Monday, February 23, 2009

विज्ञान कथा - अवतार (2)

ये कुछ नौजवानों का एक ग्रुप था जो देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा था. इस ग्रुप की मीटिंग में नाजिया और राजेश भी शामिल थे. राजेश एक न्यूज़ चैनल में रिपोर्टर था, लेकिन यह किसी को नहीं मालुम था कि वह वास्तव में देश की खुफिया एजेन्सी रा का एजेंट है.
इस समय मीटिंग में सन्नाटा छाया हुआ था और इसकी वजह नाजिया कि कही हुई एक बात थी. इस चुप्पी को तोड़ते हुए राजेश ने नाजिया को मुखातिब किया, "क्या तुम्हें पूरा विश्वास है कि तुमने जो देखा वह सही है?"

"श्योर! उस साधू के झोंपडे में अन्दर कंप्यूटर मौजूद था. और उसपर एक्स देश की खुफिया एजेन्सी की वेबसाईट खुली हुई थी."

"यानी ये की दंगों के पीछे और उस साधू के भड़काने के पीछे एक्स देश का हाथ सिद्ध होता है."
"बाबा त्यागराज के शिष्यों में बहुत से उस देश के नागरिक भी शामिल हैं." एक युवक विशाल ने कहा.
"शायद बाबा त्यागराज एक्स देश का मोहरा बन गया है." राजेश ने गंभीरता से कहा.
"कुछ भी हो, लेकिन ये वास्तविकता है की बाबा त्यागराज पिछले छः महीनों से बिना कुछ खाए पिए जिंदा है. आम जनता उसके चमत्कार पर उसे भगवान् मान चुकी है. और अब बाबा के मुख से निकला हर वाक्य उनके लिए अमृत वचन है."
"कहीं ऐसा तो नहीं एक्स देश ने मनुष्य के रूप में कोई रोबोट हमारे बीच भेज दिया हो." विशाल ने कहा.
"इम्पोसिबिल! बाबा के शरीर को हर वक्त एक्सरे मशीनें अपनी निगरानी में रखती हैं. उसके शरीर में वही हाड मांस है जो हमारे शरीर में है." राजेश ने कहा.

"आख़िर यह बन्दा पैदा कहाँ से हो गया हमारे देश का मन बरबाद करने को." नाजिया ने झुंझला कर कहा.
"गुड आइडिया." राजेश ने चुटकी बजाकर कहा, "हमें सबसे पहले यही जानकारी करनी चाहिए कि यह आया कहाँ से है? उसकी बैक्ग्राउन्ड क्या है? उसकी हिस्ट्री खंगालकर हम किसी नतीजे पर पहुँच सकते हैं."
बाबा त्यागराज की हिस्ट्री की छानबीन करने पर राजेश इत्यादि के सामने एक नई बात सामने आई. किसी को पता नहीं था की बाबा त्यागराज का बचपन कहाँ बीता. वह कहाँ पैदा हुआ, किसके घर में पैदा हुआ. हाँ उसके कुछ करीबी शिष्यों ने बताया,
"बाबा कोई आम मनुष्य नहीं है. उनका तो अवतार हुआ है."
"अच्छा! वह कैसे?" राजेश ने उत्सुकता से पूछा. वह इस समय बाबा के एक बहुत ही बड़े भक्त के रूप में मौजूद था.
"बाबा जी हिमालय पर्वत की एक गुफा में प्रकट हुए हैं. और जब से प्रकट हुए हैं तब से ऐसे ही हैं. बाबा जी को न भोजन की आवश्यकता है, न पानी की."
"भय्या, हम भी वह गुफा देखना चाहते हैं, जहाँ बाबा ने पहली बार दर्शन दिया था." राजेश ने उससे कहा.
"क्यों? बाबा के शिष्य ने उसे शंकाग्रस्त दृष्टि से देखा."
"अरे भाई वह गुफा तो बाबा जी की जन्मभूमि हुई न. वहां पर एक भव्य मन्दिर बनना चाहिए. और मन्दिर बनाने का यह पुण्य काम मैं स्वयं अपने हाथों से करूंगा." राजेश की योजना सुनकर शिष्य पूरे जोश में आ गया.
"यदि ऐसा है तो मैं स्वयं आपको वहां तक लेकर जाऊँगा. इस पुण्य कार्य में मैं भी भागीदार बनूँगा."
फ़िर जल्दी ही राजेश अपनी छोटी सी टीम के साथ हिमालय की गुफाओं के बीच उस स्थान पर पहुँच गया जहाँ बाबा के भक्तों के अनुसार वह बाबा का प्रकट स्थान था.
राजेश ने दो पलों तक कुछ सोचा, फ़िर गुफा के अन्दर जाने के लिए कदम बढ़ा दिए. धीरे धीरे नाजिया और दूसरे लोग भी अन्दर जाने लगे.

भीतर गुफा पूरी तरह वीरान पड़ी थी. राजेश गुफा में चारों तरफ़ बारीकी से निरीक्षण करने लगा. एकाएक उसने गुफा के एक कोने में कुछ पड़ा देखा और झुककर उसे उठा लिया.
"क्या चीज़ है?" नाजिया ने पूछा.
"कंप्यूटर सी.डी. का एक टुकडा." राजेश ने जवाब दिया.
"कंप्यूटर सी.डी. तो अब एक आम चीज़ हो गई है. तुम उस टुकड़े को इतनी अहमियत क्यों दे रहे हो?" राजेश के एक साथी ने पूछा.
"अहमियत ऐसे की यह टुकडा हमें ऐसी जगह से मिला है, जहाँ दूर दूर तक कंप्यूटर का नामोनिशान नहीं. अब हमारे डिपार्टमेंट के कंप्यूटर इंजिनियर बताएँगे कि इसके अन्दर महत्वपूर्ण क्या है."
"डिपार्टमेंट! क्या मतलब? भला तुम्हारे ऑफिस में कंप्यूटर इंजिनियर का क्या काम?" नाजिया ने चौंक कर पूछा.
राजेश को अपनी भूल का एहसास हुआ. रा के डिपार्टमेंट में तो कंप्यूटर इंजिनियर हो सकते हैं लेकिन एक मामूली पत्रकार के ऑफिस में ऐसा कोई डिपार्टमेंट नहीं होता.
"ओह! दरअसल मैं इसमें भारत सरकार की मदद लेना चाहता हूँ. लेकिन इसके पहले हमें कुछ और सबूत ढूँढने होंगे."
फ़िर वे लोग उस गुफा की काफ़ी देर तलाशी लेते रहे. लेकिन सी.डी. के उस टुकड़े के अलावा वहां और कुछ नहीं मिला.
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5 comments:

seema gupta said...

अच्छी शुरुआत है आगे का इन्तजार रहेगा..

Regards

Udan Tashtari said...

बढ़िया है.

Reema said...

अगली पोस्ट में पूरी ही टंकित करियेगा. इंतज़ार मुश्किल.

इष्ट देव सांकृत्यायन said...

आपका प्रयास अच्छा है. एक सुझाव है, वह यहाँ कि सामाजिक, आर्थिक, वैज्ञानिक एवं प्रशासनिक तथ्यों की छानबीन ज़रूर कर लें और पूरी तरह तसदीक करने के बाद ही लिखें. आपकी जानकारी के लिए कुछ बातें बताना चाहूंगा. अगर आप आज के अखबार के दफ्तर की बात कर रहे हैं तो वहां कई तरह के कम्प्यूटर इंजीनियर होते है. वे सी डी तो क्या कम्प्यूटर का नष्ट हो चुका हार्ड ड्राइव भी उधाड डालते हैं. दूसरी यहाँ कि कोई भी खुफिया एजेंसी मीडिया से जुडे लोगों को आम तौर पर अपना एजेंट नहीं बनाती. अगर आप ऐसा दिखा रहे हैं तो इसकी तार्किकता पहले साबित कर दें.

zeashan zaidi said...

इष्ट देव जी, आपने पॉइंट तो ठीक उठाये हैं. लेकिन यहाँ बात सी.डी. की नहीं, उसके टुकड़े की हो रही है, जिसकी अनेलिसिस एक हाई टेक लैब में ही हो सकती है.
दूसरी बात ये की खुफिया एजेंसी मीडिया पर्सन को एजेंट नहीं बनाती, लेकिन एक एजेंट अपना काम निकालने के लिए मीडिया पर्सन का चोला ओढ़ सकता है.