Friday, May 29, 2026

सूरैन का हीरो - भाग 36

अभी उस काईडोर के पास पहुंचे हुए हाबू को आधा घण्टा भी नहीं हुआ था और उसने उसकी नाक में दम कर दिया था।


अब तक बाकोल पर बोली जाने वाली सारी गालियां वह हाबू की खिदमत में पेश कर चुकी थी। जिसके नतीजे में हाबू का लटका हुआ मुंह और लटक गया था।

‘‘मैं कहती हूं तुमने उस कुत्ते के पिल्ले के लिये मेरी जिंदगी बरबाद कर दी, और उसने बदले में क्या दिया। इससे अच्छा तो मेरा महबूब था। काश कि तुमने उसे अपने पिल्ले की जगह पर अपनी गद्दी पर बिठा दिया होता तो हम दोनों तुम्हारे पाँव धो धो कर पीते।’’ काईडोर अफसोस के साथ कह रही थी।

‘‘क्या बकवास है।’’ हाबू गुर्राया, ‘‘बाकोल का शहंशाह अपने बेटे को गद्दी सौंपेगा या किसी ऐरे गैरे को। उसने जल्दी कर दी वरना मेरे बाद तो उसे मिलनी ही थी बाकोल की गद्दी।’’

‘‘अब तो वह हमेशा के लिये निकल गयी तुम्हारे हाथों से।’’ काईडोर ने चिढ़ाया।

‘‘मेरी गद्दी पर सिर्फ मैं बैठूंगा और कोई नहीं। बहुत जल्द दोबारा।’’ हाबू गुर्राया।

‘‘लेकिन कैसे? तुम्हें तो कैद में सड़ने के लिये छोड़ दिया गया है। जो तुमने मेरे साथ किया था। ऊपर वाला भी खूब तबीयत से बदले लेता है।’’

‘‘मैं कहता हूं बकवास बन्द करो और मुझे यहाँ से निकलने की तरकीब सोचने दो।’’ वह झल्ला कर बोला।

‘‘तो सोचो। मैं किसी के सोचने पर कैसे रोक लगा सकती हूं। मैं तो खुद एक कैदी हूं। बेचारी मुसीबत की मारी।’’ काईडोर नाक के बल बोली और हाबू ने झल्लाकर अपना वही ताकतवर हाथ एक दीवार पर मारा।

और पहले की तरह वह दीवार भी थोड़ी दूर तक भरभरा कर ढह गयी।

और इसी के साथ वहाँ ठंडी हवा का तेज़ झोंका आया।

लगता है इस बार मैंने जेल की बाहरी दीवार तोड़ दी है। उसने बाहर झांकते हुए कहा जहाँ से खुले मैदान में सितारे साफ नज़र रहे थे।

अब उन्हें एहसास हुआ कि इस वक्त बाकोल पर रात का वक्त हो चुका है।

‘‘अब तुम लोग यहीं रुको, मैं जा रहा हूं। फरार होकर।’’ हाबू ने शीबू और काईडोर की तरफ देखकर कहा।

‘‘क्यों? हम लोगों के साथ में फरार होने में क्या बुराई है? समझा। तुम्हें अभी भी ये डर है कि मैं तुम्हें हराकर फिर से बाकोल की गद्दी हथिया लूंगा।’’ शीबू व्यंग्य के साथ बोला।

‘‘बकवास मत करो। तुम हाबू को क्या हराओगे। तुम ताकत में मेरी उंगली के बराबर भी नहीं हो। मैं अकेले इसलिए फरार होना चाहता हूं कि तुम्हारे साथ फरार होने में पीको मुझे कहीं छुपने से पहले ही ढूंढ निकालेगा।’’

‘‘वो तो तुम्हें अकेले भी ढूंढ सकता है। और ढूंढकर अपने को यतीम कर सकता है।’’ काईडोर बोली।

‘‘तुम चुप रहो। तुम्हारी आवाज़ मुझे ज़हर लगती है।’’ हाबू झल्लाकर बोला। फिर थोड़ी देर चुप रहने के बाद बोला, ‘‘सुनो मेरे वैज्ञानिकों ने मेरे जिस्म में ऐसी डिवाईस फिट कर दी है कि ज़रूरत पड़ने पर मैं अपने को तमाम डिटेक्टिव डिवाईसेज से छुपा सकता हूं। इसलिए मैं यहाँ से निकला चला जाऊंगा और किसी को पता ही नहीं चलेगा कि मैं कहाँ हूं। देखो मैं अभी तुम लोगों की नज़रों से गायब हो जाता हूं।’’ कहते हुए हाबू ने अपने जिस्म को पहले की तरह उमेठना शुरू कर दिया।

लेकिन उसी वक्त अचानक उस खुले सूराख से तेज़ हवा का झोंका आया, और उन्हें ऐसा ही लगा कि सब उस झोंके में उड़ जायेंगे।

काईडोर के साथ तमाम लोगों ने हैरत से देखा। कोई चीज़ उस सूराख से अन्दर दाखिल हुई थी और वो चीज़ किसी लट्टू की तरह तेज़ी से घूम रही थी।

‘‘लगता है फरार होने से पहले ही तेरे बेटे को खबर लग गयी है। और उसने किसी को भेजा है तुझे किसी मज़बूत जेल में ले जाने के लिये।’’ शीबू ने अंदाज़ा लगाया जिसके जवाब में हाबू खामोश रहा। वह गौर से उस गोल तेज़ी के साथ घूमने वाली चीज़ को देख रहा था।

कुछ सेकंडों बाद वह गोल घूमने वाली चीज़ इस तरह झटके के साथ रुक गयी मानो किसी ने उसके रिमोट में ऑॅफ का स्विच दबा दिया हो।

ये वास्तव में गोले जैसी ही कोई रचना थी जो ऊपर नीचे से चपटी थी।

फिर उस गोले का एक हिस्सा किसी शटर की तरह खुला और उसमें से एक व्यक्ति नीचे कूद गया।

‘‘मंदोरा!’’ हाबू खुशी से बोल उठा।

‘‘जी हुज़ूर!’’ मंदोरा सर झुकाकर बोला, ‘‘आपको यहाँ से ले जाने आया हूं।’’

‘‘तू मेरे मैसेज का जवाब क्यों नहीं दे रहा था?’’ हाबू बेताबी के साथ पूछने लगा।

‘‘मैं आपकी सेफ्टी के इंतिज़ाम में लगा हुआ था। अब जल्दी चलें। मैंने आगे का प्लान सोच लिया है।’’ वह हाबू का हाथ थामकर उस गोले की तरफ बढ़ा जो दरअसल बाकोल का स्पेशल यान ही था।

ऐसा यान जिसे डिटेक्टिव रेज़ के द्वारा पकड़ना नामुमकिन था।

‘‘मैं कहता हूं हमें भी ले चलने में क्या हर्ज है। एक से भले तीन।’’ शीबू मरी मरी आवाज़ में बोला।

हाबू एक पल को ठिठका फिर हंसकर बोला, ‘‘ठीक है जाओ। लेकिन इसलिए नहीं कि हाबू को तुम्हारे जैसे फटीचरों की मदद चाहिए। बल्कि इसलिए कि मैं तुम्हें दिखाना चाहता हूं कि हाबू अपनी खोई हुई सल्तनत को दोबारा कैसे हासिल करता है।’’

फिर शीबू और काईडोर भी उसी छोटे यान में सवार हो गये और यान फिरकी की तरह नाचता हुआ बाकोल के वायुमंडल में विलीन हो गया।  

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सरयू के किनारे के चप्पे चप्पे को छान मारा गया लेकिन अमरीका की दूसरी आँख को मिलना था मिली। होती तो मिलती।

‘‘गाँववालों! यहाँ पर इसका मतलब यही इकलौती आई गिरी थी जो इस चार सौ बीस के हत्थे लग गयी।’’ आखिरकार रिपोर्टर ने नतीजा निकला।

‘‘तो इसका मतलब कि हमें इसको पूरी हिफाज़त के साथ रखना पड़ेगा। वरना कभी अगर अमरीका माँग बैठा तो हम कहां से देंगे।’’ मास्टर बिन्द्रादीन फिकरमन्द लहजे में बोला। आखिर वह गाँव का प्रधान भी था, इसलिए उसी की जिम्मेदारी सबसे ज़्यादा बनती थी।

‘‘अमरीका को पता चलेगा तब माँगेगा। हम वहाँ तक खबर ही जाने देंगे।’’ इबारत हुसैन धीमी आवाज़ में बोले।

ये अलग बात है कि उनकी धीमी आवाज़ भी चार कोस दूर तक पहुंच जाती थी।

‘‘खबर तो अब तक पहुंच भी चुकी है।’’ बिक्कू बोला।

‘‘वह कैसे?’’ मास्टर बिन्द्रादीन चौंक कर पूछने लगा।

‘‘अरे इस हरामी रिपोर्टर ने पूरी दुनिया में न्यूज़ फैला ही दी है न।’’ बिक्कू दाँत पीसकर बोला।

‘‘नहीं भाईयों। मेरा चैनल तो बस लोकल एरिये में ही न्यूज़ दिखाता है।’’ रिपोर्टर जल्दी से सफाई पेश करने लगा, ‘‘मेरा चैनल यू टयूब वाला चैनल है न।’’

गाँव वालों ने सहमति में सर हिला दिया। क्योंकि ज़्यादातर को यही नहीं पता था कि यू टयूब साईकिल में पड़ने वाली ट्यूब है या खुजली में लगाने वाली ट्यूब।

‘‘फिर भी मैंने सुना है कि ये अमरीका वाले इतने एडवांस होते हैं कि घर में पैदा होने वाले बच्चे की खबर बाप तक बाद में पहुंचती है और उन तक पहले पहुंच जाती है।’’ राम भरोसे अमरीका के बारे में कुछ ज़्यादा ही खबर रखता था।

‘‘अब जो है देखा जायेगा।’’ आखिरकार मास्टर बिन्द्रादीन फैसले पर पहुंचते हुए बोला, ‘‘ये गोला या अमरीका की आँख जो कुछ भी हो हमारे गाँव के एक मर्द के कब्ज़े में आया है इसलिए ये हमारी सम्पत्ति है। आखिर कटी हुई पतंग उसी की होती है जो उसे लूटता है।’’

‘‘इसलिए इसका मालिक मैं हुआ।’’ दल्लू खुश होकर बोला।

‘‘नहीं बे।’’ प्रधान ने उसे फौरन डपट दिया, ‘‘इस गोले के चक्कर में तूने पूरे गाँव को चूना लगाया है। इसलिए मैं अब पूरे गाँव को इस गोले का मालिक एनाउंस करता हूं।’’

प्रधान की बात पर पूरा गाँव तालियां बजाने लगा जबकि दल्लू का मुंह लटक गया।

‘‘सब मालिक तो बन गये, लेकिन इसका इस्तेमाल भी किसी को आता है? आखिर ये गोला और इसके अन्दर का बच्चा किस काम में आयेगा?’’ नब्बन ने सवाल ठोंका और सब खामोश हो गये। किसी को इसका जवाब पता ही कहाँ था।

‘‘ये सब बाद में देखा जायेगा। फिलहाल इसे किसी सुरक्षित जगह पर रख देते हैं।’’ मास्टर बिन्द्रादीन ने फिर फैसला किया।

‘‘जी हाँ। इस गाँव में सबसे सुरक्षित घर मेरा ही है। इसे वहीं रख देते हैं।’’ बहुत देर से खामोश कल्लू नाई इस बार बोल पड़ा।

‘‘जी इनका घर तो इतना सुरक्षित है कि गेट को छोड़कर कहीं से भी अन्दर घुस सकते हैं। मै खुद कई बार घुस चुका हूं।’’ कल्लू नाई के पड़ोसी टपाक से बोला। और कल्लू नाई उसे घूरने लगा। उसे अपनी पत्नी और पड़ोसी के चक्कर का शक तो था लेकिन कोई सुबूत नहीं था वरना खड़े खड़े वह उस्तरा फेर देता पड़ोसी की गर्दन पर।

‘‘मेरा ख्याल है कि इस गोले को मस्जिद में रख दिया जाये।’’ इबारत हुसैन ने अपनी बुलन्द आवाज़ में मशविरा पेश किया।

‘‘मस्जिद में क्यों? हमारे गाँव में मंदिर भी तो है। वहाँ रख देते हैं।’’ पंडित दीनानाथ भी कहां पीछे रहने वाले थे।

‘‘तुम लोग खामोश हो जाओ। इस गाँव के प्रधान होने की हैसियत से मेरा फैसला है कि ये गोला फिलहाल दल्लू के ही घर में रहेगा। लेकिन वहाँ अब कम से कम चार गाँव वाले बारी बारी से पहरा देंगे। और इसके इस्तेमाल की तरकीब निकालने की कोशिश करेंगे।’’

मास्टर बिन्द्रादीन के फैसले पर सब खामोश हो गये।

फिर थोड़ी देर बाद उनकी वापसी हो रही थी। उन चारों में एक नाम रिपोर्टर का भी था क्योंकि प्रधान की राय में वह उस गोले के इस्तेमाल की तरकीब ढूंढ सकता था।

फिलहाल तो रिपोर्टर को भूख लग रही थी। इसलिए वह जान बूझकर पीछे रह गया। और इंतिज़ार करने लगा कि सब निकल जायें तो बाज़ार के किसी ढाबे पर पहुंचकर पेट पूजा कर ले।

फिर जब सभी गाँव वाले नज़रों से ओझल हो गये तो वह एक ढाबे की तरफ चल पड़ा जो बाज़ार के दूसरी तरफ था।

अभी वह कुछ ही कदम चला होगा कि किसी ने उसके कंधे पर पीछे से हाथ रखा।

वह चौंक कर घूमा। हाथ रखने वाला कोई अजनबी था।

‘‘मान गये रिपोर्टर साहब आपको। क्या पर्दाफाश किया है उस चार सौ बीस बाबा और उसके जिन का।’’

‘‘जी आपका शुक्रिया।’’ रिपोर्टर फूल गया।

‘‘आपसे दो मिनट बात कर सकता हूं?’’

‘‘ज़रूर। लेकिन अभी तो बहुत ज़ोरों की भूख लगी है।’’ रिपोर्टर पेट पर हाथ फरकर बोला।

‘‘इस समय का खाना मेरी तरफ से। पहले खाना खाते हैं फिर बात करते हैं।’’ अजनबी बोला।

रिपोर्टर को तो मुंह मांगी मुराद मिल गयी। अब तो पेट भी भर जाता और जेब भी ढीली होती।

वह फौरन उसके साथ चल पड़ा। अब वह अजनबी बाज़ार से अलग किसी और रास्ते पर चल पड़ा था। शायद वह उसे अपने घर ले जा रहा था।

लेकिन फिर अचानक उस अजनबी ने फुर्ती के साथ रिपोर्टर के मुंह को किसी रुमाल से ढंक दिया। और रिपोर्टर को अरे कहने का भी मौका नहीं मिला और वह बेहोशी के गहरे कुएं में पहुंच गया।

---- जारी है

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