‘‘मंदोरा हमें लगता है अब तुम हमारे खास वज़ीर बनने के लायक नहीं रहे। ऐसी बेवकूफी भरी तरकीबें तो छोटा बच्चा भी बता सकता है।’’
‘‘एक तरकीब और है।’’ मंदोरा जल्दी से बोला, ‘‘उनके कमरे में हम ऐसे सेंसर लगवा देते हैं जो ज़रा सी भी खतरे की भनक पाकर बज उठें और हमारी सिक्योरिटी तुरन्त राजकुमार पीको को बचाने पहुंच जाये।’’
‘‘हाँ ये कुछ बेहतर है। हम यही करते हैं।’’ हाबू को ये तरकीब पसंद आयी और मंदोरा ने गहरी साँस ली। अगर ये तरकीब भी पसंद न आती तो उसे और ज़्यादा माथापच्ची करनी पड़ती।
बहरहाल सिक्योरिटी का मामला तय होने के बाद शादी का इंतिज़ाम होने में ज़्यादा देर नहीं लगी। क्योंकि दूल्हा और दुल्हन दोनों ही राज़ी हो चुके थे और बाकोल पर शादी की रस्में सूरैन जितनी लंबी चलती नहीं थीं। बस एक पवित्र बकुली जो किसी नर के संसर्ग में नहीं आयी होती, उसके सामने दूल्हा दुल्हन दोनों उसकी पवित्र लैंडियों की कसम खाते थे। और फिर एक दूसरे को किस करके पति पत्नी बन जाते थे।
शादी के मंडप में ज़ारा को पहुंचा दिया गया। और फिर थोड़ी ही देर में पीको भी वहां पहुंच गया इस हालत में कि उसके दोनों नौकर उसके ऊपरी हिस्से को थामे हुए थे।
सम्राट हाबू अपनी पत्नी यानि पीको की मोमी के साथ पहले ही वहां पहुंच चुका था और उसका शाही तख्त हवा में टिका हुआ था।
जल्दी ही शादी का जोड़ा लंबी गर्दन वाली पवित्र बकुली के सामने पहुंच गया जो सामने रखे ऊंचे सुराहीदार बर्तन में मौजूद नीली घास की जुगाली में मशगूल थी।
और उसके पास बाकोल का शाही पादरी काबू पान की जुगाली में लगातार मुंह चला रहा था। इससे पहले उसने हाबू की शादी करवाई थी और अब दोबारा साठ साल बाद उसे मौका मिल रहा था इसलिए उसने रात भर जाग कर बाकोल के पवित्र मन्त्र रटे थे जो इतने सालों में वह भूल चुका था। हालांकि अभी भी वह श्योर नहीं था कि शादी के ही मन्त्र पढ़ेगा। बीच में अंतिम संस्कार के भी पढ़ सकता था, क्योंकि बुढ़ापे की वजह से अब याददाश्त उतनी अच्छी नहीं रह गयी थी।
बहरहाल पीको व ज़ारा उसके सामने पहुंचे और वह पसीना पोंछकर सावधान की पोज़ीशन में आ गया।
उसने मुंह खोलकर मन्त्र पढ़ना शुरू ही किया था कि ज़ारा ने हाथ उठाकर उसे चुप करा दिया। और सब चौंक कर उसे घूरने लगे।
‘‘रुको पहले ये तो तय हो जाये कि मेरी शादी किसके साथ हो रही है।’’ ज़ारा के लहजे में थोड़ा कन्फ्यूज़न
था।
‘‘क्या मतलब? अरे तुम्हारी शादी मेरे साथ हो रही है और किसके साथ?’’ पीको भी कन्फ्यूज़ होकर कहने लगा।
‘‘सुनो अक्ल के औंधे। तुम्हारे साथ ये जो दो पिछलग्गू लगे हुए हैं अगर इस वक्त यहां रहे तो मेरी शादी तीनों के साथ ही हो जायेगी।’’
ज़ारा ने उन नौकरों की तरफ इशारा किया जो पीको का अजगर रूप वाला हिस्सा थामे खड़े हुए थे।
‘‘हाँ। उसका कहना सही है। बाकोल के नियम के मुताबिक अगर दूल्हा के साथ और कोई शादी के वक्त मौजूद होता है तो साथ में उसकी भी शादी उसी दुल्हन से हो जाती है।’’ हाबू भी चौंक कर कहने लगा।
‘‘लेकिन अगर इन्हें हटाया गया तो मैं ज़मीन पर लुढ़क जाऊंगा।’’
पीको ने बेबसी से कहा।
‘‘तुम अपने को किसी और सहारे से टिका लो।’’ ज़ारा ने राय दी और पीको ने उस ऊंचे बर्तन से अपने को टिका लिया जिसमें मुंह डालकर बकुली अपनी मनपसंद घास का आनन्द ले रही थी। नौकर दूर हट गये।
पादरी काबू ने मन्त्र पढ़ने फिर से शुरू कर दिये थे जबकि बकुली को पीको का बर्तन पर टिकना पसंद नहीं आया अतः वह अपनी सींगों के ज़रिये उसे वहां से हटाने की कोशिश करने लगी।
पीको अपने को बैलेंस करने की पूरी कोशिश कर रहा था। लेकिन बैलेंस था कि बिगड़ता ही जा रहा था। बकुली को ज़रा भी पसंद नहीं था कि कोई उसकी घास को सूंघने भी पाये।
फिर उधर पादरी के मन्त्र खत्म हुए और इधर बकुली के ज़ोरदार धक्के ने पीको को एक तरफ लगी डिनर टेबिल के ऊपर डायरेक्ट पहुंचा दिया जहाँ मौजूद तमाम लज़ीज़ पकवानों को एक साथ उसके बदन ने चख लिया।
ये और बात है कि उसके बाद वो पकवान किसी के चखने के काबिल नहीं बचे थे।
‘‘अब पति पत्नी एक दूसरे को किस करें।’’ इस बात से अंजान कि पीको के साथ क्या गुज़र चुकी है, पादरी पुकार रहा था।
बुढ़ापे ने उसकी आँखों की रोशनी अच्छी खासी कम कर दी थी। हो सकता है उसे बकुली का बर्तन ही पीको के रूप में नज़र आ रहा हो।
ज़ारा ने किस करने के लिये पीको की तरफ देखा और मुंह बनाकर रह गयी।
चटनी और शोरबे में लिपटा हुआ पीको डाईनिंग टेबिल पर पड़ा आँखें मिचमिचा रहा था और किस करने के काबिल तो बिल्कुल नहीं था इस वक्त। किसी आदमखार टाइप प्राणी के खाने के काबिल ज़रूर हो रहा था।
बहरहाल सम्राट हाबू का इशारा पाकर उसके दोनों नौकर दौड़े हुए आये और उसे वहीं नहला धुलाकर फिर से ज़ारा की बगल में खड़े रहने के काबिल बना दिया।
फिर पीको के उन ही नौकरों ने पीको के इधर उधर लुढ़कते मुंह को संभाला और ज़ारा ने आगे बढ़कर उसे किस कर लिया। लेकिन फौरन ही वह पानी का जग उठाकर अपने मुंह को अच्छी तरह धोने लगी। पीको के मुंह से निकलने वाली ज़ोरदार बदबू ने उसे बदहवास कर दिया था।
सम्राट के हुक्म पर बाकोल ग्रह पर दोनों की शादी की खबर फैला दी गयी और पूरे ग्रह पर धूम धड़ाके होने लगे। इधर खाना तो बरबाद हो ही चुका था सो सभी मेहमान खाली पेट ही वहाँ से रुख्सत हो गये और शाही परिवार महल वापस लौट आया।
फिर वह वक्त भी आया जब पीको को शादी के बाद पहली बार ज़ारा से मुलाकात करनी थी।
‘‘अब तुम लोग मुझे अकेला छोड़ दो। मुझे अपनी दुल्हन से मिलने को जाना है।’’ वह नौकरों से मुखातिब हुआ जो उसे बैलेंस करने के लिये लगाये गये थे।
‘‘राजकुमार अगर हम ने आपको छोड़ा तो आप उल्टी तरफ पलट जायेंगे।’’
एक ने आशंका ज़ाहिर की।
‘‘अरे तो क्या मैं तुम लोगों को लटकाये हुए अपनी दुल्हन से मिलने जाऊँगा?’’
पीको झल्लाकर बोला।
‘‘एक तरकीब मेरे दिमाग में आयी है।’’ उनमें से एक बोल उठा।
‘‘जल्दी बोल अपनी तरकीब मुझे अपनी दुल्हन से मिलने की बहुत उतावली हो रही है।’’
‘‘हम आपके ऊपरी अजगर वाले हिस्से को लकड़ी के सहारे धड़ वाले इंसानी हिस्से से बाँध देते हैं। फिर आपके पीछे गिरने का खतरा नहीं रहेगा।’’ ठीक है यही करो लेकिन जल्दी।
फिर दोनों नौकरों ने जल्दी से इसी तरकीब पर अमल किया। वैसे दोनों खुद भी उसे संभालते संभालते पक चुके थे। बहरहाल ये तरकीब काम कर गयी और पीको अपने को सीधा खड़ा रखने में कामयाब हो गया।
अब वह किसी घमंड की वजह से नहीं बल्कि रियल में अकड़ा हुआ ज़ारा के कमरे में दाखिल होने के लिये दरवाज़े के पास पहुंचा। लेकिन यह क्या?
अकड़ा होने की वजह से उसकी हाइट कुछ ज़्यादा ही हो गई थी और जिस्म दरवाज़े से अन्दर दाखिल होने के लिये साइज़ आड़े आ रहा था।
उसने गुस्से में भरकर अपने घुटनों की तरफ देखना चाहा लेकिन ये भी मुमकिन न हो पाया। दरअसल उसके नौकरों ने उसका ऊपरी हिस्सा घुटनों से नीचे तक बाँध दिया था जिसकी वजह से घुटने भी मोड़ना मुमकिन न रह गया था।
फिर उसे खुद ही एक तरकीब समझ में आ गयी और वह ज़मीन पर लेट गया और अब मुंह के बल सरकता हुआ अपने कमरे में घुस रहा था। और आखिरकार कुछ दिक्कतों के बाद कामयाब भी हो गया और अब उस बेड की तरफ बढ़ने का इरादा करने लगा जहाँ ज़ारा दुल्हन बनी हुई उसका इंतिज़ार कर रही थी।
लेकिन यह क्या? बेड तो खाली था।
उसने बौखलाकर इधर उधर देखा और फिर सुकून की गहरी साँस ली क्योंक ज़ारा कमरे में ही मौजूद थी और पास में मौजूद डायनिंग टेबिल पर बैठी हुई जल्दी जल्दी कुछ खा रहा थी।
‘‘हैलो डार्लिंग!’’ पीको धीरे से बोला, और ज़ारा ने चौंक कर उसकी ओर देखा।
‘‘अरे!? ये तुम ज़मीन पर क्यों पड़े हो?’’ उसने हैरत से पूछा।
‘‘सब मेरे कामचोर नौकरों की निशानी है। प्लीज़ मुझे आकर खोल दो।’’ उसने रिक्वेस्ट
की और ज़ारा आगे आकर उसकी रस्सी खोलने लगी।
फिर उसने पीछे बंधी हुई लकड़ी हटा दी और पीको उठकर बैठ गया। लेकिन खड़ा अब भी नहीं हो सकता था वरना उसका बैलेंस फिर बिगड़ जाता।
‘‘लगता है, तुम कोई बहुत लज़ीज़ डिश खा रही थीं। हमारे बाकोल ग्रह के बावर्ची बहुत मज़ेदार डिशेज बनाते हैं।’’ पीको ने ललचाई हुई नज़रों से डायनिंग टेबिल की ओर देखा।
‘‘हाँ। तुम भी खाओगे?’’ ज़ारा ने आफर दी।
‘‘ठीक है। पहले पेट भर लेता हूं, फिर हम तुम रोमाण्टिक
बातें करेंगे।’’ पीको खुश होकर टेबिल की ओर बैठे बैठे ही खिसकने लगा। हालांकि कुछ देर पहले ही वह हलक तक ठूंस चुका था लेकिन अपनी महबूबा को पाकर भूख कुछ ज़्यादा ही खुल जाती है।
फिर टेबिल के पास पहुंचकर वह अपने को संभालते हुए एक कुर्सी पर बैठ गया, जो ज़ारा की बगल में ही मौजूद थी। लेकिन सामने की डिश देखते ही उसका दिमाग़ चकरा गया।
‘‘य...ये तुम क्या खा रही हो?’’ उसने इस तरह ज़ारा की ओर देखा मानो उसका दिमाग चल गया है।
‘‘ये मैं अपनी पसंदीदा डिश खा रही हूं। पूरे बाकोल ग्रह पर इससे बेहतर डिश हो ही नहीं सकती।’’ ज़ारा तरंग में आकर कह रही थी।
‘‘अरे!? लेकिन ये तो हमारे ग्रह पर पैदा होने वाली घास है - जो काईडोर और बकुली की तो खास डिश हो सकती है, लेकिन इंसानों का खाना हरगिज़ नहीं होती।’’ पीको ने अफसोस के साथ ज़ारा के बर्तन में पड़ी नीली घास देखी।
ज़ारा ने जवाब में एक मुट्ठी घास और उठाई और मुंह में भरकर काईडोर की ही तरह जुगाली करने लगी।
‘‘ज़रूर तुम्हें इस ग्रह पर नया जानकर तुम्हें किसी ने बेवकूफ बना दिया है। मैं अभी अपने बावर्चियों की खबर लेता हूं।’’ वह गुस्से में भरा हुआ झटके से उठा और बैलेंस बिगड़ने की वजह से कुर्सी समेत पीछे की ओर लुढ़क गया।
उसका अजगर रूप वाला सर तेज़ी के साथ फर्श से टकराया और मुंह से बेसाख्ता चीख निकल पड़ी।
चीख की आवाज़ गूंजते ही कमरे का दरवाज़ा धड़ से खुला और आठ दस सिक्योरिटी वाले अन्दर घुस गये। उनके हाथों में मौजूद गन की नालें ज़ारा की ओर उठी हुई थीं।
अपना सर सहलाते हुए पीको उठा और उन्हें घूरने लगा।
‘‘तुम लोग क्यों आ गये इधर?’’ उसने पूछा। उसे हरगिज़ ये पता नहीं था कि सिक्योरिटी का ऐसा इंतिज़ाम मंदोरा की राय पर किया गया है जिससे कि ज़ारा अगर उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करे तो उसकी सुरक्षा की जा सके।
‘‘बोलते क्यों नहीं कमबख्तों!?’’
पीको फिर दहाड़ा।
‘‘सर, आपकी चीख सुनकर यहाँ के सेंसर ने खबर दी कि आप खतरे में हैं। और हम यहाँ पहुंच गये।’’ एक गार्ड ने जवाब दिया।
‘‘अब भाग जाओ। मैं बिल्कुल ठीक हूं। मेरी तो किस्मत ही खराब है। हाय मैंने किस घड़ी में अपनी शक्ल बदलने को सोचा था। अब न इंसानों में रह गया हूं न जानवरों में।’’ पीको ठंडी साँस लेकर बोला।
गार्डस पलट कर वापस लौटने लगे। लेकिन आफत की शुरूआत तो हो ही चुकी थी। अब तक सेंसर ने खतरे का सिग्नल मंदोरा और हाबू तक भी पहुंचा दिया था। और वो दोनों भी दौड़ते हुए पीको के कमरे तक पहुंच चुके थे।
फिर इधर सिक्योरिटी गार्डस बाहर निकले और उधर से हाबू और मंदोरा अन्दर दाखिल हो गये।
‘‘मेरे लाल, तू ठीक तो है?’’ अन्दर घुसने के साथ ही हाबू बेचैनी से पूछने लगा।
‘‘मैं ठीक हूं डोडी। लेकिन ये मेरी दुल्हन को घास खिलाने की किसने हिम्मत की। मैं उसे जिंदा नहीं छोड़ूंगा।’’
पीको दाँत पीसकर कह रहा था।
‘‘घास!?’’ मंदोरा और हाबू दोनों हैरत से ज़ारा के सामने मौजूद प्लेट देखने लगे जिसमें अभी भी थोड़ी घास बची हुई थी।
‘‘ये कौन बदतमीज़ है?’’ हाबू दहाड़ उठा। जबकि मंदोरा सर खुजलाता हुआ प्लेट में मौजूद घास को घूर रहा था।
फिर थोड़ी ही देर में शाही बावर्चियों की पूरी टीम वहाँ हाज़िर थी। और वो सब सर झुकाये हुए पीको व हाबू की गरज चमक को झेल रहे थे।
‘‘लेकिन सोचने की बात ये है कि, सूरैन की राजकुमारी
का भी दिमाग क्या चल गया है?’’ अचानक मंदोरा बीच में कूद पड़ा और हाबू का ध्यान उसकी ओर चला गया।
‘‘तुम कहना क्या चाहते हो मंदोरा?’’
हाबू का सवाल था।
‘‘यही कि राजकुमारी
भी अच्छी तरह जानती है कि ये इंसानों के खाने की चीज़ नहीं है। फिर वह इसे खाने क्यों लगी?’’ मंदोरा का सवाल वाजिब था।
‘‘जान की अमान पाऊं, तो मैं कुछ अर्ज़ करूं।’’ अचानक सामने मौजूद बावर्चियों में सबसे मिस्कीन सा दिखने वाला बावर्ची बोल उठा। और हाबू चौंक कर उसे घूरने लगा।
‘‘तुम क्या कहना चाहते हो?’’
‘‘यही कि राजकुमारी
जी ने घास खाने की फरमाईश खुद ही की थी। और उन ही की फरमाईश पर मैं इसे लेकर आया था।’’ बावर्ची ने उगला।
‘‘कमबख्त तो ये तेरी हरकत थी।’’ पीको गुर्राया और शायद उसे मारने के लिये आगे भी बढ़ने की कोशिश की। लेकिन हाबू ने उसे रोक दिया।
‘‘मैं नहीं मान सकता कि राजकुमारी
ऐसी फरमाईश कर सकती है। उसे बाकोल की घास खाने की राय कौन देगा।’’ मंदोरा सोच में डूबा हुआ कह रहा था।
उसी वक्त हाबू के फोन में किसी की काल आने लगी थी और उसका ध्यान इस पहेली से हटकर फोन की तरफ चला गया।
उसने फोन उठाया और हैरत से बड़बड़ाया, ‘‘सूरैन का सम्राट इस वक्त क्यों काल कर रहा है?’’
‘‘मालूम होता है वह कुछ खास बात करना चाहता है।’’ मंदोरा ने अंदाज़ा लगाया।
‘‘वह मुझे आशीर्वाद देने वाला है। अब तो मैं उसका दामाद बन गया हूं।’’ पीको खुश होकर बोला।
हाबू ने फोन ऑन किया और सूरैन के सम्राट की इमेज सामने दिखने लगी। मास्टर पंजुम काफी खुश दिखाई दे रहा था।
‘‘कहो हाबू। अपनी बहू के साथ खुश तो बहुत होगे तुम।’’ सम्पर्क होते ही मास्टर पंजुम बोला।
‘‘वो तो मैं हूं। लेकिन खुश तो तुम भी बहुत दिखाई दे रहे हो। जबकि हम तुम्हारी लड़की को ज़बरदस्ती उठाकर ले आये हैं। बड़ी हैरत की बात है।’’ हाबू के स्वर में व्यंग्य था।
‘‘हाबू, कभी कभी लोगों को जो उम्मीद होती है उसका ठीक उल्टा भी काम हो जाता है।’’ मास्टर पंजुम का जवाब था।
‘‘हाँ ये तो है। अब यही देखो तुम्हारी बेटी यहाँ पहुंचकर घास खाने लगी। अब इससे ज़्यादा उम्मीद से परे और क्या बात होगी।’’
‘‘उम्मीद से परे कुछ नहीं है हाबू, उसे घास खानी ही थी। उसकी वही असली ग़िज़ा है।’’ सूरैन के सम्राट की मुस्कान में अब रहस्य भी शामिल हो गया था।
उसकी बात सुनकर मंदोरा अपनी आँखें नचाने लगा और हाबू बुरी तरह चौंक पड़ा।
‘‘क्या मतलब?’’ उसने सवाल किया।
‘‘यही कि तुम्हारी बहू के रूप में पीको के कमरे में जो बनी संवरी सुंदरी मौजूद है, वह मेरी बेटी नहीं बल्कि तुम्हारे ही ग्रह की एक काईडोर है ज़ारा के मेकअप में।’’
सूरैन के सम्राट के इस रहस्योद्घाटन ने हाबू के साथ साथ मंदोरा और पीको को भी उछलने पर मजबूर कर दिया।

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