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Sunday, May 14, 2023

उपन्यास - सूरैन का हीरो और यूनिवर्स का किंग

 उपन्यास - सूरैन का हीरो और यूनिवर्स का किंग उस लंबी कहानी की अंतिम कड़ी है जिसके पूर्व हिस्से आप उपन्यासों - सूरैन का हीरो और


शादी का कीड़ा, सूरैन का हीरो और सीक्रेट डाईमेंशन, सूरैन का हीरो व अजनबी ठिकाना और सूरैन का हीरो और पालनहार में पढ़ चुके हैं। सूरैन ग्रह की राजकुमारी ज़ारा का बच्चा क्या अपनी माँ से मिल पाया? क्या पीको की यूनिवर्स जीतने की तमन्ना पूरी हो सकी? और क्या वीरान सूरैन ग्रह फिर से आबाद हो सका? इन तमाम राज़ों से परदा उठेगा इस उपन्यास में।

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Sunday, April 16, 2023

उपन्यास - सूरैन का हीरो और पालनहार।

 यह उस लंबी कहानी की चौथी कड़ी है जिसके पूर्व हिस्से आप उपन्यासों - सूरैन का हीरो और शादी का कीड़ा, सूरैन


का हीरो और सीक्रेट डाईमेंशन और सूरैन का हीरो व अजनबी ठिकाना में पढ़ चुके हैं। पूरी कहानी एक पेन्टालोजी है। यानि पूरे पाँच उपन्यासों में समायी हुई है इसकी कहानी। इसके बाद इस कहानी का अंतिम उपन्यास सूरैन का हीरो और यूनिवर्स का किंग पेश किया जायेगा। सूरैन ग्रह की राजकुमारी ज़ारा का बच्चा उससे बिछड़कर हमारी धरती के एक गाँव में पहुंच चुका है। फिलहाल गाँव वालों के लिये अजूबा बना हुआ है। कोई उसे अमेरिका का बनाया खिलौना समझ रहा है तो कोई भूत या जिन्नात का बच्चा। वह बच्चा खुद निहायत हिफाज़त के साथ एक गोलेनुमा गर्भ में रखा हुआ है। क्या वह अपने उस गर्भ से बाहर निकल पाया? जबकि उसका दुश्मन हाबू भी धरती के पड़ोसी ग्रह मंगल पर आ चुका है। क्या हाबू उसे नुकसान पहुंचाने में कामयाब रहा? इन तमाम राज़ों से परदा उठेगा इस उपन्यास में।

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Tuesday, March 14, 2023

सूरैन का हीरो और सीक्रेट डाईमेंशन

 उपन्यास - सूरैन का हीरो और सीक्रेट डाईमेंशन उस लंबी कहानी की अगली कड़ी है जिसका पहला हिस्सा आप उपन्यास - सूरैन का हीरो और शादी का कीड़ा में पढ़ चुके हैं। पूरी कहानी एक पेन्टालोजी है। यानि पूरे पाँच उपन्यासों में समायी हुई है इसकी कहानी। तमाम कोशिशों के बाद भी बाकोल ग्रह का सम्राट अपने बेटे की शादी सूरैन की राजकुमारी के साथ करने में नाकाम रहा। इंतिक़ाम की आग में जलता अब वह सूरैन की तबाही का ख्वाब देख रहा है। क्या सूरैन और उसके निवासी उसके इंतिक़ाम से बच पाये?

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https://store.pothi.com/book/zeashan-zaidi-soorain-ka-hero-aur-secret-dimension/

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Wednesday, January 18, 2023

सूरैन का हीरो और शादी का कीड़ा

 नया उपन्यास - सूरैन का हीरो और शादी का कीड़ा प्रकाशित 



यह उपन्यास एक लम्बी दास्तान की पहली कड़ी है। और एक साइंस फिक्शन रोमांच है जिसकी कहानी पृथ्वी से लाखों प्रकाश वर्ष दूर सूरैन नामी ग्रह पर शुरू होती है और फिर पृथ्वी से भी उसका लिंक जुड़ जाता है। हमेशा की तरह इस उपन्यास में भी एडवेंचर और अनोखी घटनाओं के नये नये ताने बाने आपको उपन्यास से चिपके रहने पर मजबूर कर देंगे। पूरे पांच उपन्यासों में सिमटी यह कहानी एक पेन्टोलॉजी है 
उपन्यास प्राप्त करने के लिए कवर पेज पर या नीचे क्लिक करें 

Saturday, October 30, 2021

'प्रोफ़ेसर मंकी ' अमेज़ॉन व फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध


 'प्रोफ़ेसर मंकी ' फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध 

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'प्रोफ़ेसर मंकी ' अमेज़ॉन पर उपलब्ध 

Monday, June 21, 2021

फीरान का झूला

 


उस आवाज़ के मुंह से यह सुनकर कि वे फीरान के झूले में प्रवेश कर चुके हैं, सभी हैरत में पड़ गये थे। अभी तक तो जो उन्होंने सुना था उसके मुताबिक तो वो एक खतरनाक जगह थी। लेकिन यहाँ तो सामने फूलों की घाटी नज़र आ रही थी जिसके एक कोने पर सोने का छोटा सा पहाड़ तो दूसरी तरफ रेनबो बिखेरता नीला आकाश। और साथ में उनकी खिदमत के लिये एक बौना गुलाम। बस बदसूरत था थोड़ा सा।

‘‘कितनी अजीब बात है।’’ थोड़ी देर बाद महावीर बोला।
‘‘क्या अजीब बात?’’ सैफ ने पूछा।
‘‘ये मेहनती बौना हमारी इतनी मदद कर रहा है और हमने इसे शुक्रिया भी नहीं कहा अभी तक। चलो इससे हाथ मिलाकर शुक्रिया कहते हैं।’’ कहते हुए महावीर बौने की तरफ भेजा।
‘‘हैलो मिस्टर खादिम तुम्हारा बहुत बहुत शुक्रिया।’’ महावीर ने शेकहैण्ड के लिये अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ाया लेकिन बौना पीछे हट गया।
‘‘खादिम को शोभा नहीं देता कि वह अपना हाथ मालिक के साथ मिलाये।’’ बौना पूरे विनय के साथ बोला।
‘‘अच्छा तुमको शाबाशी तो दे सकता हूं कंधा थपथपाकर।’’ कहते हुए महावीर फिर उसकी तरफ बढ़ा लेकिन बौना फिर पीछे हट गया।
‘‘नहीं। मेरा बदन हमारे मालिकों के लिये अछूत है।’’ वह फिर जल्दी से बोल उठा।
‘‘ये तो ऐसा अपने को बचा रहा है जैसे हमारे छूते ही पिघल जायेगा।’’ सैफ बड़बड़ाया।
महावीर ने आगे कुछ नहीं कहा और न ही उसकी तरफ बढ़ने की कोशिश की।
‘‘ये हमें अपने जिस्म से दूर रखने की कोशिश कर रहा है। आखिर क्यों?’’ इसबार उसने सैफ से कोडवर्डस में कहा।
‘‘मुझे लगता है कि यह चूंकि एक थ्री डी इमेज ही है इसलिए हमारे हाथ लगाने से वह इमेज बिगड़ सकती है।’’ कोडवर्डस में ही सैफ ने अपना ख्याल ज़ाहिर किया। ज़ाहिर है इस पूरे तामझाम के पीछे का दिमाग उनकी सारी बातें सुन रहा था। ऐसे वक्त में कोडवर्डस में ही बातें करना मुनासिब था।
‘‘मुझे इसके पीछे कोई और गहरा राज़ मालूम होता है।’’
‘‘तुम लोग यहीं बैठे मक्खियां मारते रहो बैल की औलादों। ऐसे निकम्मे लोग निकले हें खज़ाने की तलाश में। अब मैं अकेले जा रहा हूं सोना बटोरने।’’ अचानक वडाली ने बोलकर सभी को चौंका दिया।
उन्होंने देखा, कहने के साथ ही उसने सोने की पहाड़ी की तरफ दौड़ लगा दी थी।
‘‘अबे खुदाई किससे करेगा?’’ सैफ ने पुकारा।
‘‘अपने हाथों से।’’ दौड़ते हुए ही उसने जवाब दिया।
‘‘लगता है उसके हाथ हाथ नहीं बल्कि लोहे के बेलचे हैं। क्या तुम लोग उसका साथ नहीं दोगे? फड़वा और तसला बनकर?’’ सैफ ने नताशा और बामर की तरफ देखा।
नताशा ने बुरा सा मुंह बनाया, ‘‘हम खज़ाने की तलाश में यहां तक आकर एक गलती कर चुके हैं। अब इस बेवकूफी में और नहीं पड़ेंगे।’’ शायद अब नताशा सैफ और महावीर के सामने अपना लालच ज़ाहिर नहीं करना चाहती थी। पहले ही अच्छी खासी बेइज़्ज़ती हो चुकी थी।
‘‘हाँ। और क्या प्लेन तो तबाह हो गया। हम खज़ाना ले कैसे जायेंगे?’’ बामर ने भी हां में हां मिलायी।
‘‘खज़ाना मिल जाये तो दूसरा खरीद लेना। फिर उसी पर लादकर निकल जाना।’’ सैफ ने मशविरा दिया।
‘‘ये तो वही बात हुई कि मुर्गी खरीदकर उससे अंडा निकलवाया जाये या अंडा खरीदकर उससे मुर्गी निकलवाई जाये।’’ महावीर हंसकर बोला।
‘‘हम लोग खुद को यहां से निकाल ले जायें यही बड़ी बात है।’’ गोल्डी भी बोल उठा।
‘‘लेकिन हम लोग किसी अंडे के अन्दर थोड़ी न बन्द हैं।’’
‘‘क्या पता। हो सकता है ये जगह किसी एलियेन का अण्डा ही हो। किसी बहुत बड़े एलियेन का अण्डा।’’ इस वक्त महावीर भी तफरीह के मूड में आ चुका था।
‘‘कुछ भी हो लेकिन लगता नहीं हम यहां से बाहर निकल पायेंगे।’’ गोल्डी इस तरह बोल रहा था मानो उसकी जान निकली जा रही हो।
‘‘तो क्या तुझे यहां से निकलने की उम्मीद नहीं? तू तो यहां कई बार आ जा चुका है।’’ सैफ ने गोल्डी को घूरा।
‘‘पहले और अब में बहुत फर्क दिखाई दे रहा है। अब तो ये जगह मेरे लिये पूरी तरह अजनबी हो चुकी है।’’ गोल्डी मुंह बनाकर बोला।
सैफ आगे कुछ बोलने वाला था लेकिन उससे पहले ही नताशा बोल उठी।
‘‘मैं तो जाती हूं फूल तोड़ने। बहुत खूबसूरत फूल लगे हैं यहाँ।’’ नताशा झाड़ियों की तरफ बढ़ी जो शायद मुश्किल से दो सौ मीटर के फासले पर थीं। सैफ और महावीर दोनों को जाते हुए देख रहे थे जबकि गोल्डी और बामर एक दूसरे के कंधे पर हाथों को रखे हुए आगे के बारे में सोच रहे थे। ये अलग बात है कि आगे करना क्या है किसी की समझ में नहीं आ रहा था। बौना अलग अपनी जगह बुत बना खड़ा हुआ था।
‘‘अबे क्या तेरी बैटरी किसी ने निकाल ली?’’ सैफ ने उसे पुकारा।
‘‘खादिम की बैटरी फुल है। आप हुकम तो करें।’’ बौना सर झुकाकर बोल पड़ा।
‘‘हमारा हुकम है कि तू जा और उस सोने के पहाड़ को उठाकर यहीं लाकर पटक दे।’’ बौने की डिमाँड पर सैफ ने हुक्म दे दिया।
‘‘माफ कीजिए ये खादिम की क्षमता से बाहर का हुक्म है।’’ बौना फिर सर झुकाकर बोला।
‘‘बोल तो ऐसे रहा था जैसे अलादीन के चराग के जिन का बड़ा भाई है तू। अच्छा छोटा सा काम कर दे। मेरा सर बहुत दर्द कर रहा है। चल दबा दे।’’
‘‘माफ कीजिए ये खादिम की क्षमता से बाहर का हुक्म है।’’ बौने ने अपना डायलाग हूबहू पहले की तरह से दोहरा दिया।
‘‘तो फिर हमें ऐसे नालायक खादिम की कोई ज़रूरत नहीं। भाग जा यहाँ से।’’
‘‘माफ कीजिए ये खादिम की क्षमता से बाहर का हुक्म है।’’ इसबार वाकई सैफ का दिल चाहा कि वहीं पड़ी ईंट उठाकर अपने सर पर मार ले। उसने खून का बड़ा सा घूंट अपनी हलक के नीचे उतारा और गोल्डी की तरफ घूम गया।
‘‘यार गोल्डी, तेरा बाप यकीनन बहुत बड़ा बेवकूफ था।’’ सैफ ने उसे छेड़ा।
गोल्डी ने उसे व्यंगात्मक भाव से देखा, ‘‘हां था तो। तेरी बात का बुरा नहीं मानूंगा। बेवकूफ न होता तो तेरी खाल में भूसा भरवाकर अपने महल में लटका चुका होता।’’
‘‘अरे नहीं। इस नाकामी की ज़िम्मेदार तो तेरी बेवकूफी है। मैंने उसे बेवकूफ इसलिए कहा कि जहाँ पर सोने का इतना बड़ा पहाड़ मौजूद हैं वहां तेरे बाप को ज़रा सा खज़ाना छुपाने की ज़रूरत क्या थी।’’
‘‘ज़रूरत थी। मैं नहीं जानता ये इतना बड़ा पहाड़ कहां से आ गया। क्योंकि जब डैड यहां काम कर रहे थे तो इस विशाल पहाड़ का नामोनिशान नहीं था।’’
‘‘क्या?’’ हैरत से सैफ का मुंह खुल गया।
‘‘नामुमकिन।’’ बामर बड़बड़ाया, ‘‘इस तरह का पहाड़ बनने में हज़ारों लाखो साल लग जाते हैं। क्या यहां कोई जादूगर पाया जाता है जिसने छूमंतर कहकर ये पहाड़ पैदा कर दिया?’’
‘‘पता नहीं। मैं तो पहली बार ही इसे देख रहा हूं। जबकि इस जगह का चप्पा चप्पा हमारा छाना हुआ है।’’ गोल्डी कंधे उचकाकर सर खुजलाने लगा।
‘‘इस जगह अजीबोगरीब घटनायें घट रही हैं।’’ महावीर बीच में बोला, ‘‘अब यही देखो सैफ, तुम्हारी भूतपूर्व अम्माजान अभी तक उस झाड़ी तक नहीं पहुंच सकी हैं। फूलों को तोड़ने के लिये।’’
‘‘अरे!’’ सैफ के साथ साथ वहां मौजूद सभी हैरत में पड़ गये। क्योंकि जिस रफ्तार से नताशा उन झाड़ियों की तरफ बढ़ी थी उससे तो अबतक उसे उनसे भी आगे निकल जाना चाहिए था। ऐसा मालूम होता था कि वह कदम आगे बढ़ा रही है और नीचे की ज़मीन पीछे की तरफ खिसक रही है किसी ट्रेडमिल की तरह।
‘‘नताशा तुम आगे की तरफ क्यों नहीं बढ़ रही हो?’’ बामर ने पुकारा।
‘‘जा तो रही हूं। लेकिन आखिर मैं उन फूलों तक क्यों नहीं पहुंच पा रही?’’ नताशा की भी हैरत से भरी आवाज़ आयी।
‘‘क्या वडाली की संगत में रहकर अम्माजान का दिमाग पलट गया है?’’ सैफ बड़बड़ाया।
उसी वक्त वडाली की दहशतभरी आवाज़ ने उनका ध्यान अपनी तरफ खींच लिया, ‘‘ब...बचाओ मुझे।’’
‘‘अब तुझे क्या हुआ?’’ सैफ ने पूछा।
‘‘म...मैं गिरने वाला हूं। कोई मुझे आकर थाम लो प्लीज़। वरना खाई में गिरकर मेरी हड्डियों का सुरमा बन जायेगा।’’ वडाली फिर रोहांसी आवाज़ में बोला। उन्होंने देखा वडाली एक जगह जाकर रुक गया था और कुछ इस तरह से अपने जिस्म को हरकत दे रहा था जैसे किसी बहुत पतले रास्ते पर अपने को बैलेंस कर रहा हो।
‘‘चिपरेलीन की आखिरी बोतल तो टूट गयी थी फिर इसे इतना नशा कैसे हो गया?’’ सैफ डा0बामर की ओर घूमा।
‘‘म...मैं क्या बताऊं।’’ डा0बामर भी हक्का बक्का था।
‘‘कमबख्तों क्या तुम लोग बहरे हो गये हो? मेरी फरियाद सुनाई नहीं देती।’’ वडाली फिर चीखा।
‘‘अरे लेकिन तू तो समतल ज़मीन पर खड़ा है। किधर से गिर जायेगा?’’ बामर भी चीखा।
‘‘तुम सब अंधे हो गये हो क्या? दिखाई नहीं देता।’’ वडाली भी चीखा, ‘‘मैं एक बहुत पतले रास्ते पर चल रहा हूं जिसके दोनों तरफ गहरी खाई है। अरे कोई तो मुझे बचा लो।’’ वह लगभग रो देने वाली आवाज़ में कह रहा था।
‘‘मुझे पक्का यकीन है कि खज़ाना न मिलने की मायूसी ने इसका दिमाग पलट दिया है।’’ बामर ने ख्याल ज़ाहिर किया।
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Monday, May 10, 2021

हरस का खज़ाना


नताशा और वडाली की शादी हो चुकी थी। और शादी के बाद उन्हें आटे दाल का भाव भी मालूम हो गया था। मालूम भी क्यों न होता, नताशा को तो अरबपति रफीक मस्तान तलाक देकर अपनी सारी प्रापर्टी से बेदखल करके पाई पाई का मोहताज बना चुका था जबकि वडाली चूंकि उसी कंपनी में काम करता था सो बिना रसीदी टिकट बाहर होने के बाद अब चंदे की रसीद खरीदने के भी पैसे नहीं थे।

‘‘मैं कहती हूं कोई बड़ा बैंक लूटने की कोशिश करो वरना गुज़ारा चलना मुश्किल है।’’ नताशा ने होंठों की लिपस्टिक सही करते हुए आठवीं बार ये जुमला सुनाया और बर्तन धोता हुआ वडाली झल्ला गया।
‘‘बैंक कोई मेरे फूफा का घर है जो मुंह उठाया और चले गये। तुम्हें पता है अब बैंकों में कितनी सिक्यिोरिटी होने लगी है। पता नहीं कहां से करमजली थुकहरी औरत मेरी किस्मत में आकर बैठ गयी।’’ जो मुंह कभी नताशा को डार्लिंग और स्वीटहार्ट कहते नहीं थकते थे आज उन ही से मूसलाधार जली कटी निकल रही थी।
‘‘अरे तो फिर गुज़ारा कैसे होगा? मेरा मेकअप बाक्स पूरा खाली हो चुका है।’’ नताशा सर पर हाथ धरे बैठी थी और सामने मेकअप बाॅक्स खुला हुआ रखा था।
‘‘दो दिन पहले पूरा सामान खरीदा था। आज खाली भी हो गया। ऐसे कैसे चलेगा।’’ वडाली ने ठंडी लंबी सी साँस ली और साथ ही अपने माथे पर एक चपत भी रसीद कर दी।
‘‘रहने दो डार्लिग अब मैं बिना मेकअप के ही रहूंगी। तुमको और परेशान नहीं करूंगी।’’ नताशा के लहजे में प्यार ज़रूर था लेकिन उस प्यार भरी आवाज़ को निकालने में नताशा ने जो दाँत पीसे थे उसकी आवाज़ बर्तनों की खड़खड़ाहट के बावजूद वडाली के कानों तक पहुंच गई।
‘‘अरे रे ऐसा जुल्म भी मत करना। अब क्या हार्ट अटैक पड़वाओगी बिना मेकअप की शक्ल दिखलाकर।’’ वडाली घबराकर बोला, ‘‘मैं कोशिश करता हूं। कहीं से फाईनेन्स का जुगाड़ करता हूं। काश कि तुम्हें रफीक मस्तान को मारने में कामयाबी मिल जाती तो आज हम ऐश कर रहे होते। लेकिन तुमसे एक काम भी ढंग का नहीं हुआ।’’ वह एक बार फिर बड़बड़ाने लगा। उसका यूं बड़बड़ाना अब नताशा से झेला नहीं जा रहा था लेकिन अब दोनों को एक दूसरे को झेलना मजबूरी बन चुका थी।
‘‘तुम मेरे ऊपर ब्लेम करना छोड़ो और बर्तन ढंग से साफ करो। सुबह नाश्ते में रात की सब्ज़ी की बू आ रही थी।’’ नताशा लिपिस्टिक लगाना छोड़कर अब पर्स खोलने लगी। फिर उसने सिगरेट निकाली और दो तीन कश मार दिये।
वडाली ने उसे सिगरेट पीता देखा और मुंह बनाकर रह गया। उस औरत के साथ जबसे उसने शादी की थी उसकी नाक में दम हो चुका था। एक तो वह औरत किसी तरफ से लगती ही नहीं थी अजीब मर्दमार टाइप की थी।
उसने सोचा था कि उससे शादी करके वह रफीक मस्तान की अरबों की सम्पत्ति का मालिक बन जायेगा और खूबसूरत जवान बीवी अलग मिल जायेगी। लेकिन पहले सपने पर तो बुलडोज़र चल गया और दूसरा सपना जब हकीकत में बदला तो मालूम हुआ टाॅफी के चक्कर में ऐसी च्यूंगम निगल चुका है जो पहले ही कोई चूसकर जा चुका है।
‘‘मैं पूछती हूं बर्तन धोने में इतनी देर लगाओगे तो झाड़ू पोंछा कब करोगे?’’ इस बार नताशा की लताड़ उसे होश में ले आई और वह जल्दी जल्दी बर्तन धुलने लगा।
‘‘काश कि तुम रफीक मस्तान को मारने में कामयाब हो जाती तो आज ये बर्तन रोबोटिक्स मशीनें धो रही होतीं।’’ वडाली मायूसी के साथ फिर से पुराना राग अलापने लगा।
‘‘अब जो काम हो ही नहीं पाया उसके लिये रोने से फायदा? कुछ नया करना ही होगा। बैंक लूटने का प्लान ही सबसे बेहतर है।’’
‘‘आज के ज़माने में बैंक लूटना नामुमकिन है।’’ वडाली ने हाथ खड़े कर दिये।
‘‘इस दुनिया में नामुमकिन कुछ नहीं। फीरान को मारना भी नामुमकिन था। लेकिन मिस्टर परफेक्ट ने वह कर दिखाया। और उसकी अम्मा ने रफीक को मुझसे बचा लिया। मेरा बस चले तो उसका खून पी जाऊं।’’ नताशा ने दाँत पीसे।
‘‘तो फिर ठीक है। चलो एक बार पूरे शहर का चक्कर लगाकर आते हैं और फिर देखते हैं कौन सा बैंक सबसे बेहतर होगा लूटने के लिये।’’
दोनों में सहमति बन गयी और थोड़ी ही देर में वे तैयार होकर अपने फ्लैट से नीचे उतर चुके थे।
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डा0 बामर को चार महीने की सज़ा के बाद बेल मिल चुकी थी। जेल में पूरे चार महीने तक वह एक ही बात सेाचता रहता था और अब बेल मिलने के बाद जब वह एक रेस्टोरेंट में पहुंचा तब भी वही बात सोच रहा था।
ये वही बात थी जो शोतन ने उसे बतायी थी। यानि हरस का खज़ाना।
हरस का शायद टनों खज़ाना इस ज़मीन के किसी हिस्से में मौजूद था और जिस हिस्से में मौजूद था उसका पता गोल्डी के अलावा किसी को नहीं था। लेकिन गोल्डी तो पागल हो चुका था।
उसने ठंडी साँस ली और किसी बकरे की तरह अपना मुंह चलाने लगा। मुंह इसलिए चला रहा था क्योंकि भूख ज़ोरों की लगी थी और जिस रेस्टोरेंट में बैठा था उसका वेटर शायद घोंघे की खानदान से था। आर्डर लेकर जो गया तो अभी तक वापस नहीं लौटा था।
बोरियत दूर करने के लिये उसने इधर उधर नज़रें दौड़ाना शुरू कर दीं। और फिर एक औसत उम्र के जोड़े पर जाकर उसकी नज़र ठहर गयी जिसमें औरत अच्छी खासी खूबसूरत थी। मर्द कैसा था इससे उसे कोई मतलब भी नहीं था। सबसे खास बात ये कि जैसे ही औरत की नज़र उसकी नज़र से टकराई उस खूबसूरत हसीना ने मधुर मुस्कान उसके ऊपर निछावर कर दी।
एक मर्द को और चाहिए भी क्या होता है। इस मुस्कुराहट ने उसे चारों खाने चित कर दिया। लेकिन उस औरत के साथ बैठा मर्द कौन था?
‘शायद उसका भाई है।’ उसने देखा औरत लगातार उसे देखकर मुस्कुरा रही थी। फिर वह इशारे भी करने लगी। पास आने के इशारे। एक मर्द को औरत से और क्या चाहिए होता है। वह तुरन्त अपनी सीट से उठा और उनके पास पहुंच गया।
‘‘जी आपने मुझे बुलाया?’’ उसने पूरी शालीनता के साथ पूछा।
‘‘जी हाँ। मेरी अपने साथी से शर्त लगी थी आप प्लीज़ बैठिए।’’
वह फौरन खाली कुर्सी पर बैठ गया और पूछने लगा, ‘‘कैसी शर्त।’’
मैंने शर्त लगायी थी कि आप की शक्ल और बाॅडी पूरी तरह एक्स मोंटी से मिलती है लेकिन मेरा साथी इससे सहमत नहीं।’’
सुनते ही डाक्टर बामर कढ़ाही में पड़े भटूरे की तरह फूल गया। अब एक्स मोंटी से तो उस ज़माने का बच्चा बच्चा वाकिफ था। एक्शन फिल्मों का सुपरस्टार। उसके नाम से ही फिल्में हिट हो जाती थीं।
‘‘मैं कहता हूं ये छछूंदर एक्स मोंटी के अंगूठे के बराबर भी नहीं।’’ औरत का साथी गुर्राकर बोला। और डा0बामर को उसपर बेतहाशा गुस्सा आ गया। हालांकि बड़ी मुश्किल से उसने उस गुस्से पर काबू पाया वरना उसकी इमेज औरत की नज़र में तो खराब हो ही जाती।
‘‘तुम्हारे कहने से क्या होता है - वडाली। ये एक्स मोंटी का डुप्लीकेट है तो है।’’ औरत अपनी बात पर अड़ी थी।
‘‘नताशा! तुमको आदमी पहचानने की अक्ल ही ऊपर वाले ने नहीं दी है। मैं फिर कहता हूं ये आदमी छछूंदर का दूसरा भाई है। अरे अगर इसके सामने गली का कुत्ता भी तेज़ आवाज़ में भौंक दे तो इसकी ... गीली हो जायेगी।’’ वडाली बायीं आँख दबाकर बोला।
इतनी बेइज़्ज़जी के बाद तो किसी का भी दिमाग आउट हो सकता था तो डा0बामर का फिर क्यों न होता। उसने झपट कर वडाली का गरेबान थाम लिया।
लेकिन दूसरे ही पल उसके हाथ पैर ढीले हो गये क्योंकि कोई नुकीली चीज़ उसकी पसली में चुभने लगी थी। और चुभाने वाला वडाली ही था।
‘‘बेटा गरेबान छोड़ दे वरना यहीं बैठा बैठा ऊपर पहुंच जायेगा। ये स्पेशल खंजर है अन्दर तक काट भी डालेगा और खून भी नहीं टपकेगा। पोस्टमार्टम से पहले घाव का पता भी नहीं चलेगा।’’ वडाली की धीमी ठंडी आवाज़ डा0 बामर के कानों में पहुंची और उसके हाथ पैर ठंडे हो गये। वो एक साइंटिस्ट था और लड़ाई भिड़ाई से दूर दूर तक उसका नाता नहीं था।
ये तो साफ हो ही गया था कि दोनों कुछ लुटेरे टाइप के प्राणी हैं।
‘‘त..तुम लोग क्या चाहते हो?’’ उसने हांफते हुए पूछा।
‘‘हम चाहते हैं तुम हमारा बिल भर दो।’’ नताशा एक अदा के साथ बोली।
‘‘व...वो तो मैं यूही भर दूंगा। इसके लिये च...चाकू की क्या ज़रूरत।’’ वह कांपते हुए बोला।
‘‘सिर्फ बिल भरने से काम नहीं चलेगा छछूंदर। तुझे हम लोगों के आठ दस दिन के खर्चे का भी इंतिज़ाम करना होगा। हमने पहले सोचा बैंक लूटा जाये लेकिन उसमें रिस्क ज़्यादा है। सो अब तुम्हारे जैसे आसामियों से काम चलाना पड़ेगा।’’
‘‘पर्स इसका काफी भारी लग रहा है। लगता है हमारे पूरे महीने का जुगाड़ हो गया।’’ दूसरी तरफ से नताशा उसका पर्स टटोल रही थी।
उधर डा0 बामर किसी और ही धुन में था। कुछ सोचकर उसके चेहरे पर एक चमक आ चुकी थी। वह धीरे से बोला, ‘‘मेरे पास एक प्लान है अगर कामयाब हो गया तो तुम लोगों को जिंदगी भर किसी को लूटने की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी।’’
‘‘कैसा प्लान?’’ वडाली उसे घूरकर बोला। उसकी बात पर नताशा भी चौंक पड़ी थी।
‘‘ऐसे नहीं।’’ डा0बामर आगे झुककर धीमी आवाज़ में बोला, ‘‘इतनी ज़रूरी बात न तो चाकू की नोक पर होती है और न रेस्टोरेंट जैसे किसी पब्लिक प्लेस पर। आजकल किस रेस्टोरेंट की दीवार में कौन सा माईक छुपा है कोई नहीं जानता।’’ वह धीरे से पूरी राज़दारी के साथ बोल रहा था।
‘‘तो फिर कहीं और चलते हैं। लेकिन बिल तो तुमको ही पे करना पड़ेगा। हमारे पास फूटी कौड़ी नहीं है।’’ वडाली सर हिलाते हुए बोला।
‘‘हां वो तो मैं बोल ही चुका हूं।’’ वडाली ने अपना चाकू वापस जेब में रख लिया। फिर डा0बामर ने अपना और बाकी दोनों को बिल चुकाया और तीनों उठ खड़े हुए।
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Monday, May 3, 2021

महावीर सीरीज़ - सूचना

 प्रिय पाठकों। नमस्कार। मेरा यह ब्लॉग चौदहवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है।  बीच में कुछ समय निष्क्रिय भी रहा लेकिन गूगल की मेहरबानी से गायब नहीं होने पाया।  ब्लॉग आपकी सेवा में रोचक नई नई कहानियाँ पेश करता रहेगा इसका आपसे वादा है।  लेकिन आप में से काफी लोग उपन्यास भी पढ़ने के इच्छुक अवश्य होंगे तो मैंने इसे ध्यान में रखते हुए एक अनोखे कैरेक्टर महावीर (मिस्टर परफेक्ट) की रचना की है और फिलहाल इस सीरीज़ के तीन उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं।  चूंकि उपन्यास लिखना अच्छा ख़ासा समय लेता है और पापी पेट को भी देखना होता है इसलिए उपन्यास को पूरी तरह फ्री न करना मजबूरी ही है।
अतः मेरे हर नए उपन्यास की झलकियां आपको ब्लॉग पर मिलेंगी किन्तु पूरा पढ़ने के लिए दिए गए लिंक से एक छोटी सी कीमत देकर आप ई बुक के तौर पर डाउनलोड कर सकते हैं या फिर थोड़ी ज़्यादा कीमत देकर पेपरबैक मंगवा सकते हैं। 

छोटी कहानियाँ पहले की तरह निःशुल्क ब्लॉग पर उपलब्ध होती रहेंगी।  धन्यवाद।  आपके सहयोग की अपेक्षा में। 
ज़ीशान हैदर ज़ैदी 

Wednesday, April 21, 2021

फीरान की जन्नत

 फीरान की जन्नत में वह कहानी समाप्त होती है जो अधूरा हीरो से शुरू हुई थी  और मिस्टर परफेक्ट में परवान चढ़ी। दुनिया का अत्याचारी शासक फीरान डा जिन्दाल की बनाई भविष्यद्रष्टा मशीन में अपने काल को देखता है तो उस बच्चे को पेट में ही अपंग कर देता है । लेकिन वह अपाहिज बच्चा महावीर अपनी हिम्मत के बल पर जवान हो जाता है और  दुनिया के सर्वाधिक शक्तिशाली व क्रूर शासक से टकरा जाता है. रहस्य रोमांच की नई दुनियाओं के सैर कराते हैं ये उपन्यास। 

सभी उपन्यासों के पेपरबैक व ई बुक दोनों संस्करण इस लिंक पर उपलब्ध हैं :  



Saturday, April 10, 2021

मिस्टर परफेक्ट

 मिस्टर परफेक्ट में वह कहानी आगे बढ़ती है जो 'अधूरा हीरो' से शुरू  हुई थी. जो इसी टाईटिल से पोथी डॉट कॉम पर उपलब्ध है.  दुनिया का अत्याचारी शासक फीरान डा जिन्दाल की बनाई भविष्यद्रष्टा मशीन में अपने काल को देखता है तो उस बच्चे को पेट में ही अपंग कर देता है । लेकिन वह अपाहिज बच्चा महावीर अपनी हिम्मत के बल पर जवान हो जाता है और

दुनिया के सर्वाधिक शक्तिशाली व क्रूर शासक से टकरा जाता है. क्या रहा इस संघर्ष का अंजाम? पढ़ें इस उपन्यास में।
उपन्यास का पेपरबैक संस्करण प्राप्त करने के लिये इमेज पर क्लिक करें 

Wednesday, March 10, 2021

अधूरा हीरो

 एक साहसी युवक जो हाथ पैरों से लाचार है।


लेकिन उसके पास बला का दिमाग है।
वह दुनिया के सर्वाधिक शक्तिशाली व क्रूर शासक से टकरा जाता है
जिसके हाथों में मौत एक खिलौना है। उसने मौत को भी अपने क़ाबू में कर लिया है।
और जो सिर्फ अपने मज़े के लिये लोगों को तड़पा तड़पाकर मारता है।
क्या होगा इस टकराव का अंजाम?
रहस्य रोमांच की नई दुनियाओं के सैर के लिए पढ़ते रहिये ये धारावाहिक। (click on blue title)

सम्पूर्ण उपन्यास एक साथ पेपरबैक संस्करण में निम्न लिंक पर उपलब्ध है। 


Tuesday, January 15, 2019

"मायावी गिनतियाँ " का पेपरबैक संस्करण प्रकाशित

एक लड़का जिसके लिये गणित दुनिया की सबसे बड़ी मुसीबत थी। वह एक ऐसे तिलिस्म में फंस जाता है जो गणितीय समीकरणों पर आधारित था। 
अब गणित उसके लिये जिंदगी और मौत का सवाल बन चुकी थी। 
क्या वह उस तिलिस्म से बाहर निकल सका? 
जबकि उसका शरीर भी उसके पास नहीं था। 
अधिक जानकारी के लिए इमेज पर क्लिक करें . 

Monday, December 31, 2018

'प्रोफेसर मंकी' का पेपरबैक संस्करण प्रकाशित

विज्ञान कथा संग्रह 'प्रोफेसर मंकी' का पेपरबैक संस्करण प्रकाशित हो चुका है. जिसमें  मंकी, नादान मुजरिम, क़ैदी ऊर्जा जैसी कई रोचक व लोकप्रिय विज्ञान कथाएं संकलित हैं. अधिक जानकारी के लिए इमेज पर क्लिक करें .

Saturday, August 16, 2014

एलुसिव नम्बर्स - फ्री डाउनलोड


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Wednesday, June 18, 2014

द ब्ल... डी सिबलिंग

रोमांचक पैरानॉर्मल कहानियों का संग्रह 
लेखक : ज़ीशान ज़ैदी 
‘The Blood...y Sibling’ is a collection of amazing paranormal thrillers that includes essence of SciFi mysteries. The book contains total nine stories having colours of fantasy, paranormal, SciFi, thrill, mystery with love and romance. In these stories readers will discover universe membranes, virtual crimes, reality of shadows, time controlling machines, romance of different dimensional pairs and bloody attraction of paranormal sibling.