Wednesday, August 4, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 56

‘‘यह बात भी रामदयाल के संदिग्ध् होने के पक्ष में जाती है। उसे मालूम था कि तुम भूत देखकर वह मकान छोड़कर उसके पास जाओगे अत: उसने मकान को ताला लगा दिया ताकि तुम उसी मकान में रहने के लिये विवश हो जाओ और तुम्हें फंसाया जा सके।’’

राहुल कुछ सोचने लगा, फिर बोला, ‘‘शायद तुम ठीक कहते हो। मैंने अक्सर उसे रातों को संदेहास्पद अवस्था में फोन सुनकर बाहर जाते देखा था। कम्प्यूटर के बिजनेस में तो ऐसा नहीं होता कि आधी रात को उसे देखना पड़े। मेरा विचार है कि वह किसी जुर्म के सिलसिले में बाहर जाता था।’’
‘‘अब तुम्हारी बुद्धि कार्य कर रही है। इसी प्रकार सोचते रहो। मैं सोचता हूं कि तुम रामदयाल से मिल लो। मैं देखना चाहता हूं कि तुम्हें देखकर उसके चेहरे पर क्या भाव आते हैं।’’

‘‘ठीक है। चलो चलते हैं।’’ राहुल ने उठते हुए कहा।
‘‘ऐसे नहीं। पहले अपना हुलिया थोड़ा बदल लो। वरना पुलिस हमें धर पकड़ेगी और हमारी सारी स्कीम धरी रह जायेगी।’’ जग्गू उठा और राहुल के चेहरे पर नकली दाढ़ी मूंछें चिपकाने लगा। बालों का स्टाइल बदलने के बाद राहुल एक अलग ही रूप में दिखाई पड़ने लगा था। जग्गू ने भी अपना हुलिया बदला और वे लोग रामदयाल के पास जाने के लिये निकल पड़े। वहाँ तक जाने के लिये उन्होंने एक आटो रिक्शा चुना।

फिर जब वे सुनार की गली के पास उतरे तो जग्गू ने राहुल का हाथ पकड़ा और बोला, ‘‘वापस चलो।’’
‘‘क्यों?’’ राहुल ने आश्चर्य से कहा।

‘‘कुछ दूर पर इं-त्यागी खड़ा है। उसके साथ काला चश्मा लगाये एक अन्य व्यक्ति भी है। मेरा विचार है कि ये लोग रामदयाल से मिलने आये हैं अत: वापस चलो। बाद में आयेंगे।’’ जग्गू ने राहुल का हाथ पकड़ा और ये लोग टहलते हुए दूसरी दिशा में निकल गये।
‘‘तो फिर अब हम लोग क्या करें?’’ राहुल ने पूछा।

‘‘मैंने अपनी योजना बदल दी है। आज रात को हम लोग रामदयाल के घर पर धावा बोलेंगे। यानि उसके घर की तलाशी लेंगे।’’
‘‘तलाशी? लेकिन कैसे? क्या वह घर पर नहीं होगा?’’

‘‘उसके घर में हम लोग इस प्रकार घुसेंगे कि उसे कानों कान खबर भी नहीं होगी। और इसके लिये तुम्हें उस घर का पूरा नक्शा समझाना होगा। उसके बाद भी अगर उसने हमें पकड़ लिया तो उसे मारपीट कर बराबर कर देंगे। उसे मैं संभाल लूंगा और नौकर को तुम।’’

‘‘ठीक है। मैंने भी अपने गाँव में काफी लाठी चलायी है। आज यहाँ भी हाथ दिखा दूंगा।’’
‘‘यहाँ तुम्हें लाठी नहीं मिल पायेगी। तुम्हें खाली हाथों से दुश्मन को पछाड़ना होगा, और इस बात का ध्यान रखना होगा कि उनमें से किसी के मुंह से चीख न निकलने पाये वरना सब गड़बड़ हो जायेगी।’’ जग्गू ने एक आटोरिक्शा रोककर उसमें बैठते हुए कहा।
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