Sunday, May 10, 2009

मजबूर आसमां Part -2

विशालकाय पर्वतों के बीच यह गुफा शायद ही किसी को नजर आ सकती थी। और यह तो कोई सोच ही नहीं सकता था कि वह गुफा अंदर से पूरी तरह हाईटेक होगी। हर तरफ दीवार से लगी मशीनें दिखाई दे रही थीं और उन मशीनें पर काम करते लोग भी मौजूद थे।
उन्हीं में से एक ने सर पर चढ़ा हेडफोन उतारा और दरवाजे की तरफ बढ़ा।
दरवाजे पर पहुंचकर उसने वहां लगा एक बटन दबाया।
‘‘आ जाओ।’’ अंदर से आवाज आयी। वह अंदर दाखिल हुआ। ये कमरा काफी आलीशान तरीके से सजा हुआ था। कमरे के बीचोंबीच पड़े बेड पर एक अधेड़ शख्स लेटा हुआ था। जिसकी लम्बी दाढ़ी सीने तक फैली हुई थी।
‘‘क्या खबर है?’’ बेड पर लेटे व्यक्ति ने पूछा।
‘‘खान, ‘ईट-एन-ज्वाय’ कंपनी में मौजूद हमारे नुमाइंदे खालिद ने रिपोर्ट दी है कि उनका प्रोजेक्ट सेकंड फेस में पहुंच गया है।’’ आने वाले ने खबर दी।
उसकी बात सुनकर खान का चेहरा सिकुड़ गया।
‘‘प्रोजेक्ट का यह फेस हमारे लिए बहुत अहमियत रखता है। खालिद को मैसेज भेजो कि अब उसे बहुत सोच समझकर कदम उठाना होगा।’’
आने वाले ने सर हिलाया और वापस मुड़ गया।
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इं-विशाल के सामने फाइलों का ढेर लगा हुआ था। इन फाइलों में उन व्यक्तियों की पोस्टमार्टम रिपोर्टस थीं जो गंदी बस्ती में मचे बवाल के बीच मारे गये थे। इं-विशाल के साथ उसका असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर राघव भी उन फाइलों का अययन कर रहा था।
‘‘सर, हम लोग बेकार में सर खपा रहे हैं। इन फाइलों में कुछ भी नहीं है।’’
सब इंस्पेक्टर ने सारी फाइलें बन्द करके एक तरफ रख दीं और कुर्सी से पैर टिकाकर दो चार गहरी सांसें लीं।
‘शायद तुमने फाइलों के अंतिम पेज पर गौर नहीं किया। जहा इन सबकी केमिकल रिपोर्ट दी गयी है।’’ इं-विशाल ने इत्मिनान से कहा।
सब इंस्पेक्टर जल्दी से सीधा हो गया और एक फाइल के पन्ने पलटने लगा।
‘‘यहा भी कुछ खास नहीं है।’’
‘‘ऐसे नहीं। अगर तुम बहुत सी फाइलों की रिपोर्ट एक साथ देखो तो मामला कुछ बनता दिखाई देता है। इन सबकी केमिकल रिपोर्ट यह बताती है कि सभी में कुछ ऐसे कामन उत्प्रेरक पाये गये हैं जो मस्तिष्क के एमिगडला का आकार तेजी से बढ़ाते हैं और साथ ही हाइपोथैलमस ग्रन्थि की सक्रियता उच्च कर देते हैं।’’
‘‘मैं समझा नहीं। ये एमिगडला क्या बला है?’’ सब इंस्पेक्टर चकरा कर बोला।
‘‘एमिगडला मस्तिष्क का वह भाग होता है जो मनुष्य की भावनाओं को नियन्त्रित करता है। इनमें क्रोध , प्यार, गम, ख़ुशी सभी शामिल हैं। यदि इसका साइज किसी खास दिशा में ज्यादा बढ़ जाये तो मनुष्य में कोई एक भावना अत्यधिक प्रबल हो जायेगी।
इसी तरह हाइपोथैलमस ग्रन्थि मनुष्य की क्रियाओं को नियन्त्रित करती है। तथा स्वयं एमिगडला द्वारा नियन्त्रित होती है।
मैंने बस्तीवासियों की रिपोर्ट में पाया है कि सभी में दोनों ग्रन्थियों की सक्रियता अत्यधिक थी। विशेष रूप से एमिगडला का साइज क्रोध की खतरनाक सीमा को पार कर गया था।’’
‘‘लेकिन ऐसा हुआ क्यो?’’
‘‘ऐसा हुआ है कुछ केमिकल्स के रिएक्शन से, जो उनके भोजन या किसी अन्य तरीके से उनके मस्तिष्क में पहुचे।’’
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‘‘फिर तो तुम्हें ऐसी चीजों की जाच करानी चाहिए जिनका सभी बस्तीवासियों ने एक साथ इस्तेमाल किया हो।’’ कमिनर ने इंस्पेक्टर विशाल की रिपोर्ट सुनने के बाद कहा।
‘‘सब की नहीं। केवल आटे की।’’
‘‘क्यों?’’
‘‘इसलिए क्योकि तफ्तीश से पता चला है कि फसाद होने से ठीक तीन दिन पहले एक मल्टीनेशनल कंपनी ‘ईट-एन-ज्वाय’ ने इन्हें फ्री में आटे के पैकेट बांटे थे।’’
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2 comments:

Arvind Mishra said...

अभी कहानी पगडंडी पर ही है कब आयेगी मुख्य पथ पर !

Abhishek Mishra said...

Agli kadi ka intejar.