Welcome in the world of Hindi Science Fiction. In this blog you will see the science fiction Stories/Novels of Zeashan Zaidi. In addition you will also read the latest discussions/news related to Indian (Hindi) science fiction.

Friday, July 15, 2011

उल्टा दांव (Part - 1)

‘करोड़ों आकाशगंगाओं को देखने के बाद अगर दिमाग में यह सवाल उठे कि क्या ब्रह्माण्ड में हम अकेले हैं? तो अक्ल यही जवाब देगी कि नहीं। सूर्य ब्रह्माण्ड की विशालता के आगे कोई हैसियत नहीं रखता। और उसके गिर्द घूमने वाली पृथ्वी का भी यही हाल है। नि:संदेह पृथ्वी जैसे अनगित ग्रह ब्रह्माण्ड में मौजूद होने चाहिए।’

पृथ्वी पर इसी सोच में डूबा कोई वैज्ञानिक अगर ब्रह्माण्ड के इस हिस्से में पहुंच जाता तो उसे आगे कुछ सोचने की ज़रूरत ही न पड़ती। क्योंकि यहां एक ऐसी पृथ्वी मौजूद थी जिसके ऊपर उसके जैसे ही मनुष्य आबाद थे। ये और बात है कि ये लोग हमारी पृथ्वी के मनुष्यों की तुलना में विज्ञान में बहुत आगे थे। ये पृथ्वी भी अपने सूरज के चारों ओर कुछ उसी तरह से चक्कर लगा रही थी जैसे हमारी पृथ्वी लगाती है। इन लोगों ने अपने ग्रह ‘फैम’ को बाहरी हमलों से बचाने के लिये विशेष प्रकार की किरणें उसके चारों तरफ फैला रखी थीं जिन्हें भेदने की शक्ति महाशक्तिशाली और घातक हथियारों में भी नहीं थी। इसीलिए फैम को अपने कब्ज़े में करने का सम्राट बोरस का सपना बरसों से पूरा नहीं हो पा रहा था।

सम्राट बोरस फैम के सौरमंडल से थोड़ी दूर स्थित एक अन्य सौरमंडल के पूरे ग्यारह ग्रहों का मालिक था। और उन सभी ग्रहों का विज्ञान अत्यन्त विकसित था। इसीलिए अब उसके दिमाग में दूसरे सौरमंडलों पर कब्जे का ख्वाब जागृत हो गया था। और उसका पहला टारगेट फैम था। जो उसके सौरमंडल के सबसे पास मौजूद था और वहां बुद्धिमान प्राणियों की आबादी भी थी।

फिर एक दिन उसके पास उसका सेनापति लाइकस दाखिल हुआ। 
‘‘क्या बात है लाइकस?’’ सम्राट ने उससे पूछा। 
‘‘सम्राट हमने फैम पर कब्ज़े का फारमूला ढूंढ निकाला है।’’ 
‘‘क्या?’’ सम्राट अपनी कुर्सी से उछल पड़ा, ‘‘जल्दी बताओ क्या है वह फारमूला?’’ 
‘‘सर हमारे महान वैज्ञानिकों ने काफी मेहनत के बाद ये फारमूला निकाला है और वो इस फारमूले को अपनी लैब में दिखाना चाहते हैं।’’ 
‘‘ठीक है। चलो हम लैब में चलते हैं ।’’ सम्राट फौरन वहां जाने के लिये तैयार हो गया। जब वे लैब में पहुंचे तो कुछ वैज्ञानिक एक बड़ी मशीन के आसपास मौजूद थै। 

‘‘साइरस, सम्राट तुम्हारा फार्मूला देखना चाहते हैं।’’ लाइकस ने वहां मौजूद सबसे बड़े वैज्ञानिक को संबोधित किया। 
साइरस ने सम्राट के सामने सर झुकाया और एक सादा दीवार के पास पहुंचा। उसने दीवार की तरफ इशारा किया और दीवार किसी टीवी स्क्रीन की तरह रोशन हो गयी। उसपर किसी ग्रह की तस्वीर नज़र आ रही है। 
‘‘यह फैम ग्रह है। जिसके चारों तरफ इस तरह का सुरक्षा घेरा है।’’ उसने इशारा किया और ग्रह चारों तरफ से हरे रंग की किरणों से घिरा नज़र आने लगा। 
‘‘ये किरणें खास तरह से काम करती हैं। ग्रह के बाहर दो तरह का विकिरण पाया जाता है। एक तो वह जो ग्रह के लिये न केवल फायदेमन्द है, बल्कि ज़रूरी भी है। जबकि दूसरे तरह का विकिरण वह है जो ग्रह के लिये हानिकारक है। फैम ग्रह पर मौजूद कम्प्यूटर, जो इन किरणों को कण्ट्रोल करता है, उसकी मेमोरी में यह स्टोर है कि कौन सा विकिरण ग्रह के लिये ज़रूरी है और कौन सा हानिकारक। तो जब ज़रूरी विकिरण ग्रह तक आता है तो मशीन किरणों के बीच रास्ता बना देती है और जब हानिकारक विकिरण आता है तो मशीन किरणों की मज़बूत दीवार उनके सामने खड़ा कर देती है।’’

‘‘ठीक है। ये बात तो सभी को मालूम है।’’ सम्राट बोरस ने थोड़ा बोर होते हुए कहा। 
‘‘अब मैं आपको एक ऐसा विकिरण दिखाता हूं जो मैंने डेवलप किया है।’’ कहते हुए उसने स्क्रीन की तरफ इशारा किया और वहां हरे रंग की किरणें नज़र आने लगीं। लेकिन ये किरणें फैम ग्रह की किरणों से कुछ अलग नज़र आ रही थीं। जहां फैम ग्रह की किरणों के किनारे आग की लपटों की तरह दिख रहे थे वहीं इन किरणों के किनारे आरी की तरह दिखाई दे रहे थे।
‘‘इसमें क्या खास बात है? सम्राट ने पूछा।
‘‘ये बात तो सभी को मालूम है कि कोई भी विकिरण फोटानों के रूप में आगे बढ़ता है। यानि फोटान विकिरण के कण होते हैं, ठीक उसी तरह जैसे हवा के कण गैसों के अणु होते हैं।’’
‘‘ठीक है।’’
‘‘इन फोटानों की खास एनर्जी होती है, जो कि विकिरण की होती है। और साथ ही खास फ्रीक्वेंसी होती है। और इनकी बनावट कुछ ऐसी होती है कि दो फोटान एक ही जगह पर मौजूद हो सकते हैं, जबकि मैटर के कणों के साथ ऐसा मुमकिन नहीं होता।’’

‘‘देखो, मैं यहां किसी साइंस कान्फ्रेन्स में लेक्चर सुनने नहीं आया हूं। मुझे ये बताओ, फैम के सुरक्षा घेरे को तोड़ने के लिये तुमने क्या उपाय किया है।’’ सम्राट ने एक बार फिर वहाँ के सीनियर साइंटिस्ट को टोका।
‘‘अब मैं उसी की तरफ आ रहा हूं। मैंने ऐसे विकिरण का आविष्कार किया है जिसके फोटान सुरक्षा घेरे में मौजूद फोटानों की जगह पर घुस जायेंगे और किसी को पता भी नहीं चलेगा। फिर ये सुरक्षा घेरे के फोटानों की एनर्जी अपने अन्दर सोख लेंगे, जिससे वो सुरक्षा घेरा नष्ट होना शुरू हो जायेगा। इससे पहले कि फैम वाले कुछ समझेंगे, उनका सुरक्षा घेरा नष्ट हो चुका होगा।’’
‘‘फैम वासी काफी चालाक हैं। जब वो देखेंगे कि उनका सुरक्षा घेरा नष्ट हो रहा है तो वो उसे फौरन और एनर्जी देकर मज़बूत कर लेंगे।’’
‘‘उन्हें इसका पता ही नहीं चलेगा। क्योंकि मेरा आविष्कृत विकिरण हूबहू उनके घेरे में मौजूद किरणों जैसा ही है। उन्हें मालूम ही नहीं होगा कि कब उनका सुरक्षा घेरा हट गया और हमारा घेरा उसकी जगह कायम हो गया।’’
‘‘वेरी गुड। ये हुई न बात। और जब वो सुरक्षा घेरा हट जायेगा तो हम आसानी से अपने फाइटर प्लेन वहां दाखिल करा देंगे।’’
‘‘इसकी ज़रूरत नहीं पड़ेगी।’’ 
‘‘क्यों?’’

‘‘क्योंकि मेरी किरणें जब फैम को चारों तरफ से घेर लेंगी तो वह एक काम और करेंगी।’’ 
‘‘कैसा काम?’’
‘‘जिस तरह फैम का सुरक्षा घेरा बाहर से आने वाले हानिकारक विकिरण को रोक लेता है और फायदेमंद विकिरण को पास कर देता है, हमारी किरणें इसका उल्टा करेंगी। यानि फायदेमंद विकिरण को तो रोक लेंगी और हानिकारक विकिरण को ग्रह की ओर पास कर देंगी। और फैम वासियों का अस्तित्व ही संकट में पड़ जायेगा। हम ये युद्ध बिना संघर्ष के ही जीत लेंगे।’’
सीनियर साइंटिस्ट साइरस की बात सुनकर सम्राट बोरस का मुंह खुला रह गया था।
-----continued
लेखक - जीशान जैदी 

3 comments:

veerubhai said...

Very interesting and informative presentation .

veerubhai said...

कथा का ताना बना जानकारी से लबालब और प्रस्तुति रोचक .बधाई .

Suman said...

nice

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