Monday, December 8, 2008

ताबूत - एपिसोड 23

"तुम्हारा मतलब ये पहाडियाँ नहीं बल्कि पिरामिड हैं." शमशेर सिंह ने उसकी ओर प्रश्नात्मक दृष्टि से देखा.
"यस्."
"फ़िर तो यहाँ ममियां भी मौजूद होनी चाहिए."
"किसकी मम्मियां? हम लोगों की मम्मियां तो स्वर्गवासी हो चुकी हैं. क्या स्वर्ग जाने वाला व्यक्ति यहीं आता है?" रामसिंह ने हैरत से पूछा.
"मम्मियां नहीं उल्लू की दम, ममियां. पुराने समय में लोग मरने वालों के मसाला लगाकर उन्हें ताबूत में सुरक्षित कर देते थे. वे लाशें ही ममियां कहलाती हैं." शमशेर सिंह ने स्पष्टीकरण किया.
"मैं भी यही समझता हूँ कि यहाँ ममियां ज़रूर होंगी." प्रोफ़ेसर ने कहा, "और उनके साथ खजाना भी होगा. क्योंकि मिस्र के पिरामिडों में जहाँ जहाँ ममियां मिली थीं वहां वहां उनके साथ विशाल खजाने भी मिले थे." खजाने के ख्याल ने एक बार फिर उन्हें रोमांचित कर दिया.
आगे सुरंग पर एक मोड़ था. जैसे ही वे लोग मोड़ पर पहुंचे, उन्हें सुरंग का मुंह दिखाई पड़ने लगा. वहां से हलकी रोशनी अन्दर आ रही थी जिससे पता चल रहा था कि शाम होने वाली है.
"लो हम लोग सुरंग के मुंह तक तो पहुँच गए, यानी पहाडियों को पार कर गए." रामसिंह ने प्रसन्नता से कहा.
"इसमें दांत निकालने कि क्या बात है. हम लोग पहाडियां पार करने नहीं बल्कि खजाने की तलाश में आये है." शमशेर सिंह ने रामसिंह को घूरा.
"वह भी मिल जाएगा. वह ज़रूर सुरंग के मुंह पर नीचे बिखरा होगा. क्योंकि मुझे नीचे काफी गहराई मालूम हो रही है." रामसिंह ने कहा.
वे लोग सुरंग के मुंह तक पहुँच गए. और वहां से नीचे देख उनकी आशा निराशा में बदल गई. क्योंकि एक तो सुरंग का मुंह भूमि से काफ़ी ऊँचाई पर था और दूसरे वहां भूमि होने की बजाये एक बड़ा सा तालाब था, और यह तालाब पहाडी से एकदम लगा हुआ था. अतः नीचे उतरने का प्रश्न ही नहीं पैदा होता था.
वे लोग कुछ देर तक एक दूसरे की शक्लें देखते रहे, फिर प्रोफ़ेसर ने नीचे पैर लटकाकर बैठते हुए कहा, "क्या ख्याल है, नीचे तालाब में उतरा जाए?"
"अरे नहीं. ऐसा विचार भी अपने मन में मत लाना. अगर तुम तालाब में उतर गए तो कहीं सहारा भी नहीं ले पाओगे. क्योंकि तालाब के चारों ओर चिकनी पहाडियाँ हैं. और उनपर हाथ जम ही नहीं सकता." शमशेर सिंह ने प्रोफ़ेसर के बाजू पूरे जकड़ लिए.
"मुझे तो अब झल्लाहट होने लगी है. अगर अब भी खजाना नहीं मिला तो मैं वापस लौट जाऊंगा. तुम लोग आराम से फिर खजाना खोजते रहना." रामसिंह बोला.
"वापस तो अब लौटना ही पड़ेगा. क्योंकि आगे का रास्ता पूरी तरह बंद है." शमशेर सिंह बोला.

3 comments:

seema gupta said...

फ़िर तो यहाँ ममियां भी मौजूद होनी चाहिए
बहुत रोचक है ये ताबूत - एपिसोड , पिरामिड के बारे में बहुत पढा है, बत डर भी लगता है.... ममियां क्या जिन्दा हो जाती हैं जैसे english movies में दिखाया जाता है "

Regards

Anil said...

मिस्र में माना जाता था कि सभी मरे व्यक्ति प्रलय के दिन फिर से जिंदा होंगे. इसीलिये लोग अपने शरीर को मरने के बाद बरसों तक संभाल कर रखवाना चाहते थे. हजारों साल बाद भी वे ममियां ही बने हुये हैं. और इंगलिश फिल्मों में तो न जाने क्या-क्या दिखाते हैं - सब कुछ सच थोडे ही होता है? :)

zeashan zaidi said...

फिलहाल अभी तक तो कोई ममी जिंदा नही हुई है.