Welcome in the world of Hindi Science Fiction. In this blog you will see the science fiction Stories/Novels of Zeashan Zaidi. In addition you will also read the latest discussions/news related to Indian (Hindi) science fiction.

Tuesday, January 24, 2012

क्या था परम अन्धकार (Absolute Darkness)?


आमतौर पर अँधेरा ऐसी जगह को कहते हैं जहाँ रोशनी की कोई किरण मौजूद न हो। रोशनी हमारी आँखों और किसी वस्तु के बीच देखने के लिये सेतु का काम करती है। वस्तु से होकर आने वाली रोशनी की किरणें जब आँखों तक पहुंचती हैं तो उस वस्तु के देखने का एहसास हमारे मस्तिष्क को होता है। इलेक्ट्रान माइक्रोस्कोप जैसे उपकरणों की सहायता से चीज़ों को देखने के लिये रोशनी की किरणों की बजाय इलेक्ट्रान बीम की सहायता ली जाती है। दूसरी तरफ इन्फ्रा कैमरों में रोशनी से इतर इन्फ्रारेड तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है। बगैर कैमरे के ये तरंगें चूंकि आँखों को संवेदित नहीं करतीं अत: केवल इन्फ्रा तरंगों की उपस्थिति में नंगी आँखों से चीज़ों को देखा नहीं जा सकता। लेकिन उपकरणों की मौजूदगी में चीज़ों के देखने के औज़ारों में इलेक्ट्रान बीम व इन्फ्रारेड तरंगों को भी शामिल किया जा सकता है। अब अपने दायरे को और बढ़ाते हुए वस्तुओं को महसूस करने की बात की जाये और इसके लिये आँखों के अलावा दूसरी इन्द्रियों को भी नज़र में रखा जाये तो रोशनी के अलावा ध्वनि और तमाम तरंगें जो हमें किसी चीज़ के अस्तित्व का एहसास कराती हैं, इस परिभाषा में आ जायेंगी। रेडियो और एक्सरे जैसी चीज़ों को भी अगर शामिल कर लिया जाये तो तमाम विद्युत चुम्बकीय तरंगों और तमाम तरंगों को ‘रोशनी’ के दायरे में रखा जा सकता है क्योंकि ये तमाम तरंगें किसी न किसी तरीके से चीज़ों के अस्तित्व का एहसास मस्तिष्क को कराती हैं। यानि ये सब उपरोक्त परिभाषा के अन्तर्गत चीज़ों को देखने में मदद देती हैं या चीज़ों को दिखाती हैं। 

साइंस के अनुसार तमाम इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें ‘फोटॉन’ नामी कणों की शक्ल में होती हैं जबकि आवाज़ जैसी लहरें हवा के कणों के माध्यम द्वारा आगे बढ़ती हैं। और ये तमाम तरह की तरंगें या लहरें ऊर्जा की अलग अलग किस्में होती हैं। तो इन तमाम बातों का निष्कर्ष ये हुआ कि ऊर्जा ही वह साध्ना है जिसके द्वारा हमें किसी भी चीज़ के अस्तित्व का ज्ञान होता है। किसी वस्तु व हमारी इन्द्रियों के बीच सम्पर्क स्थापित करने का काम ऊर्जा की कोई न कोई अवस्था करती है। अब अँधेरे की परिभाषा के अनुसार कोई क्षेत्र ऐसी अवस्था में हो जहाँ पर मौजूद कोई भी वस्तु दिखाई न दे। इसलिए देखने की उपरोक्त परिभाषा में अँधेरा ऐसी अवस्था को कहेंगे जहाँ पर किसी भी तरह की ऊर्जा मौजूद न हो। सवाल ये पैदा होता है कि ऐसी अवस्था ब्रह्माण्ड में कहां पर है या थी? देखा जाये तो वर्तमान में ब्रह्माण्ड में कोई भी ऐसी जगह नहीं जहाँ ऊर्जा मौजूद न हो। लेकिन एक कल्पना ज़रूर की जा सकती है कि अगर कोई ऐसी जगह हो जहाँ पर किसी भी तरह की ऊर्जा मौजूद न हो तो किस तरह की परिस्थिति सामने आ सकती है।

इस परिस्थिति को समझने के लिये एक भौतिक राशि एण्ट्रोपी (Antropy) की सहायता ली जा सकती है। किसी खास ताप पर किसी सिस्टम में जितनी ऊर्जा होती है, उस ऊर्जा को ताप से विभाजित करने पर एण्ट्रोपी मिलती है। यानि अगर किसी सिस्टम में 10 जूल एनर्जी 2 कैल्विन ताप पर मौजूद है तो उसकी एण्ट्रोपी होगी 5 जूल/कैल्विन। एक हकीकत ये भी है कि किसी खास ताप पर किसी सिस्टम की एण्ट्रोपी की गणना करना नामुमकिन है क्योंकि उस सिस्टम में जो भी इलेक्ट्रान, प्रोटान, एटम या अणु होंगे, उनकी तमाम ऊर्जा की गणना करना नामुमकिन है। इतना ज़रूर है कि सिस्टम को बाहर से कुछ ऊर्जा देने पर उसकी एण्ट्रोपी में कितना बदलाव होगा, इसे मापा जा सकता है। अब ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) के एक नियम के अनुसार किसी सिस्टम की एण्ट्रोपी हमेशा या तो बढ़ती है या उसमें कोई बदलाव नहीं होता। सिस्टम की एण्ट्रोपी कभी कम नहीं होती। इसीलिए ये कहा जाता है कि यूनिवर्स की पैदाइश के बाद से उसकी एण्ट्रोपी लगातार बढ़ रही है।

किसी खास ताप पर एण्ट्रोपी ज़ीरो होने का मतलब हुआ कि सिस्टम में उस ताप पर कोई भी ऊर्जा मौजूद नहीं। दूसरे शब्दों में अगर उस सिस्टम में एटम है तो उसके इलेक्ट्रान नाभिक के चारों तरफ चक्कर नहीं लगा रहे होंगे। क्योंकि वहाँ गतिज ऊर्जा भी नहीं होगी। न ही प्रोटॉन आपस में बंध्कार न्यूक्लियस बना रहे होंगे और न ही क्वार्क एक दूसरे से मिलकर मूल कणों की रचना कर रहे होंगे। इसका सीधा मतलब ये निकलता है कि वहाँ पर किसी एटम का अस्तित्व ही सिरे से नहीं होगा। इन तमामतर बातों का निष्कर्ष ये हुआ कि परम अन्धकार (Absolute Darkness) एक ऐसी स्पेस लोकेशन हुई जहाँ न तो किसी तरह का पदार्थ पाया जाता है और न ही ऊर्जा। मौजूदा वक्त में यूनिवर्स के भीतर ऐसी कोई जगह नहीं है, लेकिन साइंटिफिक सुबूत बताते हैं कि यूनिवर्स के जन्म के समय ऐसी जगह मौजूद थी। जहाँ स्पेस तो था लेकिन न तो वहाँ पदार्थ था और न ही ऊर्जा। ऐसी जगह रोशनी की उत्पत्ति से भी पहले निर्मित हो चुकी थी। क्योंकि ऊर्जा न होने का मतलब यही निकलता है कि रोशनी का जन्म नहीं हुआ था।

अगर परम अन्धकार का अस्तित्व सत्य माना जाये तो इसका मतलब होगा कि पदार्थ व ऊर्जा से पहले निर्माण हुआ स्पेस व डाईमेन्शन का। यही समय था जबकि ब्रह्माण्ड में परम अन्धकार की दशा थी। फिर उसके बाद निर्माण हुआ पदार्थ व ऊर्जा का। इसमें भी ऊर्जा का निर्माण पहले हुआ। उस समय यूनिवर्स के एण्ट्रोपी शून्य थी। तब से आजतक लगातार यह एण्ट्रोपी बढ़ रही है, ऐसा साइंटिफिक रिसर्च से पता चला है। ऊष्मागतिकी का नियम भी यही कहता है कि किसी सिस्टम की एण्ट्रोपी कभी भी नहीं घट सकती। 

एक सवाल ये उठता है कि यूनिवर्स के जन्म के समय ताप कितना था? अगर ये ताप ज़ीरो माना जाये तो एण्ट्रोपी का मान ज़ीरो नहीं होगा। भले ही उस वक्त एनर्जी ज़ीरो रही हो। इसलिए क्योंकि ज़ीरो को ज़ीरो से विभाजित करने पर नतीजा ज़ीरो नहीं मिलता। बल्कि यह मान अनिर्धारित या अस्थिर होता है। बिग बैंग की मान्यता के अनुसार यह ताप अनन्त था। जो बिग बैंग के तुरन्त बाद निश्चित किन्तु अत्यधिक तापमान के रूप में परिवर्तित हो गया। 

एण्ट्रोपी का यही अस्थिर मान इन्फ्लेशनरी यूनिवर्स (Inflationary Universe) को पैदा करता है। यानि ऐसे ब्रह्माण्ड की पैदाइश करता है जो लगातार फैलता जाता है। वर्तमान खोजें भी यही दर्शाती हैं कि ब्रह्माण्ड लगातार विस्तार ले रहा है। इन्फ्लेशनरी थ्योरी के अनुसार मैटर, एण्टीमैटर और फोटॉन वैक्यूम फ्ल्क्चुएशन के ज़रिये झूठे वैक्यूम (False Vacuum) से एक कला संक्रमण (Phase Transition) के बाद पैदा हुए। ये सभी कण धनात्मक ऊर्जा रखते हैं। और इस कारण से हमेशा फैलाव की दशा में रहते हैं। हालांकि उनकी धनात्मक ऊर्जा ऋणात्मक गुरुत्वीय ऊर्जा द्वारा बैलेंस हो जाती है। इस तरह से पूरी ऊर्जा हमेशा ज़ीरो ही रहती है।

यूनिवर्स की शून्य ऊर्जा धनात्मक व ऋणात्मक ऊर्जा में कैसे बदली? यह एक बड़ा सवाल है। एनर्जी पैदा हुई ‘कुछ नहीं’ से। ये ‘कुछ नहीं’ पहले से मौजूद स्पेस टाइम का निर्वात था? या ये स्पेस टाइम भी मौजूद नहीं था। यानि ये सभी चीज़ें यूनिवर्स की पैदाइश के साथ ही पैदा हुईं? इस तरह के बहुत से सवालों पर वैज्ञानिक एकमत नहीं हैं। लेकिन अब तक मिले कई सुबूत यही कहते हैं कि ‘कुछ नहीं ’ से स्पेस टाइम की रचना हुई। उसके बाद एनर्जी और मैटर की पैदाइश हुई। एनर्जी और मैटर की पैदाइश से पहले स्पेस टाइम की वैक्यूम ही दरअसल ‘परम अन्धकार’ था।

-----उपरोक्त लेख 'इलेकट्रोंनिकी आपके लिए' के जनवरी-2012 अंक में प्रकाशित हुआ.
जीशान हैदर जैदी, लेखक.

Wednesday, December 28, 2011

उर्दू में साइंस फिक्शन - एक मुताल्या


प्रस्तुत लेख मैंने दिनांक 26 व 27 दिसंबर 2011 को नेशनल डिग्री कालेज, लखनऊ मे आयोजित कार्यशाला के दूसरे दिन पढ़ा। ये कार्यशाला विज्ञान प्रसार, नेशनल बुक ट्रस्ट व तस्लीम के संयुक्त तत्वधान में आयोजित हुई।

हिन्दी साइंस फिक्शन के शौकीनों को दो नाम खास तौर पर आकर्षित करते हैं। ये नाम है प्रोफेसर दिवाकर और डा0रमन। लेकिन जब कोई इन नामों के लेखकों के बारे में छानबीन करता है, तो उनका कहीं कोई अता पता नहीं मिलता। दरअसल ये दोनों नाम ही असली नहीं हैं और सच्चाई ये है कि इन नामों से लिखने वाला उर्दू का मशहूर मुसन्निफ इज़हार असर है। इज़हार असर ने एक हज़ार नावेल लिखकर रिकार्ड बनाया जिनमें सौ से ऊपर साइंस फिक्शन शामिल हैं। जबकि इस गिनती से वह नावेल अलग है जो उन्होंने हिन्दी में प्रोफेसर दिवाकर और डाक्टर रमन नामों से लिखे। इससे हम अन्दाज़ा कर सकते हैं कि उर्दू लिटरेचर साइंस फिक्शन के मामले में दूसरी भाषाओं के मुकाबले कहीं कमतर नहीं ठहरता। हालांकि आमतौर पर जब उर्दू लिटरेचर की बात होती है तो शेरो शायरी, ग़ज़ल, जाम व साक़ी का ही तसव्वुर ज़हन में आता है। उर्दू साइंस फिक्शन का वजूद तो बहुत ही दूर की कौड़ी नज़र आता है। लेकिन हक़ीक़त इसके बरअक्स है।
उर्दू ज़बान साइंस फिक्शन के मामले में निहायत ज़रखेज़ है। उर्दू के कई मुसन्निफों ने साइंस फिक्शन से मुताल्लिक आला दर्जे का लिटरेचर दुनिया के सामने पेश किया है। इस लिटरेचर में बहुत से नये अछूते ख्यालात को जगह दी गयी है। उर्दू को फरोग़ देने में शहरे लखनऊ का नाम अव्वल दर्जे पर आता है। उर्दू का पहला साइंस फिक्शन राइटर देने का भी सेहरा इसी शहर के सर है। और उस राइटर का नाम है खान महबूब तरज़ी। इन्होंने पहला साइंस फिक्शन नावेल आज़ादी से पहले लिख लिया था। हालांकि ये बताना बहुत मुश्किल है कि उनका पहला साइंस फिक्शन नावेल कौन सा था, क्योंकि उनके बारे में बहुत कम रिकार्ड उपलब्ध् है। आज़ादी से पहले के दौर में लिखे गये उनके कुछ नावेल है, ‘क़यामत-ए-सुग़रा’, ‘सफर-ए-ज़ोहरा’, ‘शहज़ादी शब-ए-नूर’ और ‘फौलादी पुतली’ वगैरा। ये सभी नावेल लखनऊ के मशहूर पब्लिकेशन नसीम बुक डिपो ने प्रकाशित किये थे। उनके नावेलों में टाइम मशीन और रोशनी की तेज़ रफ्तार से गुज़रकर महाभारत की लड़ाई जैसे गुज़िश्ता वाक़ियात को देखना शामिल है। आगे उर्दू के जिन मुसन्निफों ने इसपर काम किया है उनमें शामिल हैं इब्ने सफी, इज़हार असर, मज़हर कलीम, मुश्ताक़ क़ुरैशी, एच-इक़बाल, एम-ए-राहत वगैरा। 
अकेले इब्ने सफी ने ही ढाई सौ से ऊपर नावेल लिखे, इनमें सत्तर के लगभग उच्च कोटि के साइंस फिक्शन शामिल हैं। इब्ने सफी के उपन्यास कहने को तो जासूसी हैं किन्तु उनमें सस्पेंस, एडवेंचर, हास्य हर तरह के रंग देखने को मिलते हैं। वो पाठक वर्ग को ऐसी रोमांचक दुनिया की सैर कराते हैं जो पाठक को आसपास के वातावरण से बेखबर कर देती है। उनके उपन्यासों में सबसे बड़ा रंग है साइंस फिक्शन का और यह कहने में कोई हिचक नहीं होती कि उर्दू में जासूसी साइंस फिक्शन की शुरूआत की है इब्ने सफी ने। सन 1953 में प्रकाशित उनका उपन्यास ‘मौत की आंधी  इस तरह का पहला उपन्यास था। जिसमें एक ऐसे लौह मानव की कल्पना है जो मशीन से कण्ट्रोल होता था और जानवरों व इंसानों की बू पाकर झपटता था और उनके दो टुकड़े कर देता था। इस लौह राक्षस को बनाने वाले कुछ सिरफिरे वैज्ञानिक थे जो पूरी दुनिया को अपने कब्ज़े में करना चाहते थे।  
इब्ने सफी ने साहित्य में जासूसी साइंस फिक्शन की एक नयी शुरूआत की है। उनकी कहानियां भूत प्रेतों और राक्षस व पिशाचों की कल्पनाओं का मज़ाक उड़ाती हुई हर घटना की साइंटिफिक व्याख्या प्रस्तुत करती हैं। उनकी कहानियों में अनेकों अद्भुत वैज्ञानिक कल्पनाएं देखने को मिलती हैं। उनकी शोला सीरीज़ में ऐसी घातक किरणों की कल्पना है जिनसे सिर्फ चमड़े का लबादा पहनकर बचा जा सकता है। उनकी कहानियों में वैज्ञानिक रूप से निहायत तरक्कीयाफ्ता कुछ मुजरिमों ने एक नया मुल्क ज़ीरोलैण्ड नाम से बसाया है और जिनके पास ऐसे उड़नतश्तरी नुमा वायुयान हैं जिन्हें दूसरे देशों का राडार सिस्टम कैच नहीं कर पाता। और जिसे लोग दूसरी दुनिया के प्राणियों का यान समझते हैं। उनके पास गदानुमा ऐसे हथियार भी मौजूद हैं जिनसे गोलियां टकराकर अपनी दिशा बदल देती हैं।
इब्ने सफी के उपन्यासों में ज़ेब्राधारी ऐसे मनुष्य पाये जाते हैं जो हाथी से भी ज्य़ादा शक्तिशाली हैं। ये मनुष्य कुछ वैज्ञानिकों के दिमाग की उपज हैं। ज़ीरोलैण्ड पर हुकूमत करने वाली एक ऐसी औरत है जो अपने यन्त्रों द्वारा किसी को हिप्नोटाइज़ करके उससे अपने आदेश मनवा लेती है। वहाँ ऐसे पक्षी पाये जाते हैं जिनकी आँखों में छोटा कैमरा फिट रहता है और वे जासूसी का काम करते हैं। इब्ने सफी के उपन्यासों में ऊर्जा की ऐसी परछाईयां भी मिलती हैं जिनकी रेंज में आने पर बड़ी से बड़ी इमारत ढेर हो जाती है। मशीनों से कण्ट्रोल होने वाले कृत्रिम तूफान भी उनके उपन्यासों में नज़र आते हैं। इस प्रकार की अनेकों कल्पनाएं उनके उपन्यासों में प्रदर्शित होती हैं जिनमें साइंस का पहलू पूरी मज़बूती के साथ संलग्न रहता है।
मनोविज्ञान पर भी इब्ने सफी का कलम पूरी कुशलता के साथ चला है। स्पिलिट पर्सनालिटी (द्विव्यक्तित्व) का विचार उनके उपन्यास ‘जहन्नुम का शोला’ में प्रदर्शित हुआ। जिसमें एक मासूम लड़की अपनी दूसरी पर्सनालिटी में मुजरिमों की टोली की मलिका है। ‘एडलावा’ रेड इण्डियन जाति का बचा हुआ शक्तिशाली व्यक्ति, जिसके अन्दर अपनी जाति मिटाने वालों के खिलाफ गुस्सा फूटकर निकलता है और वह उनके खून से स्नान करता है। एक अपराधी जब किसी तरीके से अपना मुंह नहीं खोलता तो उसे लिटाकर उसके माथे पर लगातार पानी की बूंदें टपकायी जाती हैं। उन बूंदों की धमक उसे चीखने पर मजबूर कर देती है।
उर्दू साइंस फिक्शन में एक और सशक्त हस्ताक्षर इज़हार असर है। इनकी अभी इसी वर्ष 15 अप्रैल 2011 को मृत्यु हुई है। जासूसी और साइंस फिक्शन का मिक्सचर उनकी बहराम सीरीज़ काफी लोकप्रिय हुई। इज़हार असर के साइंस फिक्शन उपन्यासों में भी कई अछूते ख्यालात देखने को मिलते हैं। 1955 में प्रकाशित उनका उपन्यास ‘आधी जिंदगी’ एक ऐसी औरत की कहानी है जो अपने मालिक के अनैतिक हुक्म को मानने से इंकार कर देती है। उस समय उसका मालिक उसे बताता है कि वह सिर्फ एक रोबोट है जिसे अपने मालिक का हर हुक्म मानने के लिये बनाया गया है। ‘बीस साल बाद’ में दूसरे ग्रह से आये हुए एलियेन एक सुपर ब्रेन का निर्माण करते हैं जो ध्राती पर खत्म हो रही एक जाति की छानबीन करता है। ‘मशीनों की बग़ावत’ में ऐसी इण्टेलिजेंट मशीनों की कल्पना है जिन्होंने ग्रह पर रहने वाले इंसानों के दिमागों पर अपना कण्ट्रोल कर लिया है और किसी भी इंसान के दिमाग में अगर उनके खिलाफ ख्याल भी आता है तो उन्हें पता चल जाता है। लेकिन इसके बावजूद कुछ इंसान अपनी अक्ल से उनके खिलाफ जीतने में कामयाब हो जाते हैं। ‘ज़ीरो ज़ीरो ज़ीरो’ में दिमाग को एटामिक रेडियेशन के ज़रिये इतना ताकतवर बनाने की कल्पना है कि सिर्फ सोच के द्वारा किसी का क़त्ल किया जा सकता है। ‘एटामिक कठपुतलियां’ ऐसे इंसानों की कहानी है जो कभी नार्मल थे, लेकिन एटामिक रेडियेशन ने उन्हें अछूत बना दिया है। यह एक इंसानी किरदार के मशीनी डुप्लीकेट की भी कहानी है जो साइंसदानों की तमाम कोशिशों के बावजूद अपनी असलियत जान जाता है और एक ग्रह को बचाने के लिये अपने को क़ुरबान कर देता है। 
उर्दू साइंस फिक्शन में मज़हर कलीम ने भी बहुत कुछ लिखा है। हालांकि उनके उपन्यासों में इब्ने सफी के ही किरदार यानि अली इमरान व उसकी टीम नज़र आती है। शायद प्रकाशकों के दबाव में उन्होंने पुराने मक़बूल किरदारों को लेकर कहानियां लिखीं। उनके उपन्यास ‘कायापलट’ में अनोखे बायोवीपन की बात हो रही है। एक साइंटिस्ट ने ऐसे जरासीम बनाये हैं जो इंसान को बुज़दिल बना देते हैं। जिनके असर में आते ही फौज के बड़े बड़े बहादुर चींटी काटने से भी डरने लगते हैं। ‘व्हाइट शैडो’ कहानी में साइंटिस्ट ऐसी सोलर माइक्रोचिप बनाने में कामयाब हो जाता है जिसमें स्टोर की हुई सोलर एनर्जी महीनों चलती है। इब्ने सफी के ही किरदारों को लेकर एच-इक़बाल और मुश्ताक कुरैशी ने ऐसे कई नावेल लिखे जिसमें उन्होंने इन किरदारों को दूसरे ग्रहों की अनजानी दुनियाओं की सैर कराई। एम-ए-राहत की ‘सदियों का बेटा’ नाम से एक उपन्यास सीरीज़ काफी मक़बूल हुई। जिसमें उन्होंने हमेशा ज़िन्दा रहने वाले एक कैरेक्टर के ज़रिये ज़मीन बनने की शुरूआत से लेकर उसकी हर सदी में तरक्की की दास्तान सुनाई थी। खास बात ये कि इस पूरी विज्ञान सम्मत दास्तान में कहीं किसी वैज्ञानिक का रोल नहीं है। पाकिस्तान में सिराते इम्तियाज़ से सम्मानित अशफाक अहमद की तिलिस्म होश अफ्ज़ा भी क़ाबिले जिक्र है जिसमें प्योर साइंस फिक्शन कहानियां शामिल हैं। इस तरह उर्दू ज़बान साइंस फिक्शन लिटरेचर से भरपूर है।

--------- ज़ीशान हैदर ज़ैदी (लेखक)


और अब एक बानगी लखनऊ में पत्रकारिता के मौजूदा स्तर की।

लखनऊ का एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र लिखता है,
‘जीशान हैदर जैदी ने उर्दू की विज्ञान कथाओं का परिचय देते हुए कहा कि इससे पहले भी उर्दू के विज्ञान कथाकार लखनऊ में आ चुके हैं।’
(जबकि मैंने कहा था कि उर्दू जगत में पहला विज्ञान कथाकार लखनऊ का था।) 

एक अन्य प्रतिष्ठित समाचार पत्र ने लिखा,
‘उर्दू की विज्ञान कथाओं का परिचय देते हुए विज्ञान कथाकार जीशान हैदर जैदी ने कहा कि मुट्‌ठी भर विज्ञान कथाओं को छोड़ दें तो उर्दू साहित्य में दूर दूर तक विज्ञान कथाओं का कोई अस्तित्व नहीं है।’
(जबकि मैंने कहा था कि उर्दू ज़बान साइंस फिक्शन लिटरेचर से भरपूर है।)  
------लेखक           

Tuesday, December 27, 2011

विज्ञान कथा कार्यशिविर में पुस्तक ' बुड्‌ढा फ्यूचर’ का लोकार्पण.


विज्ञान प्रसार, नेशनल बुक ट्रस्ट व तस्लीम के संयुक्त तत्वधान में एक कार्यशाला का आयोजन दिनांक 26 व 27 दिसंबर 2011 को नेशनल डिग्री कालेज, लखनऊ में हुआ। जिसमें देश भर से आये लगभग 20 चोटी के विज्ञान व विज्ञान कथा लेखक सम्मिलित हुए। इनमें प्रमुख नाम थे, मुख्य अतिथि के रूप में शामिल अन्तर्राष्ट्रीय विज्ञान कथाकार अनिल मेनन, डा0अरविन्द मिश्र, श्री हेमन्त कुमार, श्री देवेन्द्र मेवाड़ी, डा0सी0एम0नौटियाल, श्री विष्णु प्रसाद चतुर्वेदी, श्री हरीश गोयल, डा0विनीता सिंघल, श्री पंकज चतुर्वेदी, श्री शुकदेव प्रसाद, श्री चंदन सरकार, श्री अमित कुमार ओम, श्री मुकुल श्रीवास्तव, सुश्री बुशरा अलवेरा, श्री मनीष मोहन गोरे, डा0ज़ाकिर अली रजनीश, सुश्री अरशिया अली व ज़ीशान हैदर ज़ैदी। कार्यक्रम के प्रथम दिन उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि थे श्री अनिल मेनन। प्रथम दिन की विस्तृत रिपोर्ट को यहाँ पढ़ें।

उद्घाटन सत्र में अन्य कार्यक्रमों के अलावा दो पुस्तकों का विमोचन भी हुआ जिनमें पहली डा0अरविन्द मिश्र की ‘साइंस फिक्शन इन इंडिया’ व दूसरी ज़ीशान हैदर ज़ैदी की ‘बुड्‌ढा फ्यूचर’ थी।

‘बुड्‌ढा फ्यूचर’ नाट्‌य जगत में एक अनूठा प्रयोग है। यानि किसी साइंस  फिक्शन कथात्मक की नाटक के रूप में प्रस्तुति। नाटक की अपनी सीमाएं होती हैं। और किसी साइंस फिक्शन को उन सीमाओं में बांधना निहायत चुनौतीपूर्ण कार्य है। खासतौर से तब जबकि हम यह तथ्य जानते हैं कि एक साइंस  फिक्शन फिल्म बनाने में आम फिल्म से कई गुना ज्य़ादा पैसा स्वाहा हो जाता है। और हर कदम पर एक नयी कल्पना व नये सीन की ज़रूरत होती है। ऐसे में नाटक के रूप में इसे दर्शाना, जहाँ केवल एक स्टेज होता है और बजट के नाम पर शून्य होता है इसका मंचन एक चैलेंज ही कहा जायेगा। यही कारण है कि साइंस  फिक्शन में ड्रामे की विधा न के बराबर देखने को मिलती है। ज़ीशान हैदर ज़ैदी द्वारा लिखे तीन ड्रामे बुड्‌ढा फ्यूचर, सौ साल बाद व पागल बीवी का महबूब इस दिशा के कार्य हैं।

बुड्‌ढा फ्यूचर पर एक पपेट ’शो भारतीय विज्ञान कथा एसोसिये’शन के 2008 अधिवेशन में हुआ। पपेट माध्यम में विज्ञान कथा पर ये विश्व का पहला शो था। जिसे प्रसिद्ध पपेटियर अरशद उमर ने निर्देशित किया था। और अब इसे किताब की शक्ल में क्वींस पब्लिकेशन, लखनऊ ने प्रकाशित किया है।

Tuesday, July 19, 2011

उल्टा दांव (Last Part - 3)

सम्राट बोरस ने इस समय सेनापति लाइकस, साइरस और दूसरे महत्वपूर्ण लोगों की हंगामी मीटिंग बुलाई थी। जब वो लोग उसके कक्ष में पहुंचे तो वो बेचैनी से टहल रहा था। 
‘‘सुनो। तुम लोगों का प्लान बहुत धीमे असर कर रहा है। उनको बाहरी विकिरण के प्रभाव में लाकर कमज़ोर करने में महीनों लग जायेंगे। और हमसे इतना सब्र नहीं हो सकता। फैम को तुरंत हमारी मुट्‌ठी में होना चाहिए।’’ बोरस ने उन्हें देखते ही कहा।

‘‘हमें क्या करना चाहिए सम्राट?’’ लाइकस ने पूछा। 
‘‘हमला। तुम अपने सारे जंगी प्लेन लो और आज ही फैम पर हमला कर दो।’’
उसकी बात सुनकर सभी चौंक पड़े। 
‘‘सम्राट। हमें तैयारियों के लिये थोड़ा वक्त चाहिए। क्योंकि फैम भी विज्ञान और तकनीक में बहुत आगे है।’’ 

लाइकस की बात सुनकर बोरस का चेहरा गुस्से से लाल हो गया, ‘‘लाइकस, हमने तुम्हें इसलिए सेनापति नहीं बनाया कि तुम हमें मशविरा दो। तुम्हें हमारे आर्डर पर अमल करना है बस।’’ 
‘‘माफ कीजिए, मैं बिना तैयारी के फैम पर हमला नहीं कर सकता। मुझे अपने सैनिकों को इस तरह मौत के मुंह में धकेलना पसंद नहीं।’’ इसबार लाइकस ने भी थोड़ी तेज़ आवाज़ में कहा।

‘‘अगर तुम ऐसा नहीं कर सकते तो मरो।’’ बोरस ने जेब से पिस्टल निकाली और लाइकस की ओर करके ट्रिगर दबा दिया। दूसरे ही पल लाइकस का जिस्म धुवां बनकर हवा में विलीन हो चुका था। उसकी ये हालत देखकर सब भौंचक्के खड़े रह गये। 
‘‘साइरस, अब लाइकस का चार्ज मैं तुम्हें देता हूं। तुम फौरन फैम पर हमला कर दो।’’ बोरस अब साइरस की ओर घूमा और साइरस हक्का बक्का रह गया।
‘‘लेकिन मुझे युद्ध का कोई तजुर्बा नहीं। मैं तो सिर्फ एक वैज्ञानिक हूं।’’ वह कमज़ोर आवाज़ में बोला।

‘‘तुम सब नालायक हो। तुम भी मरो।’’ बोरस ने अपनी पिस्टल का निशाना उसे भी बना दिया। अब कमरे में दो व्यक्ति कम हो गये थे। 
अचानक उन व्यक्तियों में से एक ने पिस्टल निकाली और बोरस की ओर करके ट्रिगर दबा दिया। दूसरे ही पल वहां सम्राट बोरस का नामोनिशान मिट चुका था।

‘‘ये बास्टर्ड हम सबको मार डालने की फिक्र में था। मैंने इसे मार दिया। अब हम सब बच जायेंगे।’’ पिस्टल से सम्राट को निशाना बनाने वाले व्यक्ति ने एक गहरी साँस ली।
‘‘तूने सम्राट की हत्या की है। और तुझे इसकी सज़ा ज़रूर मिलेगी।’’ उसके पास खड़े व्यक्ति ने भी अपनी पिस्टल निकाली और पल भर में पहले वाले व्यक्ति को खत्म कर दिया। अब वहां बाकायदा छोटी मोटी जंग शुरू हो गयी थी। जिसमें हर व्यक्ति दूसरे को निशाना बना रहा था। और जब यह जंग खत्म हुई तो वहां किसी भी शख्स का नामोनिशान नहीं था।
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‘‘सम्राट बोरस के ग्रह से अजीब अजीब खबरें आ रही हैं।’’ रामिश इस समय मारियो और दूसरे मन्त्रियों के साथ मौजूद था। उसका चेहरा चमक रहा था।
‘‘जी हाँ। मालूम हुआ है कि सम्राट बोरस अपने ही मन्त्रियों के साथ संघर्ष में मारा गया। और साथ ही उसके खास मन्त्री सेनापति सहित मारे गये।’’

‘‘पता नहीं ये करिश्मा हुआ कैसे, लेकिन इस घटना ने हमारे ग्रह को ज़रूर सुरक्षित कर दिया।’’ दूसरे मन्त्री ने कहा।
‘‘लेकिन बोरस के ग्रहवासी इसे सपने में भी नहीं सोच सकते कि इस घटना के पीछे हमारा हाथ हो सकता है।’’ बादशाह रामिश मुस्कुराते हुए बोला।

‘‘क्या? कैसे?’’ रामिश के सामने कुर्सियों पर बैठे कई मन्त्री उछल पड़े।
‘‘बेहतर है इस बारे में मारियो कुछ बताये। क्योंकि यह सारा प्लान उसी का बनाया हुआ है।’’ बादशाह रामिश ने मारियो की ओर देखा।

मारियो ने बोलना शुरू किया, ‘‘दरअसल हमने बोरस को उसी के हथियार से मारा है। उसने हमारा सुरक्षा घेरा हटा दिया था, जिससे कई प्रकार के हानिकारक विकिरण हमारे ग्रह पर प्रवेश कर रहे थे। उनमें ऐसे भी विकिरण थे जो हमारे मस्तिष्क में गुस्से जैसी भावनाएं भड़का रहे थे। हमारे वैज्ञानिकों ने ऐसे विकिरणों का अध्ययन किया और उनकी तीव्रता हज़ारों गुना बढ़ाने में कामयाब हो गये। फिर ये तीव्र विकिरण हमने बोरस के ग्रह की ओर भेज दिया। खास तौर से उसके महल के आसपास इसे भेजा गया। चूंकि बोरस अपने ग्रह के चारों ओर किसी सुरक्षा घेरे की आवश्यक्ता नहीं समझता था, अत: हम आसानी से अपने मक़सद में कामयाब हो गये। उस विकिरण ने बोरस और उसके मन्त्रियों में गुस्से और बेचैनी की भावनाएं खतरनाक हद तक बढ़ा दीं और वे आपस में ही कट मर गये।’’ मारियो ने अपनी बात समाप्त की।

‘‘ओह।’’ सबने यह सुनकर एक गहरी साँस ली।
‘‘वैसे मुझे भी कामयाबी की इतनी ज्य़ादा और इतनी जल्दी उम्मीद नहीं थी। बहरहाल अब हमें आगे के लिये अपने सुरक्षा घेरे को और मज़बूत करना है।’’ बादशाह रामिश के इन जुमलों के साथ ही मीटिंग खत्म हो गयी। 
--समाप्त--
 
----जीशान हैदर जैदी 

Sunday, July 17, 2011

उल्टा दांव (Part - 2)

फैम वासी इधर कई दिनों से अजीब सी बेचैनी महसूस कर रहे थे। हमेशा शांतचित और प्रसन्नचित रहने वाले फैमवासी इधर काफी उग्र स्वभाव के होते जा रहे थे। ज़रा ज़रा सी बातों पर एक दूसरे से मारपीट करना आम बात हो गयी थी। 
यहां तक होता तब भी ग़नीमत था। असली समस्या तो ये थी कि उनके जिस्म अत्यन्त कमज़ोर होने लगे थे। आपसी झगड़ों में अगर कोई दूसरे को थप्पड़ भी लगाता था तो दूसरे के मुंह से खून आ जाता था और वो बेहोश हो जाता था। और अगर कहीं ये थप्पड़ ज्य़ादा ज़ोर से लग जाता तो सामने वाला जान से हाथ धो बैठता था। 
बदन की हड्‌िडयां इतनी भुरभुरी हो गयी थीं कि हल्की सी चोट में भी टूट जाती थीं।

हद तो तब हो गयी जब फैम के बादशाह रामिश से खुद उसके नौकर ने बदतमीज़ी कर डाली। रामिश ने उसे किसी गलती पर टोका था। जिसके जवाब में उसका नौकर इतना क्रोधित हुआ कि उसपर जूता फेंक दिया। बादशाह रामिश के सुरक्षा गार्डों ने जब उस नौकर की यह हरकत देखी तो उसे इतना पीटा कि वह मौके पर ही खत्म हो गया।
इसके बाद रामिश ने एक हंगामी बैठक बुलायी। जिसमें उसका पूरा मन्त्रीमंडल शामिल हुआ।
‘‘हम अपने ग्रह की मौजूदा सिचुएशन से बहुत परेशान हैं। आम आदमी छोटी छोटी बातों पर आपे से बाहर हुआ जा रहा है। ऐसा लगता है जैसे लोग एक दूसरे को फाड़ खाने का इरादा बना बैठे हों। क्या आप लोगों ने यह बात महसूस की है?’’

सब ने रामिश की बात पर सहमति में सर हिलाया। सभी ने यह बात अच्छी तरह महसूस की थी। 
‘‘और दूसरी समस्या जो हमें दिखायी दे रही है कि हमारे ग्रह के लोगों के भीतर से जैसे सारी शक्ति छिन गयी हो। ग्रह के युवक इतने कमज़ोर दिखाई दे रहे हैं जैसे उनके अन्दर कुछ करने की ताकत ही नहीं बची।’’ बादशाह रामिश की इस बात से भी सभी को इत्तेफाक था।
‘‘आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? कहीं हमारे ग्रह पर कोई अनजानी बीमारी तो नहीं फैल रही है?’’ रामिश ने हेल्थ मिनिस्टर की ओर देखा। 
‘‘सर, हमारे डाक्टरों के अनुसार ग्रह के लोगों में किसी बीमारी का न तो वायरस और न ही बैक्टीरिया पाया गया है। हम अपने ग्रह से बीमारी फैलाने वाले तमाम वायरस और बैक्टीरिया पहले ही मिटा चुके हैं।’’ हेल्थ मिनिस्टर ने कहा, ‘‘लेकिन----’’

‘‘लेकिन क्या?’’ रामिश ने आतुरता से पूछा।
‘‘ग्रह वासियों में कमज़ोरी और गुस्से की बात हमारे डाक्टरों ने भी मार्क की है। और उन्होंने जो नतीजा निकाला है वह ये कि ग्रह वासियों के जिस्म में अजीब सा परिवर्तन आ रहा है। यह परिवर्तन सभी में देखा जा रहा है, क्या अमीर और क्या ग़रीब। लेकिन इस परिवर्तन की वजह ढूंढी नहीं जा सकी है।’’
‘‘अगर सभी में ये समस्या पैदा हो रही है तो इसका एक ही मतलब हो सकता है।’’
‘‘वह क्या?’’ हेल्थ मिनिस्टर ने पूछा।
‘‘समस्या का स्रोत पूरे ग्रह के लिये एक ही होना चाहिए। तुम लोग सोचो, वह स्रोत क्या हो सकता है।’’
‘‘पानी?’’ एक मिनिस्टर ने अंदाज़ा व्यक्त किया।
‘‘नहीं। वह ग्रह के विभिन्न हिस्सों में बदल जाता है।’’ 
‘‘हवा?’’ 
‘‘नहीं। हवा भी ग्रह के अलग अलग हिस्सों में अलग अलग है।’’

‘‘सूर्य का प्रकाश?’’
‘‘हाँ। यह मुमकिन है। लेकिन यही प्रकाश हज़ारों साल से हमारे शरीरों पर पड़ रहा है। मेरा ख्याल है, हमारे ग्रह के वायुमंडल में कोई ऐसा विकिरण प्रवेश कर रहा है जो ग्रहवासियों पर खराब प्रभाव डाल रहा है।’’ 
‘‘लेकिन हमारा ग्रह तो सुरक्षा घेरे में है।’’
‘‘उस सुरक्षा घेरे को चेक कीजिए और साथ में बाहर से आने वाले विकिरण को भी। मि0 मारियो, ये काम मैं आपको सौंपता हूं। क्योंकि सुरक्षा घेरे को कण्ट्रोल करने वाली मशीन आप ही की देख रेख में रहती है।’’
मारियो ने सर हिलाया। इसी के साथ मीटिंग बर्खास्त हो गयी।
-------

लेकिन इसके तुरंत बाद ही बादशाह को फिर से एक हंगामी मीटिंग बुलानी पड़ी। क्योंकि मारियो ने जाँच के बाद जो रिपोर्ट तैयार की थी वह अत्यन्त गम्भीर थी।
‘‘तुम्हारा मतलब हमारा सुरक्षा घेरा पूरी तरह हट चुका है। और उसकी जगह कोई नया घेरा आ चुका है।’’ बादशाह रामिश ने मारियो की तरफ चिंताजनक दृष्टि से देखते हुए कहा। 
‘‘जी हाँ।’’ मारियो ने सर हिलाया, ‘‘यह नया घेरा हमारे लिये अत्यन्त खतरनाक है। क्योंकि यह बाहर से आने वाले लाभदायक विकिरण को तो रोक दे रहा है जबकि हानिकारक विकिरण को ग्रह की ओर भेज देता है। इसी हानिकारक विकिरण की वजह से हमारे ग्रह पर लोग कमज़ोर और गुस्से वाले हो रहे हैं।’’ 
‘‘लेकिन ऐसा हुआ कैसे? किसने हमारे सुरक्षा घेरे को बदल दिया’’ रामिश ने पूछा। 
‘‘मुझे पूरा विश्वास है कि यह हरकत सम्राट बोरस की है। वह बहुत दिन से हमारे ग्रह पर कब्ज़े का ख्वाब देख रहा है।’’ इस बार सेनापति बोला।

‘‘हम सिर्फ अनुमान के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहरा सकते।’’ रामिश ने इंकार में सर हिलाया।
‘‘सेनापति जी सही कह रहे हैं। ये हरकत सम्राट बोरस की ही है।’’ इस बार मारियो बोला।
‘‘ये तुम कैसे कह सकते हो?’’ रामिश ने उसकी ओर देखा।
‘‘मैंने सुरक्षा घेरे को कण्ट्रोल करने वाली मशीन का पूरा रिकार्ड देखा है। और उससे मुझे मालूम हुआ कि इस घेरे को तोड़ने वाली किरणें बोरस के ग्रह से आयी थीं।’’
‘‘अगर ऐसा है, तो भी हम बोरस के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकते। क्योंकि वह हमसे कई गुना ज्य़ादा शक्तिशाली है।’’ सेनापति ने कहा। 
‘‘हाँ, बेहतर यही है कि हम अपने सुरक्षा घेरे को नये सिरे से और ज्य़ादा शक्तिशाली बनायें। मारियो ये काम कितने दिन में हो सकता है?’’
‘‘इसके लिये कम से कम एक महीने के वक्त लगेगा।’’
‘‘ठीक है। तुम अपना काम शुरू कर दो।’’
‘‘एक अंदेशा और भी है।’’ इस बार सेनापति बोला। 
‘‘क्या?’’

‘‘जब बोरस को पता चलेगा कि हम अपना सुरक्षा घेरा फिर से बना रहे हैं तो वह जान जायेगा कि हम उसकी चाल समझ चुके हैं। ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि वह हम पर तुरंत हमला कर दे। चूंकि हमारा सुरक्षा घेरा टूट चुका है इसलिए उससे बचना बहुत मुश्किल होगा।’’
‘‘हाँ। ये भी हमारे सामने एक गंभीर समस्या है।’’ बादशाह रामिश गंभीरता पूर्वक इस मसले पर विचार करने लगा।

‘‘मेरे पास एक प्लान है।’’ थोड़ी देर बाद मारियो बोला।
‘‘क्या है तुम्हारा प्लान?’’ मारियो धीरे धीरे अपना प्लान बताने लगा। जैसे जैसे वह अपना प्लान बता रहा था वैसे वैसे रामिश की आँखों में चमक आती जा रही थी। 
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Friday, July 15, 2011

उल्टा दांव (Part - 1)

‘करोड़ों आकाशगंगाओं को देखने के बाद अगर दिमाग में यह सवाल उठे कि क्या ब्रह्माण्ड में हम अकेले हैं? तो अक्ल यही जवाब देगी कि नहीं। सूर्य ब्रह्माण्ड की विशालता के आगे कोई हैसियत नहीं रखता। और उसके गिर्द घूमने वाली पृथ्वी का भी यही हाल है। नि:संदेह पृथ्वी जैसे अनगित ग्रह ब्रह्माण्ड में मौजूद होने चाहिए।’

पृथ्वी पर इसी सोच में डूबा कोई वैज्ञानिक अगर ब्रह्माण्ड के इस हिस्से में पहुंच जाता तो उसे आगे कुछ सोचने की ज़रूरत ही न पड़ती। क्योंकि यहां एक ऐसी पृथ्वी मौजूद थी जिसके ऊपर उसके जैसे ही मनुष्य आबाद थे। ये और बात है कि ये लोग हमारी पृथ्वी के मनुष्यों की तुलना में विज्ञान में बहुत आगे थे। ये पृथ्वी भी अपने सूरज के चारों ओर कुछ उसी तरह से चक्कर लगा रही थी जैसे हमारी पृथ्वी लगाती है। इन लोगों ने अपने ग्रह ‘फैम’ को बाहरी हमलों से बचाने के लिये विशेष प्रकार की किरणें उसके चारों तरफ फैला रखी थीं जिन्हें भेदने की शक्ति महाशक्तिशाली और घातक हथियारों में भी नहीं थी। इसीलिए फैम को अपने कब्ज़े में करने का सम्राट बोरस का सपना बरसों से पूरा नहीं हो पा रहा था।

सम्राट बोरस फैम के सौरमंडल से थोड़ी दूर स्थित एक अन्य सौरमंडल के पूरे ग्यारह ग्रहों का मालिक था। और उन सभी ग्रहों का विज्ञान अत्यन्त विकसित था। इसीलिए अब उसके दिमाग में दूसरे सौरमंडलों पर कब्जे का ख्वाब जागृत हो गया था। और उसका पहला टारगेट फैम था। जो उसके सौरमंडल के सबसे पास मौजूद था और वहां बुद्धिमान प्राणियों की आबादी भी थी।

फिर एक दिन उसके पास उसका सेनापति लाइकस दाखिल हुआ। 
‘‘क्या बात है लाइकस?’’ सम्राट ने उससे पूछा। 
‘‘सम्राट हमने फैम पर कब्ज़े का फारमूला ढूंढ निकाला है।’’ 
‘‘क्या?’’ सम्राट अपनी कुर्सी से उछल पड़ा, ‘‘जल्दी बताओ क्या है वह फारमूला?’’ 
‘‘सर हमारे महान वैज्ञानिकों ने काफी मेहनत के बाद ये फारमूला निकाला है और वो इस फारमूले को अपनी लैब में दिखाना चाहते हैं।’’ 
‘‘ठीक है। चलो हम लैब में चलते हैं ।’’ सम्राट फौरन वहां जाने के लिये तैयार हो गया। जब वे लैब में पहुंचे तो कुछ वैज्ञानिक एक बड़ी मशीन के आसपास मौजूद थै। 

‘‘साइरस, सम्राट तुम्हारा फार्मूला देखना चाहते हैं।’’ लाइकस ने वहां मौजूद सबसे बड़े वैज्ञानिक को संबोधित किया। 
साइरस ने सम्राट के सामने सर झुकाया और एक सादा दीवार के पास पहुंचा। उसने दीवार की तरफ इशारा किया और दीवार किसी टीवी स्क्रीन की तरह रोशन हो गयी। उसपर किसी ग्रह की तस्वीर नज़र आ रही है। 
‘‘यह फैम ग्रह है। जिसके चारों तरफ इस तरह का सुरक्षा घेरा है।’’ उसने इशारा किया और ग्रह चारों तरफ से हरे रंग की किरणों से घिरा नज़र आने लगा। 
‘‘ये किरणें खास तरह से काम करती हैं। ग्रह के बाहर दो तरह का विकिरण पाया जाता है। एक तो वह जो ग्रह के लिये न केवल फायदेमन्द है, बल्कि ज़रूरी भी है। जबकि दूसरे तरह का विकिरण वह है जो ग्रह के लिये हानिकारक है। फैम ग्रह पर मौजूद कम्प्यूटर, जो इन किरणों को कण्ट्रोल करता है, उसकी मेमोरी में यह स्टोर है कि कौन सा विकिरण ग्रह के लिये ज़रूरी है और कौन सा हानिकारक। तो जब ज़रूरी विकिरण ग्रह तक आता है तो मशीन किरणों के बीच रास्ता बना देती है और जब हानिकारक विकिरण आता है तो मशीन किरणों की मज़बूत दीवार उनके सामने खड़ा कर देती है।’’

‘‘ठीक है। ये बात तो सभी को मालूम है।’’ सम्राट बोरस ने थोड़ा बोर होते हुए कहा। 
‘‘अब मैं आपको एक ऐसा विकिरण दिखाता हूं जो मैंने डेवलप किया है।’’ कहते हुए उसने स्क्रीन की तरफ इशारा किया और वहां हरे रंग की किरणें नज़र आने लगीं। लेकिन ये किरणें फैम ग्रह की किरणों से कुछ अलग नज़र आ रही थीं। जहां फैम ग्रह की किरणों के किनारे आग की लपटों की तरह दिख रहे थे वहीं इन किरणों के किनारे आरी की तरह दिखाई दे रहे थे।
‘‘इसमें क्या खास बात है? सम्राट ने पूछा।
‘‘ये बात तो सभी को मालूम है कि कोई भी विकिरण फोटानों के रूप में आगे बढ़ता है। यानि फोटान विकिरण के कण होते हैं, ठीक उसी तरह जैसे हवा के कण गैसों के अणु होते हैं।’’
‘‘ठीक है।’’
‘‘इन फोटानों की खास एनर्जी होती है, जो कि विकिरण की होती है। और साथ ही खास फ्रीक्वेंसी होती है। और इनकी बनावट कुछ ऐसी होती है कि दो फोटान एक ही जगह पर मौजूद हो सकते हैं, जबकि मैटर के कणों के साथ ऐसा मुमकिन नहीं होता।’’

‘‘देखो, मैं यहां किसी साइंस कान्फ्रेन्स में लेक्चर सुनने नहीं आया हूं। मुझे ये बताओ, फैम के सुरक्षा घेरे को तोड़ने के लिये तुमने क्या उपाय किया है।’’ सम्राट ने एक बार फिर वहाँ के सीनियर साइंटिस्ट को टोका।
‘‘अब मैं उसी की तरफ आ रहा हूं। मैंने ऐसे विकिरण का आविष्कार किया है जिसके फोटान सुरक्षा घेरे में मौजूद फोटानों की जगह पर घुस जायेंगे और किसी को पता भी नहीं चलेगा। फिर ये सुरक्षा घेरे के फोटानों की एनर्जी अपने अन्दर सोख लेंगे, जिससे वो सुरक्षा घेरा नष्ट होना शुरू हो जायेगा। इससे पहले कि फैम वाले कुछ समझेंगे, उनका सुरक्षा घेरा नष्ट हो चुका होगा।’’
‘‘फैम वासी काफी चालाक हैं। जब वो देखेंगे कि उनका सुरक्षा घेरा नष्ट हो रहा है तो वो उसे फौरन और एनर्जी देकर मज़बूत कर लेंगे।’’
‘‘उन्हें इसका पता ही नहीं चलेगा। क्योंकि मेरा आविष्कृत विकिरण हूबहू उनके घेरे में मौजूद किरणों जैसा ही है। उन्हें मालूम ही नहीं होगा कि कब उनका सुरक्षा घेरा हट गया और हमारा घेरा उसकी जगह कायम हो गया।’’
‘‘वेरी गुड। ये हुई न बात। और जब वो सुरक्षा घेरा हट जायेगा तो हम आसानी से अपने फाइटर प्लेन वहां दाखिल करा देंगे।’’
‘‘इसकी ज़रूरत नहीं पड़ेगी।’’ 
‘‘क्यों?’’

‘‘क्योंकि मेरी किरणें जब फैम को चारों तरफ से घेर लेंगी तो वह एक काम और करेंगी।’’ 
‘‘कैसा काम?’’
‘‘जिस तरह फैम का सुरक्षा घेरा बाहर से आने वाले हानिकारक विकिरण को रोक लेता है और फायदेमंद विकिरण को पास कर देता है, हमारी किरणें इसका उल्टा करेंगी। यानि फायदेमंद विकिरण को तो रोक लेंगी और हानिकारक विकिरण को ग्रह की ओर पास कर देंगी। और फैम वासियों का अस्तित्व ही संकट में पड़ जायेगा। हम ये युद्ध बिना संघर्ष के ही जीत लेंगे।’’
सीनियर साइंटिस्ट साइरस की बात सुनकर सम्राट बोरस का मुंह खुला रह गया था।
-----continued
लेखक - जीशान जैदी 

Monday, July 4, 2011

ड्रामा द ग्रेट डिक्टेटर्स (Part - 7 & Last)


डा0सायनाइड  : देखा तुमने, मैंने क्या कहा था। जब बहुत सी पावर्स इकट्‌ठा होती हैं तो वह एक दूसरे को ही नष्ट कर देती हैं। इसलिए पावर बैलेंस बहुत ज़रूरी है। अभी मैं अपनी टोपियों पर आगे और रिसर्च करूंगा। 
जैक्सन  : आखिर ये रिसर्च करके तुम क्या साबित करना चाहते हो। इन डिक्टेटरों को पैदा करने से दुनिया को क्या फायदा पहुंचेगा। 
डा0सायनाइड  : मैं दुनिया को बहुत बड़ा फायदा पहुंचाने जा रहा हूं। इस रिसर्च से हमें ये समझने में मदद मिलेगी कि अगर दुनिया में कोई डिक्टेटर पैदा हो जाये तो उससे दुनिया को बचाया कैसे जाये।  
जैक्सन  : कहीं लेने के देने न पड़ जायें। डाक्टर मैं तुम्हारी बरबादी का भविष्य देख रहा हूं। 
डा0सायनाइड  : मैं तुझे वर्तमान में ही हेलीकाप्टर में उड़ाकर उसका पंखा बन्द कर दूंगा। नालायक, हर वक्त मनहूस बोलियां बोलता रहता है।
(उसी वक्त जार्ज बुश और हिटलर वापस आ जाते हैं। पीछे पीछे क्लियोपेट्रा भी है।) 

जार्ज बुश  : आज के दौर में हमारे दो ऐसे बड़े दुश्मन मौजूद हैं जो हमारे दुनिया के कब्ज़े की राह में सबसे बड़ी रुकावट हैं। ये है ओसामा बिन लादेन और सद्दाम हुसैन। 
हिटलर  : और बादशाह अकबर? 
जार्ज बुश  : उससे हमें कोई खतरा नहीं। अनारकली ने उसे बेकार कर दिया है। हम आज से ओसामा और सद्दाम को टेररिस्ट एनाउन्स करते हैं ताकि वह जहां भी दिखें दुनिया के बच्चे पत्थर लेकर उन्हें दौड़ा लें।

(उसी वक्त मि0कन्फ्यूज़ कराहते हुए स्टेज पर दाखिल होता है।)

मि0कन्फ्यूज़  : हाय हाय। 
जार्ज बुश  : अरे मि0कन्फ्यूज़। तुमको क्या हुआ? 
मि0कन्फ्यूज़  : अरे क्या बताऊं। हमारे गुजरात में नर्मदा बचाव वालों ने प्रोटेस्ट में मेरे घर पर धावा बोल दिया। मैं बचने के लिये औरतों के कपड़े पहनकर खिड़की से बाहर कूद गया और बाहर झाड़ियों में घुस गया। मुझे क्या पता था कि वहां आतंकवादी ग्रुप लश्करे तौबा पहले से छुपा हुआ है।
जार्ज बुश  : तो क्या उन्होंने तुमको मारा? 
मि0कन्फ्यूज़  : अरे उससे भी बुरा किया। उन्होंने मुझे औरत समझकर मेरा रेप कर डाला। 
हिटलर  : हांय। क्या उनको पता नहीं चला कि तुम औरत नहीं मर्द हो। 
मि0कन्फ्यूज़  : हाय! पता तो तब चलता जब वो आगे से काम करते। हाय हाय। 

जार्ज बुश  : आज टेररिज्म़ पूरी दुनिया के लिये खतरा बन चुका है। किसी की जान माल और इज्ज़त आबरू सेफ नहीं रह गयी है। हमको इस टेररिज्म़ को पूरी दुनिया से जड़ से मिटाना होगा। इस टेररिज्म़ को टा टा कहना होगा।
मि0कन्फ्यूज़  : टा टा तो हमारे गुजरात में पहले से है। अपनी नैनो के साथ।
जैक्सन  : (डा0सायनाइड से) क्या नैनो टाटा की माशूका का नाम है?
डा0सायनाइड  : इस चिथड़े को आशिक माशूक के अलावा कुछ सुझाई नहीं देता। चल भाग यहां से। (वह जैक्सन को ध्क्का देता है और जैक्सन छिटक कर दूर चला जाता है।)

जार्ज बुश  : मि0कन्फ्यूज़ के साथ जो हरकत हुई है उसने हमारा काम आसान कर दिया। 
हिटलर  : वह कैसे? 
जार्ज बुश  : अब हम पूरी दुनिया को टेररिज्म़ का टेरर दिखाकर जहां चाहें वहां हमले कर सकते हैं। और अपना कब्ज़ा जमा सकते हैं। चलो, अब हमें देर नहीं करनी चाहिए। 

(वह आगे बढ़ते हैं, उसी वक्त सामने से सद्दाम, ओसामा, अकबर और अनारकली पहुंच जाते हैं।)

ओसामा  : रुक जाओ। हम तुम्हें तुम्हारे मकसद में हरगिज़ कामयाब न होने देंगे। 
जार्ज बुश  : (हिटलर से।) इन्हें अपनी मिसाईलों से दाग़ दो। ये जिहादी हैं। जिहादी मुसलमान होते हैं। मुसलमान टेररिस्ट होते हैं और हमको टेररिज्म़ के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई लड़नी है। 
(हिटलर और जार्ज बुश आगे बढ़ते हैं और सददाम व ओसामा से टकरा जाते हैं। कुछ देर दोनों में छीना झपटी चलती है और फिर जार्ज बुश व हिटलर ओसामा व सद्दाम की टोपियां उतारने में कामयाब हो जाते हैं। दोनों की टोपियां उतरते ही दोनों बेहोश होकर गिर जाते हैं।)
जार्ज बुश  : हम कामयाब हो गये। हमने दुनिया पर से टेररिज्म़ का खतरा उतार कर फेंक दिया। 

(दोनों अपने अपने हाथों की टोपियां तोड़ मरोड़ कर नीचे फेंक देते हैं। और फिर अपने पैरों तले कुचलने लगते हैं।)

जार्ज बुश  : अब हमारे बच्चे इज़्राइल के लिये कोई खतरा नहीं। 
हिटलर  : (चौंक कर।) क्या कहा इज़्राइल? क्या तू यहूदी है? 
जार्ज बुश  : नहीं। में तो क्रिश्चियन हूं। यहूदी तो मेरे बच्चा इज्ऱाइल है।  
हिटलर  : कुत्ते, कमीने, मैं तेरा खून पी जाऊंगा। 

(वह जार्ज बुश से भिड़ जाता है। और जल्दी ही वो दोनों भी एक दूसरे की टोपियां उतार लेते हैं। इसी के साथ दोनों बेहोश होकर गिर जाते हैं। अब बादशाह अकबर आगे बढ़ता है और दोनों के हाथ से टोपियां ले लेता है।)
अकबर : हमने पहले ही कहा था कि हुकूमत करने का तजुर्बा सिर्फ हमारे पास है।
(वह दोनों की टोपियां अपने पैरों तले कुचलता है। उसी वक्त अनारकली आगे बढ़ती है।)
अनारकली  : बादशाह सलामत आपकी हुकूमत का दौर बीत चुका है। अब यहां अनारकली की हुकूमत चलेगी। 
(वह बादशाह के सर से टोपी खींच लेती है। बादशाह अकबर भी नीचे गिर जाता है। अनारकली उसकी टोपी को पैरों तले रौंद रही है।)

अनारकली  : आजतक अनारकली मर्दों के हाथों का खिलौना बनती थी लेकिन आज से मर्द अनारकली के हाथों की कठपुतली बनेंगे। 
(उसी वक्त क्लियोपेट्रा आगे बढ़ती है।)
क्लियोपेट्रा  : बेवकूफ तू भूल गयी कि औरत का सबसे बड़ा दुश्मन मर्द नहीं बल्कि औरत ही होती है। मर्दों को कठपुतली बनाने के लिए क्लियोपेट्रा काफी है। तू जाकर किसी कोठे पर मुजरे कर। 
अनारकली  : तेरी किस्मत में ममी बनना लिखा है तू जाकर अपने पिरामिड में आराम कर। 
(दोनों एक दूसरे पर झपट पड़ती हैं। और एक दूसरे की टोपी को तोड़ने मरोड़ने लगती हैं। जैसे ही उनके सरों से टोपियां अलग होती हैं वे दोनों भी बेहोश होकर गिर जाती हैं। अब डाक्टर सायनाइड आगे बढ़ता है और एक एक टोपी उठाकर देखता है।)

डा0सायनाइड : अरे मेरी टोपियां। मैंने कितनी मेहनत से इन्हें बनाया था। इन कमबख्तों ने सारी कि सारी बरबाद कर डालीं।
जैक्सन  : बहुत अच्छा हुआ। दुनिया के सर पर मंडराता बहुत बड़ा खतरा टल गया। अब तुम्हारी टोपियों को पहनकर कोई डिक्टेटर नहीं बनेगा। 
डा0सायनाइड  : तुम क्या समझते हो। अब कोई डिक्टेटर पैदा ही नहीं होगा। ये जान लो कि जब जब दुनिया में शांति का ज़ोर बढ़ता है तब तब एक महान डिक्टेटर पैदा होता है जो उस शांति का रेप कर डालता है। हाय मेरी इन टोपियों का कैसा रेप हुआ है। 
(सर पकड़कर बिखरी हुई टोपियों के बीच बैठ जाता है। जबकि जैक्सन उसके पीछे खड़ा खुशी से मटक रहा है।)

---समाप्त---
 
(c) लेखक
यदि कोई सज्जन या संस्था इसका मंचन करना चाहे तो मुझसे  zeashanzaidi@gmail.com पर सम्पर्क करें।
--- जीशान हैदर जैदी (लेखक)

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