Tuesday, July 16, 2013

मायावी गिनतियाँ : भाग 9

पीरियड अभी अभी खत्म हुआ था। नेहा अपनी सहेलियों पिंकी और तनु के साथ बाहर निकल आयी।
''आज क्लास में रामू नहीं दिखाई दिया, कहां रह गया?" नेहा ने इधर उधर देखा।
''कालेज तो आया था वह। कहीं चला गया होगा।" पिंकी ने ख्याल जाहिर किया।
''आजकल वह अजीब अजीब हरकतें कर रहा है। कभी गुमसुम हो जाता है तो कभी ऐसा मालूम होता है जैसे वह आइंस्टीन की तरह बहुत बड़ा साइंटिस्ट हो गया है।"

''लेकिन मैं देख रही हूं कि तू आजकल उसकी कुछ ज्यादा ही फिक्र करने लगी है। कहीं मामला गड़बड़ तो नहीं?" शोख अंदाज में कहा तनु ने।
''गड़बड़ कुछ नहीं। मुझे हैरत है कि अचानक वह इतना जीनियस कैसे हो गया?"
''गगन को भी हैरत है कि अचानक तूने उससे मुंह क्यों मोड़ लिया।"

''एवरीवन वान्टस बेस्ट। तुम लोगों को पता है कि मैं मैथ में कमजोर हूं। इसीलिए मैंने गगन को घास डाली कि वह मेरी हेल्प करेगा। लेकिन मुश्किल सवालों में वह भी फंस जाता है। बट रामू तो जबरदस्त है। आँख बन्द करके जवाब देता है। चाहे जितना मुश्किल सवाल ले जाओ उसके सामने।"
''लो हटाओ। तुम्हारा पुराना आशिक तो इधर ही आ रहा है।" पिंकी ने एक तरफ इशारा किया, जिधर से गगन चला आ रहा था। उसके हाथों में फूलों का एक गुलदस्ता था।

''यहां से जल्दी निकल चलो, वरना अभी जख्म बन जायेगा आकर।"
लेकिन इससे पहले कि वे वहां से खिसकतीं, गगन ने उन्हें देख लिया था और रुकने का इशारा भी कर दिया था। फिर वह तेजी से उनकी ओर आया।
''हाय नेहा! हैप्पी बर्थ डे।" उसने गुलदस्ता नेहा की ओर बढ़ाया।
''लगता है रामू ने गणित के साथ तुम्हारी मेमोरी भी चौपट कर दी है। मेरा बर्थ डे अगले महीने है।" नेहा ने उसकी तरफ हमदर्दी से देखा। उसे यकीन हो गया था कि रामू की कामयाबियों ने गगन का दिमाग उलट दिया है।

''मैंने पुरातन काल के शक संवत कैलेण्डर के हिसाब से तुम्हारे जन्म दिन की गणना की है। और उस कैलकुलेशन के हिसाब से तुम्हारा जन्म दिन आज ही है।"
''बड़ी मेहनत कर डाली तुमने तो। लेकिन मैं पहले ये कैलकुलेशन रामू से जँचवाऊंगी। अगर सही निकली तब तुम्हें थैंक्यू कहूंगी।" नेहा का ये जुमला गगन को सुलगाने के लिए काफी था। फिर नेहा तो आगे बढ़ गयी और वह वहीं खड़ा हाथ में पकड़े गुलदस्ते को गुस्से से घूरने लगा मानो सारी गलती उसी गुलदस्ते की है।
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बंदर बना रामू चूंकि अपने घर के चप्पे चप्पे से वाकिफ था, इसलिए वह आराम से अपने ड्राइंग रूम में पहुंच गया। अभी तक उसकी मुलाकात अपनी मम्मी से नहीं हुई थी। और पापा से इस वक्त मिलने का सवाल ही नहीं था। क्योंकि ये उनके आफिस का वक्त था।
उसने देखा सारी किताबें कायदे से रैक में सजी हुई थीं।
'शायद मेरे पीछे मम्मी ने ये सब किया है।' उसने सोचा। किताबों के बीच मैथ की टेक्स्ट बुक देखकर उसके तनबदन में आग लग गयी। उसी किताब की वजह से तो आज उसकी ये हालत हुई थी। अब न तो वो जानवरों के रेवड़ में शामिल था और न ही इंसानों के।

'मम्मी पापा ने मुझे कितना ढूंढा होगा।' उसे अफसोस हो रहा था, 'क्यों वह खुदकुशी करने के लिए भागा। उसके मम्मी पापा का क्या हाल होगा। मम्मी तो रो रोकर बेहाल हो गयी होगी।'
उसे किसी के आने की आहट सुनाई दी, और वह जल्दी से एक अलमारी के पीछे छुप गया। अन्दर दाखिल होने वाली उसकी मम्मी ही थी और किसी नयी फिल्म का रोमांटिक गाना गुनगुना रही थी।

'मम्मी तो पूरी तरह खुश दिखाई दे रही है। यानि उसे मेरे गायब होने का जरा भी दु:ख नहीं। पूरी दुनिया में किसी को मेरी परवाह नहीं।' दु:ख के साथ उसने सोचा और वहीं जमीन पर बैठ गया।
अब मम्मी ने वहां की सफाई शुरू कर दी थी।
''रामू, मैंने तुम्हारा नाश्ता लगा दिया है। जल्दी से कर लो वरना स्कूल की देर हो जायेगी।' मम्मी ने पुकार कर कहा और रामू को हैरत का एक झटका लगा। वह तो बंदर की शक्ल में वहां मौजूद था, फिर मम्मी किसे आवाज दे रही थीं?

''मम्मी मैं नाश्ता कर रहा हूं।" अंदर से आवाज आयी और रामू को एक बार फिर चौंकना पड़ा। ये तो हूबहू उसी की आवाज थी, जिसको मुंह से निकालने के लिए वह कई दिन से तरस रहा था।
"लेकिन यह कौन बहुरूपिया है जिसने उसकी जगह पर उसके घर में कब्जा जमा लिया है?" उसके दिल में उसे देखने की इच्छा जागृत हो गयी। लेकिन इसके लिए जरूरी था कि वह डाइनिंग रूम में पहुंचे और वह भी बिना किसी की नजर में आये। वरना वहां अच्छा खासा बवाल खड़ा हो जाता।
उसकी मां वहां सफाई करके निकल गयी। वह भी छुपते छुपाते उसके पीछे पीछे चला, यह देखने के लिए कि कौन सा चोर उसके बहुरूप में उसकी जगह घेरे हुए है।

जब वह डाइनिंग रूम के पास पहुंचा तो उसने स्कूल की ड्रेस में एक लड़के को बाहर निकलते देखा। लेकिन पीठ उसकी तरफ होने की वजह से वह उसकी शक्ल देखने से वंचित रहा। इससे पहले कि वह उसकी शक्ल देखने की कोशिश करता, लड़का साइकिल पर सवार होकर दूर निकल चुका था। उसी समय रामू को किसी के आने की आहट सुनाई दी और वह एक पुराने कबाड़ के पीछे छुप गया।
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.........continued