इस वक्त राजकुमारी के दिमाग को ठंडा करने के लिये चिल्ड कोल्ड ड्रिंक ही काम में लाई जा सकती थी। इसी बहाने उसे तेज़ तेज़ कदमों से चलने से भी छुटकारा मिल गया। राजकुमारी को झेलने के लिये उसका मालिक तो मौजूद ही था। फिर वह क्यों अपने का मुसीबत में डालता।
जल्दी ही ज़ारा शीले की लैब में पहुंच गयी। दरवाज़ा बाहर से बन्द नहीं था सो उसके ज़ोरों से धक्का देते ही पूरा खुल गया।
लेकिन अन्दर घुसते ही जो मंज़र उसने देखा उसने उसके गुस्से को भुला दिया।
पूरी लैब हॉलनुमा थी। और ये हॉल इतना विशालकाय था कि ज़ारा को लगा कि पूरा सूरैन ग्रह इसके अन्दर समाया हुआ है।
और इस पूरे हॉल में जगह जगह हवा में नाचती होलोग्राफिक फिल्में एक अजीब ही मंज़र पेश कर रही थीं। इन फिल्मों में अलग अलग दृश्य नज़र आ रहे थे। कहीं उगता हुआ पौधा, कहीं सुपरनोवा का विस्फोट और फिर उसका ब्लैक होल में बदलना तो कहीं एटम के अन्दर नाचते इलेक्ट्रान सब कुछ इन फिज़ा में दिखती फिल्मों में मौजूद था।
और फिज़ा में तैरती इन फिल्मों के बीच शीले भी बीचोंबीच मौजूद था। किसी मशीन पर झुका हुआ।
‘‘ये तुम क्या कर रहे हो शीले?’’ ज़ारा की आवाज़ पर शीले ने चौंक कर सर उठाया। वह अपनी मशीन में इतना खोया हुआ था कि उसे अपनी प्रेमिका के आने का एहसास ही न हुआ।
‘‘अरे तुम कब आयीं ज़ारा?’’ वह फौरन ज़ारा के पास आ गया।
‘‘ये तो मैंने सुना है कि लोग बीवी पर कम और गर्लफ्रेंड पर ज़्यादा ध्यान देते हैं। लेकिन मैं तो अभी बीवी बनी ही नहीं। फिर भी तुम दूसरे कामों में उलझकर मुझे भूलने लगे। अब यही देखो मेरे आने का पता ही नहीं चला।’’ ज़ारा शिकायती अंदाज़ में कहे जा रही थी। और शीले सकपकाया हुआ इधर उधर भागने का रास्ता तलाशने लगा था।
‘‘अरे नहीं। तुमको कोई गलतफहमी हो गयी लगता है। मेरे लिये तुमसे बढ़कर कायनात में और कुछ नहीं।’’ उसने जल्दी से ज़ारा को अपनी बाहों में ले लिया लेकिन ज़ारा फौरन ही अलग हो गयी।
‘‘तो फिर ये सब क्या है? इस वक्त तो तुम्हें शादी की तैयारियों
में होना चाहिए था। लेकिन तुम अपनी लैब में न जाने किस सूखी सड़ी रिसर्च में पड़े हुए हो।’’
इस बार शीले के चेहरे पर गंभीरता नज़र आने लगी।
‘‘ज़ारा ये सूखी रिसर्च नहीं है। ये समझ लो मेरी अब तक की जिंदगी का हासिल है। यह सब कुछ हमारे यानि हम दोनों और हमारे होने वाले बच्चों के फ्यूचर के लिये है।’’
‘‘क्या मतलब?’’ ज़ारा चौंक कर पूछने लगी।
‘‘पहले ये बताओ कि तुम्हें मेरी लैब में क्या दिख रहा है?’’
‘‘इस वक्त तुम्हारी लैब तो कहीं से नज़र नहीं आ रही है। मुझे तो यह कोई बहुत बड़ा पुराने ज़माने का सिनेमाहाल
लग रहा है जहाँ पचासों फिल्में एक साथ चल रही हैं।’’ ज़ारा ने चारों तरफ नज़रें दौड़ाते हुए कहा।
‘‘ये फिल्में नहीं बल्कि वास्तविक घटनाएं हैं। जो यूनिवर्स के अलग अलग कोनों में एक साथ घटित हो रही हैं। और मेरे प्रोजेक्ट
से इनका गहरा सम्बन्ध है। वह प्रोजेक्ट जिसके पूरा होने के बाद मैं शायद इस यूनिवर्स का महानतम वैज्ञानिक बन जाऊं।’’ शीले ने ज़ारा की आँखों में देखते हुए कहा।
शीले यूनिवर्स का महानतम वैज्ञानिक बनता या न बनता लेकिन ज़ारा इस बात पर गौर ज़रूर करने लगी थी कि उसके प्रोजेक्ट का सम्बन्ध उससे या उसके होने वाले बच्चों से किस तरह है।
‘‘आखिर तुम्हारा प्रोजेक्ट
है क्या? तुम कुछ बताओ तो सही।’’ उसने उत्सुक होकर पूछा।
‘‘बताना क्या अब दिखा ही देता हूं। क्योंकि मेरा काम लगभग पूरा हो चुका है। आओ इस तरफ।’’ कहते हुए शीले ने ज़ारा का हाथ पकड़ा और एक कोने में ले जाने लगा।
ज़ारा ने हैरत से देखा उधर कुछ स्टेज जैसा सजा हुआ दिखाई दे रहा था।
‘‘ये स्टेज तो बिल्कुल ऐसा ही है जैसा किसी शादी में दूल्हा दुल्हन के बैठने के लिये बनाया जाता है। अब क्या तुम इसी वक्त शादी करके मुझे सरप्राइज़ देना चाहते हो? लेकिन मेरी माँ और पिताजी को तो बुला लिया होता। मैं इस तरह अकेले सन्नाटे में हरगिज़ शादी नहीं करूंगी।’’
ज़ारा उसे शंका और परेशानी की नज़रों से देखने लगी।
‘‘अरे नहीं। तुम इतना घबरा क्यों रही हो!’’ शीले हंसकर बोला, ‘‘अगर मैंने ऐसा किया तो सम्राट हम दोनों को सूरैन से बाहर निकाल देंगे। और जब सब राज़ी हैं तो मैं ऐसा कदम क्यों उठाने लगा भला।’’
अब तक दोनों स्टेज के पास पहुंच गये थे। ज़ारा की कुछ नहीं समझ में आ रहा था कि शीले क्या करने वाला है। बहरहाल शीले ने उसे स्टेज पर चढ़ा दिया और साथ में खुद भी चढ़ गया।
अब दोनों ही स्टेज पर रखी कुर्सियों पर बैठ गये।
अब शीले ने अपनी कुर्सी पर लगा हुआ एक बटन दबा दिया और ज़ारा ने देखा कि स्टेज के चारों तरफ हरे रंग का धुआँ लहराने लगा था।
‘‘य..ये क्या?’’ वह घबराकर बोली, ‘‘क्या कोई ज़हरीली गैस यहाँ लीक होने लगी है?’’
‘‘बेफिक्र रहो। कोई खतरे की बात नहीं।’’ शीले ने दिलासा दिया। हालांकि अब वह मन ही मन सोचने लगा था कि इतनी शक्की बीवी के साथ वह पूरी जिंदगी कैसे गुज़ार पायेगा।
धुआँ धीरे धीरे बढ़ता जा रहा था लेकिल खास बात ये थी कि वह स्टेज के अन्दर दाखिल नहीं हो रहा था। ऐसा मालूम होता था कि कोई अदृश्य दीवार उस धुएँ को बाहर ही रोके दे रही है। लेकिन उस धुएं के घनेपन में बाहर हॉल में मौजूद सारी चीज़ें छुप चुकी थीं।
अब ज़ारा को निहायत बेहतरीन खुशबू महसूस हो रही थी। मालूम होता था वह खुशबू उसी हरे धुएं से फूटकर आ रही हो। फिर उसे महसूस हुआ कि जिस कुर्सी पर वह बैठी है वह मक्खन की तरह मुलायम हो गयी है। उसने चौंक कर देखा लेकिन यह क्या? वहाँ कुर्सी तो नदारद थी।
उसने शीले की तरफ देखा और अब उसे आभास हुआ कि दोनों ही हवा में तैर रहे हैं।
‘‘क्या तुमने ग्रैविटी को खत्म कर दिया है?’’ ज़ारा ने पूछा।
‘‘उससे भी बड़ा काम हुआ है।’’ शीले धीरे से बोला। ऐसा मालूम हो रहा था वह कहीं खो गया है, ‘‘सुनो ज़ारा क्या तुम्हें इस वक्त कुछ खाने का मूड हो रहा है?’’
‘‘हाँ। मुझे तो बहुत ज़ोरों की भूख लगी है। मन हो रहा है ढेर सारा फ्राई लेमीट खा जाऊँ।’’
जैसे ही ज़ारा के मुंह से ये अलफाज़ अदा हुए, उस हरे धुएं के भीतर से बिना जिस्म के दो हाथ नमूदार हुए और हवा में तैरते हुए ज़ारा के सामने आकर ठहर गये। और उन हाथों के बीच थमी प्लेट में बेहतरीन भुना हुआ लेमीट सामने था।
लेमीट सूरैन वासियों की सबसे पसंदीदा डिश थी। दरअसल ये किसी जानवर का मीट नहीं था बल्कि उसी टेस्ट में बड़ी बड़ी फैक्ट्रियों के अन्दर हवा और पानी की मदद से तैयार किया जाता था। स्वाद और सेहत दोनों में जानवर के मीट से कई गुना बेहतर होता था।
लेकिन ज़ारा तो अपने सामने फ्राई लेमीट को पाकर हैरत में ही पड़ी हुई थी। तो क्या शीले ने ऐसी मशीन बना ली थी जो पलक झपकते ही लोगों की इच्छा पूरी कर देती है?
उसने उन हाथों पर रखी प्लेट उठा ली और अपनी बात को आज़माने के लिये बोली, ‘‘लेमीट खाते हुए बीच की सैर हो जाये तो कितना अच्छा हो।’’
उसकी ये इच्छा भी देखते ही देखते पूरी होने लगी थी क्योंकि अचानक वह हरा धुआँ दूर जाने लगा था। लेकिन अब उस जगह पर ज़ारा को कम से कम शीले के हॉल की मशीनें तो न दिख रही थीं। उसकी जगह चिड़ियों की चहचहाहट खुले माहौल का एहसास दिला रही थी। और साथ ही ताज़ी हवा का झोंका।
उसने अपनी आँखें नीचे की तरफ कीं तो वहाँ का स्टेज नदारद पाया। बल्कि इस वक्त वह विशाल सागर के ऊपर हवा में अपने को तैरता हुआ पा रही थी। और बगल में ही शीले भी फिज़ा में परवाज़ कर रहा था।
‘‘य..ये सब क्या है? शीले, क्या तुमने इच्छाओं को पूरी करने वाली कोई डिवाईस तैयार कर ली?’’
‘‘इच्छाओं को पूरी करने वाली डिवाईस तो नहीं कह सकते लेकिन उसी से मिलती जुलती चीज़ ही बनायी है मैंने। चलो आराम से कमरे में बैठकर बात करते हैं।’’
जैसे ही उसके मुंह से कमरे में बैठने की बात अदा हुई, ज़ारा ने शीले के साथ ही अपने को एक कमरे में मौजूद पाया। दोनों एक निहायत नर्म सोफे पर टिक चुके थे।
ज़ारा के हाथ में अभी भी लेमीट की प्लेट टिकी हुई थी लेकिन इन तिलिस्मी पल पल बदलते दृश्यों के चक्कर में पड़कर वह उसे खाना भूल ही गयी थी और मुंह खोले हुए बस शीले को ही घूरे जा रही थी।
उसकी हालत देखकर शीले मुस्कुरा दिया।
‘‘पहले मुझे इस सारे तामझाम का मतलब बताओ फिर आराम से मुस्कुरा लेना। वरना मेरा सर अभी फट जायेगा।’’
ज़ारा ने उसे घूरा।
‘‘बता रहा हूं बाबा। मामला ये है कि मैंने एक ऐसी टेक्नीक डेवलप करने में कामयाबी हासिल कर ली है जिससे हम अपना यूनिवर्स बना सकते हैं।
‘‘अपना यूनिवर्स? क्या मतलब?’’ ज़ारा चौंक पड़ी।

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