Tuesday, January 27, 2009

ताबूत - एपिसोड 51

"तूने मेरे मित्र को क्यों मारा!" चीन्तिलाल को भी क्रोध आ गया और उसने एक थप्पड़ डॉक्टर के सीने पर जड़ दिया. डॉक्टर के लिए चीन्तिलाल का थप्पड़ किसी बुलडोज़र से कम नहीं था अतः उसकी पीछे की ओर रेस हो गई. और उसको रोकने के लिए शेष पागलों को अपना सहयोग देना पड़ा.
"अरे मुझे उन लोगों ने मारा. एक तो मेरा बिल नहीं दिया ऊपर से मारा भी." डॉक्टर भों भों करके पूरे वोलयूम में रूदन करने लगा. डॉक्टर को रोता देखकर कई पागलों को हमदर्दी का भूत सवार हो गया और वे मिलकर चोटीराज तथा चीन्तिलाल से मोर्चा लेने के लिए तैयार हो गए और उन्हें घूरते हुए आगे बढ़ने लगे.
"ये लोग तो हमसे लड़ने आ रहे हैं. क्या किया जाए?" चोटीराज ने पूछा.
"करना क्या है. इन्हें बता दो कि हम यल के सींगों के पुजारी हैं." चीन्तिलाल ने उनको घूरते हुए कहा.
फ़िर कुछ ही देर में वहां अच्छा खासा हंगामा खड़ा हो गया. कवि और चित्रकार को छोड़कर सारे पागल दोनों से लिपट पड़े थे. फ़िर वहां अच्छा खासा हंगामा बरपा हो गया.

"वाह वाह क्या सीन है. ऐसा दृश्य तो यादगार रहेगा. मैं अभी इसको उतारता हूँ." चित्रकार ने तुंरत कैनवास पर अपनी चित्रकारी शुरू कर दी.
"अरे मुझे तो इस लड़ाई पर कई शेर एक साथ याद आ रहे हैं. लो सुनो तुम लोग भी क्या याद करोगे." फ़िर वह हलक फाड़ कर अपने शेर सुनाने लगा.
लड़ाई ने अब काफी ज़ोर पकड़ लिया था. चीन्तिलाल और चोटीराज पागलों को बार बार झटक कर अपने से अलग करते थे किंतु वे फ़िर लिपट जाते थे. उधर चित्रकार जी लगातार चित्र बना रहे थे. किंतु उन्हें अपने इस काम में काफी परेशानी हो रही थी. क्योंकि सीन बार बार बदल जाता था. कवि जी शेर पर शेर दागे जा रहे थे.
फ़िर अचानक बाहर का दरवाजा खुला और तीन चार व्यक्ति अन्दर घुस आए. उन लोगों ने चोटीराज और चीन्तिलाल को पागलों से अलग किया और उन्हें बाहर खींच ले गए. उन्होंने दरवाज़ा बाहर से बंद कर दिया.

कवि जे ने रोते हुए दोनों की विदाई पर शेर पढ़ा. चित्रकार भी गुमसुम हो गया. क्योंकि उसका पोर्ट्रेट अधुरा रह गया था.
उधर उन व्यक्तियों ने चोटीराज और चीन्तिलाल को जीप में बिठाया और चल पड़े.
"ये लोग हमें कहाँ ले जा रहे हैं?" चीन्तिलाल ने पूछा.
"जहाँ भी ले जा रहे हैं चले चलो. क्योंकि इन्होंने हमें उन दुष्ट व्यक्तियों से बचाया है."
उन्हें ले जाने वालों में से एक दूसरे से पूछ रहा था, "बॉस, आपने इन पागलों को क्यों छुड़ाया है?"
"ये पागल मेरे काम के हैं. मैं बहुत देर से खिड़की से इनकी लड़ाई देख रहा था. इनमें अद्भुत शक्ति है. हमारे लिए ये पूरी तरह उपयुक्त हैं." बॉस ने जवाब दिया.
कुछ दूर चलने के बाद जीप एक बड़ी इमारत के सामने जाकर रुकी.
वे लोग जीप से उतर पड़े और अन्दर जाने लगे. प्राचीन युगवासी भी उनके साथ थे.
"हमें बहुत जोरों की भूख लगी है. क्या यहाँ भोजन मिलेगा?" चीन्तिलाल ने उनसे पूछा जिसे उन्होंने केवल एक पागल की बड़बड़ाहट समझा.
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