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Wednesday, March 11, 2009

खयाली संगीतकार (2)

अंत में वह दिन आ गया जिसका जाफर जैक्सन को बरसों से इन्तिज़ार था. उसने कल्लू कबाड़ीवाले को पटाने में कामयाबी हासिल कर ली थी. कल्लू कबाड़ीवाला उसकी नज़र में बहुत पैसेवाला था. जिसके घर में फ्रिज, टी.वी., वाशिंग मशीन के साथ साथ कैक्टस के पौधे भी मौजूद थे जो हर बड़े घर में पाए जाते हैं. उसने कल्लू से अपने प्रोग्राम को स्पोंसर करने की बात की.

"देखो जी, तुम्हारे प्रोग्राम को स्पोंसर करने से हमारे कबाड़ के बिजनेस को कोई फायदा नहीं होना. इसलिए हम तुम्हारे प्रोग्राम को स्पोंसर नहीं करेंगे." कल्लू कबाड़ीवाले वाले ने जवाब दिया.
"अरे कल्लू भाई, फायदे के लिए प्रोग्राम स्पोंसर नहीं किया जाता बल्कि दिलचस्पी के लिए किया जाता है."
"हमारा भेजा मत चाटो जी. हमें तुम्हारे प्रोग्राम में कोई दिलचस्पी नहीं. हाँ एक मदद कर सकता हूँ. इधर हमारे कबाड़ में दो चार टूटे फूटे सितार, गिटार और तबले आ गए हैं. उन्हें उठाओ और अपने प्रोग्राम में बजा डालो."


जाफर जैक्सन दो मिनट तक सोचता रहा कि इस टेढी खीर को कैसे सीधा किया जाए. फिर चुटकी बजाकर बोला, "कल्लू भाई सुनिए तो मेरे प्रोग्राम को स्पोंसर करने में आपका बहुत बड़ा फायदा है."

"कैसा फायदा?" नाक भौं सिकोड़ते हुए कल्लू कबाड़ीवाले ने पूछा.
"इससे पहले मेरे जितने स्टेज प्रोग्राम हुए हैं. सब में पूरा स्टेज जूते चप्पलों और तरह तरह के कबाड़ से भर गया था. लोग मेरे गायन से खुश होकर ये चीज़ें मुझे सप्रेम भेंट करते हैं. इसीलिए मेरे प्रोग्राम से कबाड़ीवालों को बहुत फायदा होता है कल्लू भाई."

जाफर जैक्सन की बात सुनकर कल्लूभाई सोच में पड़ गए.
"ये तो तूने गजब की बताई. मैं तुम्हारे प्रोग्राम को स्पोंसर करने के लिए तैयार हूँ. ये मेरी तरफ से एडवांस रख लो." कल्लू भाई ने अपनी टूटी फूटी तिजोरी से दो रुपये निकाले और जाफर जैक्सन की जेब में डाल दिए.
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जाने माने संगीतकार जाफर जैक्सन का प्रोग्राम शुरू होने में बस कुछ क्षण शेष थे. प्रोग्राम को स्टेज तक पहुंचाने में जैक्सन के साथियों का बहुत बड़ा योगदान था. क्योंकि उन्होंने अपने हाथ से मैदान में भरे गोबर और कीचड को साफ किया था. दरअसल बहुत दिन से खाली पड़े इस मैदान में ग्वालों और उनकी भैंसों ने स्थाई कब्ज़ा जमा लिया था.

तालियों की गड़गडाहट के बीच जाफर जैक्सन ने अपने चमत्कारी हारमोनियम के साथ स्टेज पर प्रवेश किया. प्रोफेसर का दिया हारमोनियम जैक्सन की चाल में आत्मविश्वास पैदा कर रहा था. उसे अपनी सफलता पर पूरा विश्वास था. माथे पर बेल्ट उसने पहले ही बाँध ली थी.

हारमोनियम का स्विच उसने ऑन किया. दूसरे ही पल हारमोनियम एक मधुर आवाज़ बिखेर रहा था. पूरा मजमा भावविभोर होकर सुनने लगा. तालियों की गड़गडाहट की आवाजें जैक्सन को हवा में उडाने लगीं और वह अपने को अमेरिका का राष्ट्रपति समझने लगा.

"अरे अमेरिका का राष्ट्रपति मेरे सामने क्या चीज़ है. दूसरे देशों पर बम और मिसाइलें दाग दागकर ज़बरदस्ती बड़ा आदमी बना हुआ है. एक दिन मैं उसकी मिसाइलें दूसरे देशों पर फेंक कर उनपर अपना कब्ज़ा जमा लूँगा." ख्यालों में ही जाफर जैक्सन को हर तरफ मिसाइलें तेज़ आवाज़ के साथ उड़ती दिखाई दे रही थीं.
फिर उसे आभास हुआ की मिसाइलों की ये आवाजें ख्यालों में नहीं बल्कि हकीकत में निकल रही हैं. उसने चौंक कर हारमोनियम की तरफ देखा. प्रोफ़ेसर घनश्याम के इस आविष्कार ने जाफर जैक्सन के विचारों को कैच कर लिया था और अब मधुर संगीत की बजाये मिसाइलों की आवाजें निकालने लगा था.

फिर उन आवाजों में बम के धमाके भी शामिल हो गए और जाफर जैक्सन घबराकर स्टेज पर उछल कूद करने को मजबूर हो गया. घबराहट में उसके मस्तिष्क ने संगीत की धुनों को मिसाइल और बम के धमाकों से मिक्स कर दिया था. नतीजे में हारमोनियम से अजीबोगरीब धुनें पैदा होने लगी थीं. इस ऊबड़ खाबड़ धुनों से कदम मिलाते हुए डांस करने में उसके पसीने छूटने लगे थे. हाथ पैर और सर किधर जा रहे हैं उसे इसका भी होश नहीं था.

एकाएक हारमोनियम शांत हो गया. दरअसल उसकी बैटरी ख़त्म हो गई थी. बुरी तरह घबराया जाफर जैक्सन अब इन्तिज़ार कर रहा था पब्लिक की तरफ से आने वाले जूते चप्पलों और सड़े टमाटरों का. प्रोफ़ेसर घनश्याम के लिए उसके दिमाग में दुनिया की सारी गालियाँ इस तरह मंडरा रही थीं जैसे सूर्य के चारों तरफ ग्रह मंडराते हैं.

लेकिन यह क्या, पूरे मजमे पर तो शांति छाई थी. फिर यह शान्ति तालियों के ज़बरदस्त शोर से टूट गई. जाफर जैक्सन का यह टेढा मेढा संगीत पब्लिक के बीच हिट हो गया था. ज़िन्दगी में पहली बार जाफर जैक्सन को इतनी ज़बरदस्त सफलता मिली थी. फ़ौरन चार पांच म्यूजिक कंपनियों के डायेरेक्टरों ने उसे साइन कर डाला.
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लेकिन अगले दिन जाफर जैक्सन अपने ठिकाने से लापता हो गया था. दरअसल वह प्रो.घनश्याम के सामने मौजूद था.
"लो प्रोफ़ेसर, अपना हारमोनियम संभालो."
"क्यों? क्या इसमें कोई खराबी आ गई है?" हैरत से प्रोफ़ेसर ने पूछा.
"खराबी मेरे भेजे में आ गई थी, जो मैंने इसे बनवाया. कल तो मैं पब्लिक की बेवकूफी से पिटते पिटते बच गया. लेकिन काठ की हांडी बार बार नहीं चढ़ती. अगर पब्लिक को मालुम हो गया कि मैं धोखा कर रहा हूँ तो वह पल भर में मेरा बेडा गर्क कर देगी." जाफर जैक्सन ने जेब से बेल्ट निकालकर प्रोफ़ेसर के सामने रखी और बाहर की राह ली.
प्रोफ़ेसर बेवकूफों की तरह कभी हारमोनियम को तो कभी दरवाज़े की तरफ देख रहा था जहाँ से अभी अभी जैक्सन निकल गया था.

------समाप्त--------

लेखक - जीशान हैदर जैदी

Tuesday, March 10, 2009

खयाली संगीतकार (1)

होली के अवसर पर एक मजेदार कहानी

जाफर जैक्सन ने जैसे ही दरवाज़े से अन्दर दाखिल होने के लिए कदम बढाया, उसके सर पर कुछ टपकने लगा. दो पलों तक तो माजरा उसकी समझ में नहीं आया, फिर उसने टपकने वाले द्रव को ऊँगली में लपेट कर सूंघा. बहुत तेज़ सड़े अंडे की महक आ रही थी. उसने घबरा कर अपने सूट की तरफ देखा जिसका उस पीले द्रव ने सत्यानाश कर दिया था. बौखला कर वह आगे बढा और झोंक में चक्कर लगाती हुई गेंदनुमा वस्तु से टकरा गया. दूसरे ही पल करंट के तेज़ झटके ने उसे हवा में कूदने पर मजबूर कर दिया, और पल भर के अन्दर वह किसी के क़दमों तले लेट चुका था. मुंह उठाकर देखा तो प्रोफेसर घनश्याम का चेचक से दागदार चेहरा नज़र आया. प्रोफेसर को देखकर हमेशा उसके तनबदन में आग लग जाती थी, लेकिन मुसीबत यह थी कि उसके बिना काम भी नहीं चलता था.

"आओ जे जैक्सन, ये क्या रास्ता चलने का नया तरीका ढूँढा है तुमने?" प्रोफेसर घनश्याम ने उसे दोनों हाथों से उठाते हुए कहा.
"यह सब तुम्हारी लैब के ऊलजुलूल यंत्रों की हरकत है. ये क्या हाल बना रखा है तुमने अपनी लैब का?" चारों तरफ देखते हुए जाफर जैक्सन बोला. वाकई प्रो,घनश्याम की लैब किसी बड़े कबाड़खाने का मंज़र पेश कर रही थी. और प्रोफेसर के साइंटिस्ट होने के साथ उसके सनकी होने का भी इशारा कर रही थी.

"देखो, तुम मेरे काम में नुक्ताचीनी न करो तो अच्छा है. वरना मैं बहुत बुरी तरह पेश आऊंगा." प्रो.घनश्याम नाक भौं सिकोड़ता हुआ बोला.
"ओ.के. ओ.के. मैं तो मज़ाक कर रहा था." जाफर जैक्सन ने उसे शांत करते हुए कहा. अपना मतलब निकालने के लिए प्रोफेसर को खुश रखना ज़रूरी था.
"तुम कैसे टपक पड़े इस वक़्त?" प्रोफेसर घनश्याम ने उसे चश्मे के ऊपर से घूरते हुए पूछा.
"मैं पूछने आया था की तुमने मेरा काम किया या नहीं?"
"कैसा काम?"
"कितनी बार याद दिलाना पड़ेगा." जाफर जैक्सन ने सर पीटते हुए कहा, "अरे मुझे संगीतज्ञ बनना है. और इसके लिए मुझे तुम्हारी मदद चाहिए."
"अच्छा हाँ, याद आया. तुमने कहा था की जो धुन तुम अपने दिमाग में सोचते हो वह हारमोनियम पर निकल नहीं पाती. मेरी राय मानो और किसी अच्छे म्यूजिक स्कूल में दाखिला लेकर हारमोनियम सीख लो. सब ठीक हो जायेगा."

"यही तो हो नहीं सकता." जैक्सन ने बेबसी से कहा, "पूरी दुनिया जानती है कि मैं बहुत अच्छा संगीतकार हूँ. अब अगर मैंने किसी स्कूल में सीखना शुरू किया तो मेरी बनी बनाई इमेज टूट फूट जायेगी."

"ऐसा कुछ नहीं होगा. क्योंकि मैंने तुम्हारी समस्या का हल ढूंढ लिया है."
"सच!" ख़ुशी से जैक्सन लगभग चीख उठा और प्रोफेसर बुरा सा मुंह बनाकर अपना चेहरा पोंछने लगा. क्योंकि जैक्सन के चेहरे से अच्छा खासा थूक निकलकर उसके चेहरे पर पड़ा था.
"आओ. मैं तुम्हें अपना आविष्कार दिखाता हूँ जो मैंने खासतौर पर तुम्हारे लिए बनाया है." वह जैक्सन को लेकर एक कोने में पहुंचा जहाँ एक हारमोनियम रखा हुआ था. हारमोनियम के ऊपर एक छोटी सी बेल्ट भी दिखाई दे रही थी जिस पर रंग बिरंगे कई बटन लगे हुए थे.

"लो, ये बेल्ट तुम बाँध लो." प्रो.घनश्याम ने बेल्ट उठाकर जैक्सन की तरफ बढ़ाई.
"इतनी छोटी बेल्ट. ये तो मेरी कमर की आधी भी नहीं है."
"बेवकूफ, ये बेल्ट कमर पर नहीं माथे पर बाँधी जायेगी."
जाफर जैक्सन ने बेल्ट अपने माथे पर लगाईं और प्रोफ़ेसर ने हारमोनियम पर लगा एक स्विच दबाया. दूसरे ही पल हारमोनियम अलग अलग सुरों में बजने लगा.
"आयें! ये हारमोनियम अपने आप कैसे बज रहा है?"
"अपने आप नहीं बल्कि इसे तुम बजा रहे हो."
"देखिये प्रोफ़ेसर साहब, मैं शक्ल से बेवकूफ लगता हूँ इसका ये मतलब नहीं की आप मेरा मज़ाक उड़ायें. हारमोनियम मेरे हाथों से बीस फिट दूर है. फिर मैं उसे कैसे बजा सकता हूँ?" जाफर जैक्सन बुरा मानकर बोला.

"पूरी बात सुनो गधे. ये हारमोनियम मेरा अनोखा आविष्कार है. मस्तिष्क से निकलने वाली बीटा तरंगों के आधार पर यह कार्य करता है. थ्योरी यह है की जब हम कुछ सोचते हैं तो हमारा मस्तिष्क विशेष प्रकार की तरंगें उत्पन्न करता है. ये बीटा तरंगें कहलाती हैं. इन तरंगों का उतार चढाव हमारे विचारों पर निर्भर होता है. तुम्हारे माथे पर जो बेल्ट बंधी है वह तुम्हारी बीटा तरंगों को हारमोनियम पर रिसीव कर रही है. इसलिए जैसे ही तुम कोई धुन सोचोगे, बीटा तरंगों की मदद से हारमोनियम उसे अपने आप बजा देगा." अपनी बात ख़त्म करके जब प्रोफ़ेसर घनश्याम जाफर की तरफ घूमा तो जाफर अपना सर पकड़कर नीचे बैठ चुका था.

"तुमने जो कुछ भी बताया प्रोफ़ेसर, सब मेरे सर से दो फिट ऊपर निकल गया है. खैर ये हारमोनियम बनाने का बहुत बहुत शुक्रिया. अब मैं इसकी मदद से दुनिया का नंबर वन संगीतकार बन जाऊँगा." जाफर जैक्सन ने आगे बढ़कर हारमोनियम उठा लिया.
"ठहरो. पहले इसे बनाने की फीस तो देते जाओ."
"जब मैं दुनिया का नंबर वन संगीतकार बन जाऊँगा तो अपनी रोयल्टी का आधा हिस्सा तुम्हारे नाम कर जाऊँगा." कहकर जाफर बाहर निकल चुका था. प्रोफ़ेसर अपना सर पकड़कर बैठ गया.
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अपने कमरे में बैठा जाफर जैकसन प्रोफ़ेसर घनश्याम के दिए हारमोनियम को घूर रहा था. "कहीं प्रोफ़ेसर ने मुझे उल्लू तो नहीं बना दिया. इसे चेक करके देखना चाहिए." उसने पट्टी अपने सर पर बाँधी और हारमोनियम का स्विच ऑन कर दिया. इस समय माइकेल जैक्सन के किसी रॉक एन रोल की धुन उसके दिमाग में उभर रही थी. स्विच ऑन करते ही हारमोनियम बज उठा. जाफर जैक्सन ख़ुशी से पागल हो उठा. क्योंकि हारमोनियम बाकायदा रॉक एन रोल की धुन निकाल रहा था. ठीक वही धुन जो जैक्सन के दिमाग में बज रही थी. अपनी धुन पर जैक्सन ने खुद ही डांस करना शुरू कर दिया. वह ऑंखें बंद करके मस्ती में नाच रहा था.
थोडी देर बाद उसे महसूस हुआ की कोई और भी उसके साथ कमरे में नाच रहा है.
"ओह! लगता है मेरी मस्त म्यूजिक सुनकर सुंदरियाँ पधारी हैं." उसने आँखें खोलीं और कमरे का नज़ारा देखकर हक्का बक्का रह गया. पूरा कमरा पड़ोस के असलम भाई की बकरियों से भर गया था. जो उसके संगीत के जोश में भरी पूरे कमरे का सत्यानाश कर रही थीं.

एक ठंडी सांस लेकर जाफर जैक्सन हारमोनियम पर गिर गया.
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