Thursday, December 4, 2008

ताबूत - एपिसोड 20

"उई मार डाला." शमशेर सिंह ज़ोर से चीखा और धप्प से पीछे की ओर गिरा. प्रोफ़ेसर और रामसिंह दौड़ कर उसके पास आये.
"क्या हुआ?" प्रोफ़ेसर ने पूछा.
शमशेर सिंह अब उठ बैठा था. उसने कांपते हुए कहा, "वह चूहा ज़रूर पिछले जन्म में कोई बदमाश था. मैं तो सोच भी नही सकता था कि वह मेरे ऊपर हमला कर देगा. मेरा खंजर कहाँ गया, मैं अभी जाकर उसे सबक सिखाता हूँ."
फ़िर प्रोफ़ेसर और रामसिंह ने बड़ी मुश्किल से उसकी मोटी कमर थामकर उसे रोका. वे लोग फिर आकर अपने स्थान पर बैठ गए. फिर रामसिंह ने कहा, "प्रोफ़ेसर, हम लोगों ने तो तुम्हें बता दिया कि खजाने का अपने हिस्सों का क्या क्या करेंगे. किंतु तुमने नहीं बताया. अब तुम बताओ."
"भाई मुझे तो एक ही शौक है. नए नए वैज्ञानिक प्रयोग करने का. उदाहरण के लिए मेरी दाढी बहुत तेज़ी से बढती है और मैं शेव बनाते बनाते परेशान रहता हूँ. इसलिए खजाना मिलने पर मैं एक ऐसी शेविंग क्रीम बनाने की सोच रहा हूँ जो चेहरे पर लगाने पर वहां के बाल पूरी तरह साफ कर देगी. और उस जगह पर फिर कभी बाल नहीं निकलेगा."
"और अगर वह शेविंग क्रीम गलती से सर में लग गई तो?" शमशेर सिंह ने पूछा.
"ओह, ये तो मैंने सोचा ही नही था. आइडिया," प्रोफ़ेसर ने उछल कर कहा, "क्यों न ऐसा तेल बनाया जाए जो गंजों के बाल उगा दे. क्योंकि गंजे इस कारण काफ़ी चिंतित रहते हैं."
"विचार अच्छा है. उस तेल की बहुत बिक्री होगी. " रामसिंह ने कहा, "जब तुम उस तेल का आविष्कार कर लोगे तो मैं उसे बनाने की फैक्ट्री खोल लूँगा. हम तुम मिलकर काफी तरक्की करेंगे."
"उस फैक्ट्री में मैं क्या करूंगा?" शमशेर सिंह ने पूछा.
"तुम्हें तेल भरी हुई शीशियों पर 'बालदार कोयला तेल' का लेबल लगाने का काम दे दिया जाएगा. मेरा ख्याल है तुम यह काम बहुत अच्छी तरह कर लोगे." रामसिंह बोला.
"इससे अच्छी तरह मैं यह काम करूंगा कि एक हौज़ में सारी शीशियाँ खाली करके तुम्हें उसमें डुबो दूँगा. और जब तुम वनमानुष बनकर बाहर निकलोगे तो बहुत अच्छे लगोगे." शमशेर सिंह ने क्रोधित होकर कहा.
"नाराज़ क्यों होने लगे मेरे प्यारे दोस्त." रामसिंह ने प्रेम से उसका सर हिलाया, "टी.वी. पर हमारे तेल का जो विज्ञापन दिया जाएगा, उसकी माडलिंग तो तुम्हें ही करनी है."
"क्या वास्तव में तुम मुझे इतना सुंदर समझते हो कि मैं विज्ञापन में मॉडल का रोल कर सकता हूँ?" शमशेर सिंह ने खुश होकर कहा.
"अरे तुम तो एलिजाबेथ टेलर से भी अधिक सुंदर हो." रामसिंह ने शमशेर सिंह की ठोडी में हाथ लगाकर उसे ऊंचा कर दिया.
"एलिजाबेथ टेलर नाम तो औरतों का मालूम हो रहा है. क्या तुमने किसी औरत से मेरी तुलना की है?" शमशेर सिंह ने शंकाग्रस्त होकर रामसिंह को देखा.
"अरे नहीं. टेलर का मतलब तो दर्जी होता है. और कोई औरत दर्जी कैसे हो सकती है? वह तो दर्जाइन होगी."
"अब तुम लोग अपनी अपनी बकवासें बंद करो और आगे बढ़ने का इरादा करो." प्रोफ़ेसर ने उठते हुए कहा.
शमशेर सिंह और रामसिंह भी उठ खड़े हुए. अचानक उस कमरे में हलकी रौशनी फैल गई.
"अरे वह सामने देखो, वह क्या है?" शमशेर सिंह ने एक कोने की ओर संकेत किया वे लोग उधर देखने लगे. वहां पर रौशनी के दो गोले पास पास चमक रहे थे.

2 comments:

seema gupta said...

और अगर वह शेविंग क्रीम गलती से सर में लग गई तो?"
"ha ha ha well asked question, presence of mind.... "

regards

Zakir Ali 'Rajneesh' said...

दुबारा ताबूत पर आना देख कर अच्‍छा लगा। वाकई लौट के बूद्धू घर को आए। पर एक दुख इस बात का जरूर है कि वे बीच रास्‍ते से ही लौट आए।