Monday, May 25, 2026

सूरैन का हीरो - भाग 32

‘‘ लेकिन ... ये तो छोटा बच्चा है। इसे कहां से उठा लाये? और इस गोले में तो दम घुटने से मर जायेगा। नब्बन जाकर फौरन पुलिस में रिपोर्ट करो।’’ बिक्कू ने नब्बन को ठहोका दिया और नब्बन ने दलान से नीचे उतरने के लिये कदम बढ़ाये।


लेकिन दल्लू ने गोला एक हाथ में थामकर दूसरे से नब्बन की कालर पकड़कर खींच ली।

‘‘ये कोई बच्चा वच्चा नहीं है। अरे ये इंसान का बच्चा या इंसान है ही नहीं।’’

‘‘जो भी हो। पहले तुम इसे गोले से बाहर निकालो।’’

‘‘अगर मैंने इसे बाहर निकाला तो ये पूरे गाँव में तबाही मचा देगा। बड़ी मुश्किल से मैंने इसे पकड़कर कैद किया है। हज़रत बाबा की दी हुई करामत से।’’

‘‘तुम बकवास कर रहे हो। मैं अभी इसे बाहर निकालता हूं।’’ बिक्कू ने उसके हाथ से गोला झपट लिया और उसे खोलने की कोशिश करने लगा।

लेकिन लाख कोशिश करने पर भी वह उसे खोलने में कामयाब हो सका। ऐसा मालूम हो रहा था कि उस बच्चे को किसी छोटे से गद्दे पर लिटाकर उसके चारों तरफ शीशा ढाल दिया गया हो। किसी ऐसे खिलौने की तरह जैसे अक्सर बाज़ार में दिख जाते हैं। लेकिन उनके अन्दर मौजूद गुड्डा बेजान होता है लेकिन इसमें तो मौजूद बच्चा अपने हाथ पैर सभी चला रहा था। और शायद इन्हें देख भी रहा था।

‘‘मैं कहता हूं तुम इसे बाहर निकालो।’’ थक हारकर उसने गोला फिर से दल्लू की ओर बढ़ा दिया।

‘‘मैंने बोला कि इस जिन को बड़ी मुश्किल से मैंने गोले में कैद किया है। अगर मैंने इसे बाहर निकाला तो ये पूरे गाँव में तबाही मचा देगा।’’

‘‘अरे ये छोटा बच्चा क्या तबाही मचायेगा?’’ बिक्कू ने लाचारी से गोले की ओर देखते हुए कहा।

पहले तो तुम लोग अपनी गलतफहमी दूर करो कि ये छोटा बच्चा है। जब मैंने इसे पकड़ा तो ये भरपूर हट्टा कट्टा जवान था मेरी ही तरह।’’ दल्लू ने अपनी बल्लियाँ दिखाने की केशिश की जो कब की देसी की भेंट चढ़ चुकी थीं।

‘‘तो फिर ये बच्चा कैसे बन गया?’’ बिक्कू का सवाल था।

‘‘इसे गोले में लाने के लिये इसका छोटा होना ज़रूरी था, जो मैने हज़रत बाबा की दी हुई करामत से कर दिया। और फिर इसे गोले में कैद कर दिया।’’

‘‘तो इसका मतलब कि हम जो किताबों में बोतल या चिराग के जिन की बात करते हैं वो सब बच्चे थे।’’

‘‘उनके बारे में मुझे कुछ नहीं पता।’’ दल्लू ने कंधे उचकाये।

‘‘लेकिन इसे कैद करने की ज़रूरत क्या थी? कितना प्यारा बच्चा मेरा मतलब जिन है।’’ मद्दन गोले के अपने हाथों से सहलाते हुए बोला।

दल्लू ने गोले को उठाकर उसके हाथों से दूर कर दिया।

‘‘ये कोई प्यारा वयारा नहीं है। कुछ पता है ये कल रात को हमारे गाँव में खुराफात करने के लिये घुसा है। इसने शब्बर दादा के सिरहाने रखे हुए तीन सौ पच्चीस रुपयों को ले जाकर पिछवाड़े बाँस के झुरमुट में डाल दिया है टट्टी बनाकर।

अब उन लोगों को काफी हद तक यकीन हो गया कि दल्लू शायद ठीक कह रहा है। क्योंकि थोड़ी देर पहले ही वे लोग शब्बर दादा की चीख पुकार सुन चुके थे।

ये अलग बात है कि उन तीन सौ पच्चीस रुपयों को पार करने वाला खुद दल्लू था और पिछवाड़े बाँस के झुरमुट में मौजूद टट्टी उस तगड़े परिन्दे की थी जिसे वह रात को पूरे का पूरा हज़म कर चुका था।

‘‘अगर तुम लोग चाहते हो कि ये आईंदा इस तरह की खुराफात करे तो इसे इस गोले में ही कैद रखना होगा।’’

‘‘दल्लू भाई ठीक कह रहे हैं।’’ नब्बन धीमे से बोला।

‘‘लेकिन मैं ये काम क्यां करूं? मुझे इसकी ज़रूरत क्या है?’’ अचानक दल्लू बोल उठा, ‘‘मैं इसे आज़ाद कर ही देता हूं।’’ वह गोले के ऊपर अपने हाथ फेरने लगा। लेकिन बिक्कू ने झपट कर उसका हाथ पकड़ लिया।

‘‘अरे नहीं दल्लू भाई। ऐसा गज़ब मत करना। इसे गोले में ही रहने दो।’’ वह घिघियाकर बोला।

‘‘लेकिन इसमें मेरा क्या फायदा? मुझे तो गाँव वाले एक गिलास पानी देने के भी रवादार नहीं। ऐसे गाँव पर तबाही जाये तो ही अच्छा है। नहीं। मैं इसे आज़ाद कर ही देता हूं।’’ उसने फिर गोले पर हाथ फिराना चाहा लेकिन कामयाब नहीं हुआ क्योंकि बिक्कू ने उसका हाथ कसकर थाम रखा था।

‘‘दल्लू भाई, आइंदा ऐसा नहीं होगा। हम लोग खुद आपको अपने हाथों से एक गिलास पानी पिलायेंगे।’’ बिक्कू घिघियाते हुए बोला।

‘‘और खाना?’’

‘‘हम खाना भी खिलायेंगे।’’ नब्बन भी बोल उठा।

‘‘और देसी भी पिलायेंगे।’’ मद्दन भी कहां पीछे रहने वाला था।

‘‘नाम मत लो उसका। अब वह गुनाह है मेरे लिये। हाँ जिस पैसे की तुम देसी पिलाने की नीयत कर रहे हो उसका कैश मेरी जेब में डाल दो। मैं उसे सदका कर दूंगा गाँव वालों के नाम से।’’

‘‘जी दल्लू भाई। फिलहाल एक पव्वे का पैसा तो आप रख ही लें।’’ मद्दन ने जेब से कुछ नोट निकालकर दल्लू के हाथ में थमा दिये जिसे उसने झटके से अपने हरे लबादे की जेब में डाल लिया।

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सम्राट हाबू आज कुछ ज़्यादा ही गुस्से में था। क्योंकि जैसे ही वह अपने दरबार में जाने के लिए कमरे से निकला एक नौकरानी ने छींक दिया। कुछ हद तक अंधविश्वास बाकोल पर भी पाये जाते थे। उसने गुस्से में आकर उसकी नाक काटने का हुक्म दिया और बिना ये देखे कि वह माफी मांगते हुए बेहाल हुई जा रही है, वह आगे बढ़ गया।

फिर जैसे ही आगे निकलकर बाहरी गैलरी में आया, चारों खाने चित हो गया। क्योंकि दूसरी नौकरानी ने अभी अभी धुलाई की थी और फर्श गीला था।

गुस्से में आकर उसने उसे उसी फर्श पर उस नौकरानी की नाक दस बार रगड़ने का हुक्म दिया और एक खुली गाड़ी में बैठकर दरबार की ओर रवाना हो गया।

दरबार के गेट पर पहुंचकर वह अपनी गाड़ी से नीचे उतरा और हैरत में पड़ गया। क्योंकि वहां मौजूद कोई भी सिपाही उसकी गाड़ी का दरवाज़ा खोलने के लिये आगे नहीं बढ़ा था।

‘‘सब नालायक हो चुके हैं। लगता है इनको नौकरी से निकालकर नये लोगों की भर्ती करनी पड़ेगी।’’ बड़बड़ाता हुआ वह अपने दरबार में दाखिल हो गया।

लेकिन आज जाने सब सनक क्यों गये थे। क्येंकि जब वह दरबार में दाखिल हुआ तो कोई भी उसके अभिवादन में अपनी कुर्सी से नहीं उठा।

लेकिन उसे ये देखने का होश कहां था। उसकी नज़रें तो अपनी खुद की कुर्सी की ओर जाकर गड़ गयी थीं।

क्योंकि उस कुर्सी पर उसका बेटा विराजमान था। तनकर बैठा हुआ।

‘‘पीको बेटा। शायद तुम गलती से उधर बैठ गये हो। तुम्हारी कुर्सी तो बगल में रखी है।’’ उसने पुचकारा।

‘‘मैं बिलकुल सही कुर्सी पर बैठा हूं। डोडी।’’ पीको ने शांत और ठंडी आवाज़ में जवाब दिया। और हाबू के पैरों तले मानो ज़मीन खिसक गयी। आखिर उसके इरादे क्या थे?

‘‘मेरे बेटे। मेरे लाल। इस कुर्सी पर सिर्फ बाकोल का बादशाह ही बैठ सकता है।’’ वह अपने बेटे को पुचकारते हुए बोला, ‘‘और फिलहाल वह बादशाह मैं हूँ। हाँ मेरे बाद तुम ही इस कुर्सी के मालिक बनोगे।’’

‘‘मैं मालिक बन चुका हूं। डोडी।’’ पीको धीरे से मुस्कुराया। और इस मुस्कुराहट में जो क्रूरता थी उसे देखने वालों ने महसूस कर लिया।

उसकी बात सुनकर अब हाबू के चेहरे पर फिक्रमन्दी झलकने लगी।

‘‘पीको बेटे, लगता है तेरा बचपन वापस लौट आया है। बचपन में तू ऐसे ही मेरी कुर्सी पर उचककर बैठ जाता था। लेकिन अब तो तू पहले से भी ज़्यादा समझदार हो गया है। मेरी बगल में जा। आज मुझे कई लोगों का इंसाफ करना है।’’ एक बार फिर उसने समझाने की कोशिश की।

‘‘आज से सबका इंसाफ मैं करूंगा।’’ पीको बिना टस से मस हुए बोला, ‘‘क्योंकि अब इस कुर्सी का मालिक मैं हूं। और सबसे पहले अपने डोडी का इंसाफ करूंगा।’’

हाबू की कुछ समझ में नहीं रहा था कि पीको को क्या हो गया है। इसलिए इस बार उसके मुंह से आवाज़ ही निकल सकी।

फिर पीको ही दोबारा बोला, ‘‘हाँ तो दरबार वालों, कान खोलकर सुन लो। आज से बाकोल का नया बादशाह मैं हूं। बोलो पीको सम्राट की जय।’’

पूरा दरबार पीको सम्राट की जय के नारे से गूंज उठा।

अब हाबू की समझ में गया था कि खुद उसी के बेटे ने ही उसे सम्राट की गद्दी से बेदखल कर दिया है। और जब ये बात पूरी तरह उसे समझ में गयी तो उसका चेहरा गुस्से से लाल हो गया। अपनी गद्दी छिन जाने को वह किसी हाल में बर्दाश्त नहीं कर सकता था चाहे छीनने वाला उसका सगा बेटा ही क्यों हो।

‘‘बेटे, तुम मेरे वह बेटे हो जिसके लिये मैंने पूरे सूरैन को तबाह कर दिया और तुम्हें इंसानी रूप में वापस पाने के लिये मैंने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। लेकिन अगर तुम अपनी इस ज़िद पर कायम रहे तो मैं अपने हाथों से तुम्हें खत्म कर दूंगा।’’ कहते हुए उसने जेब से पिस्टल निकालकर उसका रुख पीको की ओर कर दिया जिसके बारे में सभी को मालूम था कि उसमें से घातक किरणें निकलकर पल भर मं सामने वाले को मौत की नींद सुला देती हैं।

‘‘डोडी ऐसा तुम कर नहीं सकते।’’ कहते हुए वह सिपाहियों की ओर घूमा और खास इशारा किया।

दूसरे ही पल दरबार में मौजूद सिपाही हाबू के ऊपर झपट पड़े और उसके हाथ से पिस्टल छीनकर उसे बेबस कर दिया।

‘‘सिपाहियों अपने भूतपूर्व सम्राट को ले जाकर ऐसी जगह कैद करो जहाँ से ये किसी भी हालत में भाग पाये।’’ गुर्राते हुए पीको ने हुक्म दिया। और सिपाही हाबू को खींचकर ले जाने लगे।

वह चीख चिल्ला रहा था और अभी भी उसका दिल ये मानने से इंकार कर रहा था कि खुद उसी के सिपाहियों ने उसे धोखा दे दिया है। लेकिन ये हकीकत थी।

कल तक जो सिपाही उसके हुक्म पर अपनी गर्दन कटाने को तैयार रहते थे आज वही उसकी गर्दन काटने पर तैयार थे।

और उसका खुद का बेटा तो अब कोई नाजायज़ औलाद मालूम हो रहा था जिसे पता चल जाये कि जिसे वह डोडी कह रहा था वह उसका असली बाप है ही नहीं।

---- जारी है

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