Sunday, May 17, 2026

सूरैन का हीरो - भाग 24

डा0कोसी का प्रोटोटाईप अब हक़ीक़त में तैयार हो चुका था। यानि सूरैन को सामने लाकर उसे तबाह करने की तैयारियाँ मुकम्मल हो चुकी थीं। और अब महल के शाही वैज्ञानिकों की टीम अपनी ड्यूटी के इंतिज़ार में डा0कोसी के सामने मौजूद थी।


उस टीम में सम्राट के साले का साढ़ू भी मौजूद था। डा0कोसी उन्हें समझा रहा था और उसके सामने फिज़ा में एक बड़ा सा वर्चुअल नक्शा तैर रहा था और सभी की निगाहें उस नक्शे पर जमी हुई थीं।

डा0कोसी उन्हें समझा रहा था, ‘‘ये नक्शा जो तुम लोग देख रहे हो, ये हमारे बाकोल प्लेनेट के चारों तरफ के स्पेस का नक्शा है। इसमें इन प्वाइंटस पर डार्क एनर्जी पैदा करने वाले अंतरिक्ष यान मौजूद होंगे, जो थोड़ी ही देर में खास मशीनों के ज़रिये पहुंचा दिये जायेंगे। फिर मैं सबको एक एक कर मैसेज भेजूंगा। मैसेज पहुंचते ही बटन दबाना है और जिसका नाम मैं लूंगा बटन वही दबायेगा। क्योंकि स्पेस में अलग अलग जगहों से खास वक्त में डार्क एनर्जी का पैदा होना ज़रूरी है वरना सूरैन की बारहवीं डाईमेंशन गायब नहीं हो पायेगी।’’

सबने उसकी बात पर सर हिलाया। और उस बड़े मैदान में मौजूद अपने अपने यान की ओर बढ़ गये।

अब डा0कोसी काम शुरू कर चुका था। उसने अपने हाथ में पकड़ी छोटी सी रिमोट टाईप डिवाईस का कोई बटन दबाया और वह सभी यान तेज़ आवाज़ के साथ अपनी जगह छोड़कर अंतरिक्ष में बढ़ने लगे।

अब फिज़ा में मौजूद नक्शे पर भी वह यान छोटे छोटे चमकीले स्पॉटस की तरह दिखने लगे थे।

जल्दी ही वे स्पॉटस अपनी अपनी जगह पर जाकर फिट हो गये।

फिर उसने हाथ में पकड़ी डिवाईस पर एक यान से सम्पर्क किया, ‘‘नंबर इलेवेन बटन दबाओ।’’

जैसे ही उसका मैसेज ग्यारह नंबर यान तक पहुंचा, वह स्पॉट एकाएक किसी तेज़ रफ्तार लट्टू की तरह घूमने लगा और घूमते घूमते गायब भी हो गया। शायद उससे बनने वाली डार्क एनर्जी ने उसे अपने भीतर ही छुपा लिया था।

‘‘नंबर सिक्स अब तुम बटन दबाओ।’’ उसने दोबारा हुक्म दिया और इस बार दूसरा यान उसी तरह घूमते हुए गायब हो गया।

‘‘मेरा नंबर कब आयेगा?’’ अचानक डा0कोसी को अपनी डिवाईस पर तेज़ आवाज़ में मैसेज मिला।

‘‘ये कौन पूछ रहा है?’’ उसने सवाल किया।

‘‘मैं सम्राट के साले का साढू बोल रहा हूं। मैं शाही महल का सबसे सम्मानित वैज्ञानिक हूं। और ये मेरा अपमान है कि मुझे बटन दबाने के लिये इतनी देर इंतिज़ार कराया जा रहा है।’’ उधर से गुस्सैल आवाज़ में कहा गया।

‘‘अभी तुम्हारा नंबर बहुत बाद में आयेगा। अभी खामोश रहो और मुझे अपना काम करने दो वरना सब गड़बड़ हो जायेगा।’’ उसने बेचैनी से कहा। इस वक्त फालतू बातें करने का टाइम ही कहाँ था।

‘‘कुछ नहीं गड़बड़ होगा। ये मुझे यानि सम्राट के साले के साढ़ू को नीचा दिखाने का प्लान है। मैं अभी अपना बटन दबा रहा हूं।’’ उधर से शायद गुस्से में कहा गया।

‘‘अरे रुको!’’ कोसी चीखा।

लेकिन सम्राट के साले का साढ़ू शायद उसकी बात अनसुनी करके बटन दबा चुका था। क्योंकि नक्शे में दिखने वाला एक और स्पॉट तेज़ी के साथ घूमते हुए गायब हो गया था।

‘‘सब गड़बड़ हो गया। अब सूरैन की बारहवीं डाईमेंशन बाकोल की कोई ताकत नहीं हटा सकती।’’ वह सर पकड़कर बैठ गया।

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हाबू इस बार गुस्से में बुरी तरह बौखला गया था। इतना कि अगर मंदोरा रोकता तो वह डा0कोसी को शूट ही कर देता।

‘‘कमबख्तों। अपनी नाकामी की खबर देने से पहले तुम लोग खुद ही अपने को शूट कर लिया करो।’’ वह गुस्से में चीखा, ‘‘इतने कमज़ोर प्रोटोटाईप को बनाने वाले के लिये हम बाकोल के सबसे इण्टेलिजेंट साइंटिस्ट का खिताब कैसे दे सकते हैं।’’

‘‘गलती मेरी नहीं है।’’ इस बार डा0 कोसी हिम्मत करके बोला, ‘‘ये सब आपके साले के साढ़ू की वजह से हुआ है।’’

‘‘चुप रहो। मेरे साले का साढ़ू बहुत अक्लमंद और नेक इंसान है। तुम अपनी गलती उसके सर मत डालो।’’

‘‘मुझे लगता है कि कोसी ने अगर आपके साले के साढ़ू के ऊपर इल्ज़ाम लगाया है तो इसे अपनी बात का सुबूत पेश करना चाहिए।’’ इस बार मंदोरा बोल उठा।

‘‘हाँ। तुम ठीक कहते हो। मंदोरा।’’ हाबू को मंदोरा की राय पसंद आयी, ‘‘सुनो!’’ वह फिर कोसी की ओर घूमा, ‘‘अगर तुम अपनी बात का सुबूत पेश करो तो हम तुम्हारे इल्ज़ाम पर गौर कर सकते हैं।’’

‘‘जी सम्राट।’’ कहते हुए कोसी ने अपना रिमोट निकाला जिसके ज़रिये वह अपने प्रोजेक्ट को कण्ट्रोल कर रहा था। उसने उसे ऑन किया और सम्राट के साले की वह रिकार्डिंग सुना दी जिसमें उसने वक्त से पहले ही अपने प्लेन का डार्क एनर्जी पैदा करने वाला बटन दबा दिया था।

रिकार्डिंग सुनने के बाद हाबू थोड़ी देर के लिये खामोश हो गया। फिर दोबारा डा0कोसी को घूरते हुए बोला, ‘‘गलती अभी भी तुम्हारी ही है। मेरे साले के साढ़ू को तुम्हें ऐसे यान में बिठाना चाहिए था जिसका बटन सबसे पहले दबाना था।’’

कोसी कुछ बोलकर अपना सर खुजलाने लगा। उसे समझ में गया था कि सम्राट और उसके करीबियों की कभी कोई गलती नहीं होती। वैसे भी ये मामला तो सम्राट की ससुराल का था।

‘‘चलो कोई बात नहीं। अब तुम अपना सेटअप दोबारा तैयार कर लो।’’ इस बार हाबू नर्म आवाज़ में बोला, ‘‘सूरैन की तबाही के लिये मैं इतना नुकसान झेलने को तैयार हूं।’’

‘‘जैसा हुक्म सम्राट का।’’ कोसी सर झुकाकर बोला, ‘‘लेकिन सूरैन की डाईमेंशन हटाने का काम अब कम से कम ग्यारह महीने के बाद ही मुकम्मल होगा।’’

‘‘ऐसा क्यों?’’ हाबू उछलकर बोला।

‘‘क्योंकि गलत सीक्वेंस में बटन दबने से कुछ नयी पेचीदगियाँ पैदा हो गयी हैं। अब डार्क एनर्जी की पावर बढ़ाते हुए कुछ नये काम करने पड़ेंगे।’’

‘‘यानि अब हमारे पास फिलहाल इंतिज़ार करने के सिवा और कोई चारा नहीं। इधर सूरैन के खात्मे का इंतिज़ार और उधर पीको के मुकम्मल इंसान बनने का इंतिज़ार।’’ सम्राट गहरी साँस लेकर बोला।

कोसी ने कोई जवाब नहीं दिया। हालांकि इस वक्त अगर सम्राट उसके मन को पढ़ लेता तो यकीनन कोसी को उसी वक्त निपटा देता।

डा0कोसी मन ही मन सम्राट को गालियां देते हुए कह रहा था कि, ‘‘बच्चू, नया प्रोटोटाईप तो मैं एक दिन में तैयार कर दूं लेकिन तूने अपने साले के साढ़ू को बरी करके जो मुझे गलत ठहराया है तो अब मैं सूरैन की बारहवीं डाईमेंशन ग्यारह महीने के बाद ही हटाने की कोशिश करूंगा।’’

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उधर बारहवीं डाईमेंशन के सुरक्षा घेरे में मौजूद सूरैन पर एक और सुरक्षा घेरा, यानि ज़ारा के जिस्म की आरामदायक कोठरी में सूरैन का आने वाला हीरो फैम दिन दूनी रात चौगुनी रफ्तार से अपने को मुकम्मल कर रहा था।

अब शीले की बनाई मशीनों पर ज़ारा अपने अन्दर परवरिश पा रहे बच्चे को खेलते कूदते देख सकती थी।

लेकिन फिर अचानक...

एक दिन उसने जब मशीनों को ऑन किया तो वहाँ अँधेरे के सिवा कुछ नहीं दिखा।

‘‘क्या इनमें कोई खराबी गयी है?’’ वह बड़बड़ायी।

लेकिन खराबी होती तो किसी एक मशीन में होती। यहाँ तो सभी में सन्नाटा था। जिसका मतलब कि वो मशीनें बच्चे को डिटेक्ट नहीं कर रही थीं।

‘‘ऐसा कैसे हो सकता है?’’ उसने अपने पेट पर हाथ फेरा लेकिन वहाँ भी सन्नाटा ही मालूम हुआ।

एकाएक वह घबरा गयी। अचानक उसका बच्चा गायब कहाँ हो गया?

उसने शीले से सम्पर्क करने की कोशिश की। लेकिन वह जाने किस कोने में गुम हो गया था। पिछले एक हफ्ते से उसने अपनी शक्ल ही नहीं दिखाई थी।

वह पागलों की तरह कमरे से बाहर निकली और दौड़ती हुई बाहर के जंगल में घुस गयी। अब वह लगातार शीले शीले पुकार रही थी।

फिर अचानक उसकी आवाज़ में ब्रेक लग गया। क्योंकि एक निहायत खौफनाक डायनासोर अचानक घने जंगल के बीच से निकलकर उसके सामने पहुंच गया था।

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हाबू के महल से फरार और इंसानी शक्ल में मौजूद ऑक्सोर के साथ शादी करने वाली काईडोर का बुरा हाल हो चुका था। इसलिए नहीं कि वह हीरों से भरे कुंएं में भूख से मर रही थी। क्योंकि खाना तो अब उस कुंएं में बाकायदगी के साथ पहुंच रहा था।

लेकिन वह खाना ऐसा था कि उसे पेट में पहुंचाने से अच्छा वह मर जाना पसंद करती। मामला ये था कि उस कुंए में दो वक्त जो खाना पहुंचाया जा रहा था वह दरहकीकत किसी किसी काईडोर या ऑक्सोर का कटा सर होता था।

‘‘ये मेरे ही भाई बहन हैं। मैं इनको भला कैसे खा सकती हूं?’’ वह रुहांसी आवाज़ में बोली।

‘‘यही हाल मेरा है।’’ ऑक्सोर ठंडी साँस लेकर बोला, ‘‘इससे बेहतर है कि वो लोग हमें घास फूस सूखी ही सही थोड़ी सी इस कुंएं में डाल दें।’’

फिर उन लोगों ने बहुत कोशिश की कि खाना लाने वाले अपनी डिश बदल दें लेकिन वो लोग तो गूंगे बहरे मालूम होते थे।

वह लोग चुपचाप आते थे और किसी किसी काईडोर या ऑक्सोर का सर फेंककर चुपचाप ही निकल जाते थे। बिला एक शब्द बोले।

आखिरकार जब वे लोग भूख से बिल्कुल ही निढाल हो गये तो मजबूर होकर उन्हें वही घिनावनी डिश अपने हलक से नीचे उतारनी पड़ी। हालांकि जब काईडोर ने पहली बार ऐसा किया तो दस मिनट के भीतर ही सब कुछ मुंह के रास्ते बाहर भी गया। लेकिन बाद में उसे आदत हो गयी।

‘‘हाये। क्या हमने कभी ऐसा सोचा था कि अपने ही भाई बहनों को पेट में उतारना पड़ेगा?’’ ऑक्सोर ठंडी साँस लेकर बोला।

‘‘अब इस ख्याल को दिल से निकाल दो।’’ काईडोर हड़िडयाँ चबाती हुई बोली, ‘‘हमें जिंदा रहने के लिये इसे स्वीकार करना ही होगा।’’

‘‘कसम से, तू तो बिल्कुल डायन लग रही है उन हड्डियों को चबाते हुए।’’ ऑक्सोर उसे गुस्से से घूरने लगा। आखिर ये मुसीबत तो उसी की लाई हुई थी।

‘‘तू भी खाते हुए कोई राक्षस ही मालूम होता है।’’ काईडोर भी उसे घूरने लगी।

‘‘अगर मैं राक्षस बना हूं, तो तेरी वजह से। काश कि तूने शादी से पहले ही मुझे सच्चाई बता दी होती।’’

‘‘तो फिर क्या होता? क्या तू मेरे जैसी खूबसूरत लड़की को छोड़ देता?’’ वह इठलाकर बोली।

‘‘तू खूबसूरत लड़की किधर से है? तू तो डायन है डायन।’’ वह दाँत पीसकर बोला।

‘‘अब गुस्सा करने से कोई फायदा नहीं प्यारे।’’ इस बार वह लगावट से बोली, ‘‘जो होना था हो चुका। अब हमें आगे की कार्रवाई करनी चाहिए।’’

‘‘कैसी कार्रवाई?’’ ऑक्सोर चौंककर कर पूछने लगा।

‘‘वह, जिसके लिए लोग शादी करते हैं।’’

‘‘यहाँ इस कुएं में?’’ वह बौखलाकर पूछने लगा।

‘‘क्यों? इस कुंए में क्या बुराई है?’’ वह मोहब्बत भरे अंदाज़ में उसे देखते हुए उसकी तरफ बढ़ने लगी और वह बौखलाया हुआ पीछे हटने लगा।

फिर पीछे हटते हटते वह कुएं की दीवार से जाकर टिक गया। और फिर काईडोर भी उसके पास पहुंच गयी।

उसने ऑक्सोर के कंधे पर अपने हाथ टिकाये और चेहरा उसके चेहरे की ओर बढ़ाने लगी।

लेकिन इससे पहले कि दोनों के चेहरे एक दूसरे को टच करते, अचानक काईडोर को अपने चेहरे पर तेज़ जलन का आभास हुआ और उसने तिलमिलाकर आँखें खोल दीं। और ये देखकर भौंचक्का रह गयी कि सामने से ऑक्सोर नदारद था। और उसकी जगहं खाली कुएं की दीवार दिख रही थी।

लेकिन नहीं वह दीवार खाली नहीं थी। बल्कि उस जगह से तेज़ आग की लपटें उठ रही थीं। आग की लपटें इतनी गर्म थीं कि उसे फौरन कई कदम पीछे हटना पड़ा।

लेकिन गर्मी तो अभी भी कायम थी। उसने चारों तरफ देखा और ये देखकर सन्नाटे में गयी कि आग की लपटें तो कुएं में चारों तरफ उठ रही थीं। और अब वह उस आग के कुंए में अकेली थीं। ऑक्सोर का कहीं अता पता था।

---- जारी है

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