Monday, December 18, 2017

यू आई डी - भाग 3 (अन्तिम भाग)

थोड़ी ही देर बाद प्रोफेसर ने अपने को एक अलग अनोखी दुनिया में पाया। ऐसी अनोखी दुनिया उसने सपने में भी कभी नहीं देखी थी। उसके आसपास हर तरफ रंग बिरंगी तरह तरह की धारियाँ लहरा रही थीं। उन धारियों का न तो कोई शुरूआती सिरा दिख रहा था न ही कोई अंतिम छोर।

जब फिज़ा में लहराती वे धारियां प्रोफेसर के और क़रीब आयीं तो प्रोफेसर ने उनमें कुछ और खास बात देखी।
दरअसल फिज़ा में लहराती वे धारियां अनगिनत नंबरों का पैटर्न थीं जो एक दूसरे से जुड़े हुए अंतहीन चेन बना रहे थे। और यही चेन दूर से देखने पर रंग बिरंगी धारियों जैसी दिख रही थी।

प्रोफेसर के साथ तैरती हुई दोनों लहराती हुई ज्वालाएं एक धारी के पास पहुंचीं और उसके चारों तरफ इस तरह मंडराने लगीं जैसे उसका अध्ययन कर रही हों। उस धारी की चमक बाकियों से बढ़ गयी थी।
फिर लहराती हुई ज्वाला यानि हब्बल यूनिवर्स के सम्राट ने उस धारी पर कोई कार्रवाई की जिसके नतीजे में वह धारी अपनी जगह छोड़कर प्रोफेसर के गिर्द मँडराने लगी।

‘‘मेरा शक सही निकला। गड़बड़ यूआईडी नंबर में ही हुई है। उस बच्चे का यूआईडी नंबर बदला हुआ है। और इस व्यक्ति के शरीर व पृथ्वी के किसी प्राणी के शरीर की इन्फार्मेशन से मैच नहीं कर रहा है।’’
‘‘ओह! लेकिन ये अपराध किया किसने?’’ 

‘‘वह जो भी है, इस यूआईडी नंबर में गड़बड़ करते समय अपने व्यक्तित्व का सुबूत छोड़ गया है। क्योंकि उसे हमारे ‘वर्ल्ड-लॉजिक-कर्व’ सिस्टम की पूरी जानकारी नहीं थी। वह हमारे सृजनकर्ताओं में से एक है। और अब हम उसे ऐसी सज़ा देंगे जो लोगों के लिये एक सबक होगी।’’
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सम्राट के सामने उस सृजनकर्ता का लौ रूपी शरीर इस तरह लहरा रहा था मानो डर के कारण पूरे जिस्म में कंपकंपी तारी है। 

‘‘स...सम्राट। मैं बेकुसूर हूं। मैंने कोई जुर्म नहीं किया है।’’ वह कंपकंपी भरी आवाज़ में कह रहा था।

‘‘बेवकूफ सृजनकर्ता। तुम्हें ‘वर्ल्ड-लॉजिक-कर्व’ सिस्टम के बारे में कुछ नहीं पता। वह न केवल हब्बल यूनिवर्स के समस्त प्राणियों का रिकार्ड रखता है बल्कि अपने अन्दर होने वाली तमाम गतिविधियों का भी रिकार्ड रखता है। लेकिन उस रिकार्ड को केवल हम ही देख सकते हैं। उस रिकार्ड से साफ ज़ाहिर है कि तुमने उस बच्चे के यूआईडी नंबर में बदलाव किया था। अब तुम ये बताओ कि ऐसा तुमने क्यों किया?’’ 

‘‘म..मुझे माफ कर दीजिए सम्राट। ये सब मैंने गैम्बल यूनिवर्स के सम्राट के कहने पर किया था। क्योंकि उसने मुझे अपना वज़ीर बनाने का वादा किया है।’’ 
‘‘अच्छा वो मेरा प्रतिद्वंदी। जब मैंने हब्बल यूनिवर्स को एक बिग बैंग द्वारा जन्म दिया था उसी समय उसने गैम्बल यूनिवर्स को बिग क्रंच द्वारा जन्म दिया था। वह हमेशा मुझे नुकसान पहुंचाने की सोचता रहता है। लेकिन एक बच्चे के यूआईडी नंबर में बदलाव करके वह क्या नुकसान पहुंचायेगा।’’ 

‘‘सम्राट, व..वह कह रहा था कि शुरूआत के छोटे बदलाव बाद में बहुत बड़ी घटनाओं को जन्म दे देते हैं। हो सकता है कि हब्बल यूनिवर्स पूरे का पूरा नष्ट हो जाये। और उसके बाद जो स्पेस-टाइम फ्री होगा उसमें वह अपने गैम्बल यूनिवर्स का विस्तार कर लेगा।’’   
      
‘‘उसका कहना कुछ हद तक सही है। मैं देख रहा हूं कि तुम्हारी इस करतूत के नतीजे में हब्बल यूनिवर्स में एक ब्लैक होल पैदा हो गया है जो अपने आसपास के मैटर को तेज़ी के साथ अपने अन्दर खींच रहा है। लेकिन मेरे पास इस समस्या का एक हल है।’’ 
‘‘वह क्या?’’ सम्राट उसके वज़ीर ने पूछा।

‘‘हल ये है कि इस मुजरिम को उस ब्लैक होल में डाल दिया जाये। फिर वह ब्लैक होल हब्बल यूनिवर्स के लिये निष्प्रभावी हो जायेगा।’’
सुनते ही उस सृजनकर्ता के लौ रूपी शरीर की थरथराहट और बढ़ गयी। क्योंकि उसे मालूम था कि किसी ब्लैक होल से बाहर निकलना असंभव होता है। 

‘‘म..मुझे माफ कर दीजिए सम्राट। आइंदा ऐसी गलती कभी नहीं होगी।’’ 
‘‘सॉरी। हब्बल यूनिवर्स को बचाने के लिये तुम्हें ब्लैक होल में फेंकना ज़रूरी है। मैं तुम्हारे साथ कोई ज़ुल्म नहीं कर रहा हूं बल्कि तुमने खुद अपने साथ ज़ुल्म किया है। जाओ।’’ 

वहाँ मौजूद प्रोफेसर ने देखा कि एक तेज़ चीख के साथ उस सृजनकर्ता का लौ रूपी जिस्म तेज़ी के साथ एक दिशा को रवाना हो गया था। जो शायद ब्लैक होल की ही दिशा थी। 
‘‘अब इस व्यक्ति का क्या किया जाये?’’ वज़ीर ने सम्राट से पूछा।

‘‘इसे वापस पृथ्वी पर इसकी जगह पर पहुंचा दो। और उस बच्चे को नष्ट कर दो वरना पूरा सिस्टम गड़बड़ा जायेगा।’’ 
‘‘लेकिन इसे यहाँ की बातें तो याद रहेंगी।’’ 

‘‘उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। इन बातों को ये एक सपने से ज़्यादा अहमियत नहीं देगा।’’
एक बार फिर प्रोफेसर का जिस्म फिज़ा में तैरने लगा था। पृथ्वी पर वापस लौटने के लिये।
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‘‘भाई साहब। अगर आपको कार में ही सोना था तो किनारे लगाकर सोते। बीच सड़क पर क्यों खर्राटें मार रहे हैं। पूरा जाम लगा दिया है।’’ 
प्रोफेसर ने देखा एक सज्जन गुस्से में भरे हुए कार की साइड खिड़की से हाथ डालकर उसे झिंझोड़ रहे थे।

‘‘ओह आई एम सॉरी। न जाने कैसे मुझे नींद आ गयी। शायद लाँग ड्राइविंग का असर है।’’ कहते हुए उसने कार स्टार्ट की किनारे लगाने के लिये। 
लेकिन उसे अपना दिमाग़ पूरी तरह धुंधलाया हुआ लग रहा था। और उस धुंध में दो लहराती हुई ज्वालाएं चमक रही थीं। और एक तेज़ चीख। इससे पहले कि वह कुछ देर पहले देखे गये सपने के बारे में दिमाग पर और ज़ोर डालता, मोबाइल कॉल ने उसकी तन्द्रा भंग कर दी। 

वह काल प्रोफेसर के जीजा की थी जिसमें उसने अपने पोते की मौत की खबर दी थी। प्रोफेसर एक ठंडी साँस लेकर सीट से टिक गया।
--समाप्त--
---ज़ीशान हैदर ज़ैदी (लेखक)

3 comments:

sandhya Singh said...

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सतवीर वर्मा 'बिरकाळी' said...

गुड सर जी