Tuesday, August 24, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 62

रामदयाल एक कब्र के पास ठहरकर अपने थैले से कुछ सामान निकाल रहा था। फिर उसने वहाँ आग जला दी और नीली लपटें उठने लगीं।
‘‘यह तो कोई और व्यक्ति है। कोई तान्त्रिक मालूम होता है।’’ राहुल ने लपटों के प्रकाश में उस व्यक्ति को देखकर कहा।

‘‘यह रामदयाल ही है। इस समय बदले वेश में है।’’ जग्गू ने स्पष्ट किया। वह व्यक्ति कुछ बड़बड़ा रहा था।
तभी पेड़ों के झुरमुट में से एक अस्थिपिंजर निकल कर रामदयाल की ओर बढ़ने लगा। जग्गू ने जल्दी से राहुल का मुंह दबा दिया वरना उसकी चीख निकल जाती।
‘‘चुपचाप बैठे रहो। क्या खेल बिगाड़ दोगे।’’ जग्गू ने राहुल के मुंह से अपना हाथ हटाते हुए कहा।
‘‘माफ करना। मैं अपने ऊपर नियन्त्रण नहीं रख पाया था।’’ राहुल का पूरा शरीर काँप रहा था।

‘‘हिम्मत रखो। वह नकली भूत है। यदि तुम इसी प्रकार काँपते रहो तो नीचे गिर जाओगे।’’ जग्गू की बात सुनकर राहुल की हिम्मत बंधी और उसका काँपना कम हो गया।
जब कंकाल रामदयाल के पास पहुंचा तो रामदयाल ने उसे कोई वस्तु पकड़ाई और कुछ बोलने लगा। वह कोई अजीब भाषा बोल रहा था।

अचानक पूरा कब्रिस्तान सर्चलाइट की रौशनी में नहा गया। रामदयाल अर्थात तान्त्रिक चौंक कर अपने चारों ओर देखने लगा। उसके आसपास चार पाँच सिपाही घेरा डाले खड़े थे। इन सिपाहियों के साथ जी-सुंदरम भी था।
‘‘रामदयाल, तुमको गुप्त दस्तावेज़ विदेशी हाथों में देने और खोका का कार्यकर्ता होने के आरोप में गिरफ्तार किया जाता है।’’ सुंदरम बोला।

‘‘यह सुंदरम कहाँ से टपक पड़ा।’’ जग्गू बोला।
‘‘यदि उसने हम लोगों को देख लिया तो हमारी भी खैर नहीं रह जायेगी।’’ राहुल ने कहा।
रामदयाल ने भागने की कोशिश की किन्तु सिपाहियों ने उसे पकड़ लिया। कंकाल के हाथ में अभी भी रामदयाल द्वारा दिया गया पैकेट दबा हुआ था। अचानक उस कंकाल ने उस दिशा में तेजी से चलना शुरू कर दिया जिधर से वह आया था।

‘‘उसे पकड़ो।’’ सुंदरम ने चीख कर कहा।
सिपाही उसे पकड़ने के लिये हिचकिचाने लगे क्योंकि आजतक उन्होंने किसी भूत को नहीं पकड़ा था।
‘‘वह भूत नहीं है बल्कि कोई मनुष्य है। कंकालाकृति का लबादा ओढ़े है।’’ सुंदरम सिपाहियों की हिचकिचाहट भांपकर बोला।

एक सिपाही आगे बढ़ा और उसने कंकाल के कंधे पर हाथ रख दिया, फिर वह एक जोरदार चीख के साथ पीछे उलट गया।
‘‘क्या हुआ?’’ बाकी सिपाही सुंदरम के साथ उसके पास दौड़े।
‘‘सर! वह तो करंट मार रहा है। बहुत तेज़ झटका खाया है मैंने।’’ सिपाही का चेहरा पीला पड़ गया था। 

‘‘ओह।’’ सुंदरम कंकाल की ओर देखने लगा, ‘‘उसपर गोली चलाओ।’’
सिपाहियों ने राईफलें सीधी कीं और कई गोलियां उसकी ओर दाग दीं किन्तु यह देखकर उसकी आँखें आश्चर्य से फैल गयीं कि उसपर गोलियों का कोई असर नहीं हुआ था।

‘‘लगता है उसने बुलेट प्रूफ पहन रखा है।’’ सुंदरम ने कहा और उसके पीछे दौड़ने लगा। उसके हाथ में रिवाल्वर आ गया था।
‘‘वह वास्तव में कोई भूत है।’’ राहुल, जो सारा दृश्य पेड़ पर से देख रहा था, बोला। जवाब में जग्गू कुछ नहीं बोला। राहुल ने पीछे घूमकर देखा तो जग्गू गायब था।
‘‘अरे जग्गू कहां चला गया!’’ वह व्याकुल होकर हर ओर दृष्टि दौड़ाने लगा। उसे नहीं पता था कि जिस समय वह कब्रिस्तान का दृश्य देखने में लीन था, जग्गू पेड़ से उतरकर कहीं चला गया था।
-------

No comments: