Monday, September 22, 2008

ताबूत - एपिसोड 3

"हाँ. क्योंकि यह किताब भी उतनी ही पुरानी है जितनी पुरानी वह सभ्यता थी. अतः मुझे पूरा विश्वास है कि इसमें बना नक्शा उसी खजाने का नक्शा है."

"तो अब क्या विचार है?" राम सिंह ने पूछा.

"यह तो तुम ही लोग बताओगे." प्रोफ़ेसर ने कहा.
"मेरा ख्याल है कि हमें खजाना खोजने की कोशिश करनी चाहिए. हो सकता है कि वह हमारे ही भाग्य में लिखा हो." रामसिंह ने कहा.

"तो फिर ठीक है. तुम लोग असम चलने की तैयारी करो. मैं भी घर जाकर तैयारी करता हूँ. फिर कल परसों तक हम लोग प्रस्थान करेंगे." प्रोफ़ेसर ने कहा.

"ओ.के. प्रोफ़ेसर. हम लोग कल रात की ट्रेन से निकल चलेंगे. क्योंकि अब खजाना मेरी नज़रों के सामने नाचने लगा है. अतः अब हमें बिल्कुल देर नही करनी चाहिए." शमशेर सिंह बोला.
"ठीक है. लेकिन इस बात का ध्यान रखना कि ये बात हमारे अलावा और किसी के कान में नहीं पहुंचनी चाहिए. वरना वह हमारे पीछे लग जाएगा. और जैसे ही हम खजाना खोजकर निकलेंगे वह हमारी गर्दन दबाकर खजाना समेटकर रफूचक्कर हो जाएगा."
"तुम फिक्र मत करो प्रोफ़ेसर. यह बात हमारे कानों को भी न मालुम होगी." दोनों ने एक साथ उसे भरोसा दिलाया

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इसके दो दिन बाद वे लोग गौहाटी के रेलवे प्लेटफोर्म पर खड़े थे. इस समय रात के बारह बज रहे थे.

"क्या ख्याल है? मिकिर पहाडियों तक बस से चलें या किसी और सवारी से?" प्रोफ़ेसर ने पूछा.
"यार अभी सुबह तक तो यहीं रहो. इस समय तो रास्ता काफी सुनसान होगा." शमशेर सिंह ने राय दी.

"वह जगह तो दिन में भी सुनसान रहती है. जहाँ हम लोग जा रहे हैं. क्योंकि वहां केवल खंडहर और जंगल हैं." रामसिंह ने फ़ौरन उसकी बात काटी.
"फिर तो वहां भूतों का भी डेरा हो सकता है." शमशेर सिंह ने आशंका प्रकट की.

"बकवास. मैं भूतों पर विश्वास नही करता. मेरा विचार है कि हम लोगों को इसी समय प्रस्थान कर देना चाहिए. क्योंकि खजाना ढूँढने में बहुत दिन लग सकते हैं. अतः बेकार में समय नष्ट नही करना चाहिए." देवीसिंह उर्फ़ प्रोफ़ेसर देव ने कहा.

फिर यही तै पाया गया कि वे लोग उसी समय बस द्वारा मिकिर पहाडियों के लिए प्रस्थान कर जाएँ. कुछ ही देर में उन्हें बस मिल गई और वे उसमें बैठ गए. इस समय बस में लगभग तीस पैंतीस लोग बैठे थे. अधिकतर तो ऊंघ रहे थे. ये लोग भी बैठकर ऊंघने का कार्य करने लगे. बस अपनी रफ़्तार से यात्रा पूरी करने लगी.

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3 comments:

Udan Tashtari said...

हम भी ऊंघ लेते हैं..आप तब तक आगे की कथा लाईये.

seema gupta said...

"read it, and again anxious to knwo further.... if that map is of treasure or may be some mystry is waiting for them... have to wait"

Regards

Zakir Ali 'Rajneesh' said...

रोचकता का भरपूर पुट है कहानी में। बधाई।