ज़ारा का महलनुमा यान धीरे धीरे हवा में तैरता हुआ अपने महल की ओर चला जा रहा था और ज़ारा मुस्कुराते हुए शीले की ओर देख रही थी।
‘‘ऐसे क्यों देख रही हो?’’ शीले थोड़ा गड़बड़ा कर बोला।
‘‘मैं सोचती हूं कि महल में मेरी बहुत सी सहेलियां तुम्हारा इंतिज़ार कर रही हैं और उनमें से कुछ अव्वल दर्जे की शरारती भी हैं।’’
‘‘क्या मतलब?’’ शीले चौंक कर बोला।
‘‘मतलब ये कि तुम्हारी खातिरदारी में कुछ भी हो सकता है। ज़रा संभल कर रहना।’’
‘‘तुमने तो मुझे डरा दिया है। अब तो मैं सोच रहा हूं कि तुम्हारे महल जाऊं या कहीं और निकल जाऊं।’’ शीले डरी डरी आवाज़ में बोला।
‘‘फिलहाल और कहीं जाने का तो सवाल ही नहीं। तुम तो वहीं जाओगे जहाँ मेरा ये यान तुम्हें ले जायेगा।’’ कहते हुए ज़ारा यान के रिमोट सिस्टम की ओर देखने लगी जो बता रहा था कि यान निहायत धीमी रफ्तार से महल की ओर बढ़ रहा है।
‘‘लेकिन इस यान को तो मैं कहीं भी ले जा सकता हूं।’’ कहते हुए शीले ने अपने चेहरे पर हाथ फेरा और जब उसका हाथ हटा तो ज़ारा के मुंह से एक चीख निकल गयी।
क्योंकि अब सामने जो व्यक्ति मौजूद था वह शीले हरगिज़ नहीं था।
वह तो हाबू का खास वज़ीर मंदोरा था।
‘‘तुम क..कौन हो?’’ अवाक ज़ारा का सवाल था। वह मंदोरा को तो पहचानती नहीं थी।
‘‘मुझे लोग मंदोरा कहते हैं।’’ मंदोरा मक्कारी के साथ बोला, ‘‘और मैं महान बाकोल ग्रह के महान सम्राट हाबू का खास वज़ीर हूं। अब तुम मेरी निगरानी में बाहिफाज़त सम्राट हाबू के महल तक पहुंच जाओगी जहाँ तुम्हारी नटखट सहेलियों की कोई शरारत नज़र नहीं आयेगी और तुम आराम से पीको की बेगम बन जाओगी।’’
‘‘ल...लेकिन शीले कहां गया?’’ ज़ारा अभी भी हैरत में थी।
‘‘उसे तो मैंने अपने मायाजाल में ऐसा फंसाया कि बेचारा स्टेडियम का रास्ता ही भूल गया।’’ कहते हुए उसने अपने हाथ में मौजूद डिवाईस का रुख यान के कण्ट्रोल की ओर किया और ज़ारा ने देखा, अचानक यान की रफ्तार कई गुना बढ़ गयी और अब वह पुराना रास्ता बदलकर नये रास्ते पर चलता हुआ सूरैन की फिज़ा में ऊपर की ओर जाने लगा था। दूसरे अलफाज़ में सूरैन को छोड़ रहा था।
ज़ारा ने कोशिश की कि यान को अदृश्य मोड से बाहर निकालकर खतरे का सिग्नल दे दे, लेकिन यान तो उसका कहना मानने से ही इंकार कर चुका था।
वह पूरी तरह मंदोरा के कण्ट्रोल में आ चुका था।
अब उसने मंदोरा के हाथ से रिमोट डिवाईस छीनने के लिये उसके ऊपर छलांग लगा दी। लेकिन वहां तो लगा कि कोई साया है। क्योंकि ज़ारा मंदोरा के बदन से इस तरह गुज़र गयी जैसे वहां कोई थ्री डी आकृति बन रही हो।
‘‘बेकार है ज़ारा। इस वक्त मैं अनपार्टिकिल मोड में हूं।’’ मंदोरा हंसते हुए बोला।
ज़ारा भी हकीकत समझ गयी। अनपार्टिकिल मोड में होने का मतलब था कि मंदोरा का बदन वास्तविक होते हुए भी कोई न तो उसे छूकर महसूस कर सकता था और न ही उसे कोई चोट पहुंचा सकता था।
अब ज़ारा के पास बाकोल तक जाने के अलावा और कोई चारा नहीं बचा था।
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अजगर बने पीको ने ज़ारा के आने की खबर सुनते ही ज़ोरदार चीख मारी। ये चीख खुशी की थी लेकिन सामने वालों को यही लगा किसी अजगर ने गुस्से से फुंकार मारी है। जिसके नतीजे में सामने मौजूद नौकर पीछे की तरफ पलट गया और उसके हाथ में मौजूद शराब का जो जाम पीको की लपलपाती ज़बान सुड़कने वाली थी वह उछलकर दो टुकड़े हो गया। यह जाम आज के दिन का पच्चीसवाँ जाम था।
ज़ारा के इंतिज़ार के तनाव को दूर करने के लिये वह मिनट मिनट पर जाम चढ़ा रहा था लेकिन तनाव था कि शैतान की पूंछ की तरह बढ़ता ही जा रहा था।
फिलहाल उसने जाम टूटने का कोई नोटिस नहीं लिया क्योंकि उसकी मनपसंद खबर तो सुनाई पड़ ही गयी।
वह बिस्तर से नीचे लुढ़क गया और दरवाज़े की ओर बढ़ने लगा।
‘‘कहाँ जा रहे हैं राजकुमार?’’
नौकर ने सवाल किया।
‘‘जा रहा हूं ज़ारा से मुलाकात करने।’’
‘‘य..ये इस हुलिए में? ऐसे में आपको देखकर डर से उसका हार्ट फेल हो जायेगा।’’
नौकर सकपका कर बोला।
‘‘खामोश बदतमीज़।’’ पीको चीखा, ‘‘तू मेरी बीवी के मरने की बात करता है। वैसे कहता तो तू ठीक है। अजगर देखकर तो वह डर ही जायेगी। पहले मुझे अपना मेकअप खत्म करके इंसानों के जामे में आ जाना चाहिए। चल जल्दी से मेकअप खत्म करने वाली मशीन लेकर आ।’’
उसने हुक्म दिया और नौकर दौड़ गया। फिर जल्दी ही वह मशीन लेकर हाज़िर भी हो गया।
ये मशीन एक पतली अलमारी की तरह थी जिसके सामने छोटे छोटे हज़ारों आईने लगे हुए थे और हर आईने में सामने वाले की पूरी इमेज दिखाई देती थी।
नौकर ने मशीन लाकर उसके सामने रख दी।
‘‘गुड। अब जल्दी से इसे ऑन कर ताकि मैं खूबसूरत जवान की शक्ल में ज़ारा से मिलने जा सकूं। ये मेरी कैसी बदनसीबी है कि मैं अब तक अपनी होने वाली बीवी से मिलने एक बार भी अपनी असली शक्ल में नहीं जा सका।’’ पीको ने एक ठंडी साँस ली और नौकर ने मशीन ऑन कर दी।
मशीन के ऑन होते ही आगे लगे हुए तमाम आईनों से महीन रंग बिरंगी किरणें निकलकर पीको के अजगर नुमा जिस्म से जाकर टकराने लगीं और पीको का बदन धीरे धीरे इंसानी जामे में आने लगा।
सबसे पहले उसके पैरों ने ही इंसानी शक्ल अख्तियार की।
‘‘मशीन की स्पीड और तेज़ कर। मुझे ज़ारा से मिलने की बहुत उतावली है। अब बिलकुल सब्र नहीं होता।’’
नौकर ने मशीन के ऊपर मौजूद नॉब घुमाकर उसकी स्पीड तेज़ कर दी। अब आईनों से निकलने वाली किरणों की तीव्रता तेज़ हो गयी थी और पीको के इंसान बनने की रफ्तार में भी इज़ाफा हो गया।
लेकिन पीको को अभी भी सब्र नहीं हुआ।
‘‘और तेज़ कर कमबख्त।’’
वह दहाड़ा और नौकर ने नॉब इस बार घबराकर तेज़ी से घुमा दी।
दूसरे ही पल तड़ाक की एक आवाज़ आयी और नॉब टूटकर नौकर के हाथ में आ चुकी थी।
इसी के साथ मशीन के आईनों ने किरणें फेंकना बन्द कर दीं।
‘‘य...ये क्या हुआ?’’ पीको हड़बड़ाकर बोला।
अब तक उसकी कमर तक का हिस्सा इंसानी जामे में आ चुका था लेकिन उसके ऊपर का हिस्सा अभी भी अजगर की ही सूरत में था और अब उसके इंसान बनने की प्रक्रिया रुक चुकी थी।
‘‘ल...लगता है मशीन खराब हो गयी है।’’ नौकर किसी साइंटिस्ट
के ही अंदाज़ में मशीन का निरीक्षण करते हुए बोला।
‘‘खामोश मनहूस कहीं का।’’ पीको दहाड़ा, ‘‘जा जल्दी से महल के साइंटिस्ट
को बुलाकर ला ताकि वह इसे ठीक करे। कमबख्त जितना मैं जल्दी में हूं उतनी ही देर हो रही है।’’
नौकर एक बार फिर बाहर की ओर दौड़ गया। और जब वापस आया तो उसके साथ महल का सबसे बड़ा साइंटिस्ट भी था। पीको का बुलावा था तो उसे हर हाल में आना ही था।
‘‘इस मशीन को जल्दी ठीक करो।’’ उसके आने के साथ ही पीको ने हुक्म दिया।
साइंटिस्ट फौरन मशीन की ओर बढ़ गया। अब उसने नौकर के हाथ में टूटी हुई नॉब भी देख ली थी। उसने नॉब अपने हाथ में ले ली और मशीन के ऊपर फिट करने की कोशिश करने लगा।
लेकिन मशीन तो पूरी तरह सूकून में थी।
‘‘क्या हुआ?’’ बेचैनी के साथ पीको पूछ रहा था।
साइंटिस्ट ने उसे खामोश रहने का इशारा किया और मशीन के पीछे का हिस्सा खोलने लगा। अब वह मशीन के भीतर का निरीक्षण कर रहा था। फिर थोड़ी देर बाद वह पीको की ओर घूमा।
‘‘राजकुमार पीको, एक बुरी खबर है।’’ वह उदास उल्लू की तरह मुंह बनाकर बोला।
‘‘कैसी खबर?’’ राजकुमार ने बेचैनी से पूछा।
‘‘हद से ज़्यादा रफ्तार में चलने की वजह से मशीन का मेमोरी मैप वाला हिस्सा ब्लास्ट हो गया है।’’
‘‘तो फिर उसे बदल दो। लेकिन जो कुछ करना है जल्दी करो।’’
‘‘मेमोरी मैप तो बदल जायेगा लेकिन....’’,
कहकर साइंटिस्ट चुप हो गया।
‘‘आखिर तुमको बोलने में इतनी रुकावट क्यों हो रही है कब्ज़ के मरीज़? लेकिन क्या?’’ पीको झुंझलाकर पूछने लगा।
‘‘राजकुमार, शायद अब आप कभी इंसानी जामे में नहीं आ पायेंगे?’’
‘‘क्या!?’’ पीको अपनी इंसानी टाँगों के ऊपर उछल गया लेकिन ऊपरी जिस्म तो अजगर का ही था सो बैलेंस न बन सका और वह पीछे की तरफ लुढ़क गया।
फिर वह बड़ी मुश्किल से कोशिश करके बैठ पाया।
‘‘ये तुम क्या बकवास कर रहे हो? भला मैं दोबारा इंसान क्यों नहीं बन सकता?’’ उसकी आवाज़ से लगता था मानो उसकी जान ही निकल गयी है।
‘‘क्योंकि इस मशीन में मेमोरी मैप एक ऐसी खास जगह होती है जहाँ इंसान की ओरिजनल सूरत का मैप स्टोर होता है। जब वह किसी और जानवर की शक्ल में बदलता है। और फिर बाद में उसी मैप की मदद से मशीन उसे दोबारा असली हालत में ले आती है। मेमोरी मैप के ब्लास्ट होने का मतलब है कि आप के इंसानी शरीर के स्ट्रक्चर
का अब कोई रिकार्ड मशीन के पास नहीं रह गया। तो फिर वह आपको असली हालत में कैसे ला पायेगी?’’
‘‘तुम झूठ बोलते हो। ऐसा नहीं हो सकता।’’ पीको बेयकीनी के साथ बड़बड़ा रहा था।
‘‘राजकुमार। आप चाहें तो इस मशीन को रीपेयर के लिये कंपनी भिजवा दें।’’
‘‘मैं कंपनी को ही यहीं बुलवा लेता हूं।’’ राजकुमार ने अपने नौकर को इशारा किया। ज़ाहिर है कि वह बाकोल का मालिक था।
थोड़ी ही देर में कंपनी के टॉप इंजीनियर अपने तमाम साज़ो सामान के साथ वहाँ प्रकट हो गये थे।
फिर उन लोगों ने अपनी तमाम कोशिशें कर डालीं और आखिर में इसी नतीजे पर पहुंचे कि मशीन के मेमोरी मैप को दोबारा बना पाना असंभव है। अब उसमें नया मेमोरी मैप ही लगाया जा सकता है।
और इस तरह पीको को वापस इंसानी शक्ल में लाना नामुमकिन था।
जैसे ही इस हकीकत का इन्किशाफ हुआ, पीको दहाड़ें मारकर रोने लगा। और जल्दी ही पूरे महल में ये बात फैल गयी।
सम्राट हाबू भागा हुआ आया और इस खबर को सुनते ही उसके हाथ पैर ठंडे हो गये।
‘‘ये नहीं हो सकता। मेरा बेटा क्या वाकई अब कभी इंसानी शक्ल में नहीं आ पायेगा?’’
वह बेयकीनी से कह रहा था। पीको रोते हुए उससे लिपट गया।
इस बीच नॉब तोड़ने वाला नौकर अपनी जगह दूसरे को भेजकर वहां से रफूचक्कर हो चुका था। हालांकि उसने पीको के कहने पर ही मशीन तेज़ चलायी थी लेकिन अब उसे तोड़ने की गाज़ उसपर गिरनी लगभग यकीनी थी।
ज़ारा की किडनैपिंग की खुशी इस मुसीबत के पड़ने से काफूर हो चुकी थी।
‘‘ये कैसे हो सकता है? साइंस और तकनीक की इतनी तरक्की के बाद भी हम अपने बेटे को असली हालत में नहीं ला सकते। मैं अपने ग्रह के सारे वैज्ञानिकों को फांसी दे दूंगा।’’ सम्राट हाबू गुस्से में कह रहा था। हालांकि उसे इसका भी एहसास था कि इससे कोई फायदा होने वाला नहीं।

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