Friday, September 11, 2009

प्लैटिनम की खोज - एपिसोड : 25

‘‘ड --- डाकू!’’ शमशेर सिंह की हालत खराब हो गयी, ‘‘तब तो मर गये। हम लोगों ने उनका भोजन खाया है। वे जरूर हमसे बदला लेंगे।’’
‘‘हिम्मत रखो। अधिक से अधिक वे बदले में हमारा भोजन बनाकर खा जायेंगे।’’ रामसिंह ने दिलासा दिया।
‘‘भला हमारे पास कहां भोजन है?’’ शमशेर सिंह आश्चर्य से बोला।
‘‘मेरा मतलब दूसरा था। प्रोफेसर समझ गया होगा। क्यों प्रोफेसर?’’
‘‘हां। किन्तु मैं बताऊंगा नहीं। वरना यहां भय का तूफान आ जायेगा।’’

शमशेर सिंह की समझ में प्रोफेसर की बात नहीं आयी अत: वह मौन हो गया था। या हो सकता था कि उसका ध्यान किसी और तरफ मुड़ गया होगा।
अब वे लोग जंगल की सीमा में प्रविष्ट हो गये थे। तीनों के हाथों में उनके सूटकेस थे। कम्पनी द्वारा दिये गये सूट उन्होंने पहन रखे थे।

जंगल काफी घना था और सामने देखने पर मुश्किल से आठ दस मीटर तक दिखाई देता था। जैसे जैसे वे लोग आगे बढ़ रहे थे घने पेड़ों के कारण ऊपर आकाश दिखना कम होता जा रहा था। प्रोफसर अपने विचारों में गुम सबसे आगे चल रहा था और उसके पीछे पीछे रामसिंह और शमशेर सिंह भी जबरन अपने कदम बढ़ा रहे थे। जंगल की भयानकता देखकर उनकी हालत खराब हो रही थी।

अन्त में रामसिंह बोल उठा, ‘‘प्रोफेसर, मेरा विचार है कि यह स्थान पिकनिक मनाने के लिए बहुत बेकार है।’’
‘‘ऐं!’’ प्रोफेसर चौंक उठा, ‘‘हम लोग कहां जा रहे हैं?’’
‘‘कमाल है। यह तो तुम ही बता सकते हो। क्योंकि हम लोग तो तुम्हारे पीछे हैं।’’
प्रोफेसर ने चारों ओर दृष्टि दौड़ाई फिर बोला, ‘‘हमें अब रुक जाना चाहिए और प्लेटिनम की खोज आरम्भ कर देनी चाहिए।’’

‘‘किन्तु किस प्रकार?’’ शमशेर सिंह ने पूछा।
‘‘चारों ओर झाड़ियां हटा हटाकर देखो। कहीं भी कोई चमकीली वस्तु दिखाई पड़े तो मुझे बुला लेना।’’
‘‘एक बार फिर प्लेटिनम की खोज आरम्भ हो गई। वे लोग झाड़ियां हटा हटाकर गौर से हर ओर दृष्टि दौड़ा रहे थे। प्रोफेसर के हाथ में आतिशी शीशा था। जिससे वह झुककर नीचे बारीकी से निरीक्षण कर रहा था।
थोड़ी देर बाद रामसिंह ने पूछा, ‘‘शमशेर सिंह तुम्हें कुछ दिखा?’’
‘‘हां।’’

‘‘क्या चीज?’’ उसने उत्सुकता दिखाई।
‘‘किसी चिड़िया का घोंसला है शायद ।’’ शमशेर सिंह ने अपने हाथ से उसे उठाते हुए कहा।
‘‘ध्त्‌ा तेरे की। मैं प्लेटिनम के बारे में पूछ रहा हूं।’’
‘‘फिलहाल तो खोज जारी है। तुमने पूछा, इसलिए मैंने बता दिया।’’

‘‘मिल गया।’’ प्रोफेसर चिल्लाया। उसकी चीख में ख़ुशी का समावेश था।
‘‘क्या प्लेटिनम मिल गया?’’ रामंसह और शमशेर सिंह उसकी ओर दौडे।

2 comments:

Arvind Mishra said...

मजेदार वृत्तांत चालू है !

हिमांशु । Himanshu said...

रोचक है । आगत की प्रतीक्षा । आभार ।