फिर उसने एक सीटी बजायी। सीटी की आवाज़ सुनते ही जंगल के चौकीदार दौड़ते हुए वहाँ पहुंच गये। ज़ारा को देखकर उन्होंने अपने सर झुका दिये थे।
‘‘राजकुमारी जी प्रणाम।’’ एक चौकीदार सर झुकाये हुए ही बोला।
ज़ारा ने सर हिलाकर उसे जवाब दिया और पीको की तरफ देखने लगी।
अब तो उसकी हालत और ज़्यादा तबाह हो गयी थी। दरअसल शेर की ठोकर से पीको का सर और ज़्यादा कीचड़ में घुस गया था और पिछली दोनों टाँगें बुरी तरह फड़फडा रही थीं। लेकिन इस फड़फड़ाहट के बावजूद उसका खुद से बाहर निकलना मुश्किल ही लग रहा था।
‘‘उसे निकालो।’’ ज़ारा ने इशारा किया और चौकीदार दौड़कर उसे बाहर खींचने लगे। अच्छी खासी खींचतान के बाद आखिरकार वह बाहर खींच लिया गया।
अब वह बुरी तरह हांफ रहा था। कीचड़ पूरा आँख में घुस चुका था इसलिए उसे आगे पीछे का कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। फिर ज़ारा के इशारे पर चौकीदारों ने उसके मुंह पर पानी उंडेल दिया और अब वह हैरत से ज़ारा की बगल में खड़े शेर पर उसे हाथ फेरते हुए देखने लगा।
‘‘ये शेर भी मुझसे बहुत मोहब्बत करता है।’’ ज़ारा पहले की तरह शेर पर हाथ फेरते हुए बोली और अगर कोई और मेरे करीब आने की कोशिश करता है तो ये बुरा मान जाता है और आने वाले को चीर फाड़कर रख देता है। अरे हाँ, तुम मुझसे कुछ कहने वाले थे।’’ उसने चौंकने की एक्टिंग की।
‘‘ब...बाद में कहूंगा।’’
पीको हकलाते हुए बोला। इस वक्त उसके हवास हाथ पैरों की ही तरह उसके काबू में तो बिल्कुल नहीं थे।
‘‘कितना रोमाण्टिक माहौल है। ये जंगल, ये नाला और चारों तरफ गुलाब की खुशबू। साथ में ये खूबसूरत जंगल का राजा। कुछ तो बोलो हाबू के बेटे।’’ ज़ारा एक आँख दबाकर रोमाण्टिक
अंदाज़ में उसकी खिंचाई कर रही थी।
हाबू का बेटा क्या बोलता। उसके जिस्म में तो गुलाब के काँटे धंसे हुए थे और नाले में तो डूबते डूबते बचा था। रहा जंगल का राजा तो असली विलेन ही वही था। न वह सामने आता न उसकी ऐसी दुर्गत बनती। वही तो सारे फसाद की जड़ था। ऐसे में कहाँ का रोमांस और कैसा इज़हार इश्क। इस वक्त तो बस उसे अपने घर की ही बुरी तरह याद आ रही थी।
‘‘म...मैं वापस जाना चाहता हूं। बाकोल पर सब मेरा इंतिज़ार कर रहे हैं। मेरी मोमी कहती है कि घर से ज़्यादा देर बाहर नहीं रहना चाहिए और डोडी तो घर से ही निकलने से मना करते हैं। अच्छा बाद में फिर आऊंगा मिलने के लिये।’’ वह रोहांसी आवाज़ में कह रहा था।
‘‘ओ.के। तुम जाना चाहते हो तो बाय। और अच्छा यही होगा कि दोबारा मुझसे मिलने की कोशिश मत करना। मेरा दोस्त ये जंगल का राजा मुझसे बहुत मोहब्बत करता है और अगर कोई दूसरा मेरे करीब आने की कोशिश करता है तो ये बुरा मान जाता है। चीर फाड़कर रख देता है।’’ ज़ारा ने दोबारा उसे याद दिला दिया।
‘‘म...मैं अपने प्लेन को बुलाकर फौरन यहाँ से निकल जाता हूं।’’ पीको ने अपने पैरों की तरफ देखा और घबराकर बोला, ‘‘ओह। प्लेन बुलाने वाली डिवाईस तो इस भागदौड़ में कहीं टूटकर गिर गयी।’’
‘‘कोई बात नहीं। मैं तुमको पहुंचाने का इंतिज़ाम कर देती हूँ।’’ उसने चौकीदारों
को संबोधित किया,‘‘यहाँ पर कोई वाहन हो तो इसे इसके प्लेन तक पहुंचा दो।’’
‘‘अगर बुरा न मानें तो आपकी कार...’’ पीको ने कहना चाहा।
‘‘सॉरी अगर तुम मेरी कार की तरफ आओगे तो मेरा ये दोस्त तुम्हें चीर देगा। और मेरी कार गंदी अलग हो जायेगी। तुम बुरी तरह कीचड़ में गंदे हो चुके हो।’’ वह मुंह बनाकर बोली।
पीको ने अपना हुलिया देखा और मायूसी से सर हिलाया। इस बीच ज़ारा का इशारा पाकर एक चौकीदार दौड़ गया था और अब एक मिनी ट्रक नुमा वाहन लेकर वापस आ रहा था।
फिर दूसरे चौकीदार ने उसका पिछला हिस्सा खोला और ज़ारा ने पीको को उसमें बैठने का इशारा किया। नाचार होकर पीको को उसी खटारा दिखने वाले वाहन में बैठना पड़ा उसके बैठते ही चौकीदार ने दरवाज़ा बन्द कर दिया।
‘‘अरे यहाँ तो बहुत बदबू आ रही है। ये मुझे कहाँ बिठा दिया?’’ उसने पुकार कर कहा।
‘‘वो इस जंगल के मरे और सड़े हुए जानवरों को फेंकने का वाहन है। थोड़ी देर बर्दाश्त कर लो क्योंकि इस समय और कोई सवारी मौजूद नहीं।’’ ज़ारा ने पुकार कर कहा और पीको को वापस उतरने का भी मौका नहीं मिल सका क्योंकि वाहन उसे लेकर हवा में रफ्तार पकड़ चुका था।
ज़ारा ने एक गहरी साँस ली और अपने पालतू शेर के सर को प्यार से सहलाने लगी, ‘‘मेरे प्यारे शेखू उस कमबख्त को पहचान लो। दोबारा नज़र आया तो ज़रा भी मुरव्वत मत करना। फाड़ कर खा जाना।’’
शेखू इस तरह सर हिलाने लगा मानो उसकी बात समझ गया हो। फिर ज़ारा ने उसकी पीठ खास अंदाज़ में थपथपाई और उसका इशारा समझकर शेखू अपने रहने की जगह पर छलांग लगाता हुआ वापस हो गया।
अब ज़ारा भी अपनी कार पर बैठकर वापस हो रही थी। उसके और महल के बीच रास्ते की रुकावट दूर हो चुकी थी। पीको को कम से कम इतना सबक तो मिल ही गया था कि बहुत दिनों तक दोबारा आने की हिम्मत न कर पाता। वह शायद अपने सारे नौकरों को लेकर वापस हुआ था क्योंकि अब रास्ते में कोई भेड़ घास चरती हुई दिखाई नहीं दे रही थी।
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ज़ारा जब महल में दाखिल हुई तो सम्राट को बेचैनी के साथ टहलते पाया।
‘‘ज़ारा तुम कहाँ चली गयी थीं? हम यहाँ अजीब अजीब सी खबरें सुन रहे हैं। जिन्होंने
हमारे दिल को बेचैन कर दिया है।’’
‘‘कैसी खबरें पिताजी?’’
ज़ारा ने मुस्कुराकर पूछा।
‘‘सबसे पहले तो तुम्हारा गिल्लू ही खबर दे रहा था कि तुम्हारा किसी ने किडनैप कर लिया है। फिर कुछ नौकरों ने खबर दी कि महल तक आते आते तुम पता नहीं कहाँ चली गयीं।’’
‘‘नौकरों ने तो ठीक खबर दी लेकिन वह गिल्लू कमबख्त। अब मैं वाकई उस नालायक तोते की गर्दन मरोड़ दूंगी। गलत खबर क्यों देता है।’’ कहते हुए ज़ारा ने अन्दर जाने के लिये कदम बढ़ाया लेकिन सम्राट ने उसे रोक लिया।
‘‘कुछ तो ज़रूर हुआ है वरना तुम इतने गुस्से में अन्दर न दाखिल होतीं।’’
‘‘हाँ। वह कमबख्त तो पीछे ही पड़ गया है। लेकिन आज उसे अच्छा सबक मिल गया।’’
‘‘कौन? तुम किसकी बात कर रही हो?’’ सम्राट चौंक पड़ा।
ज़ारा ने उसे पीको के मिलने का पूरा किस्सा कह सुनाया।
सम्राट का चेहरा गुस्से से लाल हो गया, ‘‘उन लोगों की इतनी हिम्मत बढ़ गयी। मैं अभी एनाउंस करवा देता हूं कि बाकोल ग्रह का कोई भी व्यक्ति पाया जाये तो उसे देखते ही खत्म कर दिया जाये।’’
‘‘लेकिन वह लोग तो अब जानवरों की शक्ल में आ रहे हैं। इसलिए उन्हें पहचानना बहुत मुश्किल हो गया है।’’
‘‘हाँ पता नहीं कैसे उन लोगों ने यह तकनीक हासिल कर ली कि अपने को किसी भी जानवर की शक्ल में ढाल लेते हैं। काश कि यह तकनीक सूरैन के पास भी हो जाती।’’ सम्राट अपने हाथ मलते हुए बोला।
‘‘हमारे पास उससे बेहतर चीज़ें हैं। पिताजी अभी मैंने आपको शीले के इन्वेंशन के बारे में तो बताया ही नहीं।’’
‘‘शीले का इन्वेंशन?
उसने अब क्या बना डाला?’’ सम्राट ने सवाल किया और ज़ारा ने उसे शीले के खुद के बनाये यूनिवर्स और उसमें अपनी सैर का पूरा किस्सा बयान कर दिया।
सुनकर सम्राट का मुंह खुला रह गया।
थोड़ी देर तक वह खामोश रहा फिर कहने लगा।
‘‘शीले का इन्वेंशन वाकई में अद्भुत है। इसपर यकीन करना मुश्किल है। अपना यूनिवर्स बनाने का मतलब कि अमर होने का फार्मूला हासिल कर लेना।’’
‘‘हाँ, वह भी यही कह रहा था कि अगर हम उसके बनाये यूनिवर्स में दाखिल हो गये तो फिर दुनिया की कोई ताकत हमारा बाल बाँका नहीं कर सकती।’’
‘‘लेकिन खुद के बनाये यूनिवर्स में जाने के खतरे भी हैं।’’ सम्राट कुछ सोचकर बोला।
‘‘कैसे खतरे?’’
‘‘जो यूनिवर्स उसने बनाया है अगर उसमें कोई तकनीकी खराबी आ गयी तो मुमकिन है वहाँ जाने वाला हमेशा के लिये वहीं रह जाये। यानि अपने पुराने यूनिवर्स में लौट ही न पाये।
और अगर वह यूनिवर्स ही खत्म हो गया सपोज़ तो उसमें मौजूद तमाम लोग भी खत्म हो जायेंगे।’’
‘‘हाँ ये पासिबलिटी
तो है। शीले ने इस बारे में तो कुछ बताया ही नहीं। मैं अभी उससे पूछती हूं।’’ वह फौरन शीले को फोन लगाने लगी।
‘‘रहने दो। बाद में पूछ लेना।’’ सम्राट ने रोकना चाहा।
‘‘नहीं मेरा अभी पूछना ज़रूरी है क्योंकि शादी के बाद वह मुझे नये यूनिवर्स में ले जाने वाला है।’’ ज़ारा भी जिददी नंबर वन ही थी।
उसका फोन जल्दी ही रिसीव कर लिया गया और उसने सम्राट की शंका शीले से ज़ाहिर कर दी।
‘‘देखो ज़ारा, मैंने पहले ही तुमसे बताया है कि मल्टीवर्स
में यूनिवर्स के बुलबुले बड़े होते हैं और आखिर में फूट कर खत्म हो जाते हैं। तो मेरा बनाया यूनिवर्स भी प्रोग्रेस करता हुआ एक दिन खत्म हो जायेगा।
लेकिन उससे पहले ही हम एक नया यूनिवर्स तैयार कर लेंगे क्योंकि पुराने यूनिवर्स के खात्मे का समय हमें पहले ही मालूम हो जायेगा। जबकि जिस यूनिवर्स में हम रह रहे हैं उसके खात्मे का समय मालूम होने के बाद भी हम कुछ नहीं कर सकते और उसके खात्मे के साथ ही इसमें मौजूद सभी को खत्म हो जाना है।’’ शीले पूरी गंभीरता के साथ हक़ीक़त बयान कर रहा था।
‘‘रही बात तकनीकी खराबी की तो इस तरह के रिस्क तो पुराने यूनिवर्स में भी हैं। क्या पता कल कोई बड़ा उल्कापिंड
आकर सूरैन को ही खत्म कर दे। अब चूंकि मुझे अपने बनाये यूनिवर्स के सभी नियम अच्छी तरह मालूम हैं इसलिए सारी तकनीकी समस्याओं पर भी हमारी नज़र है। और मुझे यकीन है कि उसमें कोई खराबी नहीं आने पायेगी।’’ शीले पूरे भरोसे के साथ कह रहा था।
‘‘वेलडन! बेस्ट ऑफ लक।’’ सम्राट ने उसका हौसला बढ़ाया, ‘‘मैं तुम्हारी कामयाबी की दुआ करता हूं। अच्छा ज़ारा मैं चलता हूं। दरबार लग चुका है आज कुछ इम्पोर्टंट फैसले करने हैं।’’
ज़ारा ने सम्राट को हाथ हिलाकर विदा किया और फिर शीले से मुखातिब हो गयी।
‘‘मालूम होता है तुम अभी अभी महल पहुंची हो। वरना तुम्हारा फोन पहले ही आ जाता।’’
‘‘हाँ। तुम्हें आजकल अपने एक्सपेरीमेन्ट के अलावा और किसी का होश ही कहां है। तुम्हें क्या पता वहां से निकलने के बाद मेरे साथ क्या गुज़री।’’ ज़ारा शिकायती अंदाज़ में बोली।
‘‘मुझे सब मालूम है।’’ शीले हंसकर बोला, ‘‘पीको ने तुम्हारे साथ इश्क का इज़हार किया था ये भी मालूम है। और फिर तुमने उसकी कैसी दुर्गति बनायी इसका नज़ारा भी कर रहा था।’’
‘‘तो क्या तुम मेरे पीछे पीछे आ रहे थे?’’ ज़ारा चौंक कर पूछने लगी।
‘‘अरे नहीं। मैं तो अपनी लैब से बाहर ही नहीं निकला। बात ये है कि अपने नये यूनिवर्स में मैं पुराने यूनिवर्स के सारे सीन देख सकता हूं। मनचाहे। मैं अपनी लैब में बैठा पीको की हालत देखकर हंस रहा था। लेकिन तुम्हें इतने प्यार से उसे नहीं बुलाना चाहिए था। कसम से बहुत जीलियस फील कर रहा था।’’
‘‘अगर तुम जीलियस फील कर रहे थे तो मैं अभी पीको से सम्पर्क करके दो चार डायलाग और फेंक देती हूं। देखना चाहती हूं तुम जीलियस फील करते वक्त कैसे लगते हो।’’ ज़ारा एक आँख दबाकर बोली।
‘‘मेरे चेहरे से मेरे जज़्बात का पता नहीं चलता। बाय अब जाता हूं कुछ काम करने।’’ कहते हुए उसने फोन काट दिया और ज़ारा झल्लाकर रह गयी। उसका मन तो यही होता था कि शीले उससे बातें करने के अलावा दूसरा और कोई काम न करे।
थोड़ देर तक वह वहीं खड़ी झल्लाहट में दाँत पीसती रही फिर अन्दर की ओर बढ़ गयी।
अन्दर उसके कमरे में गिल्लू मियाँ मौजूद थे। पिंजरे के अन्दर। उसे देखते ही बेचैनी से पिंजरे के अन्दर ही टहलने लगे।
‘‘इतनी देर कहाँ लगा दी? ये वक्त है आने का? जवान लड़कियों को इतनी देर बाहर नहीं रहना चाहिए।’’ तोता बिल्कुल बड़े बूढ़ों के अंदाज़ में बोला।
‘‘अच्छा तो फिर कितनी देर रहना चाहिए?’’ ज़ारा ने पिंजरे को थपकी मारते हुए पलट कर पूछा।
तोता थोड़ी देर के लिये चुप हुआ फिर बोला, ‘‘मेरी नालेज के मुताबिक कहीं कोई टाइम बाउंडेशन तो बतायी नहीं गयी है। बस हर जगह यही कहा जाता है कि लड़कियों को देर तक बाहर नहीं रहना चाहिए।’’

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