Monday, June 21, 2021

फीरान का झूला

 


उस आवाज़ के मुंह से यह सुनकर कि वे फीरान के झूले में प्रवेश कर चुके हैं, सभी हैरत में पड़ गये थे। अभी तक तो जो उन्होंने सुना था उसके मुताबिक तो वो एक खतरनाक जगह थी। लेकिन यहाँ तो सामने फूलों की घाटी नज़र आ रही थी जिसके एक कोने पर सोने का छोटा सा पहाड़ तो दूसरी तरफ रेनबो बिखेरता नीला आकाश। और साथ में उनकी खिदमत के लिये एक बौना गुलाम। बस बदसूरत था थोड़ा सा।

‘‘कितनी अजीब बात है।’’ थोड़ी देर बाद महावीर बोला।
‘‘क्या अजीब बात?’’ सैफ ने पूछा।
‘‘ये मेहनती बौना हमारी इतनी मदद कर रहा है और हमने इसे शुक्रिया भी नहीं कहा अभी तक। चलो इससे हाथ मिलाकर शुक्रिया कहते हैं।’’ कहते हुए महावीर बौने की तरफ भेजा।
‘‘हैलो मिस्टर खादिम तुम्हारा बहुत बहुत शुक्रिया।’’ महावीर ने शेकहैण्ड के लिये अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ाया लेकिन बौना पीछे हट गया।
‘‘खादिम को शोभा नहीं देता कि वह अपना हाथ मालिक के साथ मिलाये।’’ बौना पूरे विनय के साथ बोला।
‘‘अच्छा तुमको शाबाशी तो दे सकता हूं कंधा थपथपाकर।’’ कहते हुए महावीर फिर उसकी तरफ बढ़ा लेकिन बौना फिर पीछे हट गया।
‘‘नहीं। मेरा बदन हमारे मालिकों के लिये अछूत है।’’ वह फिर जल्दी से बोल उठा।
‘‘ये तो ऐसा अपने को बचा रहा है जैसे हमारे छूते ही पिघल जायेगा।’’ सैफ बड़बड़ाया।
महावीर ने आगे कुछ नहीं कहा और न ही उसकी तरफ बढ़ने की कोशिश की।
‘‘ये हमें अपने जिस्म से दूर रखने की कोशिश कर रहा है। आखिर क्यों?’’ इसबार उसने सैफ से कोडवर्डस में कहा।
‘‘मुझे लगता है कि यह चूंकि एक थ्री डी इमेज ही है इसलिए हमारे हाथ लगाने से वह इमेज बिगड़ सकती है।’’ कोडवर्डस में ही सैफ ने अपना ख्याल ज़ाहिर किया। ज़ाहिर है इस पूरे तामझाम के पीछे का दिमाग उनकी सारी बातें सुन रहा था। ऐसे वक्त में कोडवर्डस में ही बातें करना मुनासिब था।
‘‘मुझे इसके पीछे कोई और गहरा राज़ मालूम होता है।’’
‘‘तुम लोग यहीं बैठे मक्खियां मारते रहो बैल की औलादों। ऐसे निकम्मे लोग निकले हें खज़ाने की तलाश में। अब मैं अकेले जा रहा हूं सोना बटोरने।’’ अचानक वडाली ने बोलकर सभी को चौंका दिया।
उन्होंने देखा, कहने के साथ ही उसने सोने की पहाड़ी की तरफ दौड़ लगा दी थी।
‘‘अबे खुदाई किससे करेगा?’’ सैफ ने पुकारा।
‘‘अपने हाथों से।’’ दौड़ते हुए ही उसने जवाब दिया।
‘‘लगता है उसके हाथ हाथ नहीं बल्कि लोहे के बेलचे हैं। क्या तुम लोग उसका साथ नहीं दोगे? फड़वा और तसला बनकर?’’ सैफ ने नताशा और बामर की तरफ देखा।
नताशा ने बुरा सा मुंह बनाया, ‘‘हम खज़ाने की तलाश में यहां तक आकर एक गलती कर चुके हैं। अब इस बेवकूफी में और नहीं पड़ेंगे।’’ शायद अब नताशा सैफ और महावीर के सामने अपना लालच ज़ाहिर नहीं करना चाहती थी। पहले ही अच्छी खासी बेइज़्ज़ती हो चुकी थी।
‘‘हाँ। और क्या प्लेन तो तबाह हो गया। हम खज़ाना ले कैसे जायेंगे?’’ बामर ने भी हां में हां मिलायी।
‘‘खज़ाना मिल जाये तो दूसरा खरीद लेना। फिर उसी पर लादकर निकल जाना।’’ सैफ ने मशविरा दिया।
‘‘ये तो वही बात हुई कि मुर्गी खरीदकर उससे अंडा निकलवाया जाये या अंडा खरीदकर उससे मुर्गी निकलवाई जाये।’’ महावीर हंसकर बोला।
‘‘हम लोग खुद को यहां से निकाल ले जायें यही बड़ी बात है।’’ गोल्डी भी बोल उठा।
‘‘लेकिन हम लोग किसी अंडे के अन्दर थोड़ी न बन्द हैं।’’
‘‘क्या पता। हो सकता है ये जगह किसी एलियेन का अण्डा ही हो। किसी बहुत बड़े एलियेन का अण्डा।’’ इस वक्त महावीर भी तफरीह के मूड में आ चुका था।
‘‘कुछ भी हो लेकिन लगता नहीं हम यहां से बाहर निकल पायेंगे।’’ गोल्डी इस तरह बोल रहा था मानो उसकी जान निकली जा रही हो।
‘‘तो क्या तुझे यहां से निकलने की उम्मीद नहीं? तू तो यहां कई बार आ जा चुका है।’’ सैफ ने गोल्डी को घूरा।
‘‘पहले और अब में बहुत फर्क दिखाई दे रहा है। अब तो ये जगह मेरे लिये पूरी तरह अजनबी हो चुकी है।’’ गोल्डी मुंह बनाकर बोला।
सैफ आगे कुछ बोलने वाला था लेकिन उससे पहले ही नताशा बोल उठी।
‘‘मैं तो जाती हूं फूल तोड़ने। बहुत खूबसूरत फूल लगे हैं यहाँ।’’ नताशा झाड़ियों की तरफ बढ़ी जो शायद मुश्किल से दो सौ मीटर के फासले पर थीं। सैफ और महावीर दोनों को जाते हुए देख रहे थे जबकि गोल्डी और बामर एक दूसरे के कंधे पर हाथों को रखे हुए आगे के बारे में सोच रहे थे। ये अलग बात है कि आगे करना क्या है किसी की समझ में नहीं आ रहा था। बौना अलग अपनी जगह बुत बना खड़ा हुआ था।
‘‘अबे क्या तेरी बैटरी किसी ने निकाल ली?’’ सैफ ने उसे पुकारा।
‘‘खादिम की बैटरी फुल है। आप हुकम तो करें।’’ बौना सर झुकाकर बोल पड़ा।
‘‘हमारा हुकम है कि तू जा और उस सोने के पहाड़ को उठाकर यहीं लाकर पटक दे।’’ बौने की डिमाँड पर सैफ ने हुक्म दे दिया।
‘‘माफ कीजिए ये खादिम की क्षमता से बाहर का हुक्म है।’’ बौना फिर सर झुकाकर बोला।
‘‘बोल तो ऐसे रहा था जैसे अलादीन के चराग के जिन का बड़ा भाई है तू। अच्छा छोटा सा काम कर दे। मेरा सर बहुत दर्द कर रहा है। चल दबा दे।’’
‘‘माफ कीजिए ये खादिम की क्षमता से बाहर का हुक्म है।’’ बौने ने अपना डायलाग हूबहू पहले की तरह से दोहरा दिया।
‘‘तो फिर हमें ऐसे नालायक खादिम की कोई ज़रूरत नहीं। भाग जा यहाँ से।’’
‘‘माफ कीजिए ये खादिम की क्षमता से बाहर का हुक्म है।’’ इसबार वाकई सैफ का दिल चाहा कि वहीं पड़ी ईंट उठाकर अपने सर पर मार ले। उसने खून का बड़ा सा घूंट अपनी हलक के नीचे उतारा और गोल्डी की तरफ घूम गया।
‘‘यार गोल्डी, तेरा बाप यकीनन बहुत बड़ा बेवकूफ था।’’ सैफ ने उसे छेड़ा।
गोल्डी ने उसे व्यंगात्मक भाव से देखा, ‘‘हां था तो। तेरी बात का बुरा नहीं मानूंगा। बेवकूफ न होता तो तेरी खाल में भूसा भरवाकर अपने महल में लटका चुका होता।’’
‘‘अरे नहीं। इस नाकामी की ज़िम्मेदार तो तेरी बेवकूफी है। मैंने उसे बेवकूफ इसलिए कहा कि जहाँ पर सोने का इतना बड़ा पहाड़ मौजूद हैं वहां तेरे बाप को ज़रा सा खज़ाना छुपाने की ज़रूरत क्या थी।’’
‘‘ज़रूरत थी। मैं नहीं जानता ये इतना बड़ा पहाड़ कहां से आ गया। क्योंकि जब डैड यहां काम कर रहे थे तो इस विशाल पहाड़ का नामोनिशान नहीं था।’’
‘‘क्या?’’ हैरत से सैफ का मुंह खुल गया।
‘‘नामुमकिन।’’ बामर बड़बड़ाया, ‘‘इस तरह का पहाड़ बनने में हज़ारों लाखो साल लग जाते हैं। क्या यहां कोई जादूगर पाया जाता है जिसने छूमंतर कहकर ये पहाड़ पैदा कर दिया?’’
‘‘पता नहीं। मैं तो पहली बार ही इसे देख रहा हूं। जबकि इस जगह का चप्पा चप्पा हमारा छाना हुआ है।’’ गोल्डी कंधे उचकाकर सर खुजलाने लगा।
‘‘इस जगह अजीबोगरीब घटनायें घट रही हैं।’’ महावीर बीच में बोला, ‘‘अब यही देखो सैफ, तुम्हारी भूतपूर्व अम्माजान अभी तक उस झाड़ी तक नहीं पहुंच सकी हैं। फूलों को तोड़ने के लिये।’’
‘‘अरे!’’ सैफ के साथ साथ वहां मौजूद सभी हैरत में पड़ गये। क्योंकि जिस रफ्तार से नताशा उन झाड़ियों की तरफ बढ़ी थी उससे तो अबतक उसे उनसे भी आगे निकल जाना चाहिए था। ऐसा मालूम होता था कि वह कदम आगे बढ़ा रही है और नीचे की ज़मीन पीछे की तरफ खिसक रही है किसी ट्रेडमिल की तरह।
‘‘नताशा तुम आगे की तरफ क्यों नहीं बढ़ रही हो?’’ बामर ने पुकारा।
‘‘जा तो रही हूं। लेकिन आखिर मैं उन फूलों तक क्यों नहीं पहुंच पा रही?’’ नताशा की भी हैरत से भरी आवाज़ आयी।
‘‘क्या वडाली की संगत में रहकर अम्माजान का दिमाग पलट गया है?’’ सैफ बड़बड़ाया।
उसी वक्त वडाली की दहशतभरी आवाज़ ने उनका ध्यान अपनी तरफ खींच लिया, ‘‘ब...बचाओ मुझे।’’
‘‘अब तुझे क्या हुआ?’’ सैफ ने पूछा।
‘‘म...मैं गिरने वाला हूं। कोई मुझे आकर थाम लो प्लीज़। वरना खाई में गिरकर मेरी हड्डियों का सुरमा बन जायेगा।’’ वडाली फिर रोहांसी आवाज़ में बोला। उन्होंने देखा वडाली एक जगह जाकर रुक गया था और कुछ इस तरह से अपने जिस्म को हरकत दे रहा था जैसे किसी बहुत पतले रास्ते पर अपने को बैलेंस कर रहा हो।
‘‘चिपरेलीन की आखिरी बोतल तो टूट गयी थी फिर इसे इतना नशा कैसे हो गया?’’ सैफ डा0बामर की ओर घूमा।
‘‘म...मैं क्या बताऊं।’’ डा0बामर भी हक्का बक्का था।
‘‘कमबख्तों क्या तुम लोग बहरे हो गये हो? मेरी फरियाद सुनाई नहीं देती।’’ वडाली फिर चीखा।
‘‘अरे लेकिन तू तो समतल ज़मीन पर खड़ा है। किधर से गिर जायेगा?’’ बामर भी चीखा।
‘‘तुम सब अंधे हो गये हो क्या? दिखाई नहीं देता।’’ वडाली भी चीखा, ‘‘मैं एक बहुत पतले रास्ते पर चल रहा हूं जिसके दोनों तरफ गहरी खाई है। अरे कोई तो मुझे बचा लो।’’ वह लगभग रो देने वाली आवाज़ में कह रहा था।
‘‘मुझे पक्का यकीन है कि खज़ाना न मिलने की मायूसी ने इसका दिमाग पलट दिया है।’’ बामर ने ख्याल ज़ाहिर किया।
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