Tuesday, September 2, 2014

झूमती नागिन - कहानी (भाग 1 )

लेखक : ज़ीशान हैदर ज़ैदी 

उसके जिस्म पर फटे पुराने चिथड़े थे और चेहरे पर भूख प्यास के साथ भय की लकीरें। वह बेतहाशा भाग रही थी। क्योंकि तीन दरिन्दे उसका पीछा कर रहे थे। ये तीनों वो थे जिन पर देश की बहूबेटियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी। यानि पुलिस बल के होनहार रंगरूट थे ये। किन्तु आज उनकी आँखें अपनी हवस में कर्तव्य भूल गयी थीं। एक पेड़ तले बैठी अकेली अबला उनके लिए आसान शिकार बन चुकी थी।

अचानक लड़की ने एक ठोकर खायी और मुंह के बल जमीन पर गिर पड़ी। उसका सर वहाँ पड़े पत्थर से टकराया और ज़मीन उसके खून से लाल होने लगी। उसने सर उठाकर देखा तो नशे में धुत तीनों दरिन्दे उसे घेरे हुए वहशियाना हंसी हंस रहे थे।

फिर वे उसपर टूट पड़े। देर तक उनका वहशियाना खेल चलता रहा। और जब वे अपनी हवस शान्त करके दूर हटे तो वहां नजर आ रही थी एक लाश। बेजान बिना किसी हरकत के।
*****

‘‘हम लोगों ने उसे मारकर अच्छा नहीं किया।’’ तीनों इस समय एक कमरे में मौजूद थे। उनमें से एक ने ये शब्द कहे थे। इस समय उनमें से कोई नशे में नहीं था।

‘‘तो क्या उसे छोड़ देते सबको बताने के लिए। हममें से किसी की नौकरी बाकी नहीं रहती।’’ दूसरे ने पहले को फटकारा।

‘‘सुखराम ठीक कहता है बलवन्त। वह लड़की अगर जिन्दा रहती तो हमारे लिए खतरा बन सकती थी।’’ तीसरा भी बोल उठा।

‘‘मैं तो इसलिए कह रहा था कि उसके साथ मज़ा बहुत आया था।’’ बलवन्त फिर बोला, ‘‘वैसे वह वहाँ आयी कैसे थी?’’

‘‘भिखारी तो कहीं भी पहुँच जाते हैं। ऊपरवाला भी खूब है। भिखारियों में भी इतनी खूबसूरती पैदा कर देता है।’’
‘‘तू तो कविता कहने लगा शुक्ला। लेकिन मेरे दिमाग में एक शंका है।’’ बलवन्त बोला।

‘‘कैसी शंका?’’
‘‘हम उसकी लाश यूं ही छोड़ आये थे। तफ्तीश जरूर होगी उसकी। कहीं ऐसा न हो कोई सुबूत मिल जाये, और हम लोग पकड़े जायें।’’

‘‘तू बेकार में चिन्ता करता है। तफ्तीश के लिए भी हम ही लोग बुलाये जायेंगे। अगर कोई सुबूत छूट भी गया तो हम अपने करकमलों से उसे स्वाहा कर देंगे।’’ सुखराम इत्मिनान के साथ बोला।

‘‘यानि हमारे फंसने का दूर दूर तक कोई चांस नहीं।’’

‘‘हां। अब बस एक ही खतरा है हमारे लिए।’’

‘‘कैसा खतरा?’’ दोनों सुखराम की बात पर चौंक उठे।
‘‘यही कि वह लड़की पुनर्जन्म किसी नागिन के रूप में ले ले और फिर हमसे एक एक कर बदला ले, पिछले जन्म का। जैसा कि पुरानी फिल्मों में होता था।’’

‘‘नागिन का बदला।’’ बलवन्त बोला और फिर तीनों कहकहा मारकर हंस पड़े।

‘‘चलो अब ड्यूटी पर चलने की तैयारी की जाये।’’ शुक्ला उठ खड़ा हुआ। बाकी दोनों भी उस के साथ खड़े हो गये।
*****

बलवन्त के इस समय पूरे मजे थे। एक राज्यमन्त्री के गेट पर उसकी ड्यूटी लगी थी। राज्यमन्त्री तो अपने बेडरूम में किसी कालगर्ल के साथ व्यस्त थे, लिहाजा उसके लिए भी ऊंघने का पूरा मौका था। और यही उसने किया। राइफल उतारकर साइड में रखी और दीवार से टेक लगाकर पसर गया।

अचानक उसे महसूस हुआ, उसके पैरों पर कोई लिजलिजी वस्तु रेंग रही है। उसने ऊंघती आँखों के पपोटे धीरे से खोलकर उधर नजर की। दूसरे ही पल उसके रोंगटे खड़े हो गये। क्योंकि वस्तु एक जहरीली नागिन थी। हड़बड़ा कर उसने सीधा होना चाहा, किन्तु उससे पहले ही नागिन आना फन काढ़कर उसकी आँखों से आँखें मिला चुकी थी। फिर उसे संभलने का भी मौका नहीं मिल सका। नागिन ने सीधे उसके माथे पर वार किया था और फिर बिजली की गति से वहाँ से गायब हो गयी।

‘‘बचाओ!’’ वह चीखा। आसपास मौजूद दूसरे लोग उसके पास दौड़ पड़े।

‘‘म..मुझे साँप ने काट लिया है मुझे डाक्टर के पास ले चलो ... फौरन।’’ उसने लोगों से कहा।

‘‘कहाँ..किधर है साँप?’’ उसकी बात सुनकर बाकी सब भी घबरा गये।

‘‘वह एक नागिन थी।’’ कहते हुए वह बेहोश हो गया। लोग उसे लेकर डाक्टर के पास भागे। लेकिन जहर अपना काम कर चुका था। उसे बचाया नहीं जा सका।
*****
...क्रमशः
 

1 comment:

Kokila gupta said...

waiting for the next part Zeashan....