Tuesday, January 15, 2019

"मायावी गिनतियाँ " का पेपरबैक संस्करण प्रकाशित

क लड़का जिसके लिये गणित दुनिया की सबसे बड़ी मुसीबत थी। वह एक ऐसे तिलिस्म में फंस जाता है जो गणितीय समीकरणों पर आधारित था। 
अब गणित उसके लिये जिंदगी और मौत का सवाल बन चुकी थी। 
क्या वह उस तिलिस्म से बाहर निकल सका? 
जबकि उसका शरीर भी उसके पास नहीं था। 
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Monday, December 31, 2018

'प्रोफेसर मंकी' का पेपरबैक संस्करण प्रकाशित

विज्ञान कथा संग्रह 'प्रोफेसर मंकी' का पेपरबैक संस्करण प्रकाशित हो चुका है. जिसमें  मंकी, नादान मुजरिम, क़ैदी ऊर्जा जैसी कई रोचक व लोकप्रिय विज्ञान कथाएं संकलित हैं. अधिक जानकारी के लिए इमेज पर क्लिक करें .

Wednesday, December 26, 2018

ऊँचाईयों के पार - भाग 4 (अन्तिम भाग)


‘‘तान्या, ये मक्खियाँ नहीं हैं। इनमें से एक हमारे सम्राट हैं।’’

‘‘एक मक्खी तुम्हारी सम्राट!’’ तान्या जोर से हँस पड़ी।

उसी वक्त दोनों मक्खियाँ अपना आकार बदलने लगीं। थोड़ी ही देर में उनका शरीर हाथी जितना विशाल हो चुका था।’’ तान्या ने देखा उनमें से एक मक्खी गुस्से से उस आदमजाद को घूर रही थी।

‘‘तो तुम सबसे छुपकर यह हरकतें कर रहे थे। तुमने हमारी दुनिया का कानून तोड़ा है। क्या सजा दी जाये इसकी तुम्हें?’’ वह मक्खी इंसानी भाषा में बोल रही थी।
‘‘ह...हमें माफ कर दीजिए सम्राट! गलती हो गयी।’’

‘‘यह गलती नहीं, जुर्म है। बहुत बड़ा जुर्म। तुमने न सिर्फ दूसरी दुनिया की औरत से सम्बन्ध बनाये बल्कि उसपर अपनी दुनिया के राज भी जाहिर कर दिये। इसकी सजा जानते हो! मौत और सिर्फ मौत।’’ कहते हुए मक्खी ने दूसरी मक्खी को इशारा किया। दूसरी मक्खी आगे बढ़ी और उस आदमजाद को अपने शिकंजे में कस लिया। 

आदमजाद गिड़गिड़ाते हुए सम्राट से माफी माँग रहा था लेकिन एक झटके में मक्खी उसे निगल गयी।

अब सम्राट का मुँह तान्या की तरफ घूमा।

‘‘तुम हमारी दुनिया की प्राणी नहीं हो इसलिए हम तुम्हें कोई सजा नहीं दे सकते। लेकिन तुम्हारे गर्भ में पल रहे बच्चे का जिंदा रहना मुमकिन नहीं।’’ उस मक्खी के हाथ में दिख रहे किसी विशेष अस्त्र से एक किरण निकलकर तान्या के पेट से टकराई और तान्या को ऐसा महसूस हुआ जैसे उसके पेट में किसी ने अँगारा भर दिया हो।
...........

तान्या इस समय रोहित के साथ एक पार्क के अकेले कोने में बैठी हुई थी।

‘‘तुम मुझे यहाँ क्यों लाये हो रोहित?’’ बहुत देर से खामोश बैठे रोहित को देखकर तान्या ने पूछा।

‘‘तान्या! मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ।’’ रोहित सर झुकाकर बोला।
‘‘क्या कोई खास बात?’’

‘‘हाँ....तान्या, दरअसल तुम्हारे गर्भ में पल रहा बच्चा मेरा है।’’

‘‘रोहित, एक तो मैं अपने सपने की वजह से परेशान हूँ, ऊपर से तुम और मजाक कर रहे हो।’’

‘‘ये मजाक नहीं है तान्या।’’ रोहित पूरी तरह सीरियस दिख रहा था,‘‘मैं बहुत दिन से तुमसे ये बात कहना चाहता था। लेकिन हिम्मत नहीं कर पा रहा था।’’
‘‘लेकिन ये सब कैसे हो सकता है?’’

‘‘तान्या! आज मैं तुम्हें सब कुछ बताकर अपने दिल का बोझ हल्का करना चाहता हूँ। ये आर्ट प्रदर्शनी देखने से ठीक एक दिन पहले की बात है। जब तुम दोपहर को मेरे घर आयी थीं और सर दर्द की शिकायत की थी। उस वक्त मैंने चाय में नींद की गोली देकर तुम्हें सुला दिया था। उसी वक्त शैतान मेरे ऊपर सवार हो गया था और मैंने तुम्हारे साथ वह सब कर डाला जो मुझे नहीं करना चाहिये था।’’

‘‘ओह!’’ तान्या ने एक गहरी साँस ली।

‘‘लेकिन इन सब के बावजूद मैं हैरत में हूँ। क्योंकि इससे पहले एक डाक्टरी जाँच में मुझे यही मालूम हुआ था कि मैं बाप बनने के काबिल नहीं हूँ। फिर तुममें कैसे गर्भ ठहर गया?’’

‘‘इसलिए, क्योंकि ये बच्चा तुम्हारा नहीं है रोहित।’’ तान्या ने इत्मिनान के साथ कहा।
‘‘अगर मेरा नहीं तो फिर किसका है?’’

‘‘इसी के बारे में तो मेरे सपने बयान कर रहे हैं।’’
‘‘तुम्हारे सपने बकवास के सिवा और कुछ नहीं। बच्चा मेरा ही है।’’

‘‘हरगिज नहीं रोहित। तुमने खुद ही कुबूल किया कि तुम बाप बनने के काबिल नहीं। यानि बच्चा तुम्हारा नहीं है।’’

‘‘शायद तुम इस तरह इंकार करके मेरे किये की सजा देना चाहती हो। ठीक है, जैसी तुम्हारी मर्जी।’’ रोहित दुःखी होकर वहाँ से जाने लगा। तान्या ने उसे रोकने की कोई कोशिश नहीं की।

इसके कुछ दिनों बाद तान्या ने एक बच्चे को जन्म दिया।

और वह बच्चा मृत था। 
--समाप्त--

Tuesday, December 25, 2018

ऊँचाईयों के पार - भाग 3

 तान्या के ग्रुप में एक हलचल सी मच गयी थी।

‘‘बगैर शादी के बच्चा! मुझे उम्मीद ही नहीं थी तान्या ऐसी होगी।’’ रिजवान ने कहा। साथ में अपने कानों को हाथ भी लगा लिया था।

‘‘तान्या किसी देवी की तरह पवित्र है। तुम उसके बारे में ऐसी बातें सोच भी नहीं सकते।’’ रोहित ने थोड़ा नाराज होकर रिजवान से कहा।

‘‘ओ.के.! झगड़ा नहीं।’’ सबा ने बीच में पड़कर उन्हें शान्त किया,‘‘हो सकता है उसके साथ कोई हादसा पेश आया हो।’’
‘‘मैं और तान्या बहुत ही करीबी दोस्त हैं। वह मुझसे कोई बात नहीं छुपाती। अगर उसके साथ कुछ भी हुआ होता तो वह मुझसे जरूर बताती।’’

‘‘फिर तो दो ही बातें हो सकती हैं। या तो डाक्टर की जाँच गलत है या फिर कोई चमत्कार हो गया है।’’ रिजवान बोला।

‘‘आज के साइंस व टेक्नालाजी के जमाने में चमत्कार वगैरा की बातें बेमानी हैं।’’ सबा ने कहा।
इस तरह ये बहस बगैर किसी नतीजे के खत्म हो गयी।
...........

‘‘तुम्हारे गर्भ में पलने वाला बच्चा मेरा ही है।’’ एक बार फिर तान्या ने सपने में उस आदमजाद को कहते सुना। 

‘‘मैं कैसे यकीन कर लूँ कि एक सपना मेरी हकीकत की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है।’’ सपने में भी तान्या को एहसास था कि वह सपना देख रही है।

‘‘यकीन तो तुम्हें करना ही पड़ेगा। अभी नहीं तो बच्चे को जन्म देने के बाद यकीन करोगी।’’
‘‘आखिर तुम हो कौन? और क्यों मुझे इस तरह परेशान कर रहे हो?‘‘

‘‘परेशान कहाँ? मैं तो तुमसे प्यार करता हूँ। तुम्हें तो मैं जरा भी तकलीफ नहीं देना चाहता। इसलिए मैंने तय किया है कि बच्चे का पालन पोषण मैं ही करूंगा। तुम्हें जरा भी तकलीफ नहीं होने दूँगा।’’

‘‘तुम कैसे पालोगे? तुम तो हमेशा सपने में ही दिखाई देते हो।’’ तान्या ने उसे उपेक्षापूर्ण दृष्टि से देखा। 
‘‘हाँ। यह मेरी बहुत बड़ी मजबूरी है कि मैं तुम से हकीकत की दुनिया में मिल नहीं सकता।’’ उसने कुछ उदास होकर कहा।

‘‘कैसी मजबूरी?’’

‘‘हमारे तुम्हारे बीच विमाओं का अन्तर मुझे तुम्हारी दुनिया में दाखिल नहीं होने देता।’’

‘‘क्या मतलब?’’तान्या ने चौंक कर पूछा।

‘‘यह संसार सात विमाओं यानि डाईमेशन पर बना हुआ है। इनमें से चार विमाओं के बारे में तुम लोग अच्छी तरह जानते हो। ये हैं लम्बाई, चौड़ाई, गहराई और समय की विमाएं।’’

‘‘हाँ, मैंने ग्रेजुएशन करते वक्त इन चारों विमाओं के बारे में अच्छी तरह पढ़ा है।’’ तान्या ने हामी भरी।

‘‘हकीकत ये है कि तुम और तुम्हारे आसपास रहने वाले सारे प्राणी उन्हीं चार विमाओं द्वारा निर्मित हुए हैं और अपने को अनुभव कर रहे हैं। अगर उनमें से कोई भी विमा कम कर दी जाये तो उनका अस्तित्व खत्म हो जायेगा।’’

‘‘सो तो है। लेकिन तुम यह सब क्यों बता रहे हो?’’
‘‘मैं सिर्फ इतना बताना चाहता हूँ कि हमारा अस्तित्व उन चारों विमाओं में नहीं है जिनमें तुम्हारा अस्तित्व है।’’
‘‘फिर कहाँ है?’’

‘‘हमारा अस्तित्व बाकी बची हुई तीन विमाओं में है। इसीलिए मैं तुमसे वास्तविक रूप में नही मिल सकता। ठीक उसी तरह जिस तरह दो विमाओं वाली रचनाएं परछाईं की तरह दिखती तो हैं लेकिन उन्हें वास्तविक रूप में स्पर्श नहीं किया जा सकता।’’

‘‘अगर तुम मुझे वास्तविक रूप में नहीं मिल सकते, तो मेरे गर्भ में पलने वाले बच्चे के बाप कैसे बन सकते हो? क्योंकि वह तो एक वास्तविक चार डाइमेशन में जीने वाला मेरी तरह का प्राणी होगा।’’

उस आदमजाद ने एक गहरी साँस ली फिर कहने लगा,‘‘तान्या! अगर कोई अस्तित्व दो अलग अलग डाइमेशन ग्रुप के मिलने से बनता है, तो वह कम डाइमेशन वाले ग्रुप में शामिल हो जाता है। गणित के इस नियम के अनुसार वह बच्चा मेरी ही दुनिया में दाखिल होगा। मैंने तुमसे एक बार इसीलिए कहा था कि उस बच्चे की परवरिश मैं करूँगा।’’

तान्या किसी सोच में डूब गयी, फिर बोली,‘‘कैसी विडम्बना है, माँ बनने के बाद भी मैं अपने बच्चे को स्पर्श तक नहीं कर पाऊँगी। तुमने मुझे कैसी मुश्किल में डाल दिया है।’’

‘‘मैंने सब कुछ दिल के हाथों मजबूर होकर किया है। वरना मेरी दुनिया में तो इसकी भी इजाजत नहीं कि मैं किसी दूसरे डाइमेंशन ग्रुप के प्राणियों से सम्पर्क भी करूँ। जब तुम आर्ट म्यूजियम में वह तस्वीर देख रही थीं तो मैं पास ही मौजूद था और तुम्हें देखते ही तुम पर मोहित हो गया। फिर मैं उसी तस्वीर के रूप में तुम्हारे सामने आ गया।’’

‘‘क्या मतलब? क्या यह रूप तुम्हारा असली रूप नहीं है?’’ तान्या ने चौंक कर पूछा।
‘‘हमारे संसार में किसी का कोई निश्चित आकार नहीं होता। हम दूसरों के सामने आने के लिए कोई भी आकार ग्रहण कर सकते हैं।’’

एकाएक उस आदमजाद की नजर किसी चीज पर पड़ी और वह काँपने लगा। उसका चेहरा डर से पीला पड़ गया था।

‘‘क्या हुआ?’’ तान्या उसकी यह हालत देखकर पूछने लगी।
उसने उस तरफ इशारा किया। तान्या ने देखा वहाँ मौजूद एक पौधे की पत्ती से दो मक्खियाँ चिपकी हुई थीं।
‘‘ये तो मक्खियाँ हैं, तुम इन्हें देखकर इतना घबरा क्यों गये?’’

क्रमशः 

Monday, December 24, 2018

ऊँचाईयों के पार - भाग 2


जब तान्या को होश  आया तो उसने अपने को एक सफेद बिस्तर पर पड़े देखा। पूरा ग्रुप उसे चारों तरफ से घेरे खड़ा था। 
सभी के चेहरे से परेशानी जाहिर हो रही थी। तान्या को आँखें खोलते देखकर सभी के चेहरे पर इत्मिनान की एक लहर दौड़ गयी।

‘‘तान्या तुम ठीक तो हो?’’ रोहित ने आगे बढ़कर पूछा।
‘‘हाँ...म...मगर!’’

‘‘तुम म्यूजियम में एक तस्वीर देखते देखते अचानक बेहोश होकर गिर पड़ी थीं। फिर हम तुम्हें यहाँ हास्पिटल में ले आये। भगवान का शुक्र है कि तुम ठीक ठाक हो ।’’ विनय बोला।

‘‘तो इसका मतलब बेहोशी की हालत में मैं सपना देख रही थी।’’ तान्या बड़बड़ाई।

लेकिन यह तो सपनों की एक शुरुआत थी। उसके बाद उसने रोज सपने देखने शुरू कर दिये। हर सपने में वही आदम आकृति उसके आसपास मौजूद होती थी और उसे बाहों में लेकर उससे प्यार मोहब्बत की बातें किया करती थी।

‘‘तुम्हारे गर्भ में मेरा प्यार परवरिश पा रहा है।’’ एक दिन उसने कहा।
‘‘अच्छा! और मुझे पता ही नहीं।’’ तान्या ने मज़ाकिया लहजे में कहा।
‘‘मेरी बात को झूठ मत समझो।’’ उसने कुछ सीरियस होकर कहा।
...........

‘‘क्या बात है तान्या? आजकल तुम कुछ परेशान मालूम होती हो।’’ तान्या के सबसे करीबी दोस्त रोहित से उसकी परेशानी छुपी न रही।
‘‘परेशान तो नहीं, हाँ उलझन में जरूर हूँ।’’

दोनों इस वक्त एक रेस्टोरेन्ट में चाईनीज़ का मज़ा लेने आये हुए थे।
‘‘कैसी उलझन?’’ रोहित ने पूछा।

‘‘आजकल मैं एक अजीब सा सपना रोजाना देख रही हूँ।’’ कहते हुए उसने अपना सपना बयान किया।

‘‘मालूम होता है म्यूजियम की उस तस्वीर ने तुम्हारे ऊपर गहरा असर डाला है। यह एक मनोवैज्ञानिक तथ्य है कि अगर कोई चीज़ दिमाग पर प्रभाव डालती है तो वह सपने में भी दिखाई देती है और बार बार दिखाई देती है।’’ 

‘‘हो सकता है यही बात हो। लेकिन वह तस्वीर ऐसी खास तो नहीं थी कि उसका प्रभाव मेरे ऊपर इतना ज्यादा पड़ जाये।’’

‘‘जरूरी नहीं जो चीज हमें प्रभावित करे वह खास ही हो। तुमने देखा होगा कभी कभी बहुत संभ्रान्त लोग बेख्याली में कोई फूहड़ गाना गा रहे होते हैं। दरअसल वह गाना उनके दिमाग में कहीं से घुसपैठ कर बैठता है और फिर इस तरह सवार हो जाता है जैसे बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है।’’

‘‘कुछ भी हो, लेकिन वह सपना तो अब मेरे लिए बहुत बड़ी उलझन बन गया है। लगता है जैसे मैं दोहरी जिंदगी जी रही हूँ। एक जीती जागती और दूसरी सपने में।’’

‘‘क्यों न तुम किसी अच्छे साइकोलॉजिस्ट से मिलो।’’ रोहित ने राय दी।

‘‘यही मैं भी सोच रही हूँ।’’ कहते हुए तान्या उठने लगी, लेकिन फिर दोबारा बैठ गयी और अपना सर थाम लिया।

‘‘क्या हुआ?’’ रोहित ने चौंक कर पूछा।
‘‘मुझे चक्कर आ रहा है।’’

‘‘मालूम होता है उस सपने ने तुम्हारी सेहत पर भी बुरा असर डाला है।चलो मैं तुम्हें डाक्टर के पास ले चलता हूँ।’’ रोहित ने उसका हाथ पकड़कर उसे सहारा दिया।
...........

डाक्टर ने तान्या का अच्छी तरह चेकअप किया और फिर बाहर आकर रोहित से पूछने लगा,‘‘क्या ये आपकी पत्नी है?’’

‘‘अभी तक तो नहीं। क्या बात है डाक्टर साहब?’’

‘‘ऐसी हालत में इनके पति को इनका ख्याल रखना चाहिये। इन्हें तीन माह का गर्भ है और इनके जिस्म में खून की अच्छी खासी कमी है।’’

डाक्टर की बात सुनकर रोहित हैरत में पड़ गया।

डाक्टर ने फिर कहा,‘‘देखिए, ये मामला सीरियस है। आप इनके पति से मुझे मिलाईए या बात कराईए। मैं उन्हें कुछ जरूरी मशविरे देना चाहता हूँ।’’

रोहित ने एक गहरी साँस लेकर कहा,‘‘डाक्टर, तान्या गैर शादी शुदा है। मैं आपकी बात पर कैसे यकीन कर लूँ कि वह माँ बनने वाली है।’’

‘‘ओह! आई एम सॉरी। लेकिन हकीकत वही है जो मैंने बताई है।’’

इस बीच तान्या भी चेकअप रूम से बाहर आ चुकी थी। जब उसने डाक्टर की बात सुनी तो उसके मुँह से बस यही निकला,‘असंभव!’
...........
क्रमशः 

Sunday, December 23, 2018

ऊँचाईयों के पार - Part 1


ज़ीशान -ज़ैदी  लेखक

शहर के बीचोंबीच स्थित स्ट्रोक्स आर्ट गैलरी में कलाप्रेमी दर्शकों का हुजूम लगा हुआ था। माडर्न आर्ट की इस प्रदर्शनी में विश्व के कई नामी गिरामी चित्रकारों की पेंटिग्स मौजूद थीं। वहाँ मौजूद दर्शकों में कालेज छात्रों का एक ग्रुप भी शामिल था।

तान्या को न तो माडर्न आर्ट से दिलचस्पी थी और न ही समझ थी। उसे तो हर तस्वीर ‘उल्टी जलेबी’ की तरह दिख रही थी। बहरहाल चूँकि वह ग्रुप की एक मेम्बर थी इसलिए ग्रुप के साथ घिसटना उसकी मजबूरी थी।

लेकिन इस एक तस्वीर ने उसे ठिठकने पर मजबूर कर दिया। न जाने ऐसी क्या बात थी उसमें। देखने में ऐसा कुछ नहीं था तस्वीर में। पूरे कैनवस पर आदम की तस्वीर बनी हुई थी जो पेड़ से फल तोड़ने की कोशिश में था। तान्या उस तस्वीर में ऐसा खोई कि पूरा ग्रुप कब आगे निकल गया, उसे इसका भी आभास नहीं हुआ।

उसी वक्त वहाँ अँधेरा छा गया। क्योंकि आर्ट म्यूजियम की लाइट चली गयी थी।
...........

अचानक तान्या ने देखा उसके सामने वही आदम की तस्वीर मौजूद है जीवित अवस्था में।
‘‘ आओ! मैं तुम्हारा ही इंतिजार कर रहा था।’’ उस तस्वीर के मुँह से सरसराती आवाज पैदा हुई।

‘‘क..कौन हो तुम?’’ तान्या ने घबराहट भरे स्वर में पूछा।

‘‘डरो मत। मेरे पास आओ। मैं तुम्हारा महबूब हूँ, तुमसे प्यार करता हूँ। वह बाहें फैलाकर उसकी तरफ बढ़ा। तान्या ने घबराकर पीछे हटना चाहा, लेकिन लगता था मानो उसके कदम वहीं जम गये हों। जल्दी ही तस्वीर वाले  श ख्स ने उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया। अचानक दोनों के बीच की सारी दीवारें गिर गयीं। एक भयानक तूफान था वह जिसने तान्या को अपने लपेटे में ले लिया था।

और जब वह तूफान थमा तो तान्या बेहोश  हो चुकी थी।
...........

क्रमशः