Thursday, July 11, 2013

मायावी गिनतियाँ : भाग 4

उस बंदर ने एक अंगड़ायी लेकर आँखें खोल दीं, जिसके शरीर में रामू का दिमाग फिट किया गया था। दो पलों तक तो उसकी समझ में नहीं आया कि वह कहाँ है फिर उसने चारों तरफ नजर दौड़ायी। वह जिस पलंग पर लेटा था अचानक वह जोर जोर से हिलने लगा। उसने घबरा कर नीचे नजर की और उसकी जान निकल गयी। वह एक ऊँचे पेड़ की सबसे ऊँची डाल पर लेटा हुआ था।


उसने जल्दी से घबरा कर खड़ा होना चाहा किन्तु उसी समय उसका पैर फिसल गया और वह नीचे गिरने लगा। अब पल भर में जमीन से टकरा कर उसकी हडिडयाँ चूर हो जाने वाली थीं। किन्तु पता नहीं कहाँ से उसके शरीर में इतनी फुर्ती आ गयी। उसने हवा में ही पलटा खाया और एक दूसरी डाल पकड़ कर झूल गया।
उसे अपने शरीर की फुर्ती पर हैरत हुई। फिर उसकी नजर अपने हाथों पर गयी और वह एक बार फिर बुरी तरह घबरा गया। उसके हाथों सहित पूरे शरीर पर बड़े बड़े बाल उग आये थे।

''ये ये सब क्या है!" वह बड़बड़ाया। फिर उसके दिमाग में पुरानी बातें याद आती गयीं। वह तो तालाब में डूबकर खुदकुशी करने निकला था। फिर छलांग लगाने से पहले ही किसी ने उसे बेहोश कर दिया था। लेकिन अब तो उसका पूरा शरीर ही बदलकर बंदर जैसा हो गया था।
''कहीं ऐसा तो नहीं मैं वाकई मर गया हूँ। और अब ये मेरा पुनर्जन्म है। चलो अच्छा है, कम से कम बंदर बनकर गणित से तो पीछा छूटा।"

वह अंदर से एकाएक खुशी और फुर्ती से भर उठा। और एक डाल से दूसरी डाल पर छलांग मारने लगा।
किन्तु उसी समय उसकी खुशी पर ब्रेक लग गया। सामने की डाल से लिपटा हुआ विषधर ज़बान लपलपाते हुए उसकी तरफ गुस्से से घूर रहा था।
-------

''रोमियो, सम्राट का मैसेज आ रहा है।" सिलवासा ने स्क्रीन की तरफ ध्यान आकृष्ट किया और रोमियो के साथ बाकी साथी भी स्क्रीन की तरफ देखने लगे। फिर स्क्रीन पर धीरे धीरे सम्राट का चेहरा स्पष्ट हो गया जो दरअसल रामू का चेहरा था।
''क्या पोजीशन है?" सम्राट की आवाज उन्हें सुनाई दी।

''हम लोग तो ठीक हैं सम्राट। आगे के लिए क्या हुक्म है?" रोमियो ने पूछा।
''फिलहाल तुम लोग अपने अंतरिक्ष यान को अच्छी तरह चेक करो। आइंदा के लिए उसे तैयार रहना चाहिए। मैं इन लोगों में काफी हद तक घुल मिल गया हूँ और धीरे धीरे अपना काम शुरू कर दूंगा।"
''ठीक है सम्राट।"

''तुम लोग एलर्ट रहना। किसी भी समय मुझे तुम लोगों की जरूरत पड़ सकती है।"
''हम लोग हर वक्त तैयार हैं।"
''वैसे पृथ्वीवासियों का आई. क्यू. बहुत अच्छा नहीं है। इसलिए मुझे विश्वास है कि बहुत जल्द हम कामयाब हो जायेंगे। दैटस आल।" इसी के साथ स्क्रीन पर सम्राट का चेहरा दिखना बन्द हो गया।
------- 

स्कूल के इनडोर स्टेडियम के एक कोने में तीनों की तिकड़ी सर जोड़े खड़ी हुई थी। तीनों में शामिल थे - गगन, अमित और सुहेल।
''ये रामू का बच्चा तो हमारे लिए सिरदर्द बन गया है। समझ में नहीं आता उसकी गणित एकाएक इतनी मजबूत कैसे हो गयी।" अमित अपना सर खुजलाते हुए बोला।

''कल तक क्लास की जो लड़कियां हमारे सामने गिड़गिड़ाया करती थीं, आज उसके आगे पीछे फिर रही हैं।"
''उसमें तुम्हारी खास गर्ल फ्रेन्ड भी है गगन। मैंने नेहा को अपनी आँखों से रामू के साथ चाउमिन खाते देखा है।" सुहैल ने खबर दी। 
''अब मैं उस कमबख्त की गर्दन तोड़ दूँगा।" गुस्से में बोला गगन।

''बी कूल गगन।" अमित ने उसके कंधे पर हाथ रखा।
''उसका बाप डाक्टर है। कहीं ऐसा तो नहीं उसने अपने सुपुत्र के भेजे में आपरेशन करके मैथ के फार्मूले फिट कर दिये हों।"
''दुनिया के किसी डाक्टर में अभी इतना दम नहीं है।" अमित ने सुहेल की थ्योरी रिजेक्ट कर दी।
''अग्रवाल सर भी उससे बुरी तरह खफा हैं। एक तो वह उनसे टयूशन नहीं पढ़ता। और हम लोग जो सर के रेगुलर स्टूडेन्ट हैं, उन्हें वह नीचा दिखा रहा है।"
''हम लोगों को अग्रवाल सर से डिसकस करना चाहिए। वह जरूर रामू की गणित का कोई न कोई तोड़ निकाल लेंगे।
''तुम ठीक कहते हो अमित। चलो चलते हैं।" तीनों वहाँ से चल दिये।

..............continued

1 comment:

arvind mishra said...

रोचकता बढ़ चली है