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Tuesday, February 11, 2014

नरबल का रहस्य - दूसरा अंतिम भाग (बाल विज्ञान कथा)

-ज़ीशान हैदर ज़ैदी  

''क...कौन हो तुम? घबराये हुए रवि के मुंह से अनायास ही निकला। 
''इतनी जल्दी भूल गये! अभी तो तुम मुझसे खेल रहे थे।" वह अपनी भयानक आवाज़ में बोला। 
''ल..लेकिन, वह तो कम्प्यूटर गेम था। और उसमें मैंने तुमको मार दिया था।" 

''वह कम्प्यूटर गेम नहीं मुझे इस दुनिया में लाने का तरीका था। उस गेम के बनते समय अन्दर हमने कुछ ऐसे बदलाव कर दिये हैं कि जैसे ही कोई उसके द्वारा नरबल को मारता है, वह नरबल इस दुनिया में प्रवेश कर जाता है।"

''लेकिन वह गेम तो जापान की एक कंपनी ने बनाया है?" रवि ने अविश्वास के भाव में कहा।
''हाँ। गेम उसी ने बनाया है। लेकिन उस कंपनी को भी नहीं मालूम कि उसके गेम में एक अज्ञात दुनिया के वासियों ने अपने मनमाफिक बदलाव कर दिये हैं।" 

Monday, February 10, 2014

नरबल का रहस्य - भाग 1 (बाल विज्ञान कथा)

-लेखक : ज़ीशान हैदर ज़ैदी  

अपने सामने मौजूद उस खतरनाक दैत्य को मारने के लिये रवि ने फुर्ती के साथ गन सीधी की। गन से पीले रंग की आग निकली और सामने मौजूद दैत्य उसकी आग में भस्म हो गया। 

''याहू!" रवि ने अपने हाथों को हिलाकर खुशी का नारा लगाया, ''बस अब आखिरी दरवाज़ा और उसके बाद कामयाबी मेरी मुटठी में होगी। 

आखिरी दरवाज़ा धीरे धीरे खुल रहा था। 

दरवाज़ा खुला और इसी के साथ ताबड़तोड़ अन्दर से गोलियां चलने लगी। अगर रवि ज़रा भी चूकता तो गया था काम से। उसका बचना बहुत ज़रूरी था। क्योंकि वह उन पचास बच्चों की उम्मीदों का सहारा था जो नरबल की क़ैद में थे।