Tuesday, November 10, 2009

प्लैटिनम की खोज - एपिसोड : 53

‘‘एक गिलास पानी पिला देना।’’ प्रोफेसर ने भर्रायी हुई आवाज में उससे कहा।
‘‘और मुझे भी।’’ रामसिंह का भी हलक सूखने लगा था। जंगली पानी लाने के लिए चला गया।

‘‘अब क्या होगा रामसिंह?’’ प्रोफेसर ने रामसिंह को लिपटा लिया।
‘‘अब तो तुरंत यहां से भागने का उपाय सोचो वरना हम जीवन भर मुर्गियों की कुड़ कुड़ के बीच फंस कर रह जायेगे।’’
‘‘ठीक है। फिर इस जंगली को यहां से टालो। उसके बाद हम लोग यहां से बाहर निकलने की तरकीब सोचते हैं।’’

फिर जब वह जंगली पानी देकर बाहर निकल गया तो दोनों सर जोड़कर इस समस्या पर विचार करने लगे। किन्तु काफी देर विचार करने के बाद भी उन्हें कोई हल समझ में नहीं आया।
‘‘मैंने सोचा है कि यह भी करके देख लेते हैं।’’ प्रोफेसर ने कहा।
‘‘क्या कोई तरकीब मिल गयी?’’ रामसिंह ने चौंक कर पूछा।

‘‘नहीं । बल्कि मैं मुर्गियों की रखवाली के बारे में कह रहा था। एक तजुर्बा यह भी हो जायेगा।’’
‘‘क्या मतलब?’’ रामसिंह भौंचक्का होकर उसे देखने लगा।
‘‘मतलब ये कि अब मैं मुर्गियों पर रिसर्च करूंगा। और कोशिश करूंगा कि वे अण्डे की बजाय बच्चे देने लगें।’’

‘‘किन्तु यदि वे अण्डे देती रहें तो तुम्हें क्या एतराज है?’’
‘‘क्यों देती रहें? भला ये भी कोई बात है कि पहले वे अण्डे देने में मेहनत करें और उसके बाद उसपर बैठकर बच्चे भी पैदा करें। ये तो दोहरी मेहनत हो गयी। दूसरे जानवर तो एक ही बार में निपट जाते हैं।’’

‘‘समझा। तो ये सब तुम मुर्गियों की हमदर्दी में कर रहे हो।’’ रामसिंह ठण्डी सांस लेकर बोला।
‘‘और नहीं तो क्या मुर्गों की हमदर्दी में? उन्हें तो हर हाल में कटना है। चाहे वे अण्डे से पैदा हों या डायरेक्ट पैदा हो जायें।’’
‘‘लेकिन तुम्हें ये सब करने की जरूरत क्या है?’’

‘‘तुम फिर भूल गये कि मैं एक वैज्ञानिक हूं। और वैज्ञानिक आवश्यकता नहीं देखता बल्कि अपना कार्य करता है। भला एटम बम बनाने की क्या आवश्यकता थी? लेकिन वह बनाया गया। चांद पर जाने की क्या आवश्यकता थी? लेकिन वहां जाया गया। एफिल टावर बनाने की क्या आवश्यकता थी? लेकिन वह बनाया गया। ---’’
‘‘बस बस। अब ज्यादा बोर न करो। लेकिन इतना समझ लो कि यदि तुम मुर्गियों से भिड़े तो मैं तुम्हें अकेला छोड़कर वापस चला जाऊँगा ।’’ रामसिंह झल्लाकर बोला।

उसी समय एक जंगली अन्दर प्रविष्ट हुआ।
‘‘सरदार आपकी सेवा में हाजिर होना चाहते हैं।’’ वह बोला।
‘‘ठीक है। उन्हें हाजिर कर दो।’’ प्रोफेसर ने कहा। और वह बाहर निकल गया। थोड़ी देर बाद सरदार दो तीन जंगलियों के साथ अन्दर प्रविष्ट हुआ।

2 comments:

seema gupta said...

रोचक, आगे की कड़ी का इंतजार....

regards

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

लगे रहिए।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }