Thursday, September 2, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 66

‘‘लगता है पुलिस हमें भूल चुकी है। अब तक उसे हम तक पहुंच जाना चाहिए था।’’ राहुल बोला। उससे थोड़ी दूर पर जग्गू लेटा हुआ छत को घूर रहा था।
‘‘अर्थात तुम चाहते हो कि पुलिस हमें गिरफ्तार कर ले। चुपचाप पड़े रहो ओर मौज करो। क्या करोगे वापस जेल जाकर।’’ जग्गू बोला। 

‘‘मेरा यह मतलब नहीं था। मैं तो यह कह रहा था कि---’’
‘‘हाँ हाँ मैं समझता हूं तुम्हारा मतलब। अरे पुलिस को असली अपराधी मिल गये सो वह हमें भूल गयी।’’
‘‘मैं तो सोच भी नहीं सकता था कि रामदयाल ऐसा कर सकता है। वह तो मेरे बचपन का मित्र था और मेरे साथ ही छल कर गया।’’

‘‘हर आदमी पहले अपना भला देखता है। कमज़ोर व्यक्ति तो अपना नुकसान सह लेता है मजबूरीवश किन्तु शक्तिशाली अपना गला कटते समय इस बात की परवाह नहीं करता कि कितने कमज़ोर उसके पैरों तले आ रहे हैं। और वे उसके मित्र हैं या दुश्मन ।’’

‘‘मैं तो ऐसा नहीं समझता। तुम भी तो हो, मेरी सहायता करने में तुम्हारा क्या स्वार्थ है?’’
‘‘यह तुम कैसे कह सकते हो कि मेरा कोई स्वार्थ नहीं है। हो सकता है मेरा कोई स्वार्थ हो जिसे तुम न जानते हो।’’
‘‘फिलहाल तो मैं यही जानता हूं। बाद में देखा जायेगा जब तुम अपने स्वार्थ के बारे में बताओगे।’’

‘‘बिना तुम्हें बताये भी मेरा स्वार्थ सिद्ध हो सकता है। और हो रहा है। अब तुम सो जाओ क्योंकि आज रात को एक मकान की तलाशी लेनी है।’’
‘‘क्या रामदयाल के मकान की?’’
‘‘नहीं। वह दूसरा मकान है।’’ जग्गू ने कहा।
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‘‘मि0त्यागी इस केस में हम अभी तक असली अपराधी को नहीं पकड़ सके हैं। रामदयाल को पकड़ने के बाद हम फिर अन्धकार में आ गये।’’ सुंदरम ने कहा। इं0त्यागी अभी अभी कहीं से आया था।
‘‘क्या कब्रिस्तान या उस कंकाल से कोई सूत्र हाथ नहीं लगा?’’

‘‘नहीं। मि0त्यागी, आपका उस केस पर काम कहां तक पहुंचा? शायद उसी सिलसिले में आप इस समय कहीं से आ रहे हैं।’’
‘‘मैं भी इस केस में उसी प्रकार अन्धकार में हूं जिस प्रकार आप। वह संगठन बहुत चालाक है अभी तक हम उन्हीं लोगों के पास पहुंचे हैं जिन्हें वह ब्लैकमेल कर रहा था या उनका कोई महतव नहीं था।'' 

''लेकिन मि0त्यागी मैं समझता हूं कि आप खोका संगठन के किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति तक पहुंच चुके हैं। क्या काला चश्माधारी वह व्यक्ति खोका संगठन में महत्वपूर्ण नहीं है?’’ सुंदरम ने इं0त्यागी के चेहरे पर दृष्टि जमाकर कहा। इं0त्यागी यह बात सुनकर चौंक उठा था।
‘‘मैं समझा नहीं कि आप किस काले चश्माधारी की बात कर रहे हैं।’’

‘‘क्या तुम इस समय उससे मिलकर नहीं आ रहे हो? क्या तुम्हें यह काम नहीं दिया गया है कि पुलिस इस केस में क्या कर रही है, इसकी सूचना वहां तक पहुंचाओ?’’ सुंदरम ने कहा। इं0त्यागी की हालत ऐसी हो गयी थी मानो उसके ऊपर बम गिरा दिया गया हो। वह कुछ नहीं बोला।

‘‘यदि एक पुलिस इंस्पेक्टर अपराधियों के हाथों ब्लैक मेल होने लगे तो इससे बड़ा अपमान पुलिस का क्या होगा। अब पुलिस का चरित्र इतना गिर गया है कि एक अपराधी उसकी कमजोरियों से लाभ उठाकर उसे ब्लैक मेल कर रहा है।’’ सुंदरम के चेहरे पर क्रोध् के भाव थे।
‘‘तो आपको सब कुछ मालूम हो चुका है।’’ इं0त्यागी ने धीरे से कहा।

‘‘हाँ। मैंने अपनी आँखें न केवल सामने के दृश्य देखने के लिये प्रयोग कीं बल्कि अपने शरीर पर भी दृष्टि रखी। क्या मैं ब्लैक मेलिंग का कारण पूछ सकता हूं?’’
इं-त्यागी कुछ देर मौन रहा फिर बोला, ‘‘दो वर्षों पहले एक केन्द्रीय मन्त्री के लड़के ने कुछ मर्डर किये थे। मैं उस केस में असली अपराधी तक पहुंच गया था किन्तु फिर मन्त्री ने रिश्वत तथा पद का उपयोग करते हुए वह फाइल बन्द करा दी। खोका को ऐसे सुबूत मिल गये हैं जिससे यह पता चलता है कि वह फाइल क्यों बन्द कर दी गयी। यदि यह बात खुल जाती तो न केवल मेरी नौकरी जाती बल्कि मुझे जेल भी हो जाती चूंकि आजकल विरोधी पार्टी सत्ता में है। अत: मैं उसका कहा मानने पर मजबूर हो गया।’’

‘इस समय मैं तुम्हारे विरुद्ध कोई कार्यवाई नहीं कर सकता। क्योंकि इससे न केवल पुलिस की बदनामी होगी बल्कि हम अपराधी तक भी नहीं पहुंच पायेंगे। तुम अपने पद पर बने रहोगे बशर्ते कि फिर कभी ऐसी गलती मत करो।’’
‘‘मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि फिर कभी न तो मैं रिश्वत लूंगा और न सच्चाई पर पर्दा डालने का प्रयत्न करूंगा।’’ इं0त्यागी ने धीरे से कहा।

‘‘तुम्हें फिलहाल काले चश्माधारी से उसी प्रकार मिलते रहना है। उचित अवसर देखकर हम उसपर हाथ डाल देंगे। अब तुम जा सकते हो।’’ सुंदरम ने कहा और इं0त्यागी वहाँ से उठ गया।
इं0त्यागी के जाने के बाद सुंदरम उठकर कमरे में टहलने लगा और साथ ही सिगरेट भी फूंक रहा था।
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