकिल रोक ली है। उसने घूमकर देखना चाहा, लेकिन उसी समय उसकी गर्दन भी किसी ने पकड़ ली।  कोई  उसकी गर्दन दबा रहा था। धीरे धीरे उसपर बेहोशी छा गयी।
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इस छोटे से कमरे में तेज नीली रोशनी फैली हुई थी। इस रोशनी में चार बच्चे आसपास खड़े हुए किसी गंभीर चिंतन में डूबे थे। पास से देखने पर राज़ खुलता था कि ये दरअसल बच्चे नहीं, बौने प्राणी हैं। क्योंकि इनके चेहरे पर दाढ़ी मूंछें भी मौजूद थीं। इनके शरीर का गहरा पीला रंग सूचक था कि ये प्राणी इस धरती के अर्थात पृथ्वीवासी तो नहीं हैं।

Monday, July 8, 2013

मायावी गिनतियाँ : भाग 1

'टन टन टन! स्कूल की घण्टी तीन बार बजी और रामू को ऐसा महसूस हुआ जैसे उसके दिल पर किसी ने तीन बार हथौड़े से वार कर दिया। चौथा पीरियड शुरू हो गया था और ये पीरियड उसे किसी राक्षस के भोजन की तरह लगता था। किसी तरह खत्म ही नहीं होता था। उसे गणित और गणित के अग्रवाल सर दोनों से चिढ़ थी। और चौथा पीरियड उन्हीं का होता था।
उसने अपने मन को उम्मीद बंधाई कि शायद आज अग्रवाल सर न आये हों। किसी एक्सीडेन्ट में उनकी टांग टूट गयी हो। आजकल के ट्रेफिक का कोई भरोसा तो है नहीं।
लेकिन ट्रेफिक वाकई भरोसेमन्द नहीं है। क्योंकि अग्रवाल सर अपनी दोनों टांगों की पूरी मजबूती के साथ क्लास में दाखिल हो रहे थे। चेहरे पर चढ़ा मोटा चश्मा उन्हें और खुंखार बना रहा था।

Sunday, July 7, 2013

मायावी गिनतियाँ

इस ब्लॉग पर शीघ्र पढ़ें जीशान हैदर  ज़ैदी का बाल उपन्यास 
मायावी गिनतियाँ