Saturday, August 7, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 57

‘‘तो जोगासिंह पकड़ लिया गया।’’ काले चश्माधारी व्यक्ति ने कहा। अभी अभी इं-त्यागी ने उसे यह सूचना दी थी।
‘‘हाँ। और उसे दोबारा आजाद कर दिया गया है तुम्हें अपने जाल में फंसाने के लिये।’’

‘‘खोका संगठन का कोई व्यक्ति इतनी आसानी से जाल में नहीं फंस सकता। जोगासिंह से मेरा काम निकल गया। अब मुझे उससे मिलने की कोई आवश्यकता भी नहीं है।’’ उस व्यक्ति का चेहरा भावहीन था।
इं-त्यागी कुछ नहीं बोला।
‘‘उस फोन के बारे में कुछ पता चला?’’ उस व्यक्ति ने दोबारा प्रश्न किया।

‘‘अभी नहीं। हम लोग इसी मामले में फंसे रह गये।’’
‘‘मेरा उद्देश्य तो पूरा हो गया। वह उद्देश्य जिसके लिये मैंने राहुल को जहर दिया था। वह उसकी फरारी से भी पूरा हो गया।’’ उस व्यक्ति ने कहा, फिर पास में खड़ी कार में बैठ गया।

उसके जाने के बाद इं-त्यागी ने एक टैक्सी रोकी और उसमें बैठकर थाने की ओर निकल गया।
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‘‘क्या उस अज्ञात फोन के बारे में कुछ पता चला?’’ इं-त्यागी ने सुंदरम से पूछा।
‘‘अभी नहीं। उसे पता करने के लिये सी.आई.डी. चीफ को कुछ खानापूरी करनी होगी और उसमें दो तीन दिन लग जायेंगे। उसके बाद भी हमें शोरी से मिलकर वह फोन नं-लेना होगा, तब उसका पता मालूम हो सकेगा।’’
‘‘ओह। यह तो बहुत लंबा मामला है। किन्तु हम शोरी से वह फोन नम्बर अभी क्यों नहीं ले लेते?’’

‘‘अभी ले लेने से यदि वह अपराधी है तो सतर्क हो जायेगा। फिर हम उसपर हाथ नहीं डाल सकेंगे। अभी उन्हें केवल शक होगा कि हमने वह काल टेप की या नहीं। फोन नम्बर की बात करने से उन्हें विश्वास हो जायेगा।’’
‘‘राहुल तथा उस कैदी का कुछ पता चला?’’

‘‘अभी नहीं। जब यहाँ की पुलिस कैदी को कैद में नहीं रख पायी तो स्वतन्त्र कैदी को कहाँ इतनी जल्दी पकड़ पायेगी।’’ सुंदरम ने व्यंग्यपूर्ण मुस्कुराहट के साथ कहा। फिर वह कुर्सी से उठ खड़ा हुआ।
‘‘कहाँ का इरादा है?’’ इं-त्यागी ने पूछा।

‘‘बी.सी.ओ. कम्पनी के डायरेक्टर के बँगले की निगरानी करने वाले सिपाही ने सूचना दी है कि डायरेक्टर आस्ट्रेलिया से लौट आया है। मैं उससे मिलने जा रहा हूं।’’
इं-त्यागी भी उसके साथ जाने के लिये उठ खड़ा हुआ।

जिस समय वे लोग डायरेक्टर के बँगले पर पहुंचे, वह घर पर ही था। उसने इन लोगों से ड्राइंगरूम में मुलाकात की।
डायरेक्टर जिम टेलर एक आस्ट्रेलियाई था और औसत शरीर का मालिक था।

‘‘मि0टेलर, आपने गृहमन्त्री की हत्या के बारे में तो सुना होगा।’’
‘‘जी हाँ। और मुझे दु:ख हुआ था। मेरा विचार है कि उनकी हत्या उस मीटिंग में हुई थी, जिसमें हमारा प्रोजेक्ट विचार के लिये दिया गया था।’’   

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