‘‘क्या जहाँपनाह पागल हो गये हैं?’’ एक बॉडी गार्ड के दिल में ख्याल उभरा और दिल में ही दब कर रहा गया क्योंकि अगर ज़बान पर आ जाता तो खुद उसे ज़मीन में दबा दिया जाता।
सुनो सम्राट ने उसी को मुखातिब किया और उस बेचारे का हार्ट फेल होते होते बचा, ‘कहीं सम्राट ने उसके दिल की बात तो नहीं सुन ली?’
‘‘मैं देखना चाहता हूं कि उस काईडोर पर क्या बीत रही है।’’
‘‘क...कौन सी काईडोर मी लार्ड?’’ उस बॉडी गार्ड ने सर झुकाकर पूछा।
‘‘हाँ। तुझे उसके बारे में क्या पता। मैं मंदोरा से पूछता हूं।’’ वह मंदोरा से सम्पर्क करने लगा।
ये बात ज़्यादातर लोगों से राज़ में रखी गयी थी राजकुमार महोदय सूरैन की राजकुमारी के धोखे में एक काईडोर से शादी कर बैठे थे।
फिर मंदोरा से सम्पर्क हुआ और मंदोरा ने फौरन काईडोर के साथ होने वाली तमाम कार्रवाईयों की थ्री डी वीडियो फिज़ा में भेज दिया। और अब सम्राट उसे इस तरह देख रहा था मानो वह तमाम घटनाएं उसके सामने हो रही हैं।
उस कुएं में मौजूद काईडोर अपने जिस्म से चिमटी च्यूंटियों को नोच नोच कर फेंक रही थी और बाआवाज़ बुलन्द हाबू की शान में गुस्ताखियां कर रही थी।
एक वफादर बॉडी गार्डस से ये बर्दाश्त नहीं हुआ। उसने अपनी म्यान सी तलवार खींची और और उस काईडोर की गर्दन उड़ाने के इरादे से भरपूर वार किया।
उस थ्री डी इमेज का तो कुछ नहीं बिगड़ा लेकिन सम्राट की नाक की नोक उड़ते उड़ते बची।
‘‘क्या कर रहा है बेवकूफ!’’
सम्राट दहाड़ा।
‘‘म...माफी सम्राट। ये तो इमेज है। मैं असली समझ बैठा था। लेकिन ये आपकी शान में गुस्ताखियाँ कर रही है।’’ वह बॉडीगार्ड मरी मरी आवाज़ में बोला।
‘‘मुझे इसकी गुस्ताखियां सुनने में मज़ा आ रहा है।’’ सम्राट कुटिल मुस्कुराहट बिखेरते हुए बोला।
‘‘सम्राट आप खबीस हैं बेवकूफ हैं पाजी हैं।’’ वह बॉडीगार्ड
बोल उठा और सम्राट का मुंह लाल हो गया।
‘‘इस कमबख्त को ले जाकर आग में झोंक दो।’’ उसने बाकियों को हुक्म दिया और उन्होंने उसे उठाकर टाँग लिया।
‘‘स...सम्राट मुझे माफ कर दीजिए। लेकिन मुझसे क्या गलती हो गयी?’’ उस बॉडीगार्ड
को काटो तो खून नहीं। मिनमिनाती आवाज़ में इतना ही पूछ पाया।
‘‘तूने मुझे गालियां क्यां दीं? क्या तू पगला गया है?’’ हाबू दहाड़ा।
‘‘माफी चाहता हूं हुज़ूर।’’ टंगा हुआ बॉडी गार्ड मरियल आवाज़ में बोला, ‘‘लेकिन अभी आप ही ने तो बोला कि आपको गुस्ताखियां सुनने में मज़ा आता है।’’
सम्राट ने एक छप्पर फाड़ कहकहा लगाया और कहने लगा, ‘‘मुझे बस इस हर्राफा की गुस्ताखियां इस वक्त सुनने में मज़ा आ रहा है तेरी नहीं। ले जाओ और झोंक दो इसे आग में।’’
फिर वह बेचारा चीखता चिल्लाता रह गया और दो तीन बॉडी गार्डस उसे टाँगे हुए वहाँ से निकल गये।
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ज़ारा उस सुरंग नुमा रास्ते में जैसे ही दाखिल हुई एक तोता उड़ता हुआ आया और उसके कंधे पर बैठ गया।
ज़ारा ने चौंक कर देखा। ये तो उसी का तोता गिल्लू था जिसे बहुत पहले शीले ने उसकी बर्थडे पर गिफ्ट किया था।
‘‘अरे! तू किधर से आ गया? तुझे तो मैं पिंजरे में बन्द करके आयी थीं।’’ वह पूछने लगी।
‘‘और साथ में उस हर्राफा को भी जिसने मेरा जीना हराम कर दिया है। अरे भेजा सुलगाकर राख कर दिया। अब तो राख भी नहीं बची है।’’ तोता ठंडी साँस लेकर बोला।
‘‘मुझे बहुत पहले ये काम कर लेता चाहिए था। उस तोती के आने से तू बिल्कुल शांत हो गया है।’’
‘‘ये तूफान के आने से पहले की शांति है। आप देख लेना एक दिन सूरैन पर इतना बड़ा तूफान आयेगा जिसमें वह कमबख्त तोती की बच्ची की धज्जियां उड़ जायेंगी।’’
तोता दाँत पीसकर बोला।
‘‘च...च एक नन्ही सी जान के लिये तुम इतना बड़ा कारनामा करोगे। लेकिन इतना बड़ा तूफान तुम पैदा क्ैसे करोगे?’’
‘‘उसके लिये मैं अपने पेट में बनने वाली गैस को धीरे धीरे गुब्बारों
में भर रहा हूं। और एक दिन सारे गुब्बारे एक साथ फोड़ दूंगा।’’ तोता गर्दन अकड़ाकर बोला।
‘‘अब मुझे यकीन हो गया कि सूरैन पर तूफान आकर रहेगा।’’ ज़ारा भराई आवाज़ में बोली।
‘‘लेकिन तुम कहाँ जा रही हो बीबी? सुसराल जाकर हम मायके वालों को भूल ही गयीं। आज मुझे खुद ही ज़हमत करके आना पड़ा।’’
‘‘मैं फिलहाल जा रही हूं आपने बच्चे से मिलने।’’ ज़ारा ने बताया।
‘‘क्या कहा?’’ तोता चौंक कर कई कदम पीछे हट गया।
‘‘क्यों तुम क्यों चौंक रहे हो?’’
‘‘तुम्हारे यहाँ विलादत हुई और तुमने मुझे खबर भी न की।’’
‘‘भला तुम्हें खबर क्यों करती?’’
‘‘इसलिए ताकि मैं उसकी बलायें लेता। उसे बुरी नज़रों से बचाने के ताबीज़ पहनाता। उसके ऊपर मिरचों का धुआं देता बलाओं से बचाने के लिये। और फिर तगड़ा सा नेग लेता।’’
‘‘बेफिक्र रहो। तुम्हें ये सब करने का मौका मिलेगा।’’
ज़ारा हंसकर बोली, ‘‘क्योंकि अभी मेरे बच्चे की विलादत हुई कहाँ है।’’
तोता इस तरह हवा में लहराया मानो उसका सर चकरा गया है।
‘‘क्या हुआ?’’ ज़ारा पूछने लगी।
‘‘बच्चे का जन्म अभी हुआ नहीं है। और तुम उससे मिलने जा रही हो। ये कैसी पहले है?’’ तोता उलझकर बोला।
‘‘इस पहेली को हल करो गिल्लू मियाँ। तुम्हारा तो दावा है कि तुम्हारे पास पूरे यूनिवर्स का ज्ञान है।’’
‘‘मैं अपना दावा वापस लेता हूं।’’ तोता गिड़गिड़ाया।
‘‘तो फिर सुनो। मेरा बच्चा फिलहाल एक आर्टिफिशल
गर्भ में पल रहा हे। और अभी मैं वहीं जा रही हूं।’’
‘‘ओह!’’ तोते ने एक गहरी साँस ली और दूसरी गहरी साँस लेने से पहले वे उस स्पॉट पर पहुंच चुके थे जहाँ वह गैलरी आकर खत्म होती थी जिसपर अभी तक वे लोग चल रहे थे।
सामने किसी खास धातु का बना हुआ निहायत मज़बूत दरवाज़ा दिख रहा था जो फिलहाल बन्द था।
‘‘दरवाज़ा खोलो।’’ ज़ारा ने हुक्म दिया और वह दरवाज़ा धीरे धीरे खुलने लगा।
फिर तोते ने भी देखा सामने मौजूद गोलाकर चैम्बर में बीचोंबीच एक गोले जैसी ही रचना नज़र आ रही थी, जिसके अन्दर एक के बाद एक कई पारदर्शी परतें मौजूद थीं किसी प्याज़ की परतों की तरह। अलग अलग रंगों की।
और सबसे अन्दर की परत में यानि सबसे भीतरी गोले में एक बच्चा नज़र आ रहा था। किसी निहायत आरामदायक सिंहासन नुमा बेड पर विराजमान।
ज़ारा ने उसकी बलाएं लीं और अपना कदम आगे बढ़ाया। लेकिन उसी वक्त उस गोले से कई रंग बिरंगी किरणें निकलकर उसकी ओर बढ़ीं और उसके साथ साथ वह तोता भी उन किरणों से घिर गया।
फिर तोते की एक दिलखराश चीख सुनाई दी और ज़ारा ने घूमकर देखा।
वह तोता धू धू करके जल रहा था।
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दो सेंकंड भी पूरे नहीं हो पाये थे उस तोते को राख में बदलते हुए।
ज़ारा हाथ मलते हुए अफसोस कर रही थी। उस तोते को बहुत पहले शीले ने गिफ्ट किया था और उसे मालूम भी नहीं हुआ कि कब वह उससे एक फैमिली मेम्बर की तरह मोहब्बत करने लगी थी। आज जब वह जलकर खत्म हो गया तो उसे इस बात का एहसास हुआ कि वह उसके दिल के कितना करीब हो चुका था।
उसी वक्त हल्की सी क्लिक की आवाज़ ने उसका ध्यान दूसरी तरफ मोड़ दिया और उसने सर घुमाकर देखा तो उस गोलाकार कमरे की एक साइड में शीले की इमेज उभर रही थी। उसने देखा शीले की वह इमेज हवा में हाथ बांधे हुए उसकी ओर मुस्कुरा कर देख रही है।
‘‘इसे यहाँ लाकर मारने की क्या ज़रूरत थी?’’ ज़ारा ने उसे देखते ही सवाल किया।
‘‘क्योंकि मैं नहीं चाहता कि मेरे बच्चे पर उसके जन्म से पहले हम दोनों के अलावा किसी और की नज़र पड़े।’’ शीले उसी तरह हंसकर बोला।
‘‘तुम सनक गये हो क्या?’’ ज़ारा ने उसे घूरा, ‘‘तो उसके लिये इसे मारने की क्या ज़रूरत थी? बाहर ही रोक दिया होता न।’’
‘‘ज़ारा, इसे मैंने नहीं मारा है। और न ही वह हक़ीक़त है जो तुम समझ रही हो।’’ इस बार शीले गंभीर होकर बोला और ज़ारा चौंक कर उसकी शक्ल देखने लगी।
‘‘क्या मतलब?’’
‘‘अगर ये तोता मरा है तो उस सिक्योरिटी सिस्टम की वजह से जो हमारे बच्चे की हिफाज़त के लिये ही खास तौर से तैयार किया गया है।’’
‘‘लेकिन हमारे पालतू तोते से बच्चे को क्या खतरा पैदा हो गया भला?’’ ज़ारा ने हैरत में पड़कर सवाल किया।
‘‘क्योंकि वह हमारा पालतू तोता था ही नहीं।’’ शीले फिर से मुस्कुरा उठा।
‘‘क्या मतलब?’’ ज़ारा उछल पड़ी।
इसबार शीले निहायत गंभीर होकर बोला, ‘‘ज़ारा ये दूसरे यूनिवर्स का एक निहायत खतरनाक जीव था जो उस रास्ते से दाखिल हुआ था जो लोवर लेवेल की डाईमेंशन्स में बदलाव की वजह से हमारे स्पेस टाईम में बन चुके हैं। अगर हमारी सुरक्षा मशीनों से ज़रा भी चूक हो जाती तो हम अपने बच्चे को हमेशा के लिये खो बैठते।’’
‘‘ओह!’’ ज़ारा ने एक गहरी साँस ली। और अपने बच्चे की ओर देखने लगी जो सामने मौजूद शायद निहायत आरामदायक जगह में परवरिश पा रहा था। वह जगह जो शायद माँ के पेट से भी ज़्यादा आरामदायक थी।
‘‘काश कि मैं इसे अपने पेट में महसूस कर सकती।’’ वह अपने पेट पर हाथ फेरती हुई बोली।
‘‘फिलहाल ये मुमकिन नहीं। लेकिन एक महीने बाद तुम इसे अपनी गोद में ले सकोगी। इसके मुकम्मल होने में लगभग इतना ही वक्त बचा है।’’
‘‘अरे। वक्त इतनी जल्दी गुज़र गया, पता ही नहीं चला।’’ ज़ारा चौंक कर बोली।
‘‘एक महीने बाद इसे बाहर निकालने का बटन तुम खुद अपने हाथों से दबाओगी। और फिर ये उस मशीनी गर्भ से निकलकर तुम्हारी गोद में पहुंच जायेगा।’’
शीले की इस खबर ने उसके अन्दर अजीब सी खुशी का संचार कर दिया।
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काफी कोशिशों के बाद वह काईडोर अपने जिस्म से चिमटी च्यूंटियों को अलग करने में कामयाब हो पायी थी। लेकिन इसके बाद भी उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि आगे क्या कदम उठाना चाहिए। उस कुएं में दो कदम उठाने के बाद तीसरे के लिये जगह ही नहीं बचती थी। और इस उधम चौकड़ी के बाद थकान उसपर हावी होने लगी थी।
आँखें आधी खुली आधी बन्द हो चुकी थीं। लेकिन सोने का कहीं ठिकाना नहीं था। क्योंकि वह च्यूंटियाँ जो उसके जिस्म से अलग हो चुकी थीं अभी भी उस सूखे कुएं की तलहटी में रेंग रही थीं।
फिर अचानक अधखुली आँखों के साथ उसे कुछ राहत का एहसास हुआ और उसने चौंक कर आँखें पूरी खोल दीं।
‘‘ये ठंडी हवा का झोंका किधर से आ रहा है?’’ उसने हैरत से देखा। वह कुआं धीरे धीरे चौकोर रूप लेता जा रहा था। और साथ ही वहां मौजूद च्यूंटियां बड़ा आकार लेते हुए खुशबूदार फूलों में बदलती जा रही थीं।
काईडोर समझ गयी कि हाबू ने बाकोल के वासियों के मेकअप करने की खूबी पूरी तरह मैकेनिकल कर दी है। और अब छोटे जीवों पर भी ये तकनीक आज़मायी जाने लगी है। लेकिन उन खतरनाक आदमखोर च्यूंटियों को फूलों में बदलने का मतलब?
‘‘क्या हाबू को उस पर रहम आ गया है?’’ एक पल को उसके दिमाग में ख्याल उभरा लेकिन ऐसी उम्मीद पालना खुश्क रेगिस्तान
में पानी का आभास करने से ज़्यादा अहमियत नहीं रखता था। लेकिन उन आँखों को क्या करती जो उस खुश्क कुएं को एक खूबसूरत सजे हुए कमरे में बदलता देख रही थीं।
उस कुएं में पड़े हुए सूखे पत्ते एक दूसरे से जुड़ते हुए गद्देदार सोफों में बदलते जा रहे थे। और फिर वहाँ बीचोंबीच निहायत नर्म बिस्तर भी तैयार हो गया, जो उस वक्त काईडोर की सबसे बड़ी ज़रूरत था।
उसने आव देखा न ताव और उस बिस्तर पर छलांग लगा दी।
लेकिन इससे पहले कि वह अंटा गफील हो जाती, वहाँ उसी ऑपरेटर की आवाज़ गूंजी, ‘‘तकलीफ के लिये माफी, लेकिन अभी तुमको थोड़ी देर जागते रहना होगा।’’
‘‘क्यों? क्या हाबू मुझे लेने आ रहा है?’’ इठलाकर काईडोर ने पूछा। इतनी तकलीफों को झेलने के बाद अब वह काफी हद तक फ्री हो गयी थी। और हाबू का डर न जाने कहां गुम हो गया था।
‘‘नहीं। वह तुम्हारे लिये रात का खाना भिजवा रहा है।’’ ऑपरेटर ने जवाब दिया और अब काईडोर को वक्त का एहसास हुआ।
उस कुंए में तो रात दिन का एहसास ही मिट गया था।
‘‘हाँ। नींद के साथ साथ भूख भी ज़ोरों की लग रही है। खाना खाकर ही सोती हूं।’’
लेकिन फिर जो खाने का तसव्वुर उसके मन में आया उसने उसकी लगने वाली भूख मिटा दी। पिछले कई दिनों से किसी न किसी काईडोर या ऑक्सोर का कटा हुआ सर ही उसे मिल रहा था खाने को जिसे उसे कच्चा चबाना पड़ता था।
लेकिन उसी वक्त उस कमरे में खाने की खुशबू फैल गयी। इसका मतलब आज खाना भी पका हुआ कुछ लज़ीज़ टाइप का आने वाला था।
फिर उसकी सोच हकीकत में बदल गयी। कमरे की एक दीवार अपनी जगह से हल्की सी सरकी थी और एक ट्राली सरकती हुई उसके बेड के पास ही पहुंच गयी। उसने जल्दी से ऊपर ढंका हुआ लालरंग का कपड़ा उठाया।
वाकई इसबार निहायत सलीके से पकी हुई कई लज़ीज़ डिशें उस ट्राली पर फूलों के गुलदस्तों के बीच सजी धजी रखी हुई थीं। हालांकि इसबार भी नॉन वेज ही आया था लेकिन अगर ढंग से पका हुआ हो तो काईडोर को उसे खाने में कोई हर्ज नहीं था।
उसकी भूख दोगुनी हो गयी और वह उन डिशेज़ पर इस तरह टूट पड़ी मानो कई दिन की भूखी हो।
फिर कुछ ही पल लगे थे उस ट्राली को पूरी तरह खाली होने में।
खाना खत्म करके उसने एक लंबी सी डकार ली और फिर से बेड पर कूद गयी।
‘लगता है हाबू वाकई उसपर मेहरबान हो गया है।’
अब नींद का असर और बढ़ गया था। लेकिन उसी वक्त ऑपरेटर की आवाज़ ने उसकी नींद में खलल डाल दिया, ‘‘अभी थोड़ी सी ज़हमत और है। सम्राट तुमसे बात करना चाहते हैं।’’
ऑपरेटर का मैसेज सुनकर काईडोर की नींद भाग गयी। अब बाकोल का सम्राट उससे क्या बात करना चाहता है?
फिर जल्दी ही इस सस्पेंस पर से भी परदा हटने की तैयारी हो गयी। क्योंकि कमरे की एक दीवार पर हाबू का चेहरा उभरने लगा था। हमेशा की तरह कुटिल मुस्कान लिये हुए।
‘‘कहो काईडोर। मेरे बेटे की धोखे से बनी हुई पत्नी और फिर धोखे से फरार हुई कुटिल औरत।’’
‘‘मैं उसकी माफी चाहती हूं। सम्राट।’’
काईडोर हाथ जोड़कर बोली।
‘‘नहीं, माफी की ज़रूरत नहीं। मैं कुटिल लोगों का सम्राट हूं और मुझे ऐसे लोग बहुत पसंद आते हैं।’’ सम्राट के चेहरे पर वह कुटिल मुस्कान अभी तक क़ायम थी।
काईडोर ने एक राहत की साँस ली। इसका मतलब तो यही निकल रहा था कि सम्राट ने उसे माफ कर दिया।
‘‘उम्मीद है तुम्हें आज का खाना पसंद आया होगा।’’
‘‘जी सम्राट। आपकी बहुत बहुत मेहरबानी।’’
आज तो लगता था काईडोर उसकी मेहरबानियों से बिछ ही जायेगी।
‘‘कितना अच्छा होगा, अगर इस लज़ीज़ खाने पीने और इस आरामदायक कमरे के मिलने के बाद तुझे तेरा नया पति भी मिल जाये।’’
‘‘जी... जी, वह कहाँ है?’’ काईडोर बेताबी से पूछने लगी।
‘‘मुझे अफसोस है अब वह तुझे कभी नहीं मिल सकता।’’ सम्राट थोड़ा उदास होकर बोला और काईडोर का दिल एक बार फिर ज़ोरों से धड़कने लगा।
‘‘क...क्यों?’’ उसने हकलाते हुए सवाल किया।
‘‘क्योंकि अभी अभी तूने अपने हाथों से उसे अपने पेट में उतार लिया है। इसबार के पकवान उसी के बदन से तो बने थे।’’ वह उदास होकर बता रहा था। और उस उदासी में काईडोर को दुनिया जहान की मक्कारी नज़र आ रही थी।
‘‘उफ्!’’ उसने अपने दिल को थाम लिया।

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