Sunday, July 3, 2016

अन्डर एस्टीमेट - भाग 3 (अन्तिम भाग)

‘‘क्योंकि मैं उसकी पत्नी हूँ।’’
प्रो.डेनियल का मुँह खुला रह गया। फिर लगभग चौंकते हुए उसने बेल पर उंगली रखी। और जब चपरासी हाजिर हुआ तो उसने उससे डा.आनन्द को बुलाने के लिए कहा।

‘‘डा.आनन्द काफी खुशनसीब है।’’ प्रो.डेनियल खुद से बड़बड़ाया।
‘‘पता नहीं।’’ कहते हुए डा.आनन्द की पत्नी कुर्सी पर बैठ गयी।

उसी समय वहाँ डा.आनन्द ने प्रवेश किया। साथ में विनय और गौतम भी थे।

‘‘ओह! नेहा तुम यहाँ?’’
‘‘शुक्र है कि तुमने मुझे पहचान लिया। मैं तो समझ रही थी कि तुम मुझे भूल चुके होगे। आखिर हम दो साल बाद मिल रहे हैं।’’ नेहा कुछ गुस्से में मालूम हो रही थी।

‘‘क्या तुम बाहर गयी थीं?’’ प्रो.डेनियल ने पूछा।
‘‘नहीं। इसी शहर में रहते हुए मेरे पति को मुझसे मिलने की फुर्सत नहीं।’’

‘‘नेहामेरे लिए मेरा प्रोजेक्ट इतना महत्वपूर्ण था कि मैंने इसके पीछे सभी से मिलना छोड़ दिया था।’’ डा.आनन्द बोला।

‘‘लेकिन मुझे तुम्हारे प्रोजेक्ट में कोई दिलचस्पी नहीं। दो साल अकेले रहते रहते मैं ऊब चुकी हूं। और मुझे अब तलाक चाहिए।’’

‘‘यह डा.आनन्द की बदनसीबी होगी।’’ प्रो.डेनियल ने टुकड़ा लगाया।
‘‘आप प्लीज खामोश रहें।’’ नेहा ने प्रोफेसर को भी नहीं बख्शा।

‘‘नेहाबेहतर है यह प्राब्लम हम घर चलकर साल्व करें।’’ डा.आनन्द ने समझाने के अंदाज में कहा।
‘‘घर जाने की तुम्हें फुर्सत ही कहाँ है।’’ नेहा की आवाज में दर्द था।

‘‘मेरा प्रोजेक्ट कम्प्लीट हो गया है। अब मैं कहीं भी जा सकता हूँ। चलोमैं इसी वक्त तुम्हारे साथ चलता हूँ।’’ आनन्द उठ खड़ा हुआ और फिर प्रोफेसर डेनियल से मुखातिब हुआ,

‘‘प्रो.डेनियल! आप प्लीज मेरी गैरमौजूदगी में इस लैब का चार्ज संभाल लेंगे?’’
‘‘श्योर, वाई नाॅट डा.आनन्द। तुम बेफिक्र होकर अपनी बीवी के साथ जाओ।’’
.............

लेकिन प्रो.डेनियल को लैब का चार्ज संभालना मंहगा पड़ा।
क्योंकि अगले दिन जब वह एक्सपेरीमेन्टल रूम में पहुंचा तो वहाँ गौतम को मृत पाया। उसका अकड़ा हुआ जिस्म सूक्ष्म शरीर बनाने वाली मशीन के बीचोंबीच पड़ा हुआ था।

आनन फानन में वहां सभी लोग इकट्ठा हो गये। डा.आनन्द को भी उसके घर से बुला लिया गया था।
‘‘ऐसा लगता है इसने रात को अपना सूक्ष्म शरीर बनाने की कोशिश की थी लेकिन कुछ गड़बड़ हो गयी।’’ प्रो.डेनियल ने कहा।

‘‘मशीन तो पूरी तरह ओ.के. थी। इसलिए ऐसा नहीं कहा जा सकता कि मशीन ने गड़बड़ की।’’ डा.आनन्द ने मशीन की तरफ देखते हुए कहा।

प्रो.डेनियल गौर से लाश का निरीक्षण कर रहा था।

‘‘एक बड़ा सवाल यह भी है कि यह रात के सन्नाटे में मशीन का इस्तेमाल करने क्यों आया था। इसे अगर कुछ करना था तो हम लोगों के सामने करता।’’
‘‘अब तो यह मर चुका है। इसलिए इन सवालों का जवाब भी नहीं मिल सकता।’’ विनय बोला।

‘‘जवाब मिल सकता है। यह मशीन ही हमें जवाब देगी।’’ प्रो.डेनियल ने कहा।
‘‘कैसे?’’ डा.आनन्द ने पूछा।

‘‘तुम्हें शायद याद नहींइस मशीन में एक ब्लैक बाक्स भी है जो सूक्ष्म शरीर द्धारा देखी गयी समस्त पिक्चर को रिकार्ड करता रहता है। उस ब्लैक बाक्स से मेमोरी चिप निकाल कर उसे कम्प्यूटर पर देखो कि गौतम के सूक्ष्म शरीर ने गौतम के मरने से पहले क्या क्या देखा।’’

‘‘ठीक है। डा.आनन्द मशीन से मेमोरी चिप निकालने लगा, ‘‘वैसे चिप तभी मेमोरी रिकार्ड दिखाएगी जब गौतम का सूक्ष्म शरीर निर्मित हुआ होगा।’’

‘‘अभी थोड़ी देर में सब मालूम हो जायेगा।’’ प्रो.डेनियल ने कहा।
...........

अब वे सब मेमोरी चिप को कम्प्यूटर पर लगाकर गौतम के सूक्ष्म शरीर की गतिविधियां देख रहे थे जो निर्मित हो चुका था।

‘‘यह तो लैब के बाहर जा रहा है।’’ विनय ने कहा।
फिर उन्होंने देखा वह सूक्ष्म शरीर शहर के एक रास्ते पर चला जा रहा है।
‘‘लेकिन यह जा किधर रहा है?’’ प्रो.डेनियल ने पूछा।
‘‘रास्ते तो जाने पहचाने लग रहे हैं।’’ विनय बोला।

‘‘वो तो होंगे ही। क्योंकि रास्ते तुहारे ही शहर के हैं।’’

‘‘लेकिन यह रास्ता तो मेरे ही घर की तरफ जा रहा है।’’ डा.आनन्द हैरत से बोला, ‘‘और अब मेरे ही घर में यह प्रवेश भी कर रहा है। इसे ऐसी क्या जरूरत पड़ गयी मुझसे?’’

जल्दी ही यह राज भी खुल गया। क्योंकि अब गौतम का सूक्ष्म शरीर नेहा के चारों तरफ चक्कर काट रहा था। फिर वह डा.आनन्द की पत्नी के शरीर में विलीन हो गया।

उसी समय रोशनी का एक तेज झमाका हुआ और कम्प्यूटर स्क्रीन पर अंधेरा छा गया। डा.आनन्द ने आगे बढ़कर कई बटन दबायेलेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा।

‘‘रहने दो। मेमोरी चिप में आगे कुछ भी रिकार्ड नहीं हुआ है।’’ प्रो.डेनियल ने उसे रोका।
‘‘इसका मतलब कि गौतम कैसे मरामेमोरी चिप भी इसके बारे में कुछ नहीं बता सकी।’’

‘‘मेरा ख्याल हैमेमोरी चिप बहुत कुछ बता रही है।’’

‘‘वह कैसे?’’

‘‘अभी मैं कुछ नहीं कह सकता। पहले तो मुझे सारी कड़ियां मिलानी होंगी। कुछ इन्क्वायरी भी करनी होगी। तभी कोई नतीजा निकाल पाऊँगा।’’ प्रो.डेनियल उठकर कमरे में टहलने लगा। गौतम की लाश अभी भी मशीन के बीचोंबीच पड़ी हुई थी।
............

पुलिस गौतम की लाश को कस्टडी में लेकर अपनी इन्क्वायरी कर रही थी। लेकिन डा.आनन्द और विनय को पुलिस के नतीजों से ज्यादा इंतिजार प्रो.डेनियल के नतीजों का था।
और आखिरकार उसने उन्हें अपने कमरे में बुला ही लिया।

‘‘तुम यह बताओ कि गौतम सबसे पहले तुम्हें कहां मिला था?’’ प्रो.डेनियल ने आनन्द से पूछा।
‘‘वह तो इस प्रोजेक्ट की शुरूआत से ही से मेरे साथ था। नेट इक्जाम क्लीयर करने के बाद वह मेरी गाईडेन्स में आया था।’’

‘‘और उसका आना जाना तुम्हारे घर में काफी था?’’
‘‘हाँ। जब तक यह प्रोजेक्ट शुरू नहीं हुआवह अक्सर मेरे घर आया करता था।’’
‘‘बस। तो फिर बात साफ हो गई।’’ प्रो.डेनियल ने हाथ हिलाया।

‘‘किधर से साफ हो गई?’’ डा.आनन्द ने हैरत से पूछा।

‘‘सुनो। मसला ये है कि तुम्हारी बीवी बहुत खूबसूरत है। मैं भी उसपर पहली ही नजर में आषिक हो गया था।...नहींनाराज होने की जरूरत नहीं। यह तो नेचुरल है। नेचर की इसी हरकत की वजह से गौतम भी तुम्हारी बीवी पर पर मिटा था। लेकिन उसके अंदर आगे कुछ करने की हिम्मत नहीं थी। और न ही पावर। क्योंकि बहरहाल वह उसके गाइड की बीवी थी।’’

डा.आनन्द मन ही मन प्रो.डेनियल को गालियां दे रहा था। क्योंकि उसकी इस कवायद में उसकी पत्नी का नाम बार बार उछल रहा था।

प्रो.डेनियल ने आगे कहा, ‘‘इन सब के बावजूद उसके दिमाग में तुम्हारी बीवी को पाने की ख्वाहिश कहीं छुपी रही। और दो साल बाद पिछले दिनों जब उसने दोबारा तुम्हारी बीवी को देखा तो उसके दिल के अंदर छुपी यह ख्वाहिश दोबारा उभर आयी। जाहिर हैवह अब भी उसकी पहुँच से दूर थी। अब उसके दिमाग ने एक तरकीब सोची। क्यों न मशीन के द्धारा वह अपना सूक्ष्म शरीर बनाकर तुम्हारी बीवी के पास पहुँच जाये। यानि मामला थाजिस्मानी तौर पर न सही रूहानी तौर पर ही सही।’’

अब डा.आनन्द को भी प्रो.डेनियल की बातों में दम नजर आने लगा था। क्योंकि उसने गौतम के सूक्ष्म शरीर को अपनी आँखों से अपने घर जाते और नेहा के शरीर में प्रवेश होते देखा था।

‘‘उसने अपने मकसद के लिए रात का सन्नाटा चुना और मशीन के पास जाकर उसमें बैठ गया और मषीन चालू कर दी।’’ डा.डेनियल कह रहा था, ‘‘उसका सूक्ष्म शरीर बना और तुम्हारी बीवी तक पहुँच गया। फिर उसके शरीर के भीतर भी पहुँच गया। लेकिन यहीं पर वह घटना हुई जिसकी उम्मीद हमें भी नहीं थी।’’

‘‘कैसी घटना?’’ डा.आनन्द और विनय दोनों ही चैंक पड़े।

‘‘प्रकृति को यह दुनिया शायद ही कभी पूरी तरह समझ पाये। हुआ यह कि जब गौतम के सूक्ष्म शरीर ने तुम्हारी बीवी के शरीर में घुसपैठ करने की कोशिश की तो तुम्हारी बीवी के शरीर को घुसपैठिए की खबर लग गयी। और उसने एक प्रतिरोधक शक्ति उत्पन्न कर दी। चूंकि घुसपैठिया विद्युत रूप में थाइसलिए तुम्हारी बीवी के शरीर की प्रतिरोधक शक्ति भी विद्युत रूप में ही पैदा हुई।

इस प्रतिरोधक शक्ति ने गौतम के सूक्ष्म शरीर को नष्ट करना षुरू कर दिया। गौतम का सूक्ष्म शरीर एक एम्प्लीफायर द्धारा गौतम से जुड़ा हुआ था। जब वह विद्युतीय शरीर नष्ट हुआ तो उसका प्रभाव कई गुना बढ़कर गौतम के शरीर में पहुंच गया। नतीजे में एक तीव्र विपरीत धारा गौतम के शरीर में पैदा हुई और उसके तेज झटके ने गौतम की जान ले ली।’’ प्रो.डेनियल अपनी बात पूरी करके खामोश हो गया।

डा.आनन्द की समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपने असिस्टेंट की मौत का अफसोस करे या खुशियां मनाए। क्योंकि बहरहाल उसने उसकी बीवी पर बुरी नजर डाली थी। 
....समाप्त....
ज़ीशान हैदर ज़ैदी
लेखक 

3 comments:

Kavita Rawat said...

उफ़ ये डॉक्टर भी .. क्या क्या सूझता है इन्हें ..
रोचक कहानी ..
आपको जन्मदिन की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं!

Tholeti Chandra Shekhar said...

कहानी में जबरदस्त सस्पेंस रखा गया है । साइंस को ंमनोविज्ञान से जोड़ने का प्रयास भी अप। अलग पहचान रख गई है । ये मेरी आपकी पहली कहानी है ।

Tholeti Chandra Shekhar said...

कहानी में जबरदस्त सस्पेंस रखा गया है । साइंस को ंमनोविज्ञान से जोड़ने का प्रयास भी अप। अलग पहचान रख गई है । ये मेरी आपकी पहली कहानी है ।