Tuesday, May 12, 2026

सूरैन का हीरो - भाग 19

मंदोरा एक बार फिर बाकोल के शाही वैज्ञानिकों की टीम के पास पहुंच गया था जो सूरैन को ढूंढने की जी तोड़ कोशिश में लगी हुई थी।


‘‘क्या कुछ कामयाबी मिली?’’ उसने पहुंचते ही पूछा।

‘‘अभी तक तो नहीं। हम अपनी कोशिशों में लगे हुए हैं।’’ वैज्ञानिकों के हेड कोसी ने ही जवाब दिया।

‘‘जल्दी कुछ करो। मेरे ऊपर बहुत प्रेशर है। सम्राट सुबह शाम उठते बैठते बस एक ही सवाल पूछता रहता है मुझसे। कल तो रात को एक बजे फोन करके पूछ रहा था। मेरी जिंदगी चौपट हो गयी है।’’ मंदोरा बेबसी के साथ कराहा था। हालांकि उसकी ये बेबसी भरी कराहट नकली ही थी क्योंकि हाबू कभी उससे तेज़ आवाज़ में भी बात नहीं करता था।

‘‘मंदोरा मैं क्या करूं। मेरी स्पेस कर्वेचर बदलने वाली थ्योरी तो साबित नहीं हो पायी। ऐसा कोई भी सुबूत मिल नहीं पाया जिससे पता चलता कि सूरैन वासियों ने अपना स्पेस कर्वेचर बदल दिया है।’’

‘‘इसका मतलब उन्होंने कोई और तरीका अपनाया है जो हम समझ नहीं पा रहे हैं।’’

‘‘मुझे तो अब यही लगता है कि उन्होंने हमसे डरकर पक्का अपने ग्रह को किसी खतरनाक बम के ज़रिये उड़ा दिया है। सब के सब खत्म हो चुके हैं अपने ग्रह समेत।’’ इस बार सम्राट के साले का साढ़ू ही बोल उठा।

मंदोरा ने उसे घूरते हुए बड़ी मुश्किल से अपने अरमानों को बाहर आने से रोका। वरना अरमान तो यही थे कि उसे पीट पाटकर रख दे।

‘‘आलीजनाब आप बाकोल के महानतम वैज्ञानिकों में शुमार होते हैं। मैंने सुना है कि आप काकटेल बहुत अच्छी बनाते हैं।’’

‘‘आप ने बिल्कुल सही सुना। सम्राट के साले का साढू खुश होकर बोला।’’ मेरी काकटेल पीकर चन्द मिनटों में ही आत्मा स्वर्ग की सैर करने लगती है और शरीर गटर की।’’

‘‘तो मेहरबानी फरमाकर हम सबकी आत्माओं को स्वर्ग की सैर करा दें। काश कि आप जैसा होनहार इस ग्रह का हर इंसान हो जाये।’’

सम्राट के साले का साढू अपनी तारीफ सुनकर फूलकर गोलगप्पा हो गया और फौरन दौड़ता हुआ काकटेल बनाने चल दिया।

उसके जाने के बाद मंदोरा फिर कोसी की ओर देखने लगा।

‘‘समझ में ये नहीं आता कि सूरैन पर मौजूद हमारे जासूसों का मैसेज भी नहीं मिल रहा है। ऐसा तो आजतक नहीं हुआ।’’

‘‘हाँ। अगर सूरैन खत्म नहीं हुआ तो उसके वासी भी जिन्दा होने चाहिए। और उनके बीच मौजूद हमारे जासूम भी।’’ कोसी भी हैरत से बोला।

‘‘अब वो सारे जासूस मैसेज तो भेज रहे हैं लेकिन सपने में आकर। अभी कल रात मेरे सपने में एक आया और कहने लगा कि सूरैन वालों ने कोई खास चीज़ बना ली है। ये कमबख्त सपने भी अजीब अजीब चीज़ें दिखाया करते हैं।’’

मंदोरा की बात सुनकर अचानक कोसी उठकर खड़ा हो गया। उसके चेहरे पर चौंकने के आसार थे।

‘‘क्या - क्या कहा तुमने?’’

मंदोरा कोसी के इस तरह चौंकने से खुद भी अचंभे में पड़ गया।

‘‘मैं कह रहा हूं कि वहाँ के जासूसों में से अब तक कोई सम्पर्क नहीं कर पाया है। लगता है सब के सब पकड़ कर बन्द कर दिये गये हैं।’’

‘‘लेकिन अभी तो तुमने कहा कि वे सब सपने में सम्पर्क कर रहे हैं।’’

मंदोरा ने एक कहकहा लगाया और कोसी के कंधे पर हाथ मारकर बोला, ‘‘लगता है तुम्हारे ऊपर भी सम्राट के साले के साढ़ू का असर हो गया है। सपने में सम्पर्क नहीं होता, सपने देखे जाते हैं और उनमें कुछ भी दिख सकता है। हो सकता है किसी सपने में तुम लड़की के रूप में बदल जाओ और हाबू तुमसे शादी कर ले।’’

‘‘वह सब छोड़ो। मुझे बस एक बात का जवाब दो। क्या सूरैन पर मौजूद सभी जासूस तुम्हारे सपने में चुके हैं?’’ कोसी के चेहरे से उसी तरह जोश झलक रहा था।

मंदोरा कुछ पलों तक सोचता रहा फिर बोला, ‘‘हाँ ये बात तो है। वहाँ जितने भी जासूस मेरी जानकारी में हैं सब के सब इधर दो तीन दिनों में मुझे दिखाई दे चुके हैं सपने में।

‘‘मंदोरा! तो फिर समझ लो कि हमने सूरैन के ग़ायब होने का राज़ पता कर लिया।’’ कोसी जोश के साथ बोला।

‘‘क्या बक रहे हो। यकीनन तुम्हारे ऊपर सम्राट के साले के साढ़ू का असर हो चुका है। भला मेरे सपनों का सूरैन के गायब होने से क्या ताल्लुक?’’

‘‘बहुत गहरा ताल्लुक है मंदोरा। हम अक्सर मरने वालों को अपने सपनों में देखते हैं और उन्हें जिंदा अपने से बात करते हुए देखते हैं।’’

‘‘अब तुम भी वही बात कर रहे हो, जो इससे पहले उस गधे ने की और फिर काकटेल बनाने चला गया। क्या तुम्हारा भी यही मानना है कि सूरैन वाले मर चुके हैं?’’ मंदोरा त्योरियाँ चढ़ाकर बोला।

‘‘नहीं। मेरा ये मानना नहीं है। बल्कि मेरी थ्योरी ये है कि सूरैन वाले अपनी डाईमेंशन बदल चुके हैं।’’

‘‘क्या मतलब?’’ मंदोरा इस बार चौंककर कोसी की शक्ल देखने लगा।

‘‘आज से कई सौ साल पहले हमारे ग्रह के कुछ महान वैज्ञानिकों ने थ्येरी पेश की थी कि मौत के बाद इंसान दरअसल इस दुनिया से अलग किसी और दुनिया में पहुंच जाता है जिसकी डाईमेंशन दरअसल हमारी दुनियर की डाईमेंशन से ज़्यादा होती है। ऐसे में उसका हमारी दुनिया में लौटना तो मुमकिन नहीं होता लेकिन अगर वह हमसे सम्पर्क करना चाहता है, तो उसका मैसेज हमें सपनों के रूप में ही मिल पाता है। हालांकि उस समय यह थ्योरी साबित नहीं हो पायी थी, लेकिन उसके सही होने की संभावना बहुत ज़्यादा बतायी गयी थी। अब सूरैन का गायब होना इस संभावना को सच में बदल रहा है।’’

‘‘यानि वह लोग अपने ग्रह को किसी ऊंची डाईमेंशन में ले गये हैं?’’ मंदोरा पूछने लगा।

‘‘हाँ। इसके अलावा और कोई तरीका समझ में नहीं आता। स्पेस कर्वेचर बदलने वाला थ्योरी पहले ही फेल हो चुकी है। तो अब यही तरीका बचता है जिसके ज़रिये सूरैन वाले अपने को गायब कर सकते हैं।’’

‘‘तो फिर उन्हें वापस कैसे देखा या पाया जा सकता है?’’

‘‘उन्होंने जो भी एक्स्ट्रा डाईमेंशन पैदा की है अगर उसे हटा दिया जाये, तो वह ग्रह पहले की तरह नज़र आने लगेगा।’’ कोसी ने हल पेश किया।

‘‘तो फिर हटा डालो उस डाईमेंशन को।’’ मंदोरा ने हुक्म दिया।

‘‘ये इतना आसान भी नहीं। इसपर बहुत कुछ सोचना पड़ेगा।’’ कोसी सोचने लगा था और मंदोरा उसका मुंह ताक रहा था।

काकटेल बनकर अभी तक नहीं आयी थी।

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आज ज़ारा बहुत खुश थी। और जिस खबर पर उसे ये खुशी मिली थी उसे बहुत जल्द वह शीले से शेयर करना चाहती थी। फिलहाल वह अपने महल में थी और शीले से मिलने के लिये उसके घर जाने की तैयारी कर रही थी।

फिर उसन शीले को फोन मिला दिया।

‘‘क्या हुआ?’’ उधर से पूछा गया।

‘‘मैं तुमसे मिलने रही हूं। अभी।’’ ज़ारा ने खबर दी।

‘‘अभी? अरे, लेकिन आज सुबह ही तो तुम यहाँ से गयी हो अपने मायके।’’ शीले की आवाज़ में हैरत थी।

‘‘दोबारा रही हूं। तुम्हारे बिना दिल नहीं लग रहा।’’ ज़ारा पूरी तरह रोमाण्टिक होकर बोली।

‘‘इसका मतलब, मेरा वह एक्सपेरीमेन्ट आज भी पूरा नहीं हो पायेगा - जो पिछले एक हफ्ते से पूरा करने की कोशिश कर रहा हूं।’’ वह असमंजस में पड़ गया था और ज़ारा की त्योरियाँ चढ़ गयीं।

‘‘ठीक है। अब मैं आऊंगी ही नहीं। अभी शादी को दो महीने भी नहीं हुए और तुम मुझसे इतना बोर हो गये।’’

‘‘अरे रे ऐसा नहीं है।’’ शीले बौखलाकर बोला, ‘‘तुम शौक से आओ। मेरा एक्सपेरीमेन्ट गया भाड़ में।’’

‘‘ओके। लेकिन ये मत समझना कि तुम्हारी मोहब्बत में रही हूं। तुम्हें एक इम्पोर्टेंट खास न्यूज़ देनी है।’’ इसबार ज़ारा अकड़ कर बोली।

‘‘लेकिन अभी कुछ देर पहले ही तुमने कहा है कि मेरे बिना दिल नहीं लग रहा।’’ शीले हंसकर बोला।

‘‘अच्छा! मैंने ऐसा कहा?’’

‘‘वो सिर्फ एक मज़ाक था।’’ ज़ारा दाँतों में उंगली दबाकर एक अदा के साथ बोली।

‘‘पता नहीं वो मज़ाक था या ये।’’ शीले बायीं आँख दबाकर बोला और ज़ारा ने फोन काट दिया।

वह कमरे से बाहर निकली और निकलते ही तोतों की जोड़ी से मुठभेड़ हो गयी।

‘‘सुनिए मोहतरमा।’’ तोता ने देखते ही पुकारा और ज़ारा उसकी ओर घूम गयी।

‘‘फरमाईए गिल्लू जी।’’

‘‘ये आपने हमें किस मुसीबत में फंसा दिया।’’ वो रुहांसी आवाज़ में बोला।

‘‘कौन सी मुसीबत?’’ ज़ारा अनजान बनकर पूछने लगी।

‘‘ये जो आपने हमारे पिंजरे में एक आफत लाकर छोड़ दी है।’’

‘‘क्या कहा मैं आफत!’’ तोती चीखकर बोली, ‘‘आफत तुम होगे तुम्हारा बाप होगा।’’

‘‘बदतमीज़। मेरे बाप पर जा। वरना मैं तेरी अम्मा पर चला जाऊंगा।’’ तोता भी चीखा और जवाब में तोती की ज़ोरदार लात खाकर पिंजरे के दरवाज़े से टकरा गया।

‘‘आज मैं इसका गला घोंट दूंगा।’’ तोता गुस्से में पागल होकर तोती की ओर बढ़ा।

‘‘अरे रे। रुको।’’ ज़ारा ने उसे रोका, ‘‘तुम्हारे जैसे ज्ञानी तोते को इस तरह गुस्से में देखकर अजीब सा लग रहा है। मैंने तो सुना है जो जितना ज्ञानी होता है वह उतना ही ठंडा हो जाता है। तुम्हें तो ज्ञान की बातें करनी चाहिए इस प्यारी प्यारी तोती के साथ। जैसे कि तारे गर्म क्यों होते हैं और पुच्छल तारे ठंडे क्यों?’’

‘‘मेरा सारा ज्ञान इसके आने के बाद हवा हो चुका है। अब सिर्फ इतना पता है कि जब दिमाग गर्म होता है तो गैस ठंडी निकलती है पिछवाड़े से।’’ तोता ठंडी साँस लेकर बोला।

‘‘अब दिमाग ठंडा कर ले वरना ऐसा हो कि वापसी पर दो लाशें कब्रिस्तान पहुंचानी पड़ जायें।’’ ज़ारा ने समझाया, और आगे बढ़ गयी।

दोनों बिना कुछ बोले एक दूसरे को घूरने में लग गये थे।

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पीको का जीना वह कमबख्त काईडोर हराम कर चुकी थी। ये बात अभी भी टॉप सीक्रेट थी कि पीको ज़ारा के धोखे में एक काईडोर से शादी कर बैठा है। यानि बाकोल के राजकुमार की शादी एक मादा जानवर के साथ हो चुकी है।

अभी तक ये खबर महल से बाहर नहीं जाने पायी थी वरना हाबू और पीको दोनों की ही इज़्ज़त का जनाज़ा निकल जाता। इसलिए हाबू का सख्त हुक्म था कि जो भी इस खबर को महल से बाहर निकालने की कोशिश करे उसका सर फौरन धड़ से अलग कर दिया जाये।

लेकिन उस काईडोर यानि पीको की एक्सीडेंटल बीवी का क्या किया जाये जो महल से बाहर निकलने को उतावली हो रही थी। और बार बार पीको से बाहर घूमने की फरमाईश कर रही थी।

बाहर घूमने का तो बहाना था। वह तो महल के आसपास मौजूद हरी फसल से लदे हुए खेतों को देखकर बेचैन हो रही थी।

उसका मन होता था कि कूदते हुए उन खेतों में पहुंच जाये और पूरे के पूरे एक ही झटके में चर जाये। बहुत मुश्किल से पीको उसके गार्डस ने कण्ट्रोल किया हुआ था। अगर उसे आम जनता घास चरते खेत में देख लेती तो सारा भांडा फूट जाता।

लेकिन आखिकार एक दिन उसे मौका मिल ही गया। जब पीको महल की स्पेशल काकटेल पीकर मस्त था और काईडोर यानि नकली ज़ारा की प्लेट में रखी घास खत्म हो चुकी थी।

उसने बावर्ची को आवाज़ दी लेकिन वह टाल गया। पिछले एक घंटे में वह आठ मरतबा उसकी प्लेट भर चुका था, लेकिन इस कमबख्त की भूख थी कि कम ही नहीं होती थी। उसे हैरत थी कि एक सूखी छुई मुई लड़की इतना कैसे भर लेती है।

उसे क्या पता था कि पीको की पत्नी का बाहरी बदन भले ही इंसान का है लेकिन अन्दरूनी बनावट काफी हद तक काईडोर की ही थी और उसमें घास चरने वाले जानवरों के सारे गुण भी मौजूद थे। यानि ज़रूरी नहीं कि भूख लगने पर ही चरा जाता। उसके पेट में आगे का भी स्टाक रखने की जगह मौजूद थी।

जब बावर्ची कई बार बुलाने पर भी नहीं आया तो वह खुद उठ खड़ी हुई और ज़मीन पर लेटे पीको को फांदती हुई कमरे से बाहर निकल आयी।

अब अगला मसला था महल से बाहर निकलने का। इससे पहले भी उसने कोशिश की थी लेकिन गार्डस ने उसे वापस अन्दर कर दिया था। इसलिए इसबार वह उनसे बचने की तरकीब सोच चुकी थी। उसके इंसानी दिमाग की अक्ल और जानवर रूप की ख्वाहिश दोनों मिलकर बेहतरीन तरीके से उसे आगे का रास्ता बता रही थीं।  

अपने सोचे हुए प्लान पर अमल करते हुए उसने कमरे के अटैच बाथरूम का नल कमरे के बाहर निकलने से पहले ही खोल दिया था और अब एक गैलरी में चलती हुई उस कमरे में पहुंच गयी जहाँ एक न्यूक्लियर बैटरी मौजूद थी। ये न्यूक्लियर बैटरी दरअसल महल के उस तरफ के हिस्से को रौशन करने के लिये बिजली की सप्लाई देती थी।

ये बिजली तारों में नहीं दौड़ती थी बल्कि माइक्रोवेव्स पर सवार हाकर इलेक्ट्रानिक डिवाईसेज तक पहुंच जाती थी और उन डिवाईसेज के रिसीवर्स उसे कैच करके माइक्रोवेव्स में मौजूद बिजली का इस्तेमाल कर लेते थे।

नकली ज़ारा यानि काईडोर उस कमरे में पहुंचकर बैटरी की पावर धीरे धीरे बढ़ाने लगी।

फिर उसके कानों ने हल्का सा धमाका सुना। इसका मतलब था कि बाथरूम में मौजूद रौशनी देने वाला कमज़ोर बटन नुमा बल्ब इतनी ज़्यादा पावर की ताब लाकर उड़ गया था और अब उससे निकलने वाली फ्री बिजली नीचे बहते हुए पानी में जाकर घुल रही थी।

बिजली घुला हुआ ये पानी जल्दी ही पीको के बदन तक पहुंचने वाला था। कि अचानक वहाँ तेज़ आवाज़ में खतरे का अलार्म बजने लगा। यानि पीको को खतरे में देखकर सेंसर्ज अपना काम करने लगे थे।

आवाज़ सुनते ही उधर मौजूद सारे पहरेदार बदहवास होकर पीको के कमरे में पहुंच गये। और पहुंचते ही बहते हुए पानी में ज़ोरदार झटके खाते हुए इधर उधर उछलने लगे। ज़ाहिर है पानी में हाई पावर की बिजली दौड़ रही थी।

फिर वहाँ अच्छी खासी चीख पुकार मच गयी। किसी की समझ में नहीं रहा था कि उनके साथ क्या हो रहा है। उनकी चीख पुकार सुनकर बाकी पहरेदार भी वहाँ दौड़े चले आये थे। और अब वे भी उछल कूद करने लगे थे। पीको अभी भी नशे में मस्त पड़ा हुआ था इस बात से बेखबर कि उसके आसपास क्या हो रहा है।

फिर काफी देर बाद उनकी समझ में आया कि वहाँ बहते पानी में बिजली दौड़ रही है।

उनमें से एक जो बाहर था दौड़कर उसने इमरजेन्सी स्विच ऑन कर दिया। ये स्विच हवा में मौजूद ऐसी माइक्रोवेव्स को कई गुना बढ़ा देता था जो अपनी अन्दर फ्री बिजली को सोख लेती थीं।

स्विच ऑन करते ही फिज़ा मे मौजूद सारी बिजली सोख ली गयी और इसी के साथ महल का वह हिस्सा अँधेरे में डूब गया।

अब काईडोर की पाँचों उंगलियां घी में थी। एक तो सारे पहरेदार पीको के कमरे में और सोने पे सुहागा कि चारों तरफ अँधेरा। वह आराम से महल के छोटे दरवाज़े से बाहर निकलती चली गयी।

फिर एक लंबी छलांग ने उसे खेतों के बीच पहुंचा दिया और वह आराम से हरी हरी तैयार फसल पर मुंह मारने लगी। यहाँ तो हाथों के इस्तेमाल का दिखावा भी नहीं करना था। क्योंकि कोई देखने वाला था ही नहीं।

---- जारी है

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