Sunday, May 8, 2011

आभासी सुबूत - Part 2


शहर का निर्माण कार्य आरम्भ हो गया था। 
समुन्द्र से पानी लाने के लिये पाइप लाइन बिछायी जा रही थी। इस काम में हज़ारों मज़दूर लगाये गये थे। जो आसपास के देशों के स्थानीय निवासी थे।
एक ए-सी- टेन्ट में अशोक का निवास था। बाहर हद से ज्यादा गर्मी थी। कभी कभी उसे काम की प्रगति देखने के लिये टेन्ट से बाहर निकलना पड़ता था और उस समय उसे नानी याद आ जाती थी।
अचानक एक मज़दूर तेज़ी से उसके तंबू में दाखिल हुआ। बिना इजाज़त आते देखकर अशोक ने उसे घूरा। लेकिन मज़दूर के चेहरे पर बदहवासी देखकर वह चौंक पड़ा।
‘‘साहब, नीचे से ज़हरीली गैस निकल रही है। जिसमें कई मज़दूर बेहोश हो गये हैं।’’
‘‘क्या?’’ अशोक चौंक पड़ा, ‘‘मैं देखता हूं।’’ वह तेजी से बाहर निकला। मज़दूर उसके साथ था।
जब वह घटनास्थल पर पहुंचा तो वहां बीस के लगभग मज़दूर बेहोश पड़े हुए थे। उसे गैस की महक मालूम हुई और उसने फौरन अपने चेहरे को कपड़े से ढंक लिया । कुछ ही दूर पर तेज़ सनसनाहट के साथ गैस निकल रही थी। 
‘‘सब लोग यहाँ से दूर हट जाओ।’’ उसने चीख कर कहा।
‘‘और हमारे जो साथी बेहोश हैं उनका क्या होगा?’’ पीछे से किसी ने कठोर आवाज़ में कहा। 
आवाज़ सुनकर अशोक घूमा। यह एक लंबा तगड़ा अलजीरियन था। 
अशोक ने उसे जवाब दिया, ‘‘तुम्हारे बेहोश साथियों को वहां से निकालना नामुमकिन है। हमारे पास गैस मास्क नहीं हैं और बीस लोगों को बचाने के लिये और लोगों की जान जोखिम में नहीं डाली जा सकती।’’
‘‘वो मेरे दोस्त हैं। अगर तुम्हारी कंपनी उनकी सुरक्षा नहीं कर सकती तो इतना बड़ा काम क्यों कर रहे हो।’’ वह व्यक्ति गुस्से से बोला।
‘‘इतने बड़े काम में छोटे मोटे हादसे होते रहते हैं। जाओ अपना काम करो। और मुझे अपना काम करने दो।’’ इस बार अशोक ने कठोर स्वर में कहा। अशोक के तेवर देखकर दो व्यक्तियों ने उस अलजीरियाई का हाथ पकड़ा और वहां से खींच ले गये।
अब अशोक ने बाकी लोगों को गैस से बचाव के लिये निर्देश दिये और वहां से घूम गया।
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अशोक इस समय अपने निवास स्थान पर था। उसके सामने एक अफ्रीकी मज़दूर मौजूद था और अपनी रिपोर्ट दे रहा था।
‘‘सर हमने गैस पर तो काबू पा लिया। उस होल को भर दिया जहाँ से गैस रिस रही थी। लेकिन---’’
‘‘लेकिन क्या?’’
‘‘उन बीस में से केवल दो ही जिन्दा बच पाये। गैस बहुत जहरीली थी।’’ मज़दूर ने रुक रुक कर कहा।
‘‘मुझे पहले ही अँदेशा था। इसलिए मैंने और लोगों को वहां जाने से रोक दिया था।’’
अशोक की निगरानी में चलने वाला काम एक बार फिर रफ्तार पकड़ चुका था।
लेकिन एक सुबह इस रफ्तार पर ब्रेक लग गया।
उस सुबह अशोक का नौकर जब उसे बेड टी देने केबिन के अन्दर गया तो चाय की प्याली उसके हाथ से छूट गयी।
बिस्तर पर अशोक मृत पड़ा हुआ था। किसी ने निहायत बेदर्दी से उसका गला काट डाला था।
वहां एक तहलका मच गया। हर व्यक्ति हैरान था कि आखिर प्रोजेक्ट हेड को किसने मार दिया। पुलिस अपनी तफ्तीश में जुट गयी थी।
चूंकि मामला एक मल्टीनेशनल कंपनी के अन्तर्राष्ट्रीय प्रोजेक्ट से जुड़ा हुआ था अत: तफ्तीश भी अन्तर्राष्ट्रीय पुलिस को सौंपी गयी।
इंस्पेक्टर राफेल मूल रूप से पुर्तगाली था। उसी के नेतृत्व में एक पुलिस टीम इस जाँच में जुटी हुई थी। वह अभी तक किसी खास नतीजे पर नहीं पहुंच पाया था। उसने इस प्रोजेक्ट के बारे में छानबीन करने का निश्चय किया तो उसे मालूम हुआ कि इस वीरान इलाके में शहर बसाने का प्लान एक बहुत बड़े विकसित देश का था। जो वर्तमान में इस देश का मित्र था और इसे आर्थिक मदद दे रहा था।
‘‘कहीं ऐसा तो नहीं अशोक की हत्या करके कोई इस प्रोजेक्ट को रोकना चाहता हो।’’ साथियों के साथ बैठे राफेल ने मानो अपने आप से कहा।
‘‘लेकिन कोई ऐसा क्यों करेगा। जबकि इस प्रोजेक्ट पर कार्य इस देश की सहमति से हो रहा था। और इसका पूरा खर्च दूसरा देश उठा रहा था।’’ उसके साथी ने कहा।
‘‘इस प्रोजेक्ट की कुछ बातों में पड़ोसी देश भी शामिल हैं। मसलन पानी की वह लाइन जो समुन्द्र से यहाँ तक आ रही है।’’
‘‘इसका मतलब इस हत्या में पड़ोसी देश का षडयन्त्र भी हो सकता है।’’ राफेल ने कहा।
‘‘एक वजह और भी हो सकती है।’’ दूसरा साथी जो अभी अभी वहां दाखिल हुआ था, बोल उठा।
‘‘वह क्या मि0 मारिसन?’’
‘‘कुछ दिनों पहले पाइप लाइन की खुदाई के समय ज़हरीली गैस रिसने से कई मज़दूरों की मृत्यु हो गयी थी। उनकी मृत्यु के कारण अशोक कुमार का एक मज़दूर से झगड़ा हो गया था। यह बात अभी अभी मुझे मालूम हुई है।’’
‘‘उस मज़दूर का नाम क्या था?’’ 
‘‘उसका नाम था अलबामा। और वह एक अलजीरियाई था।’’
फिर अलबामा की तलाश शुरू हुई और जल्दी ही वह मिल गया। उसे हिरासत में ले लिया गया और उससे पूछताछ शुरू हो गयी। अलबामा इससे इंकार कर रहा था। उसका यही कहना था कि उसका अशोक कुमार से उसी समय झगड़ा हुआ था जो वहीं खत्म भी हो गया था। 
लेकिन कहानी में नया मोड़ उस समय आया जब एक मशहूर इण्टरनेट साइट डाक्यूलीक्स ने हत्याकांड का खुलासा करते हुए लिखा कि एक देश जिसके अलजीरिया से अच्छे सम्बन्ध्ा हैं और जो एक विकसित देश है, नहीं चाहता कि उसके पड़ोसी देश में इस प्रकार का कोई शहर बसे।
‘‘लेकिन अशोक को मारने से क्या हासिल? प्रोजेक्ट तो रुकेगा नहीं। अब कोई और प्रोजेक्ट हेड बन जायेगा।’’ राफेल इन ही विचारों के साथ जब अपने आफिस पहुंचा तो वहां उसने एक औरत को बैठे देखा। औरत पूरी तरह ग़म की मूरत दिख रही थी। इं-राफेल ने प्रश्नात्मक दृष्टि से उसकी ओर देखा।
‘‘मैं वैशाली हूं। अशोक की पत्नी। थोड़ी देर पहले इंडिया से यहां पहुंची हूं।’’
‘‘ओह। वैशाली जी हम आपके पति के क़ातिल को ढूंढने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।’’
‘‘क्या कुछ पता चला?’’
‘‘हमने एक अलजीरियाई मज़दूर अलबामा को पकड़ा है जिसकी कुछ समय पहले अशोक से लड़ाई हुई थी। हमें यकीन है कि अशोक का हत्यारा वही है।’’
‘‘ओह!’’
इं-राफेल ने अपनी सामने रखी फाइल खोलकर उसके सामने कर दी। जिसमें अलबामा का फोटो लगा हुआ था।
‘‘यह अलबामा का फोटो है।’’ उसने वैशाली को बताया। फोटो देखते ही वैशाली आतुरता से बोली, ‘‘नहीं। ये अशोक का कातिल नहीं हो सकता।’’ 
‘‘क्यों?’’ हैरत से इं-राफेल ने पूछा। 
‘‘क्योंकि सपने में तो हुलिया दूसरा था अशोक के कातिल का।’’
‘‘कैसा सपना? कौन कातिल?’’ उलझन भरे स्वर में राफेन ने पूछा। जवाब में वैशाली ने अपने और अशोक के सपने की बात उसे बता दी। उसी समय वहां मारिसन भी पहुंच चुका था। और गौर से उसकी बातें सुन रहा था।
‘‘मैं नहीं समझता कि एक सपने पर हमें इतना यकीन करना चाहिए।’’ पूरी बात सुनने के बाद राफेल बोला, ‘‘इसको एक दु:खद संयोग से ज्यादा अहमियत हमें नहीं देनी चाहिए।’’ 
‘‘शायद मैंने इस हुलिए के व्यक्ति को यहां देखा है।’’ मारिसन कुछ सोचते हुए बोला, ‘‘वह भी मज़दूरों में शामिल है लेकिन सबसे अलग थलग रहता है और बिना किसी से बात किये अपना काम करता रहता है।’’
‘‘लेकिन बिना किसी सुबूत के मात्र एक सपने के आधार पर हम उसपर कैसे शक कर सकते हैं?’’
‘‘लेकिन पूछताछ में हर्ज ही क्या है। आप प्लीज़ उसकी जाँच करें।’’ वैशाली ने इं-राफेल पर जोर डाला।
‘‘ओ-के-। मारिसन हमें उसके पास ले चलो।’’
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5 comments:

Yogesh said...

Agle part ka intazaar rahega...

Har part shuru karne se pehle, uske pichhle parts ka link dena mat bhoola karein...

Taaki reader ko aasaani rahe...

दर्शन लाल बवेजा said...

कमाल की अभिव्यक्ति।

zeashan zaidi said...

योगेश जी,
दायें तरफ 'My Creations ' टाइटिल में 'आभासी सुबूत' पर क्लिक करें तो सारी कड़ियाँ एक साथ मिल जायेंगी.

Arvind Mishra said...

Really a gripping story!

अभिषेक मिश्र said...

देखें, कहानी इस मोड़ से क्या करवट लेती है !