Monday, August 2, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 55

‘‘मैं जा रहा हूं वापस।’’ राहुल ने चाय की एक चुस्की लेकर कहा। वह जग्गू के साथ इस समय जलपान कर रहा था। ये लोग इस समय जिस स्थान पर बैठे थे वह एक छोटा सा मकान था।
‘‘कहाँ वापस जा रहे हो?’’ जग्गू ने चौंक कर पूछा।
‘‘जेल में।’’ राहुल ने जवाब दिया।

‘‘लगता है जेल के मच्छर तुम्हें कुछ अधिक पसंद आ गये। यह तुम्हारा दिमाग क्यों घूम रहा है? मैंने क्या अपने भागने के लिये इतने पापड़ बेले थे? मैंने सोचा अभी तुम्हारी उम्र ही क्या है जो जेल में पड़े हो। रहम आ गया तुम पर। और अब तुम मेरे सारे किये किराये पर पानी फेर रहे हो। क्यों भला?’’

‘‘बात ये है कि पुलिस हमें तलाश कर रही है। कभी न कभी वह हमें ढूंढ ही लेगी। फिर हमें दोहरे जुर्म में सजा होगी। इससे अच्छा है कि हम आत्मसमर्पण कर दें।’’
‘‘दोहरा जुर्म तो अब हो ही चुका है। अब यदि तुम जेल वापस जाओगे तो पुलिस तुम्हारा स्वागत नहीं करेगी बल्कि दूनी सख्ती करेगी। इसलिये जेल जाने का विचार त्याग दो। मैं तुम्हारी सहायता करना चाहता हूं और उन लोगों को ढूंढना चाहता हूं जिन्होंने तुम्हें फंसाया है।’’

‘‘किन्तु तुम यह सब मेरे लिये क्यों करना चाहते हो?’’ राहुल ने पूछा।
‘‘इसलिये क्योंकि तुम मुझे पसंद आ गये हो। मैं तुम्हें अपना शिष्य बनाना चाहता हूं। अच्छा अब ये सब बातें छोड़ो और काम की बातों पर आओ। मेरा विचार हे कि तुम ब्राह्मण हो।’’
‘‘तुम्हारा विचार सत्य है। किन्तु इसका काम की बात से क्या सम्बन्ध्?’’

‘‘अभी सम्बन्ध् भी बन जायेगा। अगर तुम ब्राह्मण हो तो तुमने अण्डा खाना कब से आरम्भ कर दिया?’’
‘‘बात ये है कि बचपन में अपने दोस्त रामदयाल के सम्पर्क में रहा। वह अण्डा माँस सभी कुछ खाता था। उसकी संगत में रहकर मैं भी यह सब चीजें खाने लगा। हालांकि मेरे घर के अन्य लोग पक्के शाकाहारी हैं।’’

‘‘हुम्म। यहां आकर तुम खाना कहां खाते थे?’’ जग्गू ने अगला सवाल किया।
‘‘शुरू में तो रामदयाल के घर में। बाद में दो तीन बार होटल में भोजन किया।’’
‘‘होटल में तुमने शाकाहार लिया या माँसाहार?’’
‘‘वहां तो मैंने शाकाहार लिया। क्योंकि स्वभाव से मैं अब भी शाकाहारी हूं। अण्डा वगैरा तो कभी कभी ही लेता हूं।’’

‘‘तो इस तरह देखो, मैंने मुजरिम पकड़ लिया।’’
‘‘क्या मतलब?’’ राहुल ने आश्चर्य से पूछा।

‘‘मतलब ये कि रामदयाल भी मुजरिमों से मिला हुआ है। केवल उसी को पता है कि तुम अण्डा खाते हो और जोगासिंह अण्डे में पोटेशियम सायनाइड मिलाकर लाया था। उसे मालूम था कि अण्डा देखकर पहले तुम वही खाओगे। क्योंकि अगर कभी कभी माँसाहार करने वाले व्यक्ति के सामने इस प्रकार की कोई वस्तु आ जाये तो वह पहले वही खाता है। और यदि पहले न भी खायें, तो उसे अवश्य खाता है बशर्ते कि उसका पेट न गड़बड़ हो।’’ जग्गू ने चुटकी बजाते हुए कहा।

‘‘किन्तु वह तो कई दिनों से बाहर गया है। भूत देखकर जब मैंने वह मकान छोड़कर रामदयाल के यहाँ जाना चाहा तो वहाँ पता चला कि वह बाहर गया हुआ है।’’

2 comments:

seema gupta said...

अण्डे में पोटेशियम सायनाइड ????
" बेहद रोचक "

regards

Shah Nawaz said...

बेहतरीन एवं रोचक..... बहुत खूब!