Thursday, July 15, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 49

इं-त्यागी उस समय कार चला रहा था जब काले चश्माधारी खोका संगठन के व्यक्ति ने उसे हाथ देकर रुकवाया।
‘‘क्या मुझे आपकी कार में लिफ्ट मिल सकती है?’’ उसने खिड़की में सर डालकर पूछा।
‘‘आओ बैठो।’’ इं-त्यागी ने ठंडी साँस लेते हुए कहा और वह व्यक्ति दूसरी ओर से कार का अगला दरवाजा खोलकर इं-त्यागी की बगल में बैठ गया।

‘‘बस यूं ही सड़कों पर कार दौड़ाते रहो। रास्ते में ही सारी बातें होंगी।’’ उस व्यक्ति ने कहा और इं-त्यागी ने कार नार्मल स्पीड से सड़क पर छोड़ दी।
‘‘केस का क्या हाल है?’’

‘‘सुंदरम ने शोरी को शक से बाहर कर दिया है किन्तु कंपनी अभी संदेह के घेरे में है।’’ इं-त्यागी बोला।
‘‘किस आधार पर उसने ऐसा फैसला किया?’’ उस व्यक्ति ने पूछा।

‘‘शोरी ने दो कालें की थीं। पहली उस ने कहीं की थी और दूसरी उसके पास उसके डायरेक्टर की ओर से आयी थी। जिसमें डायरेक्टर ने मना किया था कि उसकी राजनगर में उपस्थिति शोरी किसी को न बताये। किन्तु शोरी ने सुंदरम से बता दिया कि डायरेक्टर वहीं है। अत: सुंदरम उसे निर्दोष मानने लगा।’’
‘‘सवाल उठता है कि शोरी ने डायरेक्टर की आज्ञा का उल्लंघन क्यों किया?’’

‘‘इसलिये क्योंकि मैंने उससे कह दिया था कि वह हमें सहयोंग दे।’’
‘‘तो क्या सुंदरम से तुमने बता दिया था कि तुम शोरी से मिल चुके हो?’’

‘‘हाँ। किन्तु केवल आधी बात बतायी थी। यह नहीं बताया था कि शोरी हमें सहयोग देने का वादा कर चुका है।’’
‘‘ओह। किन्तु फिर तो शोरी और संदिग्ध् हो जाना चाहिए था।’’
‘‘मैं तुम्हें सुंदरम का पूरा दृष्टिकोण बता देता हूं कि किस आधार पर उसने शोरी को निर्दोष माना है।’’ इं-त्यागी ने सुंदरम का पूरा दृष्टिकोण उस व्यक्ति को बताया।

‘‘ओह! यह सी-आई-डी का अफसर वास्तव में लोमड़ी का दिमाग रखता है। किन्तु शोरी ने पहली काल कहाँ की थी?’’
‘‘इसके बारे में कुछ पता नहीं। न तो वह फोन नं- ट्रेस हो पाया और न उध्रा से आने वाली बातें। इस काल ने सभी को उलझन में डाल दिया है।’’

‘‘यह पता करना बहुत जरूरी है। यह तुम्हें हर हाल में पता करना होगा।’’
‘‘यदि उस काल का पता सी-आई-डी अफसर को मालूम हो गया तो मुझे भी मालूम हो जायेगा।’’ इं-त्यागी ने कहा।
‘‘शोरी ने उस समय क्या क्या बातचीत की थी?’’

इं-त्यागी ने शोरी की गुमनाम फोन नम्बर पर बातचीत का विवरण सुनाया। उस व्यक्ति के मस्तक पर यह विवरण सुनते समय सोच की गहरी लकीरें उत्पन्न हो गयी थीं।
‘‘यह गुमनाम फोन वास्तव में खोका के लिये चिन्ता का कारण हो सकता है। इसके अलावा बाकी बातें तो हानिरहित हैं। सुंदरम चाहे जितना दिमाग लगाये, वह न तो हम तक पहुंच सकता है और न हमारे विरुद्ध सुबूत एकत्र कर सकता है।’’