Thursday, September 9, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 69 (अंत से दूसरी किस्त)

सुंदरम ने फिर बोलना आरम्भ किया, ‘‘यह तो था साफ्ट प्रो के बचाव का प्लान। खोका ने भी अपने बचाव का प्लान बना लिया था। इसके लिये उसने राहुल को चुना। उसे खोका का सरगना घोषित करवाकर मार डाला जाता और फिर खोका की फाइल भी बन्द हो जाती। और यह आतंकवादी संगठन किसी नये नाम से उभर कर सामने आ जाता। किन्तु उसका यह प्लान राहुल के फरार के कारण फेल हो गया किन्तु इसके बाद भी खोका सुरक्षित था क्योंकि उसके बारे में कोई सुराग पुलिस के पास नहीं था।

फिर खोका ने एक चाल और चली। उसने इं-त्यागी को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया और यह काफी खतरनाक था। किन्तु खोका से कुछ गलतियां भी हुई जिन्होंने मुझे सही रास्ते पर लाने में काफी अहम भूमिका निभायी।
पहली गलती तो खोका ने ये की कि उसने शोरी को डायरेक्टर की आवाज़ में एक बार फिर फोन किया जब शोरी पुलिस की दृष्टि में संदिग्ध् हो चुका था। शायद खोका को यह मालूम नहीं था क्योंकि उसने यह फोन बी-सी-ओ- की पोजीशन और गिराने के लिये किया था। वह मकान हमारी दृष्टि में आ गया। किन्तु खोका को इं-त्यागी द्वारा यह बात मालूम हो गयी और इस प्रकार वह हमारे हाथ से निकल गया।
खोका की दूसरी गलती यह थी कि वह सदैव एक ही हुलिये में सबसे मिला, चाहे वह जोगासिंह रहा हो, चाहे इं-त्यागी और चाहे रामदयाल---।’’

‘‘एक मिनट मि0सुंदरम’’, जिम टेलर बोला, ‘‘अभी आपने कहा कि खोका एक संगठन का नाम है और अब कह रहे हैं कि वह एक ही हुलिये में सबसे मिलता था। इससे तो यह कन्फ्यूजन हो रहा है कि खोका किसी व्यक्ति का नाम है।’’

‘‘आपने अच्छा प्रश्न किया मि0टेलर। वास्तव में खोका को हम एक संगठन भी कह सकते हैं और एक व्यक्ति भी। क्योंकि यह संगठन केवल एक व्यक्ति है। वही व्यक्ति इस संगठन का सरगना भी है और वही सदस्य भी। उसके अलावा जितने व्यक्ति भी उस संगठन के लिये काम कर रहे हैं वह या तो किसी मजबूरीवश कर रहे हैं या ब्लैक मेलिंग द्वारा उनसे काम लिया जा रहा है।’’ 
‘‘वह व्यक्ति कौन है मि0सुंदरम?’’ शोरी ने पूछा।

‘‘अभी आपको स्वयं ही मालूम हो जायेगा। मैं यह कह रहा था कि जोगासिंह द्वारा यह बताने पर कि एक विशेष हुलिये का व्यक्ति उससे मिलता है, हम लोगों ने ऐसे व्यक्ति की तलाश आरम्भ कर दी। फिर एक दिन मेरे एक साथी जिसे हम सरलता के लिये मि0डी कह सकते हैं, ने इं-त्यागी को उस हुलिये के व्यक्ति से बातचीत करते देख लिया। उस दिन से इं-त्यागी हमारे लिये संदिग्ध् हो गया। फिर इं-त्यागी की उस व्यक्ति से मुलाकातों पर दृष्टि रखी गयी और इसमें मि0डी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। जल्द ही मालूम हो गया कि इं-त्यागी को भी ब्लैकमेल किया जा रहा है। अभी हम उस व्यक्ति पर हाथ नहीं डालना चाहते थे क्योंकि यह मालूम नहीं था कि वही खोका का चीफ है। फिर मि0डी की इन्फारमेशन पर हमने रामदयाल को कब्रिस्तान से पकड़ा और उसके बाद इं-त्यागी ने भी मुंह खोल दिया। किन्तु अभी भी हमारे पास कोई सुबूत, कोई जानकारी नहीं थी।’’ सुंदरम का गला सूखने लगा था अत: उसने एक गिलास पानी और पिया।

‘‘मि0सुंदरम’’, जिम टेलर बोला, ‘‘आपने अभी कहा कि साफ्ट प्रो के कुछ जासूस हमारी कंपनी में हैं। क्या आप उनकी पहचान बता सकते हैं?’’

‘‘नहीं। यह बात तो सिंगली को भी नहीं मालूम होगी कि उसकी कंपनी के जासूस दूसरी कंपनी में हैं। यह बात केवल लिपमान को मालूम है क्योंकि वे जासूस उसी को सूचनाएं देते हैं। लिपमान इसे स्थानीय सहयोगी कंपनी द्वारा भेजी गयी सूचनाओं का नाम देता है। जबकि स्थानीय सहयोगी कंपनी का कोई अस्तित्व नहीं है।’’
सिंगली ने लिपमान की ओर देखा किन्तु बोला कुछ नहीं।

‘‘फिर एक दिन खोका का पीछा करते हुए एक नयी इमारत का पता चला। उस इमारत की तलाशी ली गयी और हमारा काम पल भर में हो गया। ऐसा काम जो पहले असंभव लग रहा था। उस तलाशी में न केवल खोका के असली व्यक्तित्व का पता चला बल्कि वह सारे सुबूत भी मिल गये जो खोका को सींखचों के पीछे पहुंचाने के लिये काफी थे। और इन सुबूतों के बाद ही हमने आप लोगों को यहां बुलाया। अब आप सोच रहे होंगे कि खोका का वह सरगना कौन है? तो इसके लिये आप एक दूसरे का चेहरा देख सकते हैं। क्योंकि वह सरगना अब अपने चेहरे से ही पहचाना जा सकता है। क्यों मि०गिरधारीलाल  आप अपनी कुर्सी पर पहलू क्यों बदल रहे हैं!’’

लोगों की दृष्टि एक साथ गिरधारीलाल की ओर उठ गयी जो अपनी कुर्सी पर बैठा हुआ हांफ रहा था। उसका चेहरा पसीने से तर था। फिर उसने उठ कर भागने की कोशिश की लेकिन वहां मौजूद सुंदरम के आदमियों ने उसे पकड़ लिया।

‘‘गिरधारीलाल, अच्छा हुआ हमारे आदमियों ने यहां मौजूद सारे लोगों के पर्सनल हथियार बाहर ही रखवा लिये थे वरना तुम्हारे जैसा खोका का सरगना भागने की कोशिश में दो चार कत्ल तो कर ही देता।’’ सुंदरम ने मुस्कुराते हुए कहा।

गिरधारीलाल कुछ नहीं बोला। उसके हाथों में हथकड़ियां पहनाकर अलग कुर्सी पर बिठा दिया गया।

‘‘मि0सुंदरम अभी आपने जो कुछ बताया है उससे साफ्ट प्रो का उद्देश्य तो पता चलता है किन्तु गिरधारीलाल का नहीं। उसका क्या उद्देश्य था? किस कारण से उसने खोका संगठन बनाया था?’’ जिम टेलर ने पूछा।
‘‘उसके उद्देश्य का सम्बन्ध् कुछ कुछ जगदीश कुमार से है।’’ सुंदरम ने कहा।
‘‘मुझसे? मुझसे भला क्या सम्बन्ध् हो सकता है?’’ जगदीश कुमार ने घबराकर कहा।

‘‘कहानी उस समय से आरम्भ होती है जब तत्कालीन सरकार के एक मन्त्री के लड़के ने कुछ मर्डर कर दिये। लड़के के खिलाफ सारे सुबूत मिल चुके थे किन्तु गिरधारीलाल जो उस मन्त्री का दोस्त था, उसने पैसा लेकर पुलिस का मुंह बन्द कर दिया। उस केस की तफ्तीश इं-त्यागी कर रहा था। जगदीश कुमार को इसका पता चल गया अत: उसने नाराज़ होकर गिरधारीलाल से सम्बन्ध् तोड़ लिये और विपक्षी पार्टी में शामिल हो गया। फिर वह विपक्षी पार्टी सत्ता में आ गयी।

गिरधारीलाल जगदीश कुमार को नीचा दिखाना चाहता था और साथ ही उसमें मन्त्री बनने की लालसा थी। किन्तु इसके लिये उसे अपनी पार्टी में शामिल होकर प्रभावशाली व्यक्तित्व बनना था। और इसके लिये ज़रूरी था पैसा और सीधा सादा व्यक्तित्व। अत: उसने अपना दोहरा व्यक्तित्व बनाया। एक सीधा सादा कम्प्यूटर कंपनी का मालिक और दूसरा खोका का चीफ। खोका के चीफ की हैसियत से उसने पैसा इकट्‌ठा करना शुरू किया। फिर अज्ञात कंपनी ने उसे अपने उद्देश्य के लिये मुंहमांगा पैसा देना स्वीकार कर लिया और गिरधारीलाल ने उसके लिये काम करना शुरू कर दिया। मैंने आरम्भ में कहा था कि यदि सरकार उसकी माँग स्वीकार न करती तब भी उसे लाभ होता। क्योंकि इस दशा में वह यह मुद्दा जनता में उठाता और इसी मुद्दे के बल पर वह पार्टी में एक प्रभावशाली व्यक्ति बनने की सोच रहा था।’’ सुंदरम मौन हो गया।

फिर लिपमान बोला, ‘‘तुमने खोका के विरुद्ध तो सुबूत एकत्र कर लिये किन्तु मेरी कंपनी के विरुद्ध क्या सुबूत है कि वह इस काम में शामिल थी?’’ 

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