Wednesday, September 1, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 65

रामदयाल ने पानी पीकर फिर बोलना शुरू किया, ‘‘राहुल नये मकान में पहुंच गया और उसी दिन भूतों का ड्रामा उस मकान में खेला गया। उद्देश्य यही था कि राहुल उन भूतों की बात फैला दे और फिर तलाशी लेने पर वह पेटियां मिल जायें। इस दशा में राहुल को गिरफ्तार कर लिया जाता। चूंकि पुलिस को अभी तक खोका के बारे में कोई सुराग नहीं मिला था अत: उसे राहुल को हर हाल में गिरफ्तार करना था और यही हुआ भी। उसके बाद की योजना यह थी कि राहुल को आत्महत्या द्वारा खोका का सरगना सिद्ध कर दिया जाता और पुलिस को खोका की ओर से चैन हो जाता।

किन्तु राहुल के फरार हो जाने के कारण यह योजना फेल हो गयी और शायद इसी कारण मैं आज पुलिस के बंधन में हूं।’’ रामदयाल ने बोलना समाप्त किया।
‘‘तुम खोका संगठन के उस व्यक्ति को पहचान सकते हो जो तुमसे मिला था?’’ सुंदरम ने पूछा।

‘‘नहीं। क्योंकि वह ऐसे हुलिये में मुझसे मिला था जिसमें उसका पूरा शरीर छुपा हुआ था।’’
फिर सुंदरम ने सिपाहियों को रामदयाल को ले जाने का संकेत किया और स्वयं भी उठ गया। इं-त्यागी कहीं गया हुआ था।

कुछ देर बाद सुंदरम की कार लैबोरेट्री की ओर जा रही थी। वह देखना चाहता था कि उस कंकालनुमा रोबोट के बारे में वैज्ञानिकों ने क्या निष्कर्ष निकाला।
‘‘वह विशेष प्रकार का रोबोट है।’’ रोबोट का निरीक्षण करने वाले वैज्ञानिकों में से एक ने कहा, ‘‘उसको रिमोट कण्ट्रोल द्वारा दूर से नियन्त्रित किया जाता है। वह न केवल रोबोट है बल्कि एक ट्रान्स्मीटर भी है जिसपर उसे कण्ट्रोल करने वाला व्यक्ति रोबोट के सामने वाले व्यक्ति से बातचीत कर सकता है।’’

‘‘क्या आप बता सकते हैं कि उस ट्रान्समीटर की फ्रीक्वेंसी क्या थी?’’ सुंदरम ने पूछा।
‘‘उस ट्रान्समीटर की फ्रीक्वेंसी सात दशमलव पाँच पाँच मिलीहर्त्स थी।’’ उस वैज्ञानिक ने चार्ट देखकर बताया।
‘‘यह रोबोट चलते चलते अचानक रुककर आगे पीछे झूलने लगा था। क्या आप इसका कारण बता सकते हैं?’’
‘‘हाँ। इसका राडार अर्थात आँखें नष्ट हो गयी थीं। जिससे यह दिशाहीन हो गया था। और इसका कारण था दो गोलियां जो इसकी दोनों आँखों पर पड़ी थीं। यह गोलियां मैंने इसके मस्तिष्क से निकाली हैं।’’

‘‘ओह।’’ सुंदरम मौन होकर कुछ सोचने लगा। फिर वह वहाँ से चला आया।
अब उसकी कार कब्रिस्तान की ओर जा रही थी। वह यह देखना चाहता था कि रोबोट किस स्थान से निकलकर रामदयाल के पास आता था। कब्रिस्तान पहुंचकर वह पेड़ों के उस झुरमुट की ओर जाने लगा जिध्रा से रोबोट निकलकर आया था। उस झुरमुट के दूसरी ओर अनेक पुरानी टूटी फूटी कब्रें थीं जिनके तख्ते सड़ गल कर नीचे बैठ चुके थे। कुछ सोचकर वह उन कब्रों को ध्यान से देखने लगा। फिर एक कब्र के पास जाकर वह ठिठक गया।
‘इस कब्र में लगता है अलग से मिट्‌टी डाली गयी है क्योंकि यह जमी हुई नहीं है। ’ उसने अपने मन में कहा। 

फिर कुछ सोचकर वह दोनों हाथों से मिट्‌टी हटाने लगा। थोड़ी मिट्‌टी हटने के बाद उसकी दृष्टि एक सूराख पर पड़ी। उसका मुंह इतना चौड़ा था कि उसका हाथ आराम से अन्दर जा सकता था। उसने अपना हाथ अन्दर डाला, जो कलाईयों तक अन्दर चला गया। फिर उसने अपना हाथ खींच लिया और हटाई गयी मिट्‌टी फिर उसी स्थान पर डालने लगा। यह कर चुकने के पश्चात उसने अपना मोबाइल निकाला और थाने का नंबर मिला दिया,

‘‘मैं सुंदरम बोल रहा हूं। दो तीन सिपाहियों को फावड़े और कुदाल के साथ यहाँ भेज दो। उसने कब्रिस्तान का पता बताते हुए कहा।
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