Saturday, May 16, 2026

सूरैन का हीरो - भाग 23

‘‘तो फिर हमें अपने ग्रह का अस्तित्व बचाने के लिये क्या करना चाहिए?’’ ज़ारा फिक्रमन्द लहजे में पूछने लगी।


‘‘फिलहाल मुझे नहीं लगता कि वो लोग बारहवीं डाईमेन्शन तक पहुंच पायेंगे। फिर भी अगर उन्होंने हमें पा लिया तो मेरा नया यूनिवर्स तैयार है शिफ्टिंग के लिये। जहाँ वो लोग सात जन्म भी नहीं पहुंच सकेंगे।’’

‘‘लेकिन सूरैन तो खत्म हो ही जायेगा उनके हमले में। हमारे बाप दादाओं की ज़मीन।’’

‘‘ये केवल एक छोटी सी संभावना है। हमारे ग्रह को कोई नुकसान पहुंचाना उनके लिये लोहे के चने चबाने जैसा है। खास तौर से तब तक, जब तक शीले यहाँ मौजूद है।’’ वह दाँत भींचकर बोला। 

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उधर पीको को संदूक में बन्द हुए कई दिन हो चुके थे।

बीच बीच में सम्राट हाबू हाल चाल लेने आता था और जब भी आता था एक ही सवाल करता था।

‘‘तुमने मेरे बेटे को जिंदा रखा है या उस संदूक को उसका ताबूत बना दिया?’’ आज फिर उसने गोजर को घूरते हुए यही सवाल किया।

‘‘सम्राट! राजकुमार जिंदा हैं और उनका बदन धीरे धीरे अपनी असली हालत पर रहा है। आप इस स्क्रीन पर देखें।’’ उसने दीवार पर लगी स्क्रीन की तरफ इशारा किया और हाबू ने देखा कि उसपर संदूक में लेटे हुए पीको का पूरा बदन दिखाई दे रहा था।

‘‘लग तो रहा है कि उसका बदन धीरे धीरे इंसानी हालत में रहा है। लेकिन इसमें इतना वक्त क्यों लग रहा है? तुम इस काम को जल्दी खत्म करो।’’ उसने हुक्म दिया।

‘‘सम्राट! इसमें जल्दी करना खतरनाक हो सकता है। आपको याद होगा कि राजकुमार पीको अपनी जल्दबाज़ी की वजह से ही जानवर से पूरी तरह इंसान नहीं बन पाये थे।’’ गोजर ने याद दिलाया।

‘‘लेकिन इसमें वक्त कितना लगेगा ये तो तुम बता सकते हो ?’’

‘‘जी इसमें पूरे तेरह महीने लगेंगें।’’ गोजर मन ही मन कुछ हिसाब लगाकर बोला।

‘‘तेरह महीने?’’ इतने वक्त में तो हमारे ग्रह पर माँ के पेट में नया बच्चा तैयार होकर पैदा हो जाता है।’’ हाबू ने फिर गुस्से में गोजर को घूरा। लेकिन गोजर के ऊपर उसका कोई असर नहीं पड़ा। उसे पता था कि जब तक पीको उसके बनाये संदूक में बन्द है तब तक सम्राट उसे किसी तरह के नुकसान या सज़ा देने की हिम्मत नहीं करेगा।

‘‘आप समझ लें सम्राट कि आपका बेटा फिर से पैदा हो रहा है। जब वह इस संदूक से बाहर निकलेगा तो एक नये इंसान के रूप में होगा।’’

‘‘नया इंसान? तो क्या वह मेरा बेटा नहीं रह जायेगा? ये तुम क्या खिचड़ी पका रहे हो?’’ हाबू कुछ गुस्से और कुछ बेचैनी से पूछने लगा।

‘‘वह आपका बेटा ही होगा। लेकिन उसके अन्दर अभी तक की सारी कमज़ोरियाँ दूर हो जायेगी। मुझे तो पूरा सकीन है कि उसकी कमअक्ली भी गायब हो जायेगी।’’ गोजर के मुंह में आखिरी शब्द सूखे चने की तरह अटक गये, क्योंकि हाबू का भरपूर झापड़ उसके चेहरे पर पड़ा था।

‘‘बेवकूफ आदमी! तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे बेटे को कमअक्ल कहने की।’’ वह दहाड़ा और गोजर को होश गया कि वह किसी ऐरे गैरे से बात नहीं कर रहा है बल्कि बाकोल के क्रूर सम्राट के सामने हाज़िरी दे रहा है।

‘‘माफी चाहता हूं।’’ वह सर झुकाकर बोला, ‘‘आपका बेटा तो अक्लमंदी में पूरे बाकोल का उस्ताद है। लेकिन मेरे कहने का मतलब है कि जब वह इस संदूक से बाहर निकलेगा तो पूरे यूनिवर्स के सबसे अक्लमंद इंसान बन जायेगा।’’

‘‘गुड!’’ हाबू का मूड एकाएक बदलकर खुशगवार हो गया, ‘‘अगर ऐसा हुआ तो हम पूरे यूनिवर्स पर कब्ज़ा जमा लेंगे।’’

‘‘इसीलिए ऊपरवाला गंजे को नाखून नहीं देता।’’ गोजर मन ही मन कहकर रह गया। अगर बावाज़ बुलन्द कहता तो हाबू इसकी भी परवाह नहीं करता कि उसके बेटे की जान फिलहाल गोजर के कब्ज़े में है।

‘‘सम्राट फिलहाल इसके लिये आपको तेरह महीने इंतिज़ार करना पड़ेगा।’’

‘‘कोई बात नहीं हम इंतिज़ार कर लेंगे।’’ हाबू इसबार भयानक अंदाज़ में मुस्कुराकर बोला, ‘‘इस बीच हम कुछ और काम कर डालते हैं।’’

‘‘कैसे काम सम्राट? गोजर पूछने लगा।

‘‘सबसे पहले तो हमें उस काईडोर को ढूंढकर ठिकाने लगाना है जो धोखे से हमारे बेटे की बीवी बनकर महल में गयी थी और फिर हमारी इज़्ज़त की धज्जियाँ उड़ाकर और हमें चकमा देकर फरार हो गयी।

और दूसरा काम ये कि सूरैन को ढूंढकर तबाह कर देते हैं। मंदोरा किधर है?’’ उसने इधर उधर देखा और उसे वहां पाकर फोन पर उससे सम्पर्क करने लगा। जल्दी ही फोन पर मंदोरा नज़र आने लगा।

‘‘किधर हो?’’ वह पूछने लगा।

‘‘अपने कमरे में आराम कर रहा हूं।’’ उधर से जवाब मिला।

‘‘आराम कम किया करो। मुझसे मिलो फौरन। डाक्टर कोसी के साथ।’’

इसके थोड़ी ही देर बाद वह मंदोरा और डाक्टर कोसी के साथ आपने खास मेहमानखाने में मुलाकात कर रहा था। यह वही मेहमानखाना था जो एक बड़ी झील की सतह पर तैरता रहता था और हाबू अपने खास मेहमानों से मुलाकात के लिये उसका इस्तेमाल करता था।

‘‘सम्राट!’’ डा0कोसी बता रहा था, ‘‘अपने एक्सपेरीमेन्टस के ज़रिये मैंने कन्फर्म कर लिया है कि सूरैन वालों ने अपने ग्रह को गायब करने के लिये बारहवीं डाईमेंशन का इस्तेमाल किया है।’’

‘‘ठीक है। अब जल्द से जल्द उस बारहवीं डाईमेंशन को हटाकर उस मनहूस ग्रह को खत्म कर दो।’’

‘‘हाँ। हमने उस बारहवीं डाईमेंशन को हटाने का तरीका सोच लिया है। एक बड़ा सिस्टम बनाना होगा उसके लिये। जिसका प्रोटोटाईप भी तैयार कर लिया है मैंने।’’

‘‘चाहे जितना बड़ा सिस्टम बनाना पड़े, तुम उसे बनाओ। खर्चे की परवाह नहीं बस सूरैन हर हाल में अपने अंजाम तक पहुंचना चाहिए। उन कमबख्तों ने हमें बहुत चोट दी है।’’

‘‘तुम पहले बताओ तुम्हारे सिस्टम का प्रोटोटाइप क्या है?’’ बहुत देर से खामोश मंदोरा इस बार पूछ बैठा।

‘‘सिस्टम ये है कि हमारे प्लेनेट यानि बाकोल से कुछ हैवी अंतरिक्ष यान स्पेस में जाकर हमारे सोलर सिस्टम की अलग अलग खास जगहों पर जाकर फिट हो जायेंगे। उसके बाद हमारी सेण्ट्रल लैब से सिग्नल मिलते ही उन्हें एक साथ एक बटन दबाना होगा जिसके दबाते ही खास तरह की डार्क एनर्जी पैदा होगी। जो सूरैन की बारहवीं डाईमेंशन को भी एनर्जी में कन्वर्ट करके अपने अन्दर समेट लेगी।’’

‘‘गुड!’’ हाबू खुश होकर बोला।

‘‘लेकिन कामयाबी के लिये ये ज़रूरी है कि सिग्नल मिलते ही सभी अंतरिक्ष यान एक साथ बटन दबायें। अगर एक भी छूट गया तो बारहवीं डाईमेंशन का हटना तो दूर, कुछ नयी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं। जिनपर काबू पाना मुश्किल हो जायेगा।’’

‘‘ऐसा नहीं होना चाहिए। तुम अपनी टीम में उन ही लोगों को रखना जिनपर तुम्हें सबसे ज़्यादा भरोसा है। बेहतर है कि तुम्हारी टीम में महल के ही साइंटिस्ट हों ताकि कोई गलती करने पर हम उनकी खबर ले सकें।’’

‘‘ठीक है सम्राट। अब तुम तैयारी शुरू कर दो जल्द से जल्द। तब तक हम अपने सिपाहियों से उस नालायक काईडोर की तलाश करवाते हैं।’’

‘‘उसका पता भी मिल गया है।’’ इस बार मंदोरा बोल उठा।

‘‘वेरी गुड। कहाँ है वह कमबख्त?’’

मंदोरा ने हाथ में पकड़ा मोबाईल सम्राट के सामने किया और सम्राट ने भी देख लिया कि ज़ारा की सूरत में अभी भी मौजूद वह काईडोर किसी जवान के साथ शादी रचा रही थी। और उस शादी में एक पादरी पवित्र मन्त्र पढ़ रहा था।

‘‘कहिए तो मैं अपनी रिमोट पिस्टल से यहीं बैठे बैठे दोनों का काम तमाम कर दूं।’’ मंदोरा मुस्कुराकर बोला।

‘‘नहीं।’’ हाबू भी मुस्कुराकर बोला, ‘‘इसने मेरे साथ खेल खेला है तो हम भी इसके साथ खेल खेलेंगे। सुनो।’’

फिर हाबू धीरे धीरे उसे कुछ समझाने लगा।

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इंसानी रूप में मौजूद काईडोर और ऑक्सोर की शादी अपने आखिरी मरहले में थी।

‘‘अब ये शादी सम्पन्न हो चुकी है।’’ आखिरकार पादरी ने मन्त्रों को खत्म करते हुए एलान किया, ‘‘अब पति पत्नी एक दूसरे को किस करें।’’

पादरी की बात सुनते ही दोनों एक दूसरे के करीब पहुंचे और अपना अपना सर एक दूसरे की ओर बढ़ाने लगे। लेकिन दूसरे ही पल काईडोर के पैरों तले ज़मीन निकल गयी।

क्योंकि सामने ऑक्सोर की बजाय एक अजगर का लहराता मुँह दिख रहा था। ठीक पीको के मुंह की तरह।

उधर ऑक्सोर को भी काटो तो खून नहीं। क्योंकि उसके सामने भी खूबसूरत ज़ारा की जगह एक बकुली खड़ी दिखाई दे रही थी जिसकी लंबी गर्दन पर मौजूद आँखें मानो गुस्से से उसे घूर रही थीं।

‘‘...पीको यहाँ कैसे?’’ वह बड़बड़ायी।

‘‘कुटिल, लेकिन बेवकूफ काईडोर क्या सोच बैठी थी तू। हमारी आँखों में धूल झोंकना इतना ही आसान है।’’ अचानक आई इस आवाज़ को सुनकर काईडोर उछल पड़ी। आवाज़ हण्ड्रेड परसेण्ट हाबू की थी।

काईडोर ने घबराकर चारों तरफ देखा लेकिन हाबू की आवाज़ तो मानो आसमान से आयी थी।

‘‘तूने हमारे साथ एक खेल खेला। लेकिन अब हम तेरे साथ ऐसा खेल खेलेंगे कि तू मरने के बाद भी याद करेगी।’’ हाबू चबा चबाकर बोल रहा था।

काईडोर का चेहरा सफेद हो चुका था। हाथ पैरों से तो मानो जान ही निकल गयी थी। फिर उसने हिम्मत करके दोनों हाथ जोड़ दिये, ‘‘..मुझे माफ कर दीजिए सम्राट।’’ वह लरज़ती हुई आवाज़ में बोली।

‘‘हाबू की डिक्शनरी में माफी नाम का कोई शब्द है कहाँ। लेकिन तुझे घबराने की ज़रूरत नहीं। क्योंकि तेरी जान सलामत रहेगी। लेकिन अब तेरी जिंदगी हमारे खेल की बिसात पर चलेगी।’’

उधर हाबू की आवाज़ आनी बन्द हुई और वहाँ मौजूद सभी लोगों को ऐसा लगा मानो उन्हें चारों तरफ से गहरे धुएं ने घेर लिया है।

वहाँ मौजूद दो चार जो भी मेहमान थे सभी बुरी तरह खाँसने लगे थे। लेकिन काईडोर और ऑक्सोर यानि दूल्हा दुल्हन को ऐसा मालूम हो रहा था जैसे वे किसी गहरे कुएं में गिरते जा रहे हैं। आँखों में मिरचें लग रही थीं इसलिए आँख खोलकर देखना मुमकिन नहीं था कि वे गिरते हुए कहाँ पहुंचने वाले हैं। 

फिर जल्दी ही वे पहुंच भी गये। और जैसे ही उस कुएंनुमा जगह की तलहटी पर पहुंचे उनके मुंह से एक चीख निकल गयी।

क्योंकि निहायत तेज़ धार वाले छोटे छोटे पत्थर उनके बदन से चिपक गये थे। ज़ारा के रूप में मौजूद काईडोर ने आँखें खोलकर देखा तो अपने को निहायत चमकीले पत्थरों के ढेर पर पड़े पाया। और उससे थोड़ी ही दूर पर उसका ताज़ा ताज़ा बना पति यानि ऑक्सोर भी औंधे मुंह पड़ा हुआ था।

‘‘काईडोर! तूने महल के ऐशोआराम को ठोकर मारकर एक गरीब को अपना पति चुना। तुम्हारे इस काम से खुश होकर हम तुझे हीरों से भरा हुआ ये कुआँ इनाम मे देते हैं। जाओ ऐश करो।’’ हाबू की आवाज़ फिर सुनाई दी। उसने गलत नहीं कहा था। वाकई इस कुएं में गिरने पर जो पत्थर उसके जिस्म से चिपके थे दरअसल वह हीरे ही थे।

लेकिन काईडोर ये बात अच्छी तरह से जानती थी कि हाबू ने जो कुछ कहा है वह व्यंग्य के अलावा कुछ नहीं। इस कुएं में गिरकर कैद होने के बाद वह हीरे सिर्फ और सिर्फ पत्थर ही थे जिनसे टकराकर बस घायल हुआ जा सकता था। इसके अलावा तो वह पेट भर सकते थे और ही प्यास लगने पर पानी बन सकते थे।

लेकिन ऑक्सोर को अभी भी हालात का अंदाज़ा नहीं हुआ था। इतने हीरे देखकर उसकी आँखें फटी रह गयी थीं।

‘‘अरे वाह इतने हीरे। मेरी प्यारी काईडोर, हम तो मालामाल हो गये। अब पूरी जिंदगी आराम से कटेगी। लेकिन हमारे ऊपर इतनी मेहरबानी करने वाला हमदर्द बन्दा कौन है?’’

‘‘शायद तुमने ध्यान नहीं दिया। मैंने उसे सम्राट कहकर पुकारा है।’’ काईडोर मरी मरी आवाज़ में बोली। 

‘‘अरे हाँ। तू तो उसे सम्राट कहकर पुकार रही थी। लेकिन समाट हम गरीबों की शादी में क्यों आने लगा भला।’’

‘‘हमारी शादी में तो नहीं आया लेकिन ये सब उसी का किया धरा है।’’ काईडोर ठंडी साँस लेकर बोली।

‘‘अरे वाह। हमारी शादी में सम्राट इतना शानदार तोहफा दे रहा है हम कितने खुशकिस्मत हैं।’’ ऑक्सोर हीरे उठा उठाकर हवा में उछालने लगा था।

‘‘हम खुशकिस्मत नहीं बदकिस्मत हैं और ये तोहफा नही ंसज़ा है।’’

काईडोर की बात सुनकर ऑक्सोर ठिठक गया और चौंक कर उसे देखने लगा।

‘‘क्या मतलब?’’

‘‘मतलब ये कि अब हम हमेशा इसी कुएं में कैद रहेंगे और इन हीरों को देख देखकर खुश होते रहेंगे जब तक कि भूख प्यास हमें कंकाल में नहीं बदल देती।’’ काईडोर ने मानो धमाका किया।

‘‘नहीं। ऐसा नहीं हो सकता।’’ वह बेयकीनी से बोला।

‘‘ऐसा ही होना है। सम्राट हमसे बदला ले रहा है।’’

‘‘किस बात का बदला? हम ग़रीब कमज़ोरों ने उसके साथ क्या गलत कर दिया है? कहां वह आसमान का ब्लैक होल और कहां हम ज़मीन के गड्ढे।’’ बाकोल के रहने वालों के लिये ब्लैक होल जैसे शब्दों को आम बोलचाल में शामिल करना मामूली बात थी।

‘‘ये तुमको तब तक नहीं मालूम होगा जब तक कि मैं अपनी असली कहानी तुम्हारे सामने बयान कर दूं।’’

‘‘असली कहानी? तो अभी जो तुमने बताया वो कौन सी कहानी थी?’’ ऑक्सोर उसे घूरने लगा।

‘‘मुझे माफ कर दो मेरे अभी अभी बने हुए सरताज। वह कहानी तो तुम्हारे जैसे खूबसूरत जवान को देखकर अपने आप मेरे मुंह से बन गयी थी।’’

‘‘ओह।’’ वह गहरी साँस लेकर बोला, ‘‘तो फिर अब असली वाली भी बयान कर दो।’’

सरताज की इजाज़त मिलते ही काईडोर ने धारा प्रवाह पीको के साथ अपनी शादी महल से फरार की पूरी कहानी बयान कर दी।

कहानी सुनकर ऑक्सोर का मुंह भाड़ जैसा खुल गया था और फिर जाम भी हो गया था। बाकी बदन को भी मानो लकवा मार गया था।

फिर थोड़ी देर बाद जब वह बोलने के काबिल हुआ तो मुंह से बोल निकले, ‘‘नालायक पाजी औरत। मरवा दिया तूने मुझे। अरे अब मेरा क्या होगा। तेरे चक्कर में मैं मुफ्त में मारा गया।’’ उसकी आवाज़ बाकायदा रुहांसी हो चुकी थी।

‘‘...लेकिन मैंने ये सब तुम्हारे प्यार में किया है।’’ काईडोर हकलाकर बोली।

‘‘अरे भाड़ में गया तेरा प्यार। मेरी तो वाट लग गयी। इस चक्कर में। मैं कहता हूं दूर हो जा मेरी नज़रों से।’’ उसने काईडोर को धक्का दिया और खुद भागकर एक कोने में पहुंच गया।

बाकोल पर शायद ये पहली शादी थी जो परवान चढ़ने से पहले ही औंधे मुंह गिर चुकी थी।

---- जारी है

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