Friday, August 2, 2013

मायावी गिनतियाँ : भाग 25


''किधर जा रहा है रे। बहुत बड़ा धोखा खायेगा तू।" वह राक्षस अपनी खौफनाक मुस्कुराहट के साथ बोला। 
''राक्षस दूर हो जा यहाँ से। मैं अपने बेटे को इस जगह से निकालने के लिये आयी हूं।" उसकी माँ ने गुस्से से उस वीभत्स राक्षस को लताड़ा। 
''तू इसे निकालेगी या और फंसा देगी। इसे यहाँ से सुरक्षित सिर्फ मैं निकाल सकता हूं। फिर वह रामू से मुखातिब हुआ, ''देख क्या रहा है। मेरे साथ आ। मैं तुझे यहाँ से निकालता हूं।" 

वह कुरूप राक्षस रामू की तरफ बढ़ा। रामू के दिमाग़ की चूलें इस वक्त हिली हुई थीं। उसका मन कर रहा था कि अपने सर के सारे बाल नोच डाले। 
''वहीं रूको। मैं खुद ही यहाँ से बाहर निकल जाऊंगा।" उसने चीख कर कहा और उस संरचना की ओर तेज़ तेज़ कदमों से जाने लगा जिसे नेहा ने दरवाज़े का नाम दिया था। वह उस विशाल संरचना के सामने पहुंचा और उसमें किसी दरवाज़े का निशान ढूंढने की कोशिश करने लगा। लेकिन उस संरचना में कहीं कोई दरार भी नहीं दिखाई दी। 

उसने घूमकर देखा। नेहा, उसकी माँ और वह राक्षस अपनी जगह चुपचाप खड़े उसी की तरफ देख रहे थे। उसने अपने हाथ में पकड़े ज़ीरो को उस संरचना से टच कराया। टच कराते ही उस संरचना से बादलों की गरज जैसी आवाज़ पैदा हुई जो कि शब्दों में बदल गयी। 

उस संरचना से आने वाली आवाज़ कह रही थी, ''मेरे अन्दर आने के लिये तुम्हें उन तीनों में से एक को साथ लाना पड़ेगा। इतना कहकर आवाज़ बन्द हो गयी। रामू ने दोबारा अपना ज़ीरो उससे टच कराया और संरचना ने फिर यही शब्द दोहरा दिये।

यानि रामू के पास इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं था कि वह उन तीनों में से किसी एक को साथ लेकर आता। लेकिन किसको? उन तीनों की आपसी सर फुटव्वल से यही ज़ाहिर हो रहा था कि उनमें से दो गलत हैं और एक ही सही है। गलत का साथ पकड़ने का मतलब था कि वह हमेशा के लिये किसी अंजान जगह पर कैद हो जाता। 

लेकिन उनमें सही कौन था इसे ढूंढ़ना टेढ़ी खीर था। वह वहीं ज़मीन पर बैठ गया और इस नयी पहेली को सुलझाने की कोशिश करने लगा। लेकिन बहुत देर सर खपाने के बाद भी इस पहेली का कोई हल उसे समझ में नहीं आया। एक तरफ नेहा थी, उसकी स्कूल की दोस्त। जिसने अक्सर मैथ के सवाल हल करने में उसकी मदद की थी। और उससे पूरी हमदर्दी रखती थी। दूसरी तरफ माँ थी जिसने उसे जन्म दिया था, उसकी हमेशा हर ख्वाहिश को पूरा किया था और जब जब वह किसी मुश्किल में पड़ा तो उसकी माँ ने आसानी से उसे उस मुश्किल से उबार लिया। फिर तीसरा वह राक्षस था जो खुद ही कोई नयी मुसीबत मालूम हो रहा था। लेकिन इस मायावी दुनिया का कोई भरोसा नहीं। वही वास्तविक मददगार भी हो सकता था।

बहुत देर सर खपाने के बाद भी जब वह किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका तो उसने अपने सामने मौजूद संरचना पर दृष्टि की और सोचने लगा कि आखिर इस तरह की संरचना क्या सोचकर बनायी गयी। एकाएक उसकी अक्ल का बल्ब रोशन हो गया। उसे अफसोस हुआ कि उसने इस संरचना पर पहले गौर क्यों नहीं किया। यह संरचना तो खुद ही सही मददगार की ओर इशारा कर रही थी।

दरअसल यह संरचना एक गणितीय समीकरण को बता रही थी। वह समीकरण क्यूबिक इक्वेशन थी। अगर उस अज्ञात दरवाज़े को एक्स माना जाता तो नीचे का सफेद क्यूब पाजि़टिव एक्स क्यूब बना। फिर उसके ऊपर काला स्क्वायर निगेटिव एक्स स्क्वायर हो गया। उसके ऊपर सफेद छड़ पाजि़टिव एक्स को बता रही थी और फिर सबसे ऊपर निगेटिव वन था। इस तरह यह क्यूबिक समीकरण मुकम्मल हो रही थी। अब जहाँ तक रामू को जानकारी थी कि इस क्यूबिक समीकरण के दो हल तो काल्पनिक मान रखते हैं और एक ही हल वास्तविक होता है और इस वास्तविक हल का मान वन के बराबर होता है।

इसका मतलब ये हुआ कि बाग़ में मौजूद तीनों प्राणी इस क्यूबिक समीकरण के तीन हल थे। और इस समीकरण को ज़ीरो करने के लिये यानि दरवाज़े को खोलने के लिये उनमें से एक को साथ लाना ज़रूरी था। लेकिन अगर रामू गलती से काल्पनिक मान को ले आता तो समीकरण रूपी संरचना के अन्दर जाते ही वह खुद भी काल्पनिक बन जाता और उसका वास्तविक दुनिया से हमेशा के लिये नाता टूट जाता। जबकि वास्तविक मान को साथ में लाकर वह दरवाज़ा भी खोल लेता और वास्तविक दुनिया में भी मौजूद रहता। 

अब वह सोचने लगा कि उन तीनों में से कौन से दो मान काल्पनिक हो सकते हैं थोड़ा दिमाग लगाने पर यह राज़ भी उसपर खुल गया। थोड़ी देर पहले नेहा ने उससे कहा था, ''मुझे कौन कैद कर सकता है। उसे तो मेरा आभास भी नहीं हो सकता।" 

इसका मतलब कि नेहा एक काल्पनिक मान के रूप में यहाँ मौजूद थी। क्योंकि काल्पनिक मान का वास्तविक दुनिया में आभास नहीं होता। और अगर नेहा काल्पनिक थी तो उसकी माँ भी काल्पनिक थी। वैसे भी दोनों का इस दुनिया में मौजूद रहना अक्ल से परे था। क्योंकि वह खुद तो सम्राट द्वारा वहाँ लाया गया था जबकि उन दोनों की वहाँ मौजूदगी का कोई कारण नहीं दिखाई देता था। 

वह दोबारा उन तीनों की ओर बढ़ने लगा। नेहा और उसकी माँ मुस्कुराने लगीं क्योंकि दोनों को लग रहा था कि रामू उनके ही पास आ रहा है। जबकि राक्षस के चेहरे पर पहले की तरह वीभत्स मुस्कान सजी हुई थी। 

2 comments:

vimla said...

आगे का इंतजार है

vimla said...

आगे का इंतजार है