Sunday, November 23, 2008

साइंस फिक्शन - भूत, वर्तमान, भविष्य : संस्मरण - 5



अब शुरुआत हुई प्रथम तकनीकी सत्र की. चेअरमैन बने प्रो. सागरमल गुप्ता जी. और काफी सख्त चेअरमैन बने. किसी को उसकी टाइम लिमिट से आगे नही बढ़ने दिया. लखनऊ के चाइल्ड स्पेशलिस्ट डा. अरविन्द दुबे जी एक घंटे का लेक्चर तैयार करके आये थे. उन्हें मात्र छः मिनट में बिठा दिया. वे बस इतना बता पाये कि विश्व की प्रथम विज्ञान कथा फ्रेंकेसटाइन नहीं है. उससे बरसों पहले लूसियन ने ट्रू स्टोरी और केप्लर ने सोमनियम लिखी है. डा. गौहर रज़ा ने कलाकार और वैज्ञानिक के बीच मेलजोल कराने की कोशिश की तो डा. अरुल अरम एच.जी.वेल्स की कहानियों में सामाजिकता और आधुनिकता के आगे का जहान तलाश कर रहे थे. डा. सी. एम नौटियाल साइंस फिक्शन और फंतासी की बहस में उलझे थे. लगता है वो याहू फोरम पर हुई बहस से अब तक उबर नहीं पाए हैं. लेकिन चेयरमैन की गिलासनुमा घंटी सब पर भारी थी. डा.मुथु भी विज्ञान कथाओं में चाँद की तलाश देर तक नहीं कर पाये और चेयरमैन ने सही वक्त पर अपना सेशन ख़त्म कर दिया. फिर सभी डाइनिंग मैदान की तरफ़ दौड़ पड़े.
बाहर किताबों की प्रदर्शनी लग चुकी थी. मेरे साथ जाकिर अली रजनीश, अरविन्द मिश्र, हरीश गोयल. राजीव रंजन और वाई देशपांडे जैसे नामवर लेखकों की पुस्तकें नज़र आ रही थीं. बगल की मेज़ पर टी.ए फॉर्म भी रखे थे जो प्रतिभागियों के आकर्षण का प्रमुख केन्द्र थे.
लंच के बाद दूसरे तकनीकी सत्र की शुरुआत हुई. इस सेशन की ख़ास बात ये रही कि प्रोजेक्टर ने काम करना बंद कर दिया. तो जितने वक्ता स्लाइड बनाकर लाये थे सब के अरमानों पर ओस पड़ गई. इस बार कुर्सी संभाली सुश्री मधु पन्त ने. वक्ताओं ने उनके महिला होने का लाभ उठाया, और जब तक जी चाहा बोलते रहे. मोहन जी को मुंह दबाकर चुप कराना पड़ा. डा. थिरुमनी विज्ञान को अच्छी विज्ञान कथा के माध्यम से समझने के हामी थे. हरीश गोयल ने ठान लिया कि विज्ञान कथा को स्कूलों के कोर्स में शामिल कराकर रहेंगे. यानी बच्चों के बस्ते का वज़न कुछ और बढ़ा. विष्णु प्रसाद चतुर्वेदी ने माना कि विज्ञान के बिना विज्ञान कथा हो ही नही सकती ( अब पता चला.) अमित सरवाल ने विज्ञान कथा को यू.जी.सी तक ले जाने कि ठान ली थी, लेकिन उसी समय चाये का बुलावा आ गया.

3 comments:

Arvind Mishra said...

थोडा और विस्तार से भी चलेगा जीशान !

अभिषेक मिश्र said...

विज्ञान कथा को स्कूलों के कोर्स तक ले जाना अच्छा प्रयास रहेगा.

admin said...

बहुत खूब।