Friday, July 19, 2013

मायावी गिनतियाँ : भाग 12


तीनों लड़कों के मुंह उतरे हुए थे। अग्रवाल सर के ड्राइंग रूम में अमित, गगन और सुहेल की तिकड़ी मौजूद थी। तीनों अग्रवाल सर के आने का इंतिजार कर रहे थे।
''आखिर कहां से आ गयी रामू में इतनी पावर?" अमित हाथ मलते हुए बोला।
''कहीं उसकी बात सच तो नहीं?" सुहैल ने आँखें फैलाते हुए सबकी तरफ देखा।

''कौन सी बात?"
''यही कि अल्लाह उसके ऊपर मेहरबान हो गया है, और उसे ताकत बख्श दी है?"
''जबरदस्ती की मत उड़ाओ। भला अल्लाह उसे ताकत क्यों देने लगा!" अमित ने सुहेल को घूरा।
''लेकिन अगर तुम गहराई से सोचो। जो रामू क्लास का सबसे घोंचू लड़का था, वह गणित में एकाएक इतना तेज़ हो गया कि अग्रवाल सर को मात देने लगा। फिर उसने मिसेज कपूर का फोन सिर्फ पेन की नोक की मदद से ठीक कर दिया। उसके इक्ज़ाम में जो कुछ आने वाला था वह उसको पहले से पता चल गया। और अब यह ताज़ा घटना।......"

दोनों ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया। वे भी अन्दर ही अन्दर सुहेल की बात से कायल थे।
अग्रवाल सर ने अन्दर प्रवेश किया और तीनों उनके सम्मान में खड़े हो गये।
''बैठो बैठो तुम लोग। कहो क्या हाल है?"
''ठीक है सर।" गगन ने धीरे से कहा।

''क्या बात है, आज तुम लोग काफी बुझे बुझे नज़र आ रहे हो! क्या समस्या है?"
''सर समस्या तो हमारी एक ही है। रामू।"
''वह तो हम सब के लिए समस्या बन गया है। एक स्टूडेन्ट की नालेज टीचर से ज्यादा हो गयी है। कहीं स्कूल वाले मुझे निकालकर उसे टीचर न रख लें।" अग्रवाल सर के माथे पर चिन्ता की लकीरें साफ दिख रही थीं।
''लेकिन वो लोग ऐसा क्यों करेंगे? आपके पास तो क्वालिफिकेशन है। जबकि रामू तो अभी हाईस्कूल भी पास नहीं है।" गगन ने हमदर्दी से सर की ओर देखते हुए कहा।

''तुम इस स्कूल के ट्रस्टी को नहीं जानते। महाकंजूस और चीकट टाइप का है। अगर वो रामू को रखेगा तो इसे सैलरी भी कम देनी पड़ेगी और उसका काम भी हो जायेगा। वो मेरी क्वालिफिकेशन को चाटेगा भी नहीं।"
मामला वाकई गंभीर था। सभी अपनी अपनी जगंह सोच में पड़ गये।
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जबकि बन्दर बने असली रामू ने भरपेट खाना खा लिया था और अब उसे नींद आ रही थी।
''लगता है तुम काफी थक गये हो और अब तुम्हें नींद आ रही है।" मिसेज वर्मा ने उसकी तरफ देखा। रामू ने सहमति में सर हिलाया।
''मेरे साथ आओ।" मैं तुम्हारे सोने का इंतिजाम कर देती हूं।

मिसेज वर्मा ने किचन से बाहर जाने के लिये कदम बढ़ाया। रामू उसके पीछे पीछे हो लिया। उसे देखकर सुखद आश्चर्य हुआ कि वह उसे रामू के यानि उसी के कमरे की तरफ ले जा रही थी।
'तो क्या मम्मी ने उसे पहचान लिया है? हो सकता है। भला कौन मां होगी जो अपने लाल को नहीं पहचानेगी।' वह ख़ुशी ख़ुशी उसके पीछे बढ़ने लगा। उसकी मम्मी रामू के कमरे के दरवाजे पर पहुंच गयी। 

लेकिन वहां न रुककर वह आगे बढ़ गयी। और एक छोटे से खुले स्थान के पास जाकर खड़ी हो गयी जो रामू के कमरे की बगल में मौजूद था। यहां एक पाइप था जो छत की तरफ गया हुआ था। उस पाइप से बरसात के मौसम में छत का गंदा पानी नीचे बहता था।

''तुम यहां आराम करो। मैं जाती हूं। कुछ और काम निपटाना है।" उसकी मम्मी वहाँ इशारा करके वहां से चली गयी और वह हसरत से उस छोटी सी गंदी जगह को घूरने लगा। उसके कमरे की एक खिड़की उसी तरफ खुलती थी और वह अक्सर उसका इस्तेमाल थूकने के लिए करता था। अब इस जगंह को आराम के लिए इस्तेमाल करना, उसे सोचकर ही उबकाई आ गयी।
लेकिन मरता क्या न करता। और कोई चारा ही न था। वह वहीं एक कोने में पसर गया। और कहते हैं नींद तो फांसी के तख्ते पर भी आ जाती है सो उसे भी थोड़ी ही देर में आ गयी।
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रामू बना सम्राट प्रिंसिपल के आफिस में दाखिल हुआ। प्रिंसिपल ने सर उठाकर उसकी तरफ देखा।
''क्या बात है रामकुमार?" प्रिंसिपल ने पूछा।
''मैडम मैं आपसे एक रिक्वेस्ट करना चाहता हूं।"
''लगता है तुम अग्रवाल सर की शिकायत लेकर आये हो। मैं जानती हूं कि वो तुम्हारे साथ बहुत ज्यादती कर रहे हैं। और तुम्हें परेशान कर रहे हैं। लेकिन तुम घबराओ मत। मैं बहुत जल्दी उन्हें हटाने वाली हूं। नये गणित के टीचर की वैकेन्सी अखबार में दे दी गयी है। जैसे ही कोई नया टीचर आयेगा, उन्हें हम हटा देंगे।"

''मैडम, मुझे अग्रवाल सर से कोई शिकायत नहीं। मुझे तो इस दुनिया के किसी जीव से कोई शिकायत नहीं।" रामू की बात पर प्रिंसिपल मैडम ने हड़बड़ा कर उसकी तरफ देखा, इस समय वह कोई बहुत ही पहुंचा हुआ सन्यासी लग रहा था। बल्कि एक अजीब सी रोशनी उसके चेहरे के चारों तरफ फैली हुई थी।
''क्या बात है रामकुमार? आज तुम कुछ बदले बदले दिखाई दे रहे हो।"

''हाँ मैडम। मैं वाकई बदल गया हूं। मैं क्यों बदला हूं यही बताने के लिए मैं आपके पास आया हूं।"
''तो फिर बताओ। ये सुनने के लिए मैं बेचैन हूं।"
''यहाँ पर नहीं मैडम। ये बात मैं पूरी दुनिया के सामने बताना चाहता हूं और उससे पहले पूरे स्कूल के सामने। आप प्लीज पूरे स्कूल में नोटिस निकलवा दीजिए कि रामू उन्हें कुछ खास बताना चाहता है।"

''ठीक है नोटिस निकल जायेगा।" मैडम रामू से कुछ ज्यादा ही इम्प्रेस हो चुकी थी इसलिए उसकी हर बात बिना चूँ चरा मान रही थी, ''मैं आज ही एनाउंस कर देती हूं कि कल की प्रेयर में सबको हाजिर होना अनिवार्य है। प्रेयर के बाद तुम अपनी बात उनके सामने रख देना।"
''ठीक है मैडम। जो बात मैं कहना चाहता हूं। उसके लिए प्रेयर के बाद का समय ही सबसे अच्छा है।" रामू मैडम को अपनी पहेली में उलझाकर बाहर निकल गया।
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