Saturday, July 27, 2013

मायावी गिनतियाँ : भाग 19


वक्त बीतता जा रहा था। लेकिन रामू के लिये ये वक्त बहुत ही सुस्त रफ्तार से गुज़र रहा था। एक एक सेकंड उसके लिये पहाड़ की तरह साबित हो रहा था। उसके हाथ अब अकड़ने लगे थे लेकिन फानूस से लटकने के सिवा उसके पास और कोई चारा नहीं था। यह मायावी दुनिया अजीब थी। वह पूरे जंगल को पार करके आया था और उसमें उसे किसी खतरनाक जानवर की झलक तक नहीं दिखी थी। दूसरी तरफ यह महल था जहाँ उसे उम्मीद थी कि खूबसूरत बेडस पर नर्म गददे लगे मिलेंगे, वहाँ ऐसे खतरनाक कीड़े मकोड़े व साँप बिच्छू। 

उसने बेबसी से फर्श की तरफ देखा जहाँ बहुत से साँप बिच्छू उसके ठीक नीचे मुंह फैलाकर खड़े हो गये थे और उसके टपकने का इंतिज़ार कर रहे थे। उसने जल्दी से फर्श पर से नज़रें हटा लीं और दीवार की ओर देखने लगा। लेकिन दीवार के नज़ारे ने उसकी हालत और खराब कर दी। उसपर इस डरावनी हक़ीकत का इज़हार हुआ कि वहाँ कुछ ऐसे कीड़े व साँप भी मौजूद थे जो दीवार पर चढ़ सकते थे। और वो आफतें दीवार पर चढ़कर लगभग छत तक पहुंचने वाली थीं और उसके बाद उस फानूस तक जिससे वह लटका हुआ था।

यानि बचने का कोई रास्ता नहीं था। हाँ मरने के उसके पास दो रास्ते थे। या तो वह फानूस को छोड़ देता। ऐसी दशा में नीचे के कीड़े मकोड़े फौरन ही उससे चिमटकर उसका काम तमाम कर डालते, या फिर वह उन कीड़ों का इंतिज़ार करता जो छत से रेंगकर उसके पास आने वाले थे।

'क्या यहाँ भी बचने का कोई गणितीय फार्मूला मौजूद है?' उसके दिमाग़ में ये विचार पैदा हुआ। और इस विचार के साथ ही उसके दिल में उम्मीद की किरण फिर पैदा हो गयी। वह हाल में चारों तरफ नज़रें दौड़ाने लगा और गौर से एक एक चीज़ को देखने लगा। फिर उसकी नज़र छत से लटकते एक छल्ले पर जम गयी।

वैसे तो हाल की छत से बहुत से फानूस लटक रहे थे। और उनका लटकना कोई हैरत की बात नहीं थी। लेकिन उन फानूसों के बीच में एक छल्ले का लटकना ज़रूर अजीब था। फिर उसने फर्श पर रेंगते कीड़ों और साँप बिच्छुओं को भी जब गौर से देखा तो उसे उनमें एक खास बात नज़र आयी।

वह सभी कीड़े मकोड़े साँप व बिच्छू रेंगते हुए किसी न किसी गणितीय अंक के आकार को बना रहे थे। मसलन एक साँप इस तरह टेढ़ा होकर रेंग रहा था कि उससे 5 का अंक बन रहा था। कुछ बिच्छू इस तरह सिमटे थे कि उनसे 3 का अंक बना दिखाई दे रहा था। एक कीड़ा 8 के अंक के आकार में था तो दूसरा 9 के अंक के आकार में। जब ये कीड़े एक दूसरे के समान्तर रेंगते थे तो उनसे बनी संख्याएं भी साफ दिख जाती थीं। फर्श पर कहीं 1512 संख्या रेंगती हुई दिख रही थी तो कहीं 5234। कहीं कहीं तो पन्द्रह बीस अंकों की बड़ी संख्याएं भी दिख रही थीं।

''कमबख्तों ये जो तुम लोग इतनी बड़ी बड़ी संख्याएं बना रहे हो। अगर मुझे कहीं से ज़ीरो मिल जाये तो तुम सब को उससे गुणा करके ज़ीरो कर दूं।" रामकुमार ने दाँत पीसकर कहने की कोशिश की और इसी के साथ उसकी आँखों ने हाल में मौजूद ज़ीरो को पहचान भी लिया। छत में फानूसों के साथ लटकता वह स्पेशल छल्ला ठीक किसी ज़ीरो की तरह ही दिख रहा था। 

जिस फानूस से वह लटक रहा था उससे चार फानूस आगे जाकर वह छल्ला मौजूद था। लेकिन वहाँ तक पहुंचना भी अत्यन्त मुश्किल था। फर्श पर तो वह चल ही नहीं सकता था वरना ज़हरीले साँप बिच्छू फौरन ही उससे चिमट जाते। केवल एक ही रास्ता उसके सामने था। कि वह अपने फानूस से छलांग लगातार दूसरे फानूस तक पहुंचता और फिर तीसरे तक। इस तरह वह उस ज़ीरो नुमा छल्ले तक पहुंच सकता था। ये काम बहुत ही मुश्किल था लेकिन और कोई चारा भी नहीं था। 

'मरना तो हर हाल में है। फिर कोशिश करके क्यों न मरा जाये।' उसने सोचा और आगे वाले फानूस की तरफ छलांग लगा दी। उसकी ये छलांग कामयाब रही। वह आगे के फानूस पर पहुंच चुका था। पहली बार उसे अपने बन्दर के जिस्म पर गर्व महसूस हुआ। अगर उसके पास मानव शरीर होता तो इस छलांग में फानूस टूट भी सकता था और ये भी ज़रूरी नहीं था कि वह दूसरे फानूस तक पहुंच ही जाता।

इस कामयाबी ने उसका उत्साह दोगुना कर दिया और उसने फौरन ही दूसरी छलांग लगा दी। हालांकि इसमें वह थोड़ी जल्दी कर गया था और तीसरा फानूस उसके हाथ से छूटते छूटते बचा था। उसके दिल की धडकनें एक बार फिर बढ़ गयीं। 
अभी भी वह ज़ीरो नुमा छल्ला उससे दो फानूस आगे था। इसबार उसने संभल कर छलांग लगायी और एक फानूस और कामयाबी के साथ पार कर लिया। फिर अगला फानूस पार करने में भी उसे कोई परेशानी नहीं हुई। अब उसकी आँखें सिर्फ उस चमकदार छल्ले को देख रही थीं।

'बस एक छलांग और फिर ये ज़ीरो मेरे हाथों में होगा।' उसने एक पल में सोचा और दूसरे पल में छल्ले की ओर छलांग लगा दी। लेकिन जैसे ही उसके हाथों ने छल्ले को पकड़ा। छत से लटकते छल्ले की ज़ंज़ीर टूट गयी और वह छल्ले को लिये दिये फर्श पर आ गया।

2 comments:

kamlesh kumar diwan said...

achcha projection hai

Ashugeet Mukul Singh said...

Very intresting.. Agla part kholne me lag raha samay.. Mujhe or b jada sochane k liye majbur kar raha h ki.. Aage kya hoga? :-/