Monday, May 11, 2026

सूरैन का हीरो - भाग 18

बाकोल के शाही वैज्ञानिक शाही टुकड़े का मज़ा लेते हुए उस सूरैन ग्रह के टुकड़े टुकड़े करने का प्लान बना रहे थे जो फिलहाल अंतरिक्ष में नज़र ही नहीं रहा था।


उन वैज्ञानिकों के साथ मंदोरा भी मौजूद था।

‘‘हम ऐसे ग्रह का क्या बिगाड़ सकते हैं जो नज़र से ही गायब है।’’ एक वैज्ञानिक उलझन भरी आवाज़ में बोला।

‘‘तुम लोगों को इसीलिए पाला जा रहा है ताकि इस तरह की प्राब्लम्स का हल फौरन ढूंढकर दो।’’ मंदोरा ने उसे घूरा, ‘‘सूरैन को फिर से नज़र में लाने की तरकीब ही तुम लोगों को ढूंढनी है जल्द से जल्द।’’

‘‘इसके लिये सबसे पहले उस टेक्नीक का पता लगाना होगा जिसे अपनाकर सूरैन वाले ऐसा करने में कामयाब हुए हैं।’’ एक साइंटिस्ट ख्याली लहजे में बोला।

‘‘मालूम होता है, उन्होंने अपने ग्रह को छिपाने के लिये कोई बहुत बड़ा परदा तैयार कर लिया है।’’ एक थोड़ा जवान दिखने वाले साइंटिस्ट ने अपनी थ्योरी पेश करते हुए कहा, ‘‘लेकिन उलझन की बात ये है कि इतना बड़ा परदा उन्होंने अपने ग्रह पर बनाया कैसे होगा?’’

उसकी थ्योरी सुनकर मंदोरा उसे बुरी तरह घूरने लगा।

‘‘तुम जैसे गधे को शाही वैज्ञानिकों की टोली में शामिल किसने किया। तुम्हें फौरन लात मारकर बाहर निकला देना चाहिए।’’ उसकी फटकार सुनकर उस जवान वैज्ञानिक का मुंह बन गया।

‘‘मंदोरा, ये सम्राट के साले के भाई के साढू हैं।’’ दूसरा वैज्ञानिक जल्दी से उस जवान वैज्ञानिक का परिचय देने लगा।

‘‘ओह!’’ मंदोरा ने गहरी साँस ली। उसके तेवर ढीले हो गये, ‘‘अच्छा हुआ तुमने बता दिया वरना इनका पत्ता तो अभी साफ हो जाता। लेकिन बेहतर यही होगा कि आगे ये अपनी चोंच बन्द रखें।’’

‘‘सूरैन ग्रह का गायब होना एक ऐसी घटना है जिसने हमारे दिमाग चकरा दिये हैं।’’ दूसरा वैज्ञानिक बोल रहा था, ‘‘अगर उसके चारों ओर उसे अदृश्य करने वाली किरणें फैलायी जातीं तो हमारे राकेट्स उसे हर हाल में भेद देते। लेकिन यहाँ तो मालूम होता है कि उसे अपनी जगह से हटाकर कहीं और भेज दिया गया। किसी गुप्त जगह पर।’’

‘‘ऐसा करना इम्पासिबिल है।’’ दूसरा साइंटिस्ट बोल उठा, ‘‘हमारे सोलर सिस्टम के स्टार की ग्रैविटी बहुत ज़्यादा है। उससे बाहर निकल पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।’’

‘‘लेकिन ये नामुकिन काम हुआ है। वरना वह ग्रह गायब होने के बाद भी अपनी जगह तो रहना ही चाहिए था।’’ मंदोरा भी बीच में बोल उठा।

‘‘कहीं ऐसा तो नहीं, कि उन्होंने स्पेस कर्वेचर ही बदल दिया हो जिसकी वजह से हम उसकी लोकेशन कहीं और सर्च कर रहे हैं और हकीकत में वह लोकेशन कोई और है।’’ उस वैज्ञानिक ने अपनी राय सामने रखी जो उन सब में फिज़िक्स का सबसे बड़ा माहिर था।

‘‘हाँ ये मुमकिन है।’’ कई वैज्ञानिक इसपर एकमत हो गये थे।

‘‘अगर उन लोगों ने ऐसा किया है तो भी उन्हें ढूंढ पाना बहुत मुश्किल होगा।’’ पहले ने अपना ख्याल ज़ाहिर किया।

‘‘लेकिन हम कोशिश शुरू कर सकते हैं। अगर स्पेस कर्वेचर बदला गया है तो आसपास की दूसरी बॉडीज़ से उसका सुबूत मिल सकता है और सूरैन की लोकेशन भी ट्रेस हो सकती है।’’ वही वैज्ञानिक दोबारा बोला जो शायद उन सबमें सबसे ज़्यादा काबिल था और जिसने स्पेस कर्वेचर के बदलने का आईडिया दिया था।

‘‘ठीक है मिस्टर कोसी, अब सूरैन की खोज तुम्हारी लीडरशिप में होगी। तुम आपरेशन सूरैन सर्च के हेड होगे।’’ मंदोरा ने फाईनली तय कर दिया और सम्राट के साले के भाई के साढू का मुंह बन गया। कोशिश और मेहनत कोई भी करता लेकिन प्रोजेक्ट हेड तो उसे ही बनाना चाहिए था। आखिर वह हाबू के साले के भाई का साढू जो था।

उसने मन ही मन तय कर लिया कि इसकी शिकायत मुनासिब मौका देखकर महारानी से ज़रूर करेगा।

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जबसे पीको को मालूम हुआ था कि ज़ारा के हुलिए में उसे एक काईडोर पकड़ा दी गयी है तभी से उसे अपने मुंह का मज़ा कड़वा मालूम हो रहा था।

जिस तरकीब के ज़रिये वह ज़ारा से मिलने कई बार सूरैन पहुंचा था उस तरकीब को वापस उसी पर पलटा दिया गया था।

अब पोज़ीशन ये थी कि वह नामुराद काईडोर चाहती थी कि पीको भी उसके साथ घास खाना शुरू कर दे और पीको का मन होता था कि उसे धुन कर रख दे।

‘‘घास दुनिया का सबसे पुराना और सबसे शुद्ध भोजन है।’’ इस वक्त भी वह काईडोर उसे कन्वेंस करने पर तुली हुई थी, ‘‘इंसान के रूप में इवोल्यूशन से पहले हम सब घास खाते थे और इवोल्यूशन के बाद भी हज़ारो साल तक सिर्फ घास खायी। फिर हमारे एक बहुत माननीय सम्मानीय पूर्वज ने आग की खोज की तो घास को उबालकर खाने लगे। तुम मेरी बात सुन रहे हो या नहीं?’’ पीको को सपाट सन्नाटे में देखकर काईडोर ने उसके कूल्हे पर एक हाथ जमा दिया और पीको जो अपनी स्पेशल कुर्सी पर मुश्किल से बैलेंस बनाकर टिका हुआ था, कुर्सी समेत नीचे चला आया।

‘‘मरदूद औरत! काईडोर की बच्ची।’’ वह कराहते हुए गुस्से से बोला, ‘‘मुझे तेरी कोई बात नहीं सुननी। मैं तो एक खास मुद्दे पर सोच रहा हूं।’’

‘‘क्या सोच रहे हो मेरी जान?’’ इसबार काईडोर ने बहुत प्यार से पूछा।

‘‘यही कि काश मेरा पूरा बदन ही अजगर का होता, तो मैं इस वक्त तुझे समूचा निगल जाता और डकार भी लेता।’’

‘‘छी! ये तुम कैसी गंदी गंदी बातें कर रहे हो। एक इंसान को अहिंसा का पुजारी होना चाहिए।’’

‘‘मैं आधा जानवर हूं। दिखाई नहीं देता?’’ पीको झल्लाकर बोला।

‘‘आधे से ज़्यादा जानवर घास ही खाते हैं।’’ नकली ज़ारा यानि काईडोर ने एक बार फिर नयी दलील दाग़ दी।

‘‘मैं सोच रहा हूं कि अब तेरा मेकअप खत्म करवा कर असली काईडोर की शक्ल में ले आऊँं। ज़ारा की शक्ल में वैसे भी तू मुझे ज़हर लग रही है।’’ पीको इसबार बत्तीसों दाँत पीसकर बोला।

‘‘यही तो वह शक्ल है जिसपर कुछ दिन पहले तुम मर रहे थे।’’ ज़ारा की शक्ल में काईडोर गुनगुना कर बोली।

‘‘अब तुम मुंह बन्द करो, वरना कसम से गला घोंट कर मारूंगा।’’ पीको गुर्राया।

‘‘इससे अच्छा है कि तुम मुझे काईडोर की ही सूरत में वापस ला दो। कम से कम आज़ादी से घास तो खा लूंगी। इंसानी सूरत में तो लोग अजीब अजीब सी नज़रों के साथ घूरते हैं।’’ काईडोर एक बार फिर नखरीले अंदाज़ में बोली।

अब तक पीको इतना पक गया था कि उसने फौरन मेकअप स्पेश्लिस्ट को बुलवा लिया।

‘‘इसका मेकअप खत्म करके इसे वापस काईडोर बना दो फौरन।’’ मेकअप स्पेश्लिस्ट के आने के साथ ही उसने उसे हुक्म दिया।

‘‘राजकुमार, इसके लिये तो उस मेमोरी मैप की ज़रूरत पड़ेगी जिसमें इसका ओरिजनल डेटा मौजूद है।’’ आने वाले ने बताया।

‘‘क्यों महोदया, आपका मेमोरी मैप किधर है?’’ पीको ने घूमकर काईडोर से पूछा।

‘‘सूरैन ग्रह पर। ज़ारा के मेकअप में मौजूद काईडोर का जवाब था।

‘‘और सूरैन ग्रह तो गायब हो चुका है। इसका मतलब तू हमेशा ज़ारा के ही मेकअप में मेरे सीने पर मूंग दलती रहेगी।’’ पीको कराहकर बोला।

‘‘मुझे घास के साथ साथ मूंग की दाल भी बहुत पसंद है। कच्ची।’’ काईडोर खुश होकर बोली।

‘‘अब मुझे भी कच्ची दाल समझकर चारा बना डाल। सत्यानाश हो जाये सूरैन का। वहाँ की राजकुमारी के पूरे बदन में कीड़े पड़ जायें। जो मेरे गले में ये खतरनाक बला डाल दी है।’’ अगर पीको पूरी तरह इंसान होता और उसके हाथ मौजूद होते तो इस वक्त यकीनन वह अपने बाल नोचते हुए किसी वीराने की ओर निकल जाता।

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उधर बाकोल के वैज्ञानिक सूरैन को ढूंढ रहे थे और इधर सूरैन पर शीले और ज़ारा दावतों में बिज़ी थे। हालांकि हर दावत में ज़ारा तो खुशी खुशी जाती थी लेकिन शीले का मुंह बन जाता था। क्योंकि उसके पास बरबाद करने के लिये बहुत कम वक्त था।

उसके लिये किसी सुनसान वीराने की सैर कहीं ज़्यादा मज़ा देती थी क्योंकि ऐसी जगहों पर उसे कुछ नया क्रियेटिव सोचने का वक्त मिल जाता था।

शादी के बाद तो उसे ऐसी जगहों की ज़रूरत कुछ ज़्यादा ही होने लगी थी क्योंकि ज़ारा पूरी तरह एक आदर्श पत्नी साबित हुई थी यानि बोल बोलकर सिरदर्द पैदा कर देने वाली।

फिलहाल दोनों सम्राट मास्टर पंजुम के एक वज़ीर की दावत के बुलावे पर थे। वज़ीर की डाईनिंग टेबिल पर खाना लग चुका था और इस नये शादी शुदा जोड़े के साथ खुद वज़ीर उसके कुछ खास मुसाहिब भी मौजूद थे।

‘‘राजकुमारी और राजकुमार शीले का बहुत बहुत शुक्रिया जो आप लोग हमारे बुलावे पर यहाँ तशरीफ ले आये।’’ वज़ीर दोनों का आभार जता रहा था।

‘‘लेकिन मुझे एक बात हैरत में डाल रही है।’’ शीले या ज़ारा के कुछ बोलने से पहले ही वज़ीर का एक साथी बोल उठा।

‘‘कैसी बात?’’

‘‘यही कि बाकोल वाले अपनी नाकामी के बाद भी हमपर हमला क्यों नहीं कर रहे हैं?’’ उसने सवाल किया।

‘‘हमला तो तब करेंगे जब उन्हें सूरैन नज़र आयेगा।’’ ज़ारा हंसकर बोली।

‘‘क्या मतलब?’’ वज़ीर का साथी चौंक पड़ा।

शीले ने हंसते हुए सूरैन के गायब होने की कहानी बता दी और साथ में उसकी वजह भी।

‘‘कमाल है जी। बाकोल वाले तो ऐसा सोच ही नहीं सकते।’’ वह साथी हैरत में पड़ गया।

खाना खत्म हो चुका था। वज़ीर का साथी नेपकिन से हाथ पोंछते हुए उठ खड़ा हुआ।

‘‘अब मैं चलूंगा। कुछ ज़रूरी काम गया है।’’

‘‘राजकुमार और राजकुमारी की मेहमान नवाज़ी से ज़्यादा ज़रूरी क्या हो सकता है?’’ वज़ीर ने उसे घूरा।

‘‘माफी चाहता हूं। लेकिन इस वक्त बहुत ज़रूरी है जाना।’’ फिर उसने वज़ीर की इजाज़त का इंतिज़ार भी नहीं किया और वहाँ से निकलता चला गया।

थोड़ी ही देर में वह वज़ीर के बंगले से थोड़ी दूर पर मौजूद सड़क पर चलता नज़र रहा था। फिर चलते चलते उसने जेब से माचिस की डिबिया के आकर की एक डिवाईस निकाली और उसे ऑन करके बोलने लगा।

‘‘हैलो बाकोल कण्ट्रोल रूम हैलो। वेरी वेरी इम्पार्टेंट मैसेज।’’

शायद बाकोल ग्रह से सम्पर्क नहीं हो पा रहा था। सो वह बार बार कोशिश करने लगा।

‘‘अब ऐसी भी क्या जल्दी है बाकोल से सम्पर्क करने की।’’ एक आवाज़ पीछे से आयी और वह बुरी तरह चौंक गया।

घूमकर देखा तो शीले कमर पर हाथ रखे हुए मुस्कुरा रहा था। साथ में ज़ारा भी मौजूद थी।

‘‘...आप !?’’ वह बौखलाकर बोला।

‘‘हाँ मैं। शीले। और देख रहा हूं कि बाकोल के कई जासूस अभी भी सूरैन पर घूम रहे हैं आज़ाद।’’

‘‘ऐसे लोगों को हमारे शेरों के पिंजरे में होना चाहिए।’’ ज़ारा गुस्से में बोली।

बाकोल का जासूस एक पल को सकपकाया और फिर उसने तेज़ी से आगे की और दौड़ लगा दी।

क़ायदे से तो शीले को उसे पकड़ने के लिये उसके पीछे दौड़ जाना चाहिए था। लेकिन वह वैज्ञानिक ही कैसा जो हर वक्त कुछ अलग सोचता हो। उसने इत्मिनान से जेब से एक छोटी सी डिवाईस निकाली और सामने की ओर उसका रुख करके एक बटन दबा दिया।

ज़ारा ने देखा, आगे की सड़क अचानक समुन्द्र में उठी किसी ऊँची लहर की तरह आगे से उठकर पीछे की तरफ घूम गयी थी। जिसके नतीजे में भागता हुआ बाकोल का जासूस हवा में टंगता चला गया और दूसरे ही पल लुढ़कता हुआ वापस पीछे रहा था।

वह लुढ़कता हुआ शीले के कदमों में गिरा और शीले ने आराम से उसे अपनी डिवाईस से निकलने वाली किरणों के पिंजरे में कैद कर दिया।

‘‘अब तुम इसे ले जाकर अपने किसी कैदखाने में डाल दो। किसी ऐसे कैदखाने में जहाँ से ये भागने पाये।’’ शीले ज़ारा से मुखातिब हुआ।

‘‘अभी इसके और भी साथी सूरैन पर मौजूद हो सकते हैं।’’ ज़ारा ने अंदेशा ज़ाहिर किया।

‘‘हाँ ये मुमकिन है और अगर उनमें से कोई वापस चला गया तो मैंने बारहवीं डाईमेंशन का जो मायाजाल तैयार किया है वह टूट भी सकता है।’’ अब शीले को भी फिक्र हो गयी थी।

‘‘तो फिर इसका हल?’’

‘‘हमें पूरी निगरानी रखनी होगी कि सूरैन का कोई भी वासी ग्रह के बाहर निकलने पाये। क्योंकि बारहवीं डाईमेंशन का मायाजाल सिर्फ ग्रह के परिसर में ही काम कर रहा है, और यह मायाजाल उसी वक्त तक क़ायम रहेगा जब तक सूरैन वासी सूरैन से बाहर निकलेंगे।’’

‘‘एक खतरा और भी है। बाकोल के इस तरह के जासूस सूरैन पर रहते हुए भी बाकोल से सम्पर्क कर सकते हैं। जैसे ये कर रहा था।’’

‘‘ये ऐसा नहीं कर पायेंगे। क्योंकि बारहवीं डाईमेंशन उनके मैसेज को रोकने की भी पावर रखती है जो इस बेचारे को पता ही नहीं था।’’

‘‘ये लोग तो हमें जिंदा ही नहीं देखना चाहते। और तुम इसे बेचारा कह रहे हो? ’’ ज़ारा ने इस बार शीले को घूर कर देखा।

‘‘अब तो बेचारा ही है। क्योंकि हमारी कैद में है। इसे और बेचारा बनाना है तो इसकी कैद में उस तोते को भी डाल देना जो मैंने तुम्हें तुम्हारी बर्थडे पर गिफ्ट किया था।’’ शीले हंसकर बोला।

ज़ारा भी मुस्कुराई और बोली, ‘‘उसकी तो मैं बहुत पहले ही बोलती बन्द कर चुकी हूं।’’

‘‘क्या मतलब क्या तुमने उसकी गर्दन मरोड़ दी है?’’ शीले अफसोस के साथ पूछने लगा।

‘‘नहीं। बल्कि उसके पिंजरे में एक तोती लाकर डाल दी है। तभी से उसकी बोलती बन्द है। अब तोती बोलती रहती है और वह बस सुनता रहता है।’’

‘‘यानि उसकी भी हालत मेरी जैसी ही हो गयी है।’’ शीले ने ठंडी साँस लेने की जो कोशिश की वह ज़ारा के पीठ पर धौल जमाने से कामयाब हो पायी।

---- जारी है

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