Wednesday, April 29, 2026

सूरैन का हीरो - भाग 6

 ‘‘हाँ। अपना यूनिवर्स। इससे पहले तुमने मेरी लैब में कुछ सीन देखे थे जो दरअसल इस यूनिवर्स के हक़ीक़ी सीन थे। वह यूनिवर्स जो किसी अज्ञात शक्ति ने बनाया हुआ है। जिसके बारे में हम ज़्यादा कुछ नहीं जानते। लेकिन उस यूनिवर्स की स्टडी करके मैंने बहुत कुछ मालूम किया है। और इस लेवेल तक पहुंच गया हूं कि अब अपनी लैब में अपने एक नये यूनिवर्स की रचना कर सकता हूं। ज़ारा इस वक्त तुम मेरे बनाये हुए अपने यूनिवर्स में ही मौजूद हो।’’


‘‘ये तुम क्या कह रहे हो?ये कैसे मुमकिन है?’’ अवाक होकर ज़ारा ने पूछा।

‘‘मैं तुम्हें और विस्तार से बताता हूं। दरअसल किसी यूनिवर्स में कुछ चीज़ें होती हैं जैसे कि प्लेनेट, सितारे और फिर उनपर पाये जाने वाले पेड़ पौधे और तरह तरह के प्राणी। फिर ग्रैविटी जैसी कुछ ताकतें होती हैं जिनकी वजह से सब एक दूसरे से जुड़े हुए एक दूसरे के काम आते हैं और अपनी लाइफ गुज़ारते हैं।’’

‘‘हाँ सो तो है।’’

‘‘अब मैंने जो यूनिवर्स बनाया है उसमें ये सब चीज़ें मौजूद हैं लेकिन वह सब मेरे बनाये हुए नये नियमों के अनुसार पैदा हुई हैं। कुदरती यूनिवर्स से उनका कोई सम्बन्ध नहीं। और उन तमाम चीज़ों की पैदाईश हमारी इच्छाओं से होती है। यही वजह है कि जब तुम्हें लेमीट की इच्छा हुई तो वह तुम्हारे सामने गया और जब बीच पर जाने की ख्वाहिश हुई तो समुन्द्र का निर्माण हो गया।’’

‘‘तो फिर मैंने गलत कब कहा कि तुमने इच्छाओं की पूर्ति के लिये मशीन तैयार कर ली है।’’

‘‘आम ज़बान में कहा जा सकता है लेकिन तकनीकी रूप से तो ये कहना गलत है।’’

‘‘मैं तो इसे सही कहूंगी।’’ ज़ारा ज़िद भरे अंदाज़ में बोली।

‘‘इस यूनिवर्स में वह इच्छा कभी नहीं पूरी होगी जो किसी नियम को तोड़ दे। मतलब ये कि यहाँ रहने के लिये भी कुछ नियमों को मानना ही पड़ेगा।’’

‘‘हुम्म। वैसे चीज़ तो तुमने ज़ोरदार बनायी है लेकिन इतना सब कुछ करने की ज़रूरत क्या थी। मुझे लगता है कि हम अपनी तमाम इच्छाओं की पूर्ति पुराने यूनिवर्स में रहते हुए भी कर सकते हैं।’’

‘‘अब तुमने क़ायदे का सवाल पूछा।’’ शीले मुस्कुराया।

‘‘क़ायदे का? तो क्या इससे पहले बेक़ायदे का सवाल पूछ रही थी?’’ ज़ारा का गुस्सा हमेशा नाक पर ही रहता था। आखिर वह सूरैन की इकलौती राजकुमारी जो थी।

‘‘मेरा ये मतलब नहीं था।’’ शीले अपनी सफाई पेश करने लगा।

‘‘खैर छोड़ो। तुम मेरे कायदे के सवाल का जवाब दो।’’ इस वक्त ज़ारा ने भी बहस करना मुनासिब नहीं समझा वरना हो सकता था कि उसके कायदे के सवाल का जवाब ही मिल पाता।

‘‘मेरे इस यूनिवर्स के बनाने के पीछे का मकसद ये है कि हम हमेशा के लिये अपने बच्चों के साथ जिंदा रहें और जवान रहें। देखो अभी जिस यूनिवर्स में हम जी रहे हैं इसमें वक्त के साथ हर चीज़ पुरानी होती जाती है और एक दिन खत्म हो जाती है। मसलन हमारी जिंदगी ज़्यादा से ज़्यादा पाँच सौ साल की होगी। सूरैन कुछ लाख साल के बाद खत्म हो जायेगा और उसका सूरज कुछ करोड़ साल के बाद खत्म हो जायेगा। लेकिन जो यूनिवर्स मैं तैयार करूंगा वह हमेशा रहेगा और उसके मालिक यानि कि हम और हमारे बच्चे हमेशा रहेंगे। यही इस यूनिवर्स के बनाने का असली मकसद है।’’ शीले ने अपनी मंशा ज़ाहिर की।

‘‘ओह!’’ ज़ारा ने एक गहरी साँस ली। वाकई शीले ने बहुत दूर की सोची थी।

‘‘अपने बनाये यूनिवर्स में हम हर तरह की बलाओं से महफूज़ रहेंगे। तो किसी दुश्मन के हमले का डर, किसी प्लेनेट पर बाहरी हमले का डर तूफान या भूकंप की तबाही का डर और अपने सूरज के किसी ब्लैक होल में समाने का डर। क्योंकि इस यूनिवर्स में हमने बस वहीं चीज़ें क्रियेट की हें जो हमारे फायदे की हैं और नुकसान पहुंचाने वाली बातों को शामिल ही नहीं किया।’’

‘‘यू आर ग्रेट शीले।’’ ज़ारा सोफे से उठी और जाकर शीले को एक चुंबन जड़ दिया। जिसने अपने यूनिवर्स में खोये हुए उसके प्रेमी को फिर से जगा दिया।

‘‘मुझे अभी भी हैरत है कि इतनी कम उम्र में तुमने इतना बड़ा काम कैसे कर लिया। ये एक महान काम है जिसके लिये सदियाँ चाहिए।’’ ज़ारा अब उसे तारीफी नज़रों से देख रही थी।

‘‘हाँ। ये एक बड़ा काम हुआ है लेकिन इसकी बुनियाद हमारे ग्रह के दूसरे वैज्ञानिक पहले रख चुके हैं। उन्होंने ही ये खोज की थी कि हम दरअसल ऐसी दुनिया में हैं जो एक मल्टीवर्स का हिस्सा है। यानि जिस यूनिवर्स में हम रह रहे हैं, इस तरह के अनगिनत यूनिवर्स एक मल्टीवर्स दुनिया में उबलते पानी के बुलबुलों की तरह पैदा होते रहते हैं।’’

‘‘अरे नहीं क्या हम सब पानी के बुलबुले का हिस्सा हैं? तो फिर इतने ठोस कैसे हैं?’’ ज़ारा बेयकीनी से बोल पड़ी।

‘‘यस। छोटे लेवेल पर ठोस मालूम होते हैं लेकिन बहुत बड़े पैमाने पर हमारी हैसियत बुलबुले जैसी ही कमज़ोर है। यूनिवर्स के बुलबुले बड़े होते हैं और आखिर में फूट कर खत्म हो जाते हैं। बुलबुले की तरह एक यूनिवर्स के बनने की शुरूआत क्वांटम फ्ल्क्चुएशन के ज़रिये होती है और साथ ही पैदा होते हैं उस यूनिवर्स के नियम, जो उस पैदा हुए यूनिवर्स की भविष्य की घटनाओं को निर्धारित करते हैं।’’

‘‘हाँ। अब कुछ कुछ याद रहा है। इस बारे में तो मैंने भी थोड़ा पढ़ा है।’’ ज़ारा सोचने के अंदाज़ में बोली।

‘‘मैंने अपने प्रोजेक्ट में इसी लैब के भीतर आर्टिफिशल क्वांटम फ्ल्क्चुएशन को पैदा करने और उसे कण्ट्रोल करने में कामयाबी हासिल कर ली। वह क्वांटम फ्ल्क्चुएशन जो नये यूनिवर्स को पैदा करता है। इस तरह अब मैं खुद अपना यूनिवर्स क्रियेट करने के काबिल हो चुका हूं। थोड़ी सी कमियाँ हैं जिन्हें जल्द ही दूर कर लिया जायेगा। फिर हम एक अपने परफेक्ट यूनिवर्स में जिंदगी गुज़ारेंगे।’’

‘‘तो उन कमियों को दूर करने के लिये क्या तुम हमारी शादी को टाल दोगे?’’ ज़ारा ने शंकित नज़रों से उसकी ओर देखा।

‘‘नहीं शादी तो अपने वक्त पर ही होगी। और तुम मेरी बीवी बनकर जिस द्वार से प्रवेश करोगी वह हमारे नये यूनिवर्स का प्रवेश द्वार होगा। अब चलो पुराने यूनिवर्स में वापस चलते हैं।’’ कहते हुए शीले ने सोफे पर लगा हुआ कोई बटन दबाया था और ज़ारा ने देखा वही हरा धुआँ फिर से चारों तरफ उठने लगा था जो शीले के पहली बार बटन दबाने पर पैदा हुआ था।

उस धुएं ने कमरे की हर चीज़ को अपने में छुपा लिया। और फिर एकाएक गायब हो गया।

लेकिन अब ज़ारा अपने चारों तरफ शीले की वही पुरानी लैब देख रही थी। जहाँ से होकर वह नये यूनिवर्स में पहुंची थी। और वह उस लैब के स्टेज पर मौजूद थी।

‘‘ओह! मुझे लगता है जैसे मैं कोई सपना देख रही थी। अरे अपना लेमीट तो खा लूं। अरे लेमीट कहाँ गया?’’ वह अपने खाली हाथों को उलट पलट कर हैरत से देखने लगी।

‘‘लेमीट तो उस नये यूनिवर्स की पैदाईश था और वहीं रह गया। तुमको उसे वहीं पर खा लेना चाहिए था। कोई बात नहीं अब मैं तुमको इसी यूनिवर्स में खिला देता हूं।’’ कहते हुए शीले ने सेक्रेटरी को बुलाने के लिये घंटी बजा दी।

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ज़ारा शीले के यूनिवर्स को देखकर लौट रही थी कि महल से थोड़ी ही दूरी पर उसे अपनी फ्लाईंग कार हवा में ही रोकनी पड़ गयी। सामने ही फिज़ा में भेड़ों का बड़ा सा झुण्ड हवा में तैरते हुए रोड क्रास कर रहा था।

सूरैन के चरवाहों के पास भी कम से कम इतनी तकनीक पायी जाती थी कि वे अपने जानवरों को हवा में ही एक जगह से दूसरी जगह हांकते हुए भेज सकते थे।

लेकिन यह क्या? सारी भेड़ें तो बीच सड़क पर ही आकर रुक गयीं।

‘‘ये क्या मुसीबत है!’’ ज़ारा झुंझलायी, ‘‘ये चरवाहे गायब कहाँ हो जाते हैं अपने जानवरों को खुला छोड़कर।’’

उसने इधर उधर देखा और किसी इंसान को पाकर हार्न बजाना शुरू कर दिया। लेकिन तो चरवाहे का कोई पता चला और ही भेड़ें अपनी जगह से टस से मस हुईं।

फिर उन भेड़ों में से ही एक हट्टा कट्टा भेड़ आगे बढ़ा और कार के ठीक सामने गया।

‘‘हैलो ज़ारा कैसी हो?’’ उसके मुंह से इंसानी आवाज़ निकली।

---- जारी है

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