Monday, August 3, 2009

प्लैटिनम की खोज - एपिसोड : 20

‘‘अच्छा, अब तुम लोग चुप हो जाओ। मेरा विचार है उस सामने की छोटी सी पहाड़ी के पीछे ही रेस्ट हाउस होना चाहिए। हमें उस पहाड़ी को पार करना होगा।’’

‘‘कितना भयानक जंगल है।’’ रामसिंह ने पहली बार माहौल पर नज़र दौड़ायी।
‘‘बस! हालत खराब होने लगी। इस जंगल में केवल मेरे जैसे साहसी आ सकते थे।’’ शमशेर सिंह ने सीना ठोंककर कहा। हालांकि वास्तविकता ये थी कि वह भी मन ही मन हनुमान चालीसा का पाठ करने लगा था।

‘‘इस जंगल में बंदर तो अवश्य होंगे।’’ रामसिंह ने कहा।
‘‘ब---बंदर? भला वे हमारा क्या बिगाड़ लेंगे।’’ शमशेर सिंह की आवाज में हल्की कंपकंपाहट आ गयी थी।

‘‘वही तो सबसे खतरनाक होते हैं। इस तरह नोचते खसोटते हैं कि सर पर एक बाल भी नहीं बचता।’’
शमशेर का हाथ तुरंत अपने सर पर चला गया, मानो वह देखना चाहता हो कि कहीं उसके सर का कोई बाल कम तो नहीं हो गया।

‘‘बन्दर हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पायेंगे।’’ इस बार प्रोफेसर बोला, ‘‘हम लोग तो रेस्ट हाउस में रहेंगे जिसकी सारी खिड़कियां दरवाजे तो बन्द होंगे। फिर बन्दरों के घुसने का मौका ही नहीं मिल पायेगा।’’

प्रोफेसर की बात सुनकर रामंसंह और शमशेर सिंह के उतरे चेहरे फिर ठीक हो गये। अब वे लोग पहाड़ी के ऊपर चल रहे थे।

चलते चलते अचानक प्रोफेसर रुककर कुछ सोचने लगा।
‘‘क्या हुआ प्रोफेसर?’’ रामसिंह और शमशेर सिंह भी रुक गये।

‘‘मैं कुछ सोच रहा हूं। मेरे विचारों में इस समय कई बातें हैं।’’ प्रोफेसर ने दार्शनिकों के अंदाज में कहा।
‘‘कौन कौन सी बातें प्रोफेसर। हमें भी बताओ।’’ रामसिंह बोला।

‘‘पहली बात तो ये कि जंगल में हमें जंगली जानवरों का सामना करना पड़ेगा। इसलिए सूटकेसों से अपनी अपनी पिस्तौलें निकाल लो, जो हमें कंपनी की ओर से मिली हैं।’’

प्रोफेसर की बात सुनकर वे लोग पिस्तौलें निकालने के लिए अपने अपने सूटकेस खोलने लगे। ये सूटकेस भी उन्हें कंपनी की ओर से मिले थे।
जब वे लोग पिस्तौल निकाल चुके तो प्रोफेसर ने आगे कहा, ‘‘दूसरा विचार मेरे मन में आया है कि क्यों न हम लोग अभी से प्लेटिनम की खोज आरम्भ कर देंं। मैंने किताबों में पढ़ा है कि अक्सर खनिज चट्‌टानों में मिलते हैं। चूंकि यहां भी चट्‌टानें हैं इसलिएयहां प्लेटिनम अवश्य होगा।’’

‘‘बात तो तुम्हारी ठीक है प्रोफेसर। मेरा भी यही विचार है।’’ शमशेर सिंह बोला।
‘‘तो ठीक है। शुरू हो जाओ। हमारे आसपास जो बिखरी हुई चट्‌टानें हैं, उनपर से हल्के पत्थरों को उठाकर देखो। कहीं न कहीं प्लेटिनम अवश्य मिलना चाहिए।’’