Wednesday, August 18, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 60

सुंदरम और इं-त्यागी की जीप रामदयाल के मकान के सामने जाकर रुकी। इं-त्यागी ने जीप से उतरकर घंटी बजायी।
कुछ देर बाद रामदयाल का नौकर बाहर निकला।
‘‘मि0रामदयाल हैं घर में?’’ इं-त्यागी ने पूछा। नौकर ने सकारात्मक रूप में सर हिला दिया। और उन्हें अन्दर आने को कहा। फिर उसने ड्राइंगरूम का दरवाजा खोल दिया और ये लोग वहाँ जाकर बैठ गये।

फिर थोड़ी देर बाद अन्दर से कुरता-पाजामा पहने रामदयाल ने प्रवेश किया। वह आकर उनके सामने सोफे पर बैठ गया।
‘‘फरमाईए मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूं?’’ उसने पूछा। सुंदरम ने अपना कार्ड उसके सामने किया।

‘‘जी-सुंदरम फ्राम सी-आई-डी।’’ उसने कार्ड पढ़ा, ‘‘ओह तो आप सी-आई-डी अफसर हैं। क्या किसी केस के सिलसिले में आप यहाँ आये हैं?’’
‘‘जी हाँ। एक केस के बारे में आपसे पूछताछ करनी है। मैंने सुना है आपका एक मित्र है राहुल।’’
‘‘राहुल। हाँ वह मेरे बचपन का मित्र है।’’

‘‘क्या आपको यह सूचना मिल चुकी है कि उसपर खोका संगठन का कार्यकर्ता होने के संदेह के कारण उसे गिरफ्तार किया जा चुका है?’’
‘‘जी हाँ। मैंने यह सुना था और यह भी सुना है कि अब वह जेल से फरार हो गया है। मैं कल ही बाहर से आया हूं और सोचता था कि उसकी ज़मानत के लिये कोशिश करूं किन्तु उससे पहले ही वह फरार हो गया।’’
‘‘मि0रामदयाल, आपका क्या विचार है? क्या राहुल अपराधी हो सकता है?’’

‘‘उसने मुझे जो कुछ अपने बारे में बताया अर्थात ये कि वह गाँव से पहली बार आया है और नौकरी की तलाश में है, उस आधार पर तो उसका अपराधी होना असंभव है। किन्तु कोई यह कैसे जान सकता है कि किसी के दिल में क्या है।’’

‘‘आपका मकान तो काफी सुंदर है मि0रामदयाल। क्या आप बहुत दिन से यहाँ कारोबार कर रहे हैं?’’ सुंदरम ने बात बदल दी।
‘‘मैं यहाँ दस वर्षों से हूं। और मेरा विचार है कि दस वर्ष काफी होते हैं। मेरा बिजनेस यहाँ काफी जम गया है।’’ रामदयाल ने कहा।

‘‘अभी कुछ दिनों पहले कम्प्यूटर द्वारा एक मर्डर किया गया था। आपने सुना होगा कि गृहमन्त्री की हत्या एक कम्प्यूटर प्रोग्राम द्वारा की गयी थी।’’ सुंदरम ने रामदयाल की आँखों में देखते हुए कहा। जिनमें सुंदरम की बात सुनकर एक पल के लिये कुछ विशेष भाव आये थे जो बाद में गायब हो गये।
‘‘हाँ, मैंने सुना था और मेरा विचार है कि यह खोका का ही काम था।’’

‘‘राहुल भी खोका से सम्बंधित माना जा रहा है। कुछ दिनों पहले राहुल यहीं रहता था?’’ सुंदरम ने पूछा।
‘‘हाँ। गाँव से आने के बाद राहुल कुछ दिन यहीं रहा।’’
‘‘उस दौरान उसकी गतिविधियाँ आपको कुछ संदिग्ध् नहीं लगीं?’’
‘‘नहीं। ऐसी तो कोई बात नहीं हुई किन्तु जब मैं अपने बिजनेस के सिलसिले में बाहर रहता था तो उस समय की उसकी गतिविधियों के बारे में मैं नहीं बता सकता।’’ रामदयाल ने कहा।
फिर सुंदरम ने और कोई प्रश्न नहीं किया और वे लोग उठ गये।
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